Issue BriefsPublished on Aug 24, 2023
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जलवायु-और आपदा-लचीले बुनियादी ढांचे में निवेश को उत्प्रेरित करना

  • Thomas Smith
  • Ashok Kumar Basa
  • Navinchandra Vasoya

    जलवायु और आपदा-लचीले दोनों तरह के बुनियादी ढांचे का निर्माण प्राकृतिक आपदाओं, विशेष रूप से विकासशील देशों और वंचित समुदायों को तेजी से इन आपदाओं की स्थिति में तैयार रहने और उससे उबरने में सहायक साबित हो सकता है. G20 की अध्यक्षता कर रहे भारत ने 'वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर’ को अपना आदर्श वाक्य चुना है. ऐसे में यह आदर्श वाक्य ऐसी कार्रवाई के लिए एक एकीकृत आवाहन करता है जो सार्वभौमिक मूल्यों को राष्ट्रवाद से ऊपर रखता है. G20 अपनी सामूहिक शक्ति और पहुंच के साथ, जलवायु और आपदा-लचीले बुनियादी ढांचे के लिए निवेश को उत्प्रेरित करने के लिए एक दीर्घकालिक, साझेदारी-आधारित प्रयास शुरू कर सकता है. ऐसा होने पर ही गुणवत्ता वाले बुनियादी ढांचे के एक नए युग की शुरुआत होगी. जलवायु लचीलापन आपदा लचीलापन की बड़ी अवधारणा का हिस्सा है, लेकिन इस पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए. जलवायु परिवर्तन पर UN के इंटरगर्वनमेंटल पैनल ऑन क्लयामेट चेंज (IPCC) जैसे निकायों ने साफ़ कर दिया है कि यदि जलवायु की वज़ह से हो रहे परिवर्तन के प्रभावों को पलटा नहीं गया तो भविष्य में स्थिति बेहद भयावह होने वाली है. शहरी और ग्रामीण प्रणालियों में इस तरह के बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए निर्णय लेने की प्रक्रिया में इंजीनियरों का बेहतर एकीकरण ज़रूरी हो गया है.

Attribution:

एट्रीब्यूशन : थॉमस स्मिथ, अशोक कुमार बासा और नवीनचंद्र वसोया, ‘‘कैटलाइजिंग इन्वेस्टमेन्ट फॉर क्लायमेट-एंड डिजास्टर-रेजिलिअन्ट इंफ्रास्ट्रक्चर,’’ T20 पॉलिसी ब्रीफ, मई 2023.

1 परिचय

यह आलेख बताता है कि कैसे G20 जलवायु और आपदा-लचीले बुनियादी ढांचे के लिए निवेश को उत्प्रेरित करने के लिए एक दीर्घकालिक, साझेदारी-आधारित प्रयास शुरू कर सकता है. उच्च ख़रीद मानकों द्वारा पेंशन फंड, सॉवरेन वेल्थ फंड और ऐसे अन्य निवेशकों से अधिक निजी फंडिंग को आकर्षित करते हुए इस तरह के निवेश के प्रवाह को अधिक सुगम बनाया जा सकता है. एक संपूर्ण और पूर्ण जीवनचक्र लागत तुलना निजी निवेशकों को आश्वस्त करेगी कि प्रस्तावित परियोजनाएं समय के साथ जलवायु परिवर्तन के प्रभाव का सामना करने के लिए बनाई जा रही हैं. जलवायु की रक्षा के अलावा, बड़े पैमाने पर क्रियान्वित सार्वजनिक और निजी वित्तपोषण से वंचित और कमज़ोर आबादी को कई गुना लाभ प्रदान किया जा सकता है. निम्नलिखित बिंदु जलवायु और आपदा-लचीले बुनियादी ढांचे के प्रमुख सिद्धांतों का सार प्रस्तुत करते हैं-
जलवायु-और आपदा-लचीलापन सिद्धांत


