Author : Tanya Aggarwal

Expert Speak Young Voices
Published on Apr 06, 2024 Updated 0 Hours ago

भारत के नागरिकों और कारोबारियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सीखकर इसका फायदा उठाना चाहिए. इसका फायदा उठाने के लिए ये ज़रूरी है कि हम एआई के क्षेत्र में हो रहे तकनीक़ी विकास के प्रति जागरूक रहें. उन्हें सीखें. तभी हम इस प्रतिस्पर्धात्मक दुनिया में सबसे आगे रह सकते हैं.

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को मज़बूत बनाने में AI साक्षरता की भूमिका क्या है?

तकनीक़ी के क्षेत्र में इस वक्त बहुत तेज़ी से विकास हो रहा है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वजह से क्रांतिकारी बदवाल हो रहे हैं. 

से देखते हुए ये कहा जा सकता है कि एआई साक्षरता की अहमियत बढ़ गई है. एआई को समझना बहुत ज़रूरी हो गया है. अपने डेमोग्राफिक डिविडेंड और सूक्ष्म, लघु और मध्यम श्रेणी के उद्योगों (MSME) पर निर्भरता की वजह से भारत इस वक्त एक नाजुक मोड़ पर खड़ा है. यही वजह है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल ही में अपने यहां स्कूलों में सबके लिए एआई साक्षरता मुहिम की शुरूआत की. इसका मकसद छात्रों को एआई, कोडिंग और मशीन लर्निंग(ML) की जानकारी देना है. सरकार चाहती है कि तेज़ी से डिजिटल होती दुनिया में सफलता हासिल करने के लिए युवा पीढ़ी को हर तरह से तैयार किया जाए.

जैसे-जैसे हम तेज़ी से बदलती तकनीक़ी को समझते जा रहे हैं, वैसे-वैसे ये बात भी साफ होती जा रही है कि हमारे सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए एआई को समझना और इसका नैतिकता के साथ उपयोग करना ज़रूरी हो गया है.


जैसे-जैसे हम तेज़ी से बदलती तकनीक़ी को समझते जा रहे हैं, वैसे-वैसे ये बात भी साफ होती जा रही है कि हमारे सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए एआई को समझना और इसका नैतिकता के साथ उपयोग करना ज़रूरी हो गया है. तकनीक़ी के क्षेत्र में जिस तेज़ रफ्तार से प्रगति हो रही है, उसे देखते हुए ज़रूरत इस बात की है कि हमारे पास ऐसे कर्मचारी हों, जो एआई का इस्तेमाल करना जानते हैं. जो इसकी क्षमता का पूरा दोहन कर सकें. खासकर MSMEs के क्षेत्र में. एआई की पूरी क्षमता का इस्तेमाल करने के लिए सबसे पहले ये समझना ज़रूरी है कि ये तकनीक़ी समाज में, कारोबार में, हमारी दैनिक दिनचर्या में बहुआयामी यानी कई तरीके से प्रभाव डालती है.

भविष्य के लिए सीखना

मौजूदा दौर में एआई का समाज पर व्यापक प्रभाव पड़ रहा है. रोग और उसके इलाज पर निगरानी के साथ-साथ ये फोटो फिल्टर टूल्स से हमारे सोशल मीडिया अनुभव को भी बेहतर बनाता है. अगर सामान्य शब्दों में कहें तो एआई साक्षरता का मतलब ये है कि हम एआई पर आधारित तकनीक़ी को समझें और इसका इस्तेमाल कर सकें. ये जानना ज़रूरी है कि जो मौजूदा एआई टूल्स हैं, वो कैसे काम करते हैं. समाज को ये कैसे नए तरीके से आकार दे रहे हैं. कर्मचारियों के और आम लोगों के रोज़ाना के जीवन पर इसका क्या असर पड़ रहा है. विकासशील देशों में एआई की साक्षरता से नौकरी और रोज़गार के क्षेत्र में बड़े बदलाव लाने की क्षमता है. एआई का ज्ञान होना अलग-अलग उद्योगों में रोज़गार के नए अवसर खोल सकता है. अगर किसी कंपनी के कर्मचारियों को डाटा एनालिटिक्स, मशीन लर्निंग और एआई की जानकारी है, तो वो विदेशी निवेश को आकर्षित करके कंपनी की आर्थिक तकक्की करवा सकते हैं. ऐसे कर्मचारियों को कंपनी के लिए बहुत मूल्यवान समझा जाता है. व्यापार में अलग-अलग एआई टूल्स के इस्तेमाल से उत्पादकता बढ़ सकती है, उत्पादन की गति तेज़ हो सकती है और उपभोक्ताओं के व्यवहार को समझने में भी मदद मिलेगी. इस वक्त भारत में करीब 6 करोड़ MSME उद्योग हैं, जिनमें 11 करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला है. अगर किसी को एआई का इस्तेमाल करना आता है तो उसे आम उम्मीदवार के तुलना में MSMEs में आसानी से रोज़गार मिल सकता है.

एआई में अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र में हलचल मचाने की क्षमता है. ऐसे में सरकार को चाहिए कि वो अर्थव्यवस्था के अहम क्षेत्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे. MSME एक बहुत की महत्वपूर्ण क्षेत्र है. 


