विश्व अफ़्रीका दिवस के अवसर पर, अफ़्रीका के अलग अलग इलाक़ों में कोविड-19 की महामारी के बहुआयामी प्रभाव को देख रहे हैं.
अफ़्रीका ने 14 फरवरी 2020 को मिस्र में कोविड-19 का पहला मामला दर्ज किया. बेनिन, इरिट्रिया, इस्वातिनी, लाइबेरिया, नाइजीरिया, सिएरा लियोन और दक्षिण अफ़्रीका सहित सात देशों (फ़िगर संख्या 1) ने मामलों की संख्या में वृद्धि दिखाई; रिपोर्ट किए गए नए मामलों की सबसे अधिक संख्या दक्षिण अफ़्रीका (49.4 प्रतिशत) से थी. अधिकांश अफ़्रीकी देशों में कोविड-19 की जांच को लेकर बहुआयामी चुनौतियां देखी गईं जैसे, जांच के लिए प्रशिक्षित लोगों की कमी और बुनियादी स्वास्थ्य ढांचे का अभाव. अकादमिक सामग्री और स्वास्थ्य से जुड़ी रिपोर्ट छापने वाले लैंसेट के मुताबिक परीक्षणों की गति बेहद धीमी रही, जिसमें 17 देशों में मिलाकर, प्रत्येक 10 से 30 परीक्षणों पर निर्धारित की गई रिपोर्टिंग से भी कम की गई.
अफ़्रीकन सेंटर फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने जीवन, अर्थव्यवस्था और आजीविका को बचाने के लिए निगरानी और परीक्षण, चिकित्सा आपूर्ति, वैक्सीन परीक्षण, सार्वजनिक स्वास्थ्य और सामाजिक उपायों को लक्षित करते हुए कई पहलें (फ़िगर संख्या 2) शुरू की हैं.
अफ़्रीका की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को पैसे की कमी, स्वास्थ्य सेवा में नियुक्त कार्यबल की संख्या में कमी और अलग अलग बीमारियों के बढ़ते बोझ जैसी कई बहुआयामी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. महामारी ने ग़रीबी, ख़राब स्वास्थ्य साक्षरता और कमज़ोर स्वास्थ्य प्रणालियों के अलावा संचार (कम्यूनिकेबल) और गैर-संचारी (नॉन-कम्यूनिकेबल) रोगों के दोहरे बोझ को जोड़कर चुनौती को और बढ़ा दिया है. स्वास्थ्य कर्मियों को भी मानसिक तनाव, शारीरिक थकावट और परिवारों से अलगाव का सामना करना पड़ रहा है; जिस के चलते उनकी सुरक्षा और मानसिक देखभाल की ज़रूरत और मांग भी बढ़ी है. अफ़्रीकी महाद्वीप ने पहली लहर की तुलना में 2020 के अंत तक कई और मामलों के साथ एक बेहद आक्रामक दूसरी लहर देखी. इस के लिए कई तरह के कारक ज़िम्मेदार थे—सार्वजनिक स्वास्थ्य और सामाजिक उपायों में कमी, कोविड-19 के अरूपों और लॉकडाउन थकान सहित कई कारक जिम्मेदार थे. COVID-19 डेटा और स्थानीय समाधानों की बेहतर निगरानी से महाद्वीप को तीसरी लहर के संकट से सुरक्षित रखा जा सकता है.
