नेपाल में बढ़ती राजनीतिक अस्थिरता के बावजूद, अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने की दिशा में सरकार को साहसिक कदम उठाने पड़ेंगे.
नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कुमार दहल ने देश के हाइड्रोपावर क्षेत्र, विदेशी मुद्रा कोश, और देश के भीतर बढ़ते विदेशी पर्यटकों की आवा-जाही से मिलने वाले सकारात्मक रुझानों के आधार पर, नेपाल की एक रंगीन और बेहतर छवि पेश करने के बावजूद, स्थानीय लोग इसका उनके दिन प्रतिदिन के जीवन पर शायद ही कोई प्रभाव देख पा रहे हैं. कृषि और औद्योगिक उत्पादन में आ रही निरंतर गिरावट की वजह से देश गंभीर आर्थिक संकट से गुज़र रहा है, रोज़गार के साथ ही व्यापार घाटे में भी निरंतर वृद्धि दर्ज हो रही है, स्टॉक मार्केट भी धराशायी हो रहा है और रियल एस्टेट का कारोबार भी चौपट गया है. गिरते अन्य व्यापारिक गतिविधियों के साथ रेस्टोरेंट एवं होटल व्यवसाय में भी गिरावट दर्ज हो रही है. इन सब के ऊपर 8.19 प्रतिशत की मुद्रास्फीति भी लोगों के खरीदी क्षमता को तेज़ी से नकारात्मक दिशा में प्रभावित कर रहा है.
कृषि और औद्योगिक उत्पादन में आ रही निरंतर गिरावट की वजह से देश गंभीर आर्थिक संकट से गुज़र रहा है, रोज़गार के साथ ही व्यापार घाटे में भी निरंतर वृद्धि दर्ज हो रही है, स्टॉक मार्केट भी धराशायी हो रहा है और रियल एस्टेट का कारोबार भी चौपट गया है.
अर्थव्यवस्था का प्रमुख कारक, देश का कृषि क्षेत्र भी संकट में हैं. जो देश पहले दुनिया को चावल निर्यात किया करता था, वो अब पिछले चंद वर्षों से, चावल आयात करने की स्थिती में पहुंच चुका है. वर्ष 2021-22 में, नेपाल ने भारत से यूएस $ 473.43 मिलियन मूल्य के 1.4 मिलियन टन चावल का आयात किया. बाद में, 20 जनवरी 2023 को, अन्य देशों के साथ-साथ नेपाल को भारत ने ग़ैर-बासमती चावल का निर्यात करने पर प्रतिबंध लगा दी थी. परंतु कुछ समय के बाद, भारत ने उसे 93000 टन गैर बासमती चावल का निर्यात करने की अनुमति दे दी थी.
उद्योग आदि या तो बंद होते जा रहे हैं अथवा अपनी क्षमता से काफी नीचे प्रदर्शन कर रहे हैं. उदाहरण के लिए, नेपाल के प्रमुख उद्योगों में से एक सीमेंट उद्योग, अपनी क्षमता से 30 प्रतिशत कम उत्पाद कर रहा है. हालांकि हाल-फिलहाल के दिनों में, नेपाल सरकार ने निर्यात उद्योग को कुछ प्रोत्साहन दिये हैं. उसने एक नए सीमा शुल्क विधेयक को अपनी सहमति दी है जो उद्योगों में इस्तेमाल किये जाने वाले कच्चे माल का आयात करने वाली निर्यात कंपनियों को कस्टम ड्यूटी में छूट देगी. इस बिल में अंतरराष्ट्रीय उड़ान, एयरक्राफ्ट, स्पेयर पार्ट, उपकरण और इन-फ्लाइट खाद्य पेय के इस्तेमाल पर लगने वाले कर में छूट दी गई है. हालांकि, ये कहना मुश्किल है कि इस तरह की छूट से औद्योगिक सेक्टर को किस तरह से मदद मिल पायेगी.
