किसी भी अन्य संकट की तरह, सेना के दो प्रमुख धड़ों, सूडानी नेशनल आर्मी और रैपिड सपोर्ट (फोर्सेज), के बीच हालिया संघर्ष की स्थिति ने 15 अप्रैल 2023 को राजधानी खार्तूम को हिला कर रख दिया, जिसका सूडानी लोगों, ख़ासकर महिलाओं और लड़कियों की जिंदगियों पर विनाशकारी प्रभाव पड़ा है.
सत्ता को लेकर जारी संघर्ष के बीच, वे कई मोर्चों पर जूझ रही हैं और पेट भर भोजन, साफ़ पानी, स्वास्थ्य-देखभाल और सेवाओं जैसी बेहद मामूली सुविधाओं तक पहुंचने और हिंसा या शोषण से सुरक्षा के लिए संघर्ष कर रही हैं.
उदाहरण के लिए, जब से ये लड़ाई शुरू हुई है, कम से कम 28 अस्पतालों (जिसमें देश भर के कई प्रसूति अस्पताल शामिल हैं) पर हमला किया गया है, जहां खार्तूम में 61 प्रतिशत से ज्यादा स्वास्थ्य केंद्रों को बंद करने के लिए मजबूर किया गया है. इसके कारण हज़ारों सूडानी महिलाओं को उचित मातृ स्वास्थ्य सेवाएं और चिकित्सा देखभाल नहीं मिल पा रही है, इनमें 219,000 गर्भवती महिलाएं हैं, उसमें से 24,000 महिलाएं ऐसी हैं जो अगले तीन महीनों के भीतर बच्चे को जन्म देने वाली हैं.
हज़ारों सूडानी महिलाओं को उचित मातृ स्वास्थ्य सेवाएं और चिकित्सा देखभाल नहीं मिल पा रही है, इनमें 219,000 गर्भवती महिलाएं हैं, उसमें से 24,000 महिलाएं ऐसी हैं जो अगले तीन महीनों के भीतर बच्चे को जन्म देने वाली हैं.
इसके अलावा, सूडान भर में RSF सैनिकों के साथ-साथ सेना के अधिकारियों द्वारा किए गए बलात्कार और यौन हिंसा के कई मामले सामने आए हैं. वे न सड़कों पर सुरक्षित है और न ही अपने घरों में क्योंकि कई परिवारों को सैनिकों द्वारा अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर किया गया है. कईयों को अपने घरों में RSF सैनिकों को जगह देने के लिए मजबूर किया गया है, जिससे महिलाओं और लड़कियों के शोषण का ख़तरा बढ़ गया है.
यह स्थिति और भी बदतर हो गई है क्योंकि हज़ारों लोग अपने घरों को छोड़कर सूडान के दूसरे इलाकों या पड़ोसी देशों जैसे मिस्र, इथियोपिया, चाड और मध्य अफ्रीकी गणराज्य में चले गए हैं, और इसके कारण महिलाओं को मानव-तस्करी, शोषण, हिंसा आदि का सामना करना पड़ रहा है. और ऐसा न हो कि हम भूल जाएं, यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब सुरक्षा सेवाओं और सहायता तक पहुंच पहले से ही बहुत कठिन हो गई है और अगर ये लड़ाई जारी रही तो है स्थिति और गंभीर हो जाएगी.
लेकिन इन चुनौतियों के बावजूद, सूडान में महिलाएं शांति बहाल करने के प्रयासों के प्रति प्रतिबद्ध हैं. सूडान में महिला अधिकार और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने सैनिकों द्वारा किए जा रहे बलात्कार घटनाओं के बारे में बताने और दूसरों को आगाह करने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया है और पीड़ितों और यौन हिंसा के जोख़िम का सामना कर रहे लोगों को एक ज़रूरी सहायता नेटवर्क प्रदान किया है. और जैसा कि देश में संचार सेवाओं की स्थिति गड़बड़ है, इसी बीच हिंसा के ग्राफिक विवरण ऑनलाइन साझा किए गए, जिससे देश में महिलाओं के खिलाफ़ हो रही हिंसा की परेशान करने वाली तस्वीर उभर कर सामने आ रही है.