  1. विकासशील देशों में गरीब, सीमांत, स्वदेशी और कमज़ोर आबादी के उत्थान पर विशेष ध्यान देने के साथ, समावेशी और समान हिस्सेदारी को प्राथमिकता देने वाले सुरक्षित, टिकाऊ और लचीले बुनियादी ढांचे का निर्माण करें.
    2. बढ़ते कार्बन उत्सर्जन का मुकाबला करने और वित्तीय सहायता जुटाने के लिए नए वित्तपोषण और फंडिंग मॉडल को विकसित करने के साथ ही एक नया, मज़बूत बुनियादी ढांचा निवेश वर्ग स्थापित करें.
    3. देशों को अपनी ऐसी राष्ट्रीय अनुकूलन योजनाओं[1] को अंतिम रूप देने के लिए प्रोत्साहित करें जिसमें जलवायु- और आपदा-लचीले बुनियादी ढांचे के सिद्धांत, मानक और कोड शामिल हों.
    4. भरोसेमंद जलवायु- और आपदा-लचीली बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की पाइपलाइन यानी श्रृंखला को बढ़ाकर हर चरण में उन्हें जोख़िम से मुक्त करने के लिए इंजीनियरिंग रणनीतियों को व्यापक रूप से अपनाया जाए.
    5. सरकार के मुखियाओं, इंजीनियरों, नीति विश्लेषकों, पेंशन फंड, संपत्ति प्रबंधकों, बैंकों, बीमा और पुनर्बीमा कंपनियों, MDBs और वित्तीय संस्थानों के बीच नजदीकी सहयोग को प्रोत्साहित करें, ताकि जलवायु और आपदा-लचीले बुनियादी ढांचे में अधिक से अधिक निवेश को प्रोत्साहित किया जा सके.
    6. जलवायु परिवर्तन को संबोधित करने और गरीबी उन्मूलन के बीच कथित विभाजन को प्रदर्शित करने में MDBs को यह दिखाते हुए मदद करें कि कैसे जलवायु- और आपदा-लचीला बुनियादी ढांचा अनेक लाभों के साथ एकीकृत एजेंडा प्राप्त करने का एक साधन है.
    7. राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदानों और राष्ट्रीय अनुकूलन योजनाओं के वित्त पोषण और प्राथमिकता को पुनर्संतुलित करें,[2] ताकि जलवायु और आपदा-लचीले बुनियादी ढांचे, इसे दोनों को प्राप्त करने का साधन माना जाएं.
    8. प्रोजेक्ट डेवलपमेंट प्रोसेस में तकनीकी विशेषज्ञता बढ़ाकर जलवायु और आपदा-लचीले बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाएं, ताकि संचालन लागत में बचत संभव हो सके.
    9. FAST इंफ्रा और ब्लू डॉट नेटवर्क जैसे वैश्विक प्रयासों के अनुसार इंजीनियरिंग मानकों को बढ़ाया जाए.
    10. जलवायु परिवर्तन आपदाओं का सामना करने वाले लचीले बुनियादी ढांचे को सुनिश्चित करने के लिए लाइफसाइकिल कॉस्ट तुलना के लिए ख़रीद आवश्यकताओं को अपनाएं.
    11. राष्ट्रीय, प्रांतीय और संचालन के स्थानीय स्तर पर इंजीनियरिंग मानकों को लागू करें, ताकि पारिस्थितिक तंत्र के स्वास्थ्य की रक्षा और बहाली हो सके और जैव विविधता की रक्षा की जा सके.
    12. उन्नत और विकासशील देशों के बीच सर्वोत्तम प्रथाओं और नई तकनीकों को साझा करने के लिए पीयर-टू-पीयर इंजीनियरों, बुनियादी ढांचा पेशेवरों और स्थानीय सरकारी अधिकारियों के बीच द्विपक्षीय आदान-प्रदान शुरू किया जाए.
    13. उन्नत राष्ट्रों और विकासशील छोटे द्वीप देशों के बीच तकनीकी और संगठनात्मक आदान-प्रदान मुहैया करवाएं. ये छोटे द्वीप देश ही जलवायु परिवर्तन की अग्रिम पंक्ति पर खड़े हैं और उन्हें तत्काल आपदा-लचीले बुनियादी ढांचे की आवश्यकता है.
    14. जलवायु और आपदा-लचीले बुनियादी ढांचे के लिए सार्वजनिक, निजी और गैर-लाभकारी भागीदारी को बढ़ावा देना चाहिए.
    15. प्रत्येक देश की विशिष्ट स्थानीय स्थितियों के लिए इंजीनियरिंग और वित्तपोषण मुहैया करवाएं. जलवायु परिवर्तन भले ही प्रकृति में वैश्विक है, लेकिन इसके प्रभाव स्थानीय होते हैं.
    16. सिद्धांत और व्यवहार के एकीकरण को सुविधाजनक बनाने के लिए वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग संगठनों के एकीकरण को मज़बूत करें.
    17. निर्णय लेने की प्रक्रिया के हर चरण में इंजीनियरों को शामिल करें. 
2. चुनौती