अफ़्रीकी महाद्वीप ने पहली लहर की तुलना में 2020 के अंत तक कई और मामलों के साथ एक बेहद आक्रामक दूसरी लहर देखी. इस के लिए कई तरह के कारक ज़िम्मेदार थे—सार्वजनिक स्वास्थ्य और सामाजिक उपायों में कमी, कोविड-19 के अरूपों और लॉकडाउन थकान सहित कई कारक जिम्मेदार थे
कोविड-19 ने अफ़्रीकी देशों में स्वास्थ्य सेवाओं में भारी व्यवधान पैदा किया है. मॉडलिंग पर आधारित एक अध्ययन के मुताबिक निम्न और मध्यम आय वाले देशों में महामारी के दौरान क्रमशः एचआईवी, तपेदिक (टीबी), और मलेरिया के कारण होने वाली मौतों में 10 प्रतिशत, 20 प्रतिशत और 36 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी हुई है. इस के चलते उप-सहारा अफ़्रीका जैसे देशों के लिए यह ज़रूरी है कि वह मलेरिया महामारी को रोकने के लिए कीटनाशकों के जाल और मलेरिया-रोधी उपचार तक पहुंच को प्राथमिकता दे. केन्या का एक अध्ययन लंबे समय तक चलने वाले टीबी के बोझ को इंगित करता है. इस अध्ययन के मुताबिक लॉकडाउन से आए व्यवधानों के कारण टीबी के लगभग 25,000 अतिरिक्त मामले सामने आए. इस के अलावा महामारी ने उप-सहारा अफ़्रीका में एचआईवी सेवाओं में आई रुकावटों ने गड़बड़ी पैदा की है जिससे एचआईवी से होने वाली मौतों का बोझ भी बढ़ गया है. एचआईवी उपचार से जुड़े एक अन्य विश्लेषण ने संकेत दिया है कोविड-19 के कारण उपचार में व्यवधान के चलते अफ़्रीका में एचआईवी से 500,000 अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं.
अफ़्रीकी महाद्वीप में कोविड-19 के दीर्घकालिक सामाजिक-आर्थिक प्रभाव का विश्लेषण करने वाली यूनाइटेड नेशंस डेवलपमेंट प्रोग्राम (यूएनडीपी) की एक हालिया रिपोर्ट में तीन प्रणालियों पर महामारी के प्रभाव की अवधारणा सामने रखी गई है- मानवीय स्तर पर, घरेलू स्तर पर और अंतरराष्ट्रीय प्रवाह पर प्रभाव (फ़िगर संख्या 3). अध्ययन में कहा गया है कि ये सभी कारक आपस में जुड़े हुए हैं. मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव जैसे मृत्यु दर और बीमारियों के बदलते पैटर्न, आर्थिक गतिविधियों में कमी का कारण बनते हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक प्रणालियों को प्रभावित करते हैं. कोविड-19 का दीर्घकालिक प्रभाव लाभ को पीछे धकेल देगा और साल 2025 और 2030 तक बाल मृत्यु दर और ग़रीबी में वृद्धि दर्ज करेगा. रिपोर्ट में अप्रत्यक्ष आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी प्रभावों को कम करने के लिए स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे में सुधार, बच्चों और युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए निवेश बढ़ाने का आह्वान किया गया है ताकि आने वाली पीढ़ियों पर होने वाले आर्थिक व स्वास्थ्य संबंधी प्रभावों को कम किया जा सके.
अफ़्रीकी महाद्वीप में महामारी के कारण महिलाएं और बच्चे भी असमान रूप से प्रभावित हुए हैं. कोविड-19 के चलते जिस तरह दुनिया भर में 150 मिलियन लोग अत्यधिक ग़रीबी के दायरे में पहुंचे हैं उस के चलते केन्या और नाइजीरिया जैसे कई देश प्रभावित हुए हैं. महामारी के कारण आवाजाही पर लगी रोक का अफ़्रीका की खाद्य सुरक्षा पर प्रभाव पड़ा है, और इस के चलते खाद्य सुरक्षा और सुरक्षा तंत्र से जुड़ी नीतियों व कार्यक्रमों को और मज़बूत करने की बात की जा रही है. स्कूलों के बंद होने का बाल पोषण पर सीधा प्रभाव पड़ा है. इसका युवाओं की कमाई करने की क्षमता पर भी प्रभाव पड़ा है, जिससे मानव पूंजी का नुकसान हुआ है. स्वास्थ्य संबंधी संसाधनों की कमी के कारण महामारी के दौरान प्रसवपूर्व देखभाल से जुड़ी सेवाएं भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं. केन्या, तंजानिया और युगांडा की एक रिपोर्ट में प्रसवपूर्व सेवाओं पर कोविड-19 के प्रतिकूल प्रभाव को दिखाया गया है. यह आगे चलकर देशों में नवजात और मातृ मृत्यु दर को बढ़ाएगा जिस से मातृ मृत्यु अनुपात को कम करने से जुड़े सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को प्राप्त करने में देश पिछड़ सकते हैं.
