Author : Amit Chanda

Published on Feb 01, 2021 Updated 0 Hours ago

 आर्थिक मोर्चों पर इन चुनौतियों के अलावा सुल्तान हैथम को मध्य-पूर्व में बदलते राजनीतिक परिदृश्य से भी निपटना है.

ओमान के नए सुल्तान हैथम बिन तारिक़ के समक्ष चुनौतियां

ओमान पर सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले सुल्तान क़ाबूस बिन सईद के निधन के बाद पिछले साल 11 जनवरी को सुल्तान हैथम बिन तारिक़ ने बड़ी उम्मीदों के बीच ओमान के सुल्तान का कामकाज संभाला था. सुल्तान का पद संभालते ही उनपर कोविड-19 से निपटने की बड़ी ज़िम्मेदारी आ गई. ओमान में फरवरी 2020 से ही कोविड-19 के मामले सामने आने शुरू हो गए थे. बाद के महीनों में राजधानी मस्कट और देश के दूसरे हिस्सों में लगाए गए लॉकडाउन से कारोबारी गतिविधियों में भारी गिरावट आई. कई लोगों ने अपनी नौकरियां भी गंवा दी. बहरहाल, आर्थिक मोर्चों पर इन चुनौतियों के अलावा सुल्तान हैथम को मध्य-पूर्व में बदलते राजनीतिक परिदृश्य से भी निपटना है.

कठिनाइयों भरा साल

सुल्तान हैथम के कामकाज संभालने के कुछ ही दिनों बाद फरवरी में ओमान में कोविड-19 का प्रकोप दिखना शुरू हो गया था. दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी लगभग इसी समय कोविड-19 का फैलाव हुआ था. ओमान में ईरान से लौटे तीर्थयात्रियों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई थी.

कोरोना को फैलने से रोकने के लिए ओमान ने चरणबद्ध तरीके से लॉकडाउन लगाया. इससे वहां कारोबारी गतिविधियों को बड़ा झटका लगा. जनवरी 2020 में ओमान ने तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमत 58 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल रहने के आधार पर अपना बजट तैयार किया था. हालांकि उस समय से अबतक सुस्त अंतरराष्ट्रीय मांग के चलते कच्चे तेल की कीमत 40 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के आस-पास ही बनी हुई है.

अपने नए शासक के नेतृत्व में ओमान ने “विज़न 2040” का लक्ष्य निर्धारित किया है. इस साल इसे अमली जामा पहनाने का काम शुरू हो जाएगा. इसके तहत ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था के निर्माण का लक्ष्य है. 

कच्चे तेल के निर्यात और कॉरपोरेट टैक्स से मिलने वाले राजस्व में गिरावट के चलते ओमान को अपने बजट घाटे को पूरा करने के लिए अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों से कर्ज़ लेना पड़ा. अक्टूबर 2020 में आधिकारिक ओमान न्यूज़ एजेंसी (ओएनए) को जारी किए गए अपने बयान में ओमान के वित्त मंत्रालय ने कहा कि उसने दो खेप में 7 वर्ष और 12 वर्ष की परिपक्वता अवधि वाले कुल 2 अरब अमेरिकी डॉलर के अंतरराष्ट्रीय बॉन्ड जारी किए हैं.

घरेलू मोर्चे पर चुनौतियां

राष्ट्र के नाम अपने पहले संबोधन में सुल्तान हैथम ने देश की आर्थिक यात्रा का खाका प्रस्तुत किया था. इसमें युवा शक्ति पर ख़ास ज़ोर दिया गया था. उन्होंने देश की तरक्की में छोटे और मंझौले उद्योगों की अहमियत को रेखांकित करते हुए नई खोजों, आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस और आधुनिकतम तकनीक पर आधारित स्टार्टअप पर विशेष रूप से बल दिया था.

अगस्त 2020 में सुल्तान हैथम ने अपने मंत्रिपरिषद में बदलाव करते हुए कई नए मंत्रियों की नियुक्ति की और कई मंत्रालयों का आपस में विलय कर दिया. पर्यटन और विरासत, मानव संसाधन और नागरिक सेवा (जिसे अब श्रम का नाम दिया गया है), न्याय और कानून जैसे मंत्रालयों का आपस में विलय कर दिया गया. वहीं कई नए मंत्रालय भी बनाए गए, इनमें आवास और शहरी नियोजन, उच्च शिक्षा, शोध और नए प्रयोग, परिवहन, दूरसंचार और सूचना प्रौद्योगिकी, वाणिज्य, उद्योग और निवेश प्रोत्साहन जैसे मंत्रालय शामिल हैं.

देश के लिए अहम विदेश मंत्रालय में भी बड़ा बदलाव हुआ. लंबे समय से विदेश मंत्री का काम संभाल रहे यूसुफ़ बिन अलावी बिन अब्दुल्ला की जगह सैयद बद्र बिन हमाद बिन हमोद अल बुसेदी को ओमान का नया विदेश मंत्री बनाया गया. शासन के ढांचे में सुल्तान हैथम द्वारा लाए गए इन बदलावों का मकसद ओमान की जनता की आकांक्षाओं को पूरा करना और देश की तरक्की को एक नई दिशा देना है.