बड़े पैमाने पर जलवायु- और आपदा-लचीले बुनियादी ढांचे के लिए निवेश को उत्प्रेरित करने के लिए, सरकारों, वित्तीय संस्थानों और इंजीनियरों[3] को बुनियादी ढांचे के मानकों और ख़रीद आवश्यकताओं को बढ़ाने के लिए एक साथ आना चाहिए. ऐसा होने पर ही दीर्घकालिक गुणवत्ता वाले ऐसे बुनियादी ढांचे का निर्माण किया जा सकेगा जो समावेशी हो, पर्यावरण की रक्षा करता हो, और जलवायु आपदाओं के प्रभाव को कम करने में सहायक साबित हो. विश्व मौसम विज्ञान संगठन के 'अटलास ऑफ मॉर्टेलिटी एंड इकोनॉमिक लॉसेस फ्रॉम वेदर, क्लायमेट एंड वॉटर एक्सट्रिम्स (1970-2019)’ के अनुसार, इस 50 साल की अवधि के दौरान जलवायु ख़तरों के कारण 3.64 ट्रिलियन US$ का नुक़सान हुआ है. इसके अलावा 2 मिलियन से अधिक मौतें हुईं. उनमें से 91 प्रतिशत से अधिक मौतें विकासशील देशों में हुई हैं.[4] US नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन की रिपोर्ट के अनुसार 1980 के बाद से, अकेले अमेरिका ने 348 मौसम और जलवायु संबंधी आपदाओं को झेला है. इसकी वज़ह से 2022 में ही US को ऐसी 18 घटनाओं की वज़ह से 1 बिलियन US$ से अधिक कीमत चूकानी पड़ी है.[5]

अभूतपूर्व अवसंरचना आवश्यकताएं
बिजनेस लीडर, राजनेता और परोपकारी माइकल ब्लूमबर्ग कहते हैं, "आधी शताब्दी तक निर्मित बुनियादी ढांचे की मात्रा आज उपलब्ध कुल ढांचे से लगभग चार गुना अधिक होगी."[6] G20 इन्फ्रास्ट्रक्चर हब की इन्फ्रास्ट्रक्चर मॉनिटर 2022 रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि इस मांग को पूरा करने के लिए आज और 2040 के बीच प्रति वर्ष 3.7 ट्रिलियन US$ की आवश्यकता होगी, जो मौजूदा रुझान जारी रहने की तुलना में 19-प्रतिशत अधिक होगा.[7]

 

जीवन की गुणवत्ता और आर्थिक विकास के लिए आधारभूत संरचना ही प्रॉक्सी

लगभग हर कार्य, चाहे वह नल या लाइट चालू करना हो, भोजन ख़रीदना हो, सड़क पर गाड़ी चलाना हो या पुल पार करना हो, इसके सफ़ल संचालन और समापन के लिए सभी को इंजीनियर्ड सिस्टम पर ही निर्भर रहना पड़ता है. इस इंजीनियर्ड सिस्टम को ही इंफ्रास्ट्रक्चर कहा जाता है. जलवायु परिवर्तन पर पार्टियों के ऐतिहासिक 2015 पेरिस सम्मेलन (COP) में लिए गए निर्णयों के अनुरूप और UN के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) का समर्थन करने वाला बुनियादी ढांचा ही दैनिक जीवन का समर्थन करने और सभी आर्थिक क्षेत्रों और सामाजिक पृष्ठभूमि के लोगों को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.


