Author : Shivam Shekhawat

Published on Feb 08, 2024 Updated 0 Hours ago
विदेश मंत्री एस.जयशंकर का नेपाल दौरा: एक अच्छी शुरुआत

2024 में अपने पहले विदेश दौरे के तहत विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर 4-6 जनवरी को काठमांडू गए. उनकी ये यात्रा भारत-नेपाल साझा आयोग की बैठक के सातवें संस्करण के सिलसिले में थी. मई 2023 में नेपाल के प्रधानमंत्री प्रचंड के दिल्ली दौरे के बाद बनी सकारात्मकता को आगे बढ़ाते हुए विदेश मंत्री का दौरा पारस्परिक मेलजोल के क्षेत्रों- ऊर्जा, व्यापार, कनेक्टिविटी, लोगों के बीच आपसी संबंध, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, विकास से जुड़ी साझेदारी- पर केंद्रित था. इसमें ये ध्यान रखा गया कि दोनों देशों के बीच विवादित मुद्दे सहयोग पर असर न डालें.

2024 की अपनी पहली यात्रा को चिह्नित करते हुए, विदेश मंत्री, डॉ एस जयशंकर भारत-नेपाल संयुक्त आयोग की बैठक के सातवें संस्करण के लिए 4-6 जनवरी से काठमांडू में थे। मई 2023 में नेपाल के प्रधानमंत्री प्रचंड की नई दिल्ली यात्रा की सकारात्मक गति के आधार पर, विदेश मंत्री की यात्रा का ध्यान आपसी सामंजस्य के क्षेत्रों-ऊर्जा, व्यापार, संपर्क, लोगों से लोगों के बीच संबंध, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, विकास साझेदारी-पर भी केंद्रित था.

नेपाल में अपने 26 घंटे के दौरे में विदेश मंत्री ने प्रधानमंत्री प्रचंड और राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल से मुलाकात की और विदेश मंत्री एन. के. सऊद के साथ साझा आयोग की बैठक की. उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देऊबा और के पी शर्मा ओली से भी मुलाकात की.

सहयोग का विस्तार: बैठक के नतीजे 

नेपाल में अपने 26 घंटे के दौरे में विदेश मंत्री ने प्रधानमंत्री प्रचंड और राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल से मुलाकात की और विदेश मंत्री एन. के. सऊद के साथ साझा आयोग की बैठक की. उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देऊबा और के पी शर्मा ओली से भी मुलाकात की. साझा आयोग का काम समग्र द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा और चिंता के विषय से जुड़े सवालों, अगर कोई है तो, पर चर्चा करना है. भारत और नेपाल- दोनों देशों ने इस बातचीत को ‘उपयोगी और व्यापक’ बताया. कुछ बड़े नतीजे जैसे कि नेपाल से भारत को 10,000 MW बिजली के निर्यात को निर्धारित करने वाला समझौता, नवीकरणीय ऊर्जा पर सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन (MoU), 132 KV की तीन साझा सीमा पार ट्रांसमिशन लाइन का वर्चुअल उद्घाटन और पंचेश्वर हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) की प्रगति को लेकर बैठक के दौरान सफलतापूर्वक बातचीत होने की उम्मीद है. भारत के पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल के ज़रिए मुनाल सैटेलाइट के लॉन्च की सुविधा के लिए न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड और नेपाल एकेडमी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के बीच एक समझौता भी हुआ. बैठक के दौरान सीमा पार नई ट्रांसमिशन लाइन और सीमा पार लाइन की क्षमता बढ़ाने के लिए बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं की खोज-बीन करने और दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई.   

नवंबर में जाजरकोट में आए 6.4 तीव्रता के भूकंप के बाद पुनर्निर्माण में मदद के लिए भारत ने 10 अरब नेपाली रुपये की पेशकश की. इसका एक बड़ा हिस्सा अनुदान सहायता के तहत दिया जाएगा. भारत ने कंबल, टेंट, स्लीपिंग बैग, इत्यादि समेत राहत सामग्रियों का अपना पांचवां हिस्सा भी दिया और विदेश मंत्री ने त्रिभुवन यूनिवर्सिटी सेंट्रल लाइब्रेरी समेत शिक्षा, स्वास्थ्य और संस्कृति के क्षेत्र में भूकंप के बाद 59 नई पुनर्निर्माण परियोजनाओं का उद्घाटन किया. 