इसके अलावा, महिला मानवाधिकार कार्यकर्ताएं (WHRD) न्याय, जवाबदेही और शांति की मांग कर रही हैं और बार-बार युद्ध की समाप्ति के लिए अपील कर रही हैं. इसका परिणाम ये है कि वे एक बेहद खतरनाक माहौल में काम कर रही हैं और उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं, इससे उनके जान पर ख़तरा मंडरा रहा है.
रिपोर्टों के अनुसार, तीन महिला स्वास्थ्य कर्मचारियों (जिनमें से दो प्रमुख कार्यकर्ता हैं) और उनके परिवारों को जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं, इससे पहले उनकी युद्ध को ख़त्म किए जाने की अपील के लिए उनके खिलाफ़ मानहानि अभियान चलाया गया था. इसके अलावा, पूर्व सत्ता अधिकारियों के जेल से भागने के बाद विशेष रूप से महिला पत्रकारों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और वकीलों की जान मुश्किल में पड़ गई है.
सूडानी महिलाओं की क्रांतिकारिता का एक लंबा इतिहास है, जिसकी शुरुआत 19वीं सदी के आख़िर में हुई थी जब महिलाओं ने उपनिवेशवाद के विरोध करने के साथ-साथ अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने के लिए संगठित होना और समूह बनाना शुरू किया था.
हालाँकि, यहां यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि यह पहली बार नहीं है कि सूडान में महिलाएं सत्ता संघर्ष को समाप्त करने और अपने अधिकारों की लड़ाई का नेतृत्व कर रही हैं. सालों से, वे सशस्त्र बलों और RSF के खिलाफ़ आवाज़ उठाई आई हैं और कहा है कि ये अर्धसैनिक इकाइयां उनके कल्याण या हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध नहीं हैं. उन्होंने सैन्यीकरण और लगातार बढ़ते सैन्य बजट का विरोध किया है, जो निर्दोष महिलाओं की जान बचाने की बजाय हथियारीकरण को प्राथमिकता देता है.
सूडानी महिलाओं की क्रांतिकारिता का एक लंबा इतिहास है, जिसकी शुरुआत 19वीं सदी के आख़िर में हुई थी जब महिलाओं ने उपनिवेशवाद के विरोध करने के साथ-साथ अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने के लिए संगठित होना और समूह बनाना शुरू किया था. और 1952 में सूडानी वूमेंस यूनियन (SWU) की स्थापना महिला आंदोलन के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुई.
लेकिन सूडान में अस्थिर राजनीतिक माहौल के चलते इन प्रयासों को बाधाओं का सामना करना पड़ा और राजनीतिक दलों ने महिला मुद्दों पर एकाधिकार जमाना और महिला प्रतिनिधियों को नेतृत्व भूमिका से हटाना शुरू कर दिया, जिसके कारण देश में महिला आंदोलन की गति बाधित हुई और इस दिशा में सारे प्रयासों को रोक दिया गया.
लेकिन इन कठिनाइयों और देश के पितृसत्तात्मक माहौल के बावजूद सूडानी महिलाओं ने 2019 की क्रांति में एक अहम भूमिका निभाई, जिसका उद्देश्य उमर अल बशीर की तानाशाही को ख़त्म करना था. महिलाओं ने इन क्रांतिकारी विरोध प्रदर्शनों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था और इस क्रांति को सफल बनाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण थी.
लैंगिक हिंसा और महिला अधिकारों में कटौती ने सूडानी महिलाओं में बदलाव और प्रतिरोध की भावना को बढ़ावा दिया है. और वर्तमान में वे अकेली नहीं हैं. दुनिया के विभिन्न हिस्सों में रह रहे सूडानी प्रवासियों और शरणार्थियों ने मिलकर उनका समर्थन किया है और हिंसक झड़पों को समाप्त करने का आह्वान किया है.
शायद अब समय आ गया है कि महिलाओं की आवाज़ें सुनी जाए और देश में शांति को बहाल करने और सभी निर्दोष सूडानी नागरिकों को बेहतर सामाजिक-आर्थिक माहौल देने के लिए किए जाने वाले प्रयासों में सूडानी महिलाओं के नज़रिए और उनके अनुभवों को शामिल किया जाए.
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Akanksha Khullar is a Visiting Fellow with the ORFs Strategic Studies Programme where her work focuses on the intersection of policy advice and academic research ...
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