लचीले बुनियादी ढांचे के निर्माण के महत्व को बढ़ा चढ़ा कर नहीं आंका जा सकता है. विशेषत: विकासशील देशों के लिए, जिनके पास पर्याप्त क्षमता, उन्नत तकनीक और वित्तीय संसाधनों की कमी के कारण उन्हें आपदाओं के लिए त्वरित प्रतिक्रिया और रिकवरी की सुविधा मिलने में परेशानी का सामना करना पड़ता हो.


अवसंरचना के लिए जलवायु-संचालित ख़तरे

वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन से आपदाओं की फ्रीक्वेन्सी और गंभीरता में तेजी आएगी.[8] ऐसे में जलवायु-लचीले बुनियादी ढांचे के लिए सार्वजनिक वित्त से अधिक निवेश आवश्यक होगा. सार्वजनिक वित्त और वास्तव में होने वाले ख़र्च के बीच के अंतर को भरने के लिए निजी पूंजी की आवश्यकता होगी.

अपर्याप्त बुनियादी ढांचा असमानताओं को बढ़ाता है
जब बढ़ते कार्बन उत्सर्जन को ख़राब बुनियादी ढांचे के साथ जोड़ दिया जाता है, तो इसका व्यापक प्रभाव विनाशकारी हो सकता हैं. अक्सर कम आय वाले समुदाय को ही इसके प्रभावों का ख़ामियाजा भुगतना पड़ता हैं. उनके पास पुनर्निर्माण और स्थिति को सामान्य बनाने के लिए संसाधनों की कमी होती है. पर्याप्त संसाधनों के अभाव में व्यापक गरीबी, विस्थापन और सामाजिक अशांति की स्थिति उत्पन्न हो सकती है.


इस स्थिति में महिलाएं और बच्चे अक्सर सबसे कमज़ोर साबित होते हैं. जब पीने के पानी और वेस्ट वॉटर सिस्टम अपर्याप्त या पूरी तरह से विफ़ल हो जाते हैं, तो गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों के जलजनित रोगों की चपेट में आने का ख़तरा सबसे अधिक होता है. यह रोग शारीरिक और मानसिक विकास को रोक सकते है. यहां तक कि कुछ मामलो में ये रोग अकाल मृत्यु का कारण भी बन सकते है. ख़तरनाक वेस्ट साइट्‌स से निकटता के प्रभाव भी समान ही होते हैं. ख़राब बुनियादी ढांचा स्कूली उम्र के बच्चों को स्कूल जाने से भी रोकता है.

3. G20 की भूमिका

आपदाओं से पहले ही बेहतर निर्माण करने के लिए यह ज़रूरी है कि वैश्विक समुदाय बुनियादी ढांचे में निवेश को ऐतिहासिक स्तर तक बढ़ाए. सौभाग्य से, इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सभी तत्व मौजूद हैं. ज़रूरत सिर्फ इस बात की है कि हर क्षेत्र में ठोस और सतत नेतृत्व और जोख़िम-मुक्त रणनीतियों को नियोजित करने के लिए सामूहिक प्रयास किए जाएं.

द कोअलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिअन्ट इंफ्रास्ट्रक्चर इस दिशा में प्रयास करने के लिए दुनिया का ऐसा प्रमुख संगठन है, जो सरकारों, बहुपक्षीय विकास बैंकों (MDBs) और UN एजेंसियों का नेतृत्व करते हुए गुणवत्तापूर्ण बुनियादी ढांचे के लिए एक नए प्रतिमान की दिशा में कार्यक्रम डिजाइन करता है. इसे हितधारकों के समर्थन की आवश्यकता है, और G20 इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.

सभी हितधारकों को शामिल करें

वित्तीय संस्थान, ऐसी ख़रीद आवश्यकताओं और गुणवत्ता मानकों को चाहते हैं जो उनके निवेश पोर्टफोलियो लक्ष्यों को पूरा करते हैं. जैसे ही जलवायु परिवर्तन के प्रभाव ध्यान में आते हैं, निवेशक अपनी निवेश रणनीतियों में इंजीनियरिंग आकलन[9] को शामिल करके संपत्ति के नुक़सान से बच सकते हैं. तीन बड़ी रेटिंग एजेंसियां[10] अपनी रेटिंग को लचीलेपन और स्थिरता पर आधारित करेंगी क्योंकि, जीवनचक्र लागत विश्लेषण और जलवायु शमन और अनुकूलन महत्वपूर्ण हो गए हैं.