एक मार्च 2021 को शुरू हुए कोविड-19 टीकाकरण अभियान की गति फिलहाल धीमी है. मुख्य रूप से टीकों की कम आपूर्ति और वित्तीय संकट के कारण अफ़्रीकी महाद्वीप में टीकाकरण अभियान अलग अलग रूप में धीमी गति के साथ शुरु हो पाया है.
इबोला प्रकोप के परिणामों के समान, कोविड-19 की महामारी ने अफ़्रीका में मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित किया है. हेल्थकेयर वर्कर, कोविड-19 से प्रभावित मरीज़, बच्चे, युवा और बुज़ुर्ग, चिंता और अवसाद से पीड़ित हैं. महामारी से निपटने के तौर तरीक़ों और प्रतिक्रियायों में महामारी के दौरान और उस के बाद सामने आने वाले मनोसामाजिक प्रभावों को जोड़ा जाना चाहिए. इस के लिए ज़रूरी है कि मानसिक स्वास्थ्य शिक्षा और परामर्श से जुड़ी सुविधाओं को महामारी से निपटने के व्यापक तौर तरीक़ों के साथ एकीकृत किया जाए. कोविड-19 के अप्रत्यक्ष स्वास्थ्य प्रभावों को ले कर केन्या, युगांडा और दक्षिण अफ़्रीका से सामने आए निष्कर्षों में आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं में पड़ी रुकावटों और इस के चलते प्रतिकूल स्वास्थ्य प्रभावों की बात की गई है. इन निषकर्षों के आधार पर स्थानीय स्तर पर सुविधाओं और समुदायों से जुड़ा डेटा एकत्र करने का सुझाव सामने आया है, ताकि इस के आधार पर महामारी से निपटने के तौर तरीक़ों और राहत कार्यों को स्थानीय ज़रूरतों के मुताबिक ढाला जा सके. पूर्वी और पश्चिमी अफ़्रीका में किए गए एक ऑनलाइन सर्वेक्षण में पीयर टू पीयर यानी सहकर्मी स्तर पर संचार को कोविड-19 से जुड़ी नीतियों के अनुपालन में प्रभावी व लाभकारी पाया गया है.
जबकि महामारी ने कई देशों के स्वास्थ्य क्षेत्र और अर्थव्यवस्था को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया है, यह स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों को फिर से आकार देने का एक अवसर ले कर भी आया है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) में अफ़्रीका के क्षेत्रीय निदेशक मत्शिदिसो मोएती ‘सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज कार्यक्रमों को लागू करने, प्राथमिक और निवारक स्वास्थ्य देखभाल पर ज़ोर के साथ साथ डिजिटल इनोवेशन और महामारी के लिए बेहतर तैयारी’ का समर्थन करते हैं.
एक मार्च 2021 को शुरू हुए कोविड-19 टीकाकरण अभियान की गति फिलहाल धीमी है. मुख्य रूप से टीकों की कम आपूर्ति और वित्तीय संकट के कारण अफ़्रीकी महाद्वीप में टीकाकरण अभियान अलग अलग रूप में धीमी गति के साथ शुरु हो पाया है. कोवैक्स (COVAX) के माध्यम से वैक्सीन की आपूर्ती में बाधा से अफ़्रीका का संकट और बढ़ गया है.