पिछले कुछ वर्षों में अपनी पड़ोस सर्वप्रथम नीति के तहत पड़ोसी देशों पर भारत के नए सिरे से ज़ोर, नेपाल के आंतरिक घरेलू राजनीतिक घटनाक्रम और नेपाल में चीन की बढ़ती पैठ की वजह से नेपाल और भारत- दोनों देशों ने लाभदायक सहयोग पर ज़्यादा ध्यान दिया है ताकि साझेदारी का ज़्यादा-से-ज़्यादा लाभ उठाया जा सके. जिन मुद्दों ने ऐतिहासिक रूप से दोनों देशों के बीच सकारात्मक संबंधों में रंग में भंग डाला है जैसे कि 1950 की संधि की समीक्षा की मांग, सीमा से जुड़े मुद्दे एवं एकतरफा नक्शे से जुड़े (कार्टोग्राफिक) कदम, प्रतिष्ठित व्यक्तियों के समूह की रिपोर्ट, इत्यादि को लेकर राजनीतिक नेतृत्व के बीच व्यापक रूप से बातचीत नहीं हुई है. लेकिन तब भी नेपाल की राजनीति से जुड़ा एक वर्ग अपने नेतृत्व से मांग करता रहा है कि वो भारत के साथ इन चिंताओं को उठाए. वैसे तो नेपाल के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री- दोनों इस बात पर सहमत हुए कि इन मुद्दों को साझा आयोग की बैठक में रखा गया लेकिन इन मामलों को लेकर कोई महत्वपूर्ण सफलता नहीं मिली. पोखरा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान भरने वाली फ्लाइट के लिए एयर रूट की उपलब्धता मुहैया कराने के अनुरोध, जिसे मई 2023 में भी उठाया गया था, पर भी कोई प्रगति नहीं हुई क्योंकि भारत हवाई पहुंच देने के लिए तैयार नहीं है. सीमा के मुद्दे के सवाल पर नेपाल के विदेश मंत्री ने मतभेदों को दूर करने के लिए ‘संवाद और कूटनीतिक पहल’ को आगे का रास्ता बताया. 

पोखरा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान भरने वाली फ्लाइट के लिए एयर रूट की उपलब्धता मुहैया कराने के अनुरोध, जिसे मई 2023 में भी उठाया गया था, पर भी कोई प्रगति नहीं हुई क्योंकि भारत हवाई पहुंच देने के लिए तैयार नहीं है.

बहुमुखी विकास से जुड़ी साझेदारी: चिंताओं का समाधान

नेपाल के साथ भारत की विकास से जुड़ी व्यापक साझेदारी है. अपने अनुदानों और लाइन ऑफ क्रेडिट (अगस्त 2023 तक कुल मिलाकर 1.65 अरब अमेरिकी डॉलर) के ज़रिए भारत ने नेपाल में स्वास्थ्य, शिक्षा, कनेक्टिविटी, इत्यादि से जुड़ी बड़ी और मध्यम स्तर की इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के विकास में साथ दिया है. वैसे तो भारत ने नेपाल के भीतर कई परियोजनाओं पर काम किया है लेकिन पिछले दिनों साझा आयोग की बैठक में नेपाली पक्ष ने एग्ज़िम बैंक के माध्यम से भारत की लाइन ऑफ क्रेडिट के ज़रिए प्रदान की गई फंड वाली कुछ परियोजनाओं के पूरा होने में देरी को उजागर किया. वर्तमान समय में लगभग एक दर्जन सड़क निर्माण से जुड़ी परियोजनाओं पर काम चल रहा है. इस देरी की वजह कर्ज़ के समझौते में निर्धारित कुछ शर्तें हैं. नवंबर 2023 में भी नेपाल के सड़क विभाग ने अपनी सालाना रिपोर्ट में भारत से शर्तों- जिसके तहत किसी प्रोजेक्ट के निर्माण में भारत के कुछ सामानों और सेवाओं का कुछ हिस्सा इस्तेमाल करना ज़रूरी है- में कुछ ढील देने का अनुरोध किया और इसे 50 प्रतिशत से घटाकर 30 प्रतिशत करने की मांग की. इसकी वजह ये थी कि इसमें नौकरशाही से जुड़ी प्रक्रियाएं शामिल थीं और इससे परियोजनाओं को पूरा करने में देरी होती थी. इसी तरह की मांग बांग्लादेश में भारत की परियोजनाओं को लेकर भी हो चुकी है.