टिकाऊ बुनियादी ढांचे के लिए तकनीकी विशेषज्ञता, सरकारी नेतृत्व और वित्तीय सहायता की आवश्यकता होती है. दुर्भाग्य से, अक्सर इंजीनियरों को निर्णय लेने की प्रक्रिया से बाहर रखा जाता है. इसका योजना तैयार करने, उसका निष्पादन करने और योजना से अपेक्षित परिणाम की गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. यही बात आवश्यक वित्तपोषण के स्तर को आकर्षित करने में भी बाधा उत्पन्न कर सकती है. अत: सरकारों को हर अवसर पर इंजीनियरों को योजना के प्रारंभ और निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल करना चाहिए.

तीन बड़ी रेटिंग एजेंसियों द्वारा बुनियादी ढांचे को अत्यधिक आकर्षक परिसंपत्ति वर्ग के रूप में मान्यता दिए जाने पर इस वर्ग को आकर्षक बनाने की दिशा में सामाजिक प्रगति होगी. रेटिंग एजेंसियों को यह आश्वस्त करने की आवश्यकता है कि परियोजनाएं सुरक्षित, जलवायु-लचीली और टिकाऊ हैं. यह आश्वासन बुनियादी ढांचे के प्रतिनिधियों और बुनियादी ढांचे का मूल्यांकन करके उसकी रिपोर्ट के माध्यम से दिया जा सकता है.

अपने ही दायरे में काम करने वाले लोगों की समस्या को सिस्टम में काम करने का दृष्टिकोण अपनाकर हल किया जा सकता है. मूल्यांकन और समाधान में भविष्य की ज़रूरतों और चुनौतियों का अनुमान लगाते हुए परियोजनाओं के आर्थिक, सामाजिक, पर्यावरणीय, जनसांख्यिकीय, सांस्कृतिक, राजनीतिक, नैतिक, स्वास्थ्य और तकनीकी पहलुओं पर भी विचार किया जाना चाहिए. इसमें इंजीनियरिंग सिद्धांतों को लागू किया जाना चाहिए.

जलवायु- और आपदा-लचीला बुनियादी ढांचा G20 सिद्धांतों के अनुरूप है

निवेश को निर्मित और प्राकृतिक पर्यावरण दोनों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए. एक सर्कुलर इकोनॉमी में, प्रत्येक बुनियादी ढांचा क्षेत्र - चाहे वह जल, परिवहन, ऊर्जा, दूरसंचार, कृषि और खाद्य सुरक्षा, स्वच्छता, औद्योगिक संयंत्र, स्कूल, अस्पताल या सार्वजनिक सुविधाएं हो - अन्य सभी क्षेत्रों को प्रभावित करने वाला होता है.

 ख़रीद नीतियों को अंतरराष्ट्रीय समझौतों द्वारा निर्देशित किया जाना चाहिए जो योजना और निर्माण प्रक्रिया की मूल जानकारी देते हैं. 2015 पेरिस समझौते, जोख़िम न्यूनीकरण और पुनर्प्राप्ति के लिए सेंडाई फ्रेमवर्क, आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन के चार्टर और UN SDGs के साथ सावधानीपूर्वक और सटीक संरेखण अपरिहार्य है.

ये अंतर्राष्ट्रीय समझौते वैश्विक कूटनीति की शक्ति के प्रमाण हैं. उल्लिखित प्राथमिकताएं प्रत्येक पेशे और सरकार के लिए कार्रवाई का आह्वान हैं.

जलवायु और आपदा-लचीले बुनियादी ढांचे की कार्रवाई को सक्षम कर सकता है G20

अंतर्राष्ट्रीय समझौते तब सबसे प्रभावी होते हैं जब उनके पास उन्हें वांछित लक्ष्य तक ले जाने के लिए एक चालक होता है. इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट (EIU) के अनुसार: "बुनियादी ढांचा ही SDGs का प्रवर्तक और चालक है."[11]

जलवायु और आपदा लचीले बुनियादी ढांचे में SDGs का इंजन या चालक बनने की क्षमता है. SDGs में जलवायु कार्रवाई, गरीबी उन्मूलन, खाद्य सुरक्षा, सुरक्षित जल, स्वच्छ ऊर्जा, आर्थिक विकास, बुनियादी ढांचा और सभी प्रकार के सामाजिक और पर्यावरण संरक्षण शामिल हैं.