10 मई तक, अधिकांश अफ़्रीकी देशों में टीकाकरण शुरु हो गया है (फ़िगर संख्या 4), लेकिन नौ देशों ने ज़रूरी खुराक़ के एक चौथाई से भी कम संख्या प्राप्त की है और 15 देशों ने प्राप्त खुराक़ों का आधा हिस्सा अभियान के तहत दिया है. टीकाकरण की धीमी दर के कारणों में टीकों का असमान वितरण, स्वास्थ्य देखभाल के बुनियादी ढांचे की कमी, और टीकों को ले कर हिचकिचाहट व संदेह शामिल हैं. विश्व स्तर पर दी जाने वाली 1,000 लोगों पर 150 खुराक़ के विपरीत, अफ़्रीका में टीके का कवरेज केवल आठ खुराक़ है. यह सभी देशों में सबसे कम है.
अफ़्रीका में सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के लिए आवश्यक दवाओं और टीकों तक समान पहुंच को ले कर महामारी के प्रभाव की समीक्षा स्थायी स्वास्थ्य सुधारों के लिए एक बहुआयामी दृष्टिकोण की मांग करती है.
टीकाकरण से जुड़ी एक और बाधा फाइज़र-बायोएनटेक (Pfizer-BioNTech) टीका लेने वाले लोगों में कोरोनावायरस के नए वेरिएंट बीएनटी162बी2 (BNT162b2) की भेद्यता यानी टीकाकरण के बावजूद संक्रमण से जुड़े प्रमाण हैं. कोरोनोवायरस मामलों, अस्पताल में भर्ती होने वालों की संख्या और मौतों पर चिंता को लेकर बीएनटी162बी2 (BNT162b2) वेरिएंट के प्रभाव से जुड़े लैंसेट के एक हालिया अध्ययन से पता चलता है कि अलग अलग आयु वर्गों में सार्स-कोविड-2 (SARS-CoV-2) के दोनों प्रकार के संक्रमणों यानी रोगसूचक (symptomatic) और स्पर्शोन्मुख (asymptomatic) को रोकने को ले कर वैक्सीन प्रभावशाली साबित हुई है. साथ ही वैक्सीन कवरेज में वृद्धि से संक्रमण की घटनाओं में कमी पाई गई है. इन सब के अलावा, कोविड-19 ने अफ़्रीकी अर्थव्यवस्थाओं में कमज़ोरियों को उजागर किया है और स्वास्थ्य संबंधी कमियों में बढ़ोत्तरी की है. विश्व बैंक का अनुमान है कि सभी क्षेत्रों में कोविड-19 के प्रभाव से निपटने के लिए अफ़्रीका को 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर की ज़रूरत है. अफ़्रीका को अपनी आजीविका पर महामारी के प्रभाव को दूर करने के लिए सुरक्षा से संबंधी योजनाओं व कार्यक्रमों को बढ़ावा देने और खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने की आवश्यकता है. अफ़्रीका में सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के लिए आवश्यक दवाओं और टीकों तक समान पहुंच को ले कर महामारी के प्रभाव की समीक्षा स्थायी स्वास्थ्य सुधारों के लिए एक बहुआयामी दृष्टिकोण की मांग करती है. साथ ही इस समीक्षा में महामारी से जुड़े सामाजिक और आर्थिक जोखिमों को कम करने की पैरवी की गई है. स्वास्थ्य और सामाजिक देखभाल से जुड़े क्षेत्र में निवेश और सुधार व ई-स्वास्थ्य जैसी इनोवेशन का उपयोग करना कोविड-19 से निपटने के लिए हमारे समय की सब से बड़ी आवश्यकता है.
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Dr. Shoba Suri is a Senior Fellow with ORFs Health Initiative. Shoba is a nutritionist with experience in community and clinical research. She has worked on nutrition, ...
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