कर्ज़ की सीमित मांग की वजह से, 2023-24 के प्रथम तीन महीने में नेपाली कमर्शियल बैंकों का मुनाफा 18.61 प्रतिशत से घट कर भारतीय रुपये में 8.41 बिलियन तक पहुंच चुका है. कई बैंकों को, लिक्विडेशन यानी दिवालिया घोषित किये जाने से बचाने के लिये उनका आपस में विलय कर दिया गया है. ऐसी स्थिति में, आम जनता को बैंकों में जमा उनके पैसे की सुरक्षा के आश्वासन के तौर पर, नेपाल की केन्द्रीय बैंक, नेपाल राष्ट्र बैंक ने एक प्रावधान तय किया है जिसके तहत सभी बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों को एक तय राशि देश के डिपॉज़िट और क्रेडिट गारंटी फंड में जमा करना पड़ेगा. ऐसे सभी कदम ये सुनिश्चित करने के लिए है कि अगर किसी बैंक अथवा वित्तीय संस्थान के सामने दिवालिया घोषित होने का संकट आ जाये तो बैंक के डिपाज़िटर व क्रेडिट गारंटी फंड के ज़रिये जमाकर्ताओं को कम से कम 312.500 रूपये की राशि तक के नुकसान की भरपाई की जा सके.
इन सब के बाद, देश से नेपाली युवा जिनमें महिलायें भी शामिल हैं, देश छोड़कर ठीक उसी तरह से भाग रहे हैं जैसे कि मधुमक्खियाँ, असुरक्षित महसूस होने की स्थिति में अपनी बस्तियां छोड़ कर भागती हैं.
इसके अलावा, आयात की तुलना में नेपाल के निर्यात दर में साल दर साल दर्ज होती गिरावट जारी है. मध्य-जुलाई से मध्य दिसंबर तक, उसने भारतीय 39.5 बिलियन मूल्य के बराबर निर्यात किया है और उसके सामने भारतीय रुपए 401.37 बिलियन के बराबर का आयात किया है, जिस वजह से नेपाल को, 361.87 बिलियन का व्यापारिक घाटा दर्ज हुआ है. व्यापार के होने वाले कुल व्यापार में निर्यात से होने वाले व्यापार का योगदान मात्र 8.96 प्रतिशत ही रहा है.
और, अमेरिकी डॉलर की तुलना में नेपाली रुपये का मूल्य धीरे-धीरे कम होता जा रहा है. 2022-23 के वित्तीय वर्ष के दौरान, 17 जुलाई 2022 के दिन एक यूएस डॉलर का मूल्य नेपाली डॉलर में 128 (आईएनआर 80.0) के बराबर था, जो कि 16 जुलाई 2023 के दिन 131.68 नेपाली रुपये के स्तर पर पहुंच चुका था. अमेरिकी डॉलर एवं नेपाली रूपया के विनिमय दर में आई इस बदलाव की वजह से, वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान नेपाल को 37.5 अरब भारतीय रुपए के विदेशी मुद्रा का घाटा दर्ज हुआ, जिस वजह से देश को उनके विदेशी कर्ज़दाताओं को घरेलू मुद्रा के रूप में अधिक भुगतान करने के लिये मजबूर होना पड़ा.
इन सब के बाद, देश से नेपाली युवा जिनमें महिलायें भी शामिल हैं, देश छोड़कर ठीक उसी तरह से भाग रहे हैं जैसे कि मधुमक्खियाँ, असुरक्षित महसूस होने की स्थिति में अपनी बस्तियां छोड़ कर भागती हैं. हर साल दस लाख से भी ज्य़ादा युवा, बेहतर रोज़गार की तलाश में देश छोड़ कर भाग रहे है. कई युवाओं को तो विदेशी धरती पर अपनी जान जोख़िम में डाल कर काम करने को विवश होना पड़ता है. हाल ही में, नेपाली नीतियों के विपरीत, जिन 200 नेपाली युवाओं ने यूक्रेनी सेना के साथ चल रही युद्द में रशियन सेना में भाड़े के सैनिक के तौर पर शामिल हुए थे, उनमें से 7 युद्ध में मारे गए थे, और 100 के करीब लोगों के या तो घायल होने अथवा लापता होने की आशंका है.