जलवायु- और आपदा-लचीला बुनियादी ढांचा सार्वजनिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण को प्राथमिकता देते हुए नवीन और लागत प्रभावी समाधान ख़ोजने वाले इंजीनियरों पर निर्भर करता है. इंजीनियरों को IPCC द्वारा बताए गए संभावित भविष्य के परिदृश्यों का विश्लेषण करना चाहिए. इंजीनियरिंग विश्लेषण में वित्तीय, तकनीकी और भौतिक संसाधनों का मूल्यांकन शामिल है. कार्यक्रम का विश्लेषण विज्ञान और इंजीनियरिंग पर आधारित होना चाहिए, जिसे जलवायु के प्रभाव को कम करके आंकने से बचना चाहिए, क्योंकि ऐसा होने पर बुनियादी ढांचा विफ़ल हो सकता है. जलवायु के प्रभाव को इसे अधिक करके भी नहीं आंकना चाहिए, क्योंकि इससे बुनियादी ढांचे की लागत बढ़ सकती है.

जलवायु और आपदा-रोधी बुनियादी ढांचे के लाभों के साथ वित्त को संरेखित करने के लिए, इंजीनियरिंग सोसायटी बेहतर ख़रीद आवश्यकताओं को पूरा करने वाले उच्च मानकों को अपनाने का आग्रह कर रही हैं. वैश्विक स्तर पर मानकों को बढ़ाने के प्रयास चल रहे हैं. US-आधारित इंस्टीट्यूट फॉर सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर (ISI) का 'एनविजन' ढांचा, 80 सार्वजनिक और निजी संस्थानों द्वारा समर्थित फाइनेंस टू एक्सीलरेट सस्टेनेबल ट्रांजिशन (FAST) इंफ्रा पहल, और मूल्यांकन प्रदान करने के लिए US, जापान और ऑस्ट्रेलिया का ब्लू डॉट नेटवर्क विश्व स्तर पर बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को प्रमाणन मुहैया करवा सकते हैं. इन सभी में सुधार संभव है यदि वे वैश्विक इंजीनियरिंग समुदाय के साथ अधिक निकटता से काम करते हैं. वैश्विक इंजीनियरिंग समुदाय इस बात का पेशेवर मूल्यांकन प्रदान कर सकता है कि उनके मानकों को कैसे लागू किया जाना चाहिए.

अपेक्षित वैश्विक वित्तपोषण को आकर्षित करने के लिए गंभीरता ज़रूरी

G20 पर व्यापक जानकारी इसके प्रक्षेप पथ और वैश्विक महत्व का स्पष्ट दृष्टिकोण प्रदान करती है. G20 के वित्त मंत्रियों का योगदान, G20 कार्यबलों का कार्य और G20 संवाद समूहों के दृष्टिकोण G20 को महत्वपूर्ण आयाम देते हुए इसकी घोषणाओं को वजनदार यानी अहम बनाते हैं.

1999 में G20 की स्थापना के बाद से G20 की नीतियां और इसके बयानों का कद और प्रभाव बढ़ा हैं. इसके सदस्यों में दुनिया की GDP का 85 प्रतिशत हिस्सा और वैश्विक आबादी का 67 प्रतिशत हिस्सा शामिल है. G20 उन्नत देशों और सबसे बड़े विकासशील देशों दोनों की ओर से बोलने या उनका प्रतिनिधित्व करने की विशिष्ट स्थिति में है.