अपने नए शासक के नेतृत्व में ओमान ने “विज़न 2040” का लक्ष्य निर्धारित किया है. इस साल इसे अमली जामा पहनाने का काम शुरू हो जाएगा. इसके तहत ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था के निर्माण का लक्ष्य है. इसी प्राथमिकता को मद्देनज़र रखते हुए विज़न के अंतर्गत रणनीतिक तौर पर उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा व्यवस्था, शोध और नए प्रयोगों से जुड़ी प्रभावकारी योजनाओं को लागू करने पर ज़ोर दिया गया है.

इस इलाके की करीब-करीब सभी बड़ी ताक़तों के साथ ओमान ने समान दूरी बनाते हुए सबसे दोस्ती का रिश्ता कायम रखा है. हालांकि पिछले कुछ महीनों में ओमान की इस नीति को तनाव भरे पलों का भी सामना करना पड़ा है. 

ओमान की सरकारी न्यूज़ एजेंसी की ख़बरों के मुताबिक “इस विज़न के मुख्य उद्देश्यों में-स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की चुनौतियों को पूरा करने के लिए ओमानी नागरिकों के कौशल और विशेषज्ञता को बढ़ाना, स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित करना और एक ऐसे शासन तंत्र की स्थापना करना जो मुल्क की अर्थव्यवस्था में विविधता लाने में मददगार हो- शामिल है.” एजेंसी की ख़बरों के मुताबिक देश की इस नई नीति का मुख्य ज़ोर एक ऐसा मददगार माहौल बनाना है जिसमें “निजी क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था को नया रूप देने में अग्रणी भूमिका निभा सके.”

ओमान और मध्य-पूर्व

उथल-पुथल भरे मध्य पूर्व के इलाके में दशकों तक ओमान ‘तटस्थ रणनीति’ का रास्ता ही अपनाता रहा है. संघर्ष में उलझे रहने वाले इस इलाके में ख़ासतौर से दिवंगत सुल्तान क़ाबूस के दौर में ओमान को अक्सर ‘अमन का नखलिस्तान’ कहकर पुकारा जाता रहा.

अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौता कराने में ओमान की बड़ी भूमिका रही. इस समझौते के लिए ओमान ने कई बार अपने यहां गोपनीय बैठकें आयोजित करवाईं.  आखिरकार 2015 में इस सौदे पर दस्तख़त हुए. 2017 में जब सऊदी अरब, यूएई और  बहरीन ने ‘राजनीतिक मतभेदों’ के चलते क़तर से अपने व्यापारिक और कूटनीतिक रिश्ते तोड़ने का फैसला किया तब भी ओमान ने किसी का भी पक्ष लेने से इनकार कर दिया था.

इस इलाक़े में ओमान के एक तटस्थ देश होने का एक और प्रमाण अक्टूबर 2018 में तब मिला जब इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ओमान का दौरा ख़त्म कर वापस लौटे.  इज़रायल के प्रधानमंत्री का ओमान का ये दौरा कूटनीतिक मोर्चे पर एक दुर्लभ घटना थी. ओमान में उनकी मुलाक़ात सुल्तान क़ाबूस से हुई थी. जल्दी ही ऐसी ख़बरें आने लगीं कि इज़रायल और फिलिस्तीन के बीच चल रहे विवाद के हल के लिए ओमान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है.

इस इलाके की करीब-करीब सभी बड़ी ताक़तों के साथ ओमान ने समान दूरी बनाते हुए सबसे दोस्ती का रिश्ता कायम रखा है. हालांकि पिछले कुछ महीनों में ओमान की इस नीति को तनाव भरे पलों का भी सामना करना पड़ा है. ख़ासकर तब जब इज़रायल ने ‘छुआछूत वाली सुरक्षा दीवार’ तोड़कर यूएई और बहरीन के साथ अपने कूटनीतिक रिश्ते जोड़ लिए. यूएई और बहरीन से पहले केवल दो अरब देशों- जॉर्डन और इजिप्ट के साथ ही इज़रायल के कूटनीतिक संबंध थे.

नवंबर में अंतरराष्ट्रीय मीडिया में ऐसी ख़बरें आईं थी कि इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के साथ सऊदी अरब के शहर नियोम में गुप्त रूप से वार्ताएं की हैं. ये भी कहा गया था कि इस बातचीत के दौरान अमेरिका के तत्कालीन विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो भी मौजूद थे.

ओमान में भारत के 4100 से भी ज़्यादा उद्यम और प्रतिष्ठान कार्यरत हैं और इनमें तकरीबन 7.5 अरब अमेरिकी डॉलर की पूंजी लगी हुई है. ओमान की अर्थव्यवस्था के तमाम सेक्टरों में करीब 5 लाख भारतीय कामगार कार्यरत हैं. इस लिहाज से भारत में विदेशों से भेजे जाने वाले धन का ओमान एक बड़ा स्रोत है.