बड़ी संख्या में युवाओं के विदेश पलायन के कारण, देश के भीतर स्मार्टफोन, रेस्तरां, शराब, खाद्य एवं पेय पदार्थों व अन्य सामग्रियों की मांग में भारी कमी आ रही है. इसने न केवल निजी क्षेत्र का सरकार के प्रति भरोसे को डगमगाया है, बल्कि, इसने देश में निवेश के बाज़ार को भी नकारात्मक रूप से प्रभावित किया है. नेपाली अर्थव्यवस्था में इस तरह की बढ़ती प्रवृत्ति को देखते हुए, फेडरेशन ऑफ नेपाली चेम्बर ऑफ कॉमर्स और उद्योग (एफएनसीसीआई) के अध्यक्ष चंद्र प्रसाद ढाकल के अनुसार,”नेपाली अर्थव्यवस्था संवेदनशील स्थिति में है. माध्यम और छोटे स्तर के उद्योग बंद हो चुके है. कृषि उत्पाद ज्य़ादातर बाज़ार को खोते जा रहे है. मांग में कमी आ रही है. उद्योगपतियों में हताशा अपने चरम पर है और निवेश के बजाय वे बच निकलने की योजना बना रहे हैं.”
हाल ही में, विश्व बैंक ने सरकार द्वारा आर्थिक विकास दर में छह प्रतिशत बढ़त प्राप्त करने के लक्ष्य के सामने मात्र 3.9 प्रतिशत आर्थिक बढ़त की सफलता पाने की आशंका व्यक्त की है. हालांकि, विशेषज्ञों का तो ये तक मानना है कि इस वित्त वर्ष में सरकार इस लक्ष्य के 3 - प्रतिशत विकास दर से ज्य़ादा प्रतिशत हासिल करने में सफल नहीं रह पाएगी क्योंकि आर्थिक विकास का प्रमुख कारक, यानी देश का कृषि क्षेत्र, कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिल रही है.
इस आर्थिक संकट के दौरान नेपाल वैश्विक भ्रष्टाचार निरोधी निकाय FATF के द्वारा ग्रे लिस्ट में डाले जाने का ख़तरा भी झेल रहा है. ये सामने आया है कि नेपाल मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादियों के वित्त पोषण की जांच करने या उनकी निगह़बानी करने के प्रति बिल्कुल भी गंभीर नहीं है. साथ ही, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने नेपाल को गंभीर वित्तीय संकट झेलने की चेतावनी दी है अगर शीघ्र ही अर्थव्यवस्था सुधार के उचित उपाय नहीं किए गये तो.
ये सामने आया है कि नेपाल मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादियों के वित्त पोषण की जांच करने या उनकी निगह़बानी करने के प्रति बिल्कुल भी गंभीर नहीं है.
इससे पहले की और देर हो जाए, रोज़गार के और बेहतर अवसर के सृजन को सुनिश्चित करने के लिए, नेपाल को युद्धस्तर पर अपनी अर्थव्यवस्था का पुनःगठन, घरेलू उत्पाद और सेवाओं को बढ़ाने, बढ़े हुए व्यापार में हो रहे घाटे में कमी, एवं व्यापारिक संवर्धन द्वारा आम लोगों के खरीदने की ताक़त में बढ़त किए जाने की आवश्यकता है. हालांकि, ये देखा जाना अब भी बाकी है कि देश के भीतर बढ़ते राजनीतिक अस्थिरता के बीच नेपाल अपनी अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के क्या प्रयास करती है.
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Hari Bansh Jha was a Visiting Fellow at ORF. Formerly a professor of economics at Nepal's Tribhuvan University, Hari Bansh’s areas of interest include, Nepal-China-India strategic ...
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