जलवायु- और आपदा-रोधी बुनियादी ढांचे की उचित योजना बनाकर उसी डिजाइन के हिसाब से उसका योग्य तरीके से निर्माण किया जाना चाहिए. जलवायु- और आपदा-रोधी बुनियादी ढांचे की योजनाएं सरकार को निर्णय लेने में सहायता करते हुए मानवीय आवश्यकताओं के विभिन्न क्षेत्रों में अनेकलाभ प्रदान करने वाले परिवर्तनकारी निवेशों को लक्षित करने के लिए MDBs का मार्गदर्शन कर सकती हैं. उच्च मानक स्थापित करने के लिए, इंजीनियरों को ख़रीद आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए MDBs के साथ काम करने के लिए आमंत्रित किया जाना चाहिए.

इंजीनियरों की भूमिका

जोख़िमों को कम करने वाली और निजी निवेश को आकर्षित करने का अवसर देने वाली जलवायु-लचीली परियोजनाओं की एक पाइपलाइन यानी श्रृंखला का मूल्यांकन करने में इंजीनियर्स मदद कर सकते हैं. इंजीनियरों के पास किसी परियोजना को शुरुआती चरण से ही जोख़िम से मुक़्त करने की रणनीति निर्धारित और हर कदम पर सावधानीपूर्वक लगन से काम करने संबंधी शिक्षा, प्रशिक्षण और अनुभव होता है.

विश्व बैंक और अन्य MDBs के बीच गरीबी उन्मूलन और आर्थिक विकास के लिए जलवायु निवेश बनाम इन वित्तीय संस्थाओं के पारंपरिक निवेश को लेकर पनपने वाले तनाव को कम करने के लिए इंजीनियर आवश्यक तकनीकी और व्यावसायिक विश्लेषण भी मुहैया करवा सकते हैं.[12] SDGs के चालक के रूप में, जलवायु- और आपदा-लचीला बुनियादी ढांचा संपूर्ण जलवायु और विकास एजेंडे को संरेखित कर सकता है.

विभिन्न लाभ

जलवायु और आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे के निवेश को प्राथमिकता देकर, MDBs जलवायु प्राथमिकताओं और गरीबी उन्मूलन से एक साथ निपट सकते हैं.

अनुकूलन पर UN के वैश्विक आयोग के अनुसार दुनिया भर में लचीलापन और अनुकूलन के प्रयास "गंभीर रूप से अपर्याप्त" हैं.[13] 24 मार्च 2023 तक, 153 विकासशील देशों में से केवल 44 ने पूर्ण राष्ट्रीय अनुकूलन योजनाएं प्रस्तुत की थीं.[14] इन योजनाओं में जलवायु- और आपदा-लचीले बुनियादी ढांचे के सिद्धांतों, मानकों और कोड्‌स को भी शामिल किया जाना चाहिए जो गुणवत्तापूर्ण बुनियादी ढांचे के लिए वित्त पोषण के नए स्तर को उत्प्रेरित करेंगे, अधिक डेटा साझाकरण को प्रोत्साहित करेंगे, और उन्नत देशों से विकासशील देशों में अधिक प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की राह को आसान करेंगे.

इसके अतिरिक्त, जलवायु- और आपदा-लचीला बुनियादी ढांचा जलवायु कार्रवाई के लिए शमन प्रयासों और आपदा लचीलापन, गरीबी उन्मूलन और आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय प्रगति के लिए अनुकूलन परिणामों से मेल खा सकता है. अनुकूलन और लचीलापन रणनीतियों का उपयोग करके बुनियादी ढांचे के डिजाइन और निर्माण में सहायता के लिए कई इंजीनियरिंग मानकों पर भी काम किया गया है.

4 G20 को सिफ़ारिशें

(1) सरकारों को सरकारी और वित्तीय संस्थानों के साथ परियोजनाओं और कार्यक्रमों की योजना बनाने, डिजाइन करने और निर्माण करने के लिए नीति निर्माताओं, निवेश विशेषज्ञता और बुनियादी ढांचे के पेशेवरों को निर्णय लेने की एक ही मेज पर लाना चाहिए.

(2) किसी परियोजना के दशकों लंबे जीवन तक लचीले, समावेशी और टिकाऊ साबित होने वाले उच्च मानकों और ख़रीद आवश्यकताओं के माध्यम से जोख़िमों को कम करके सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के निवेश का लाभ उठाने के लिए पूंजी बाज़ारों को आकर्षित कर सकती हैं.