एक ऐसे समय में जब मध्य पूर्व के देश इज़रायल के प्रति अपने रुख़ में निरंतर बदलाव ला रहे हैं और फिलिस्तीन के बारे में अपनी नीतियों को नए सिरे से तय कर रहे हैं, ओमान ने प्रतीक्षा करो और देखो की नीति अपनाई हुई है. यहां के तमाम मुल्क इस वक़्त इज़रायल के साथ अपने रिश्तों में एक नया सामंजस्य बिठाने की कवायद में जुटे हैं. ऐसे में ये देखना दिलचस्प होगा कि मध्यपूर्व के बदले राजनीतिक परिदृश्य में ओमान किस तरह से अपना तटस्थ रुख़ कायम रख पाता है क्योंकि यहां के तमाम देशों के साथ उसके संबंध पहले से ही काफी अच्छे हैं.

भारत के लिए क्यों अहम है ओमान

ओमान के साथ भारत के रिश्ते करीब 5 हज़ार साल पुराने हैं. आधुनिक समय में कूटनीतिक तौर पर ओमान के साथ भारत का रिश्ता 1955 में कायम हुआ था जिसे 2008 में और आगे बढ़ाकर सामरिक भागीदारी वाले रिश्ते में बदल दिया गया.

द्विपक्षीय रिश्तों में फरवरी 2018 में तब और गरमाहट आई जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ओमान के दौरे पर पहुंचे. उन्होंने ओमान के तत्कालीन सुल्तान क़ाबूस से मुलाकात की थी. दोनों देशों ने स्वास्थ्य, बाहरी अंतरिक्ष क्षेत्र के शांतिपूर्ण इस्तेमाल, पर्यटन और सैन्य सहयोग से जुड़े करारों पर दस्तख़त किए थे.

भारत ओमान के बड़े व्यापारिक सहयोगियों में से एक है. 2018 में ओमान के कुल आयात का तीसरा सबसे बड़ा स्रोत भारत था (यूएई और चीन के बाद) जबकि इसी कालखंड में ओमान के ग़ैर-तेल निर्यातों के लिए भारत तीसरा सबसे बड़ा बाज़ार था (यूएई और सऊदी अरब के बाद). भारत और ओमान का द्विपक्षीय व्यापार 2019-20 में 5.93 अरब अमेरिकी डॉलर के बराबर था. ओमान में भारत के 4100 से भी ज़्यादा उद्यम और प्रतिष्ठान कार्यरत हैं और इनमें तकरीबन 7.5 अरब अमेरिकी डॉलर की पूंजी लगी हुई है. ओमान की अर्थव्यवस्था के तमाम सेक्टरों में करीब 5 लाख भारतीय कामगार कार्यरत हैं. इस लिहाज से भारत में विदेशों से भेजे जाने वाले धन का ओमान एक बड़ा स्रोत है.

निष्कर्ष

पिछले एक साल में सुल्तान हैथम के शासन की सबसे बड़ी चुनौती कोविड-19 महामारी पर काबू पाने की रही है. जुलाई 2020 में ओमान में इस बीमारी की रफ़्तार सबसे तेज़ थी. 45 लाख की कुल आबादी वाले इस देश में तब औसतन 2 हज़ार केस रोज़ सामने आ रहे थे. फरवरी से लेकर 22 नवंबर 2020 तक ओमान में कोविड-19 के कुल 122,081 मामले सामने आए, इनमें से 113,260 लोग पूरी तरह से स्वस्थ हो गए जबकि 1380 लोगों की मौत हो गई.

कोविड-19 के ख़तरे और अर्थव्यवस्था की सुस्त रफ़्तार की वजह से 2020 के पहले 10 महीनों में करीब दो लाख 77 हज़ार विदेशी कामगारों को ओमान से अपने वतन लौटने पर मजबूर होना पड़ा. इनमें से लगभग एक लाख कामगार तो भारतीय ही थे. ओमान में कई कारोबार आज भीषण संकट में हैं, कर्मचारियों को वेतन में कटौती का सामना करना पड़ा है और कुछ कारोबार तो बंद भी हो गए हैं.

अर्थव्यवस्था का ग़ैर-तेल सेक्टर, ख़ासतौर से पर्यटन क्षेत्र महामारी की सबसे बड़ी मार झेल रहा है. 2019 में 35 लाख विदेशी पर्यटक ओमान आए थे. पर्यटन ओमानी लोगों के लिए तेल से इतर होने वाली कमाई और नौकरियों के लिए एक अहम स्रोत है.

आने वाले दिनों में सुल्तान हैथम के लिए देश की पूरी आबादी के लिए टीकाकरण सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है. इसके साथ ही देश की अर्थव्यवस्था को मुश्किलों भरे रास्ते से आगे लेकर जाना और ओमान के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से हर साल हज़ारों की तादाद में निकलने वाले ओमानी नौजवानों के लिए रोज़गार के अवसर मुहैया कराना सबसे बड़ी चुनौती साबित होने वाले हैं.

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