भारत की विकास से जुड़ी साझेदारी नेपाल में उसके ‘हाई इंपैक्ट कम्यूनिटी डेवलपमेंट प्रोजेक्ट’ (पहले ‘स्मॉल डेवलपमेंट प्रोजेक्ट’) में भी दिखती है जिसने पिछले साल 23 वर्ष पूरे किए हैं. इसके तहत भारत ने 535 परियोजनाओं पर काम शुरू किया था जिनमें से 476 परियोजनाओं को पूरा किया गया है. साझा आयोग की बैठक में दोनों पक्षों ने योजना के तहत प्रति परियोजना अनुदान 50 मिलियन नेपाली रुपये से बढ़ाकर 200 मिलियन नेपाली रुपये करने को अंतिम रूप दिया. इसका उद्देश्य संसाधनों की कमी को पूरा करना था और इसे दिसंबर 2023 में मंज़ूरी दी गई. लेकिन इसके बावजूद समझौते की आलोचना की गई और ‘ढीली जांच प्रक्रिया’ को लेकर सवाल उठाए गए जिसकी वजह से भारत अपनी मर्ज़ी से नई परियोजनाएं शुरू करने में सक्षम हो सकेगा और ‘अनुचित प्रभाव’ हासिल करेगा. प्रधानमंत्री ने साफ किया कि किस तरह नेपाल का दूसरे देशों जैसे कि चीन, यूनाइटेड किंगडम, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, इत्यादि के साथ भी इसी तरह के तौर-तरीकों वाले समझौते हैं. उन्होंने दोहराया कि किसी भी प्रोजेक्ट के लिए स्थानीय या प्रांतीय सरकारों को परियोजना मंज़ूरी के लिए वित्त मंत्रालय को भेजने की ज़रूरत होगी जो इसके बाद भारत सरकार को प्राथमिकता के आधार पर परियोजना को लागू करने के लिए कहेगी. सरकारी संस्थानों और भारतीय दूतावास को मिलाकर एक निगरानी की व्यवस्था भी बनाई जाएगी.   

ये दिखाता है कि कैसे लागू की जा रही परियोजनाओं की सीमा और स्वरूप को लेकर कुछ चिंताएं बनी हुई हैं जबकि इस बात को लेकर आम राय है कि भारत इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास से जुड़ी अपनी प्रतिबद्धताओं को आगे बढ़ाए और नेपाल में अपना निवेश बढ़ाए. नेपाल के विदेश मंत्री के अनुसार पंचेश्वर, पश्चिम सेती, अरुण III और अपर करनाली जैसी भारत समर्थित परियोजनाओं के समय पर पूरा होने से सरकार को रोज़गार के लिए विदेश जाने वाले लोगों की संख्या सीमित करने में मदद मिलेगी क्योंकि इन परियोजनाओं से देश के भीतर ही रोज़गार के नए अवसरों का निर्माण होगा. वैसे तो भारत ने एग्ज़िम बैंक के द्वारा दिए गए कर्ज़ के तहत शर्तों की समीक्षा के सवाल पर सकारात्मक रुख़ दिखाया है लेकिन दोनों पक्षों के लिए महत्वपूर्ण है कि वो साथ मिलकर ऐसे गतिरोधों को दूर करें जो किसी प्रोजेक्ट को देर करते हैं और विश्वास की कमी को दूर करने के लिए कदम उठाएं.

वैसे तो भारत ने एग्ज़िम बैंक के द्वारा दिए गए कर्ज़ के तहत शर्तों की समीक्षा के सवाल पर सकारात्मक रुख़ दिखाया है लेकिन दोनों पक्षों के लिए महत्वपूर्ण है कि वो साथ मिलकर ऐसे गतिरोधों को दूर करें जो किसी प्रोजेक्ट को देर करते हैं और विश्वास की कमी को दूर करने के लिए कदम उठाएं.

लंबे समय के लिए बिजली के व्यापार के समझौते पर सफल हस्ताक्षर एवं भारत, नेपाल के साथ-साथ बांग्लादेश के बीच त्रिपक्षीय सहयोग की संभावना को बढ़ाने की इसकी क्षमता और डिजिटल कनेक्टिविटी को बढ़ाने में लगाई गई छलांग आने वाले महीनों में द्विपक्षीय संबंध को तय करेगी. मौजूदा भू-राजनीतिक माहौल में नेपाल और भारत- दोनों पर निर्भर है कि वो आपसी लाभ सुनिश्चित करने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति का उपयोग करें और सहयोग बढ़ाएं. 

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