(3) सरकारों को वैज्ञानिकों, नागरिक समाज संगठनों सहित प्रमुख हितधारकों को एक साथ लाकर निवेश वित्तपोषण पर सहयोग बढ़ाने के लिए अपनी संयोजक शक्ति का उपयोग करना चाहिए. ऐसा होने पर ही विकासशील देशों में जलवायु और आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की एक पाइपलाइन विकसित की जा सकेगी जो राष्ट्रीय प्राथमिकताओं, मूल्य, संस्कृतियों और इतिहास के अनुरूप हों.

(4) G20 सरकारों को बहुपक्षीय विकास बैंकों के साथ जलवायु-लचीले बुनियादी ढांचे के निवेश पर एक ऐसे एकीकृत एजेंडे के लिए काम करना चाहिए जो गरीबी में कमी और आर्थिक विकास पर भी ध्यान देने वाला हो.

(5) G20 को स्थानीय, क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुसार सामान्य एजेंडा और विश्वास स्थापित करने के लिए बुनियादी ढांचे के पेशेवरों, स्थानीय सरकारी नेताओं और अन्य हितधारकों के बीच द्विपक्षीय संबंध स्थापित करना चाहिए.

(6) G20 को अन्य G20 संवाद समूहों के साथ काम करने के लिए एक इंजीनियरिंग एंगेजमेंट ग्रुप की स्थापना करनी चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि नीतिगत विचारों में बुनियादी ढांचे के जोख़िमों का गहन विश्लेषण और ख़रीद आवश्यकताओं में पर्यावरण और सामाजिक चिंताओं के लिए उच्च मानक शामिल हैं.

'नन अलोन’ मंत्र एक ऐसे एजेंडे के साथ सामंजस्य बनाकर काम करने की आवश्यकता पर जोर देता है जो भविष्य की पीढ़ियों के लिए गुणवत्तापूर्ण बुनियादी ढांचे का निर्माण करेगा और जलवायु आपदाओं के प्रभाव को कम करेगा. जलवायु- और आपदा-रोधी बुनियादी ढांचे के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति, वित्तीय संसाधन और तकनीकी विशेषज्ञता जुटाने की आवश्यकता होगी और G20 इस क्षेत्र में नेतृत्व दिखा सकता है.

Endnotes

[1] United Nations Climate Change (UNCC), “NAPCentral,” accessed March 24, 2023.

[2] UNCC, “NAPCentral.”

[3] Modern infrastructure is not possible without engineers. Engineers create the strategies that de-risk infrastructure, attract private capital to complement public investments, and build infrastructure that is not only safe and reliable but also sustainable and climate resilient.

[4] World Meteorological Organization, WMO Atlas of Mortality and Economic Losses from Weather, Climate and Water Extremes (1970–2019), WMO-No. 1267 (Geneva: WMO, 2021).

[5] NOAA National Centers for Environmental Information. U.S. Billion-Dollar Weather and Climate Disasters (Asheville, NC: NCEI, 2023).

[6] Michael Bloomberg, “City Century: Why Municipalities Are the Key to Fighting Climate Change,” Foreign Affairs 94, no. 5 (2015): 116–24.

[7] Oxford Economics and Global Infrastructure Hub, Global Infrastructure Outlook: Forecasting Infrastructure Investment Needs and Gaps, 50 Countries, 7 Sectors to 2040 (Oxford: Oxford Economics, 2017).

[8] IPCC, Climate Change 2021.

[9] Engaging engineers early in the planning process is paramount to a project’s success and will lead to better collective assessment of structural and nonstructural solutions and their economic, environmental, and social impacts.

[10] These are Moody’s Investor Services, Standard and Poor’s, and Fitch.

[11] Economist Intelligence Unit, The Climate and Disaster Resilient Infrastructure Role of Infrastructure for the SDGs (New York: EIU, 2019).

[12] Financial institutions want to fund infrastructure projects that benefit disadvantaged communities and vulnerable populations while supporting healthy ecosystems and biodiversity. They will be attracted to engineering standards that build such requirements into the procurement documents.

[13] Global Commission on Adaptation. Adapt Now: A Global Call for Leadership on Climate Resilience (Netherlands: Global Center on Adaptation, 2019), 1.

[14]  UNCC, “NAPCentral.”

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