एआई में अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र में हलचल मचाने की क्षमता है. ऐसे में सरकार को चाहिए कि वो अर्थव्यवस्था के अहम क्षेत्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे. MSME एक बहुत की महत्वपूर्ण क्षेत्र है. भारत खुद को एआई तकनीक़ी के विकास के मुख्य केंद्र के तौर पर पेश करना चाहता है. यही वजह है कि वो एआई साक्षरता पर इतना ज़ोर दे रहा है. भारत इस बात को समझ रहा है कि अगर उसे डेमोग्राफिक डिविडेंड यानी अपनी युवा आबादी का फायदा लेना है तो युवाओं को भविष्य के लिए तैयार करना होगा. इसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत में अब एआई को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जा रहा है, जिससे हमारे छात्र भविष्य की ज़रूरतों के हिसाब से तैयार रहें. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2023 में इस बात को स्वीकार किया गया है कि एआई, मशीन लर्निंग और बिग डाटा एनालिटिक्स जैसी उभरती तकनीकियों में दुनिया को बदलने की क्षमता है. इसीलिए अब पढ़ाई-लिखाई के तरीके में बदलाव किया जा रहा है. इसका मकसद पढ़ाई के तरीके और मूल्यांकन प्रक्रिया को बेहतर बनाना, शिक्षा को सबकी पहुंच में लाना, शिक्षा की कार्ययोजना, प्रबंधन और प्रशासन को व्यवस्थित करना है. इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए डिजिटल शिक्षा व्यवस्था के इकोसिस्टम को मजबूत बनाया जा रहा है. शिक्षकों, छात्रों, उनके अभिभावकों और शिक्षा के प्रबंधन से जुड़े लोगों को तकनीक़ी के इस्तेमाल के बारे में सही सूचना दी जा रही है. इसके साथ ही उन्हें सुरक्षा उपायों की जानकारी भी दी जा रही है.

ऐसी ही एक पहल है यूथ फॉर उन्नति एंड विकास विद एआई (YUVAi) प्रोग्राम. ये प्रोग्राम इलेक्ट्रोनिक्स और इन्फोर्मेशन टेक्नोलॉजी मंत्रालय के नेशनल ई-गवर्नेंस डिवीज़न और इंटेल इंडिया कंपनी के सहयोग से चल रहा है. इसका मकसद युवाओं को एआई तकनीक़ी के लिए तैयार करना है. ये मंच युवाओं की मानसिकता को नए ज़माने की तकनीक़ी के हिसाब से ढालने और फिर उसके लिए ज़रूरी कुशलता देने पर फोकस करता है. एआई को पाठ्यक्रम में शामिल करवाकर ये सुनिश्चित किया गया है राष्ट्रीय, राज्य और स्कूली स्तर पर सभी छात्र इन नई तकनीकियों, उसके रोल और उनके प्रभावों के बारे में जानकारी हासिल कर लें. एआई को लेकर सरकार जिस तरह सक्रिय भूमिका निभा रही है, उसका मकसद छात्रों को डिजिटल क्षेत्र में आ रहे बदलावों के बारे में जानकारी देना और चुनौतियों के मुकाबले के लिए तैयार करना है, जिससे वो जिम्मेदारी के साथ इनका इस्तेमाल कर सकें.

एआई को लेकर इस साक्षरता को अगर युवाओं के साथ-साथ कारोबारियों में भी बढ़ाया जाए तो इसका बहुत फायदा मिल सकता है. आज जिस तरह व्यापार में एआई का प्रभाव बढ़ता जा रहा है, उसमें अगर व्यापारियों को एआई की जानकारी होगी तो वो अपने कारोबार में इसका इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके बारे में सही फैसले सकते हैं. इससे उनकी कार्यकुशलता और उत्पादकता बढ़ेगी. अपने कारोबार में वो नए प्रयोग भी कर सकेंगे. एआई की जानकारी होने का फायदा ये होगा कि व्यापारी बाज़ार के बदलते समीकरणों के हिसाब से खुद को उसमें ढाल सकेंगे. तकनीक़ी के क्षेत्र में हो रहे विकास में आगे रहेंगे. आर्थिक विकास के मौकों को भुना सकेंगे. MSMEs सेक्टर में एआई साक्षरता को बढ़ावा देने से वो डिजिटल युग में आने वाली चुनौतियों से निपटने में तो सक्षम होंगे ही, साथ ही देश के आर्थिक विकास में योगदान भी देंगे. इससे लघु उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा.

लघु उद्योग, बड़ा असर

MSMEs सेक्टर को भारत की समाजिक और आर्थिक विकास की रीढ़ की हड्डी माना जाता है. MSME भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. बड़े पैमाने पर रोज़गार मुहैया कराने, निर्यात और समावेशी वृद्धि में भी इसकी अहम भूमिका है. MSME की भारत के कुल औद्योगिक उत्पादन में 45 प्रतिशत, कुल निर्यात में 40 प्रतिशत और जीडीपी में 37.54 प्रतिशत की हिस्सेदारी है. देश के विकास में इस क्षेत्र की अहमियत को देखते हुए MSME मंत्रालय इनके लिए अनुकूल व्यापारिक माहौल बनाने पर ज़ोर देता है, जिससे इन कारोबारियों की उद्यमशीलता बनी रहे.

ऐसे में आज के तेज़ी से बदले कारोबारी परिदृश्य में एआई साक्षरता MSMEs क्षेत्र को उसकी पूरी क्षमता पहचानने में मदद करेगी. एआई टूल्स की समझ इस क्षेत्र के कारोबारियों को विकास के नए अवसर देगी. उनकी कार्यकुशलता बढ़ाएगी. बड़ी कंपनियों से प्रेरणा लेते हुए MSMEs को बिक्री की रणनीति बनाने, उपभोक्ताओं के रूझान समझने, बाज़ार को लेकर भविष्यवाणी करने और अपनी उत्पादन की प्रक्रिया को सुनियोजित करने के लिए एआई का इस्तेमाल करना चाहिए. खास बात ये है कि एआई का असर व्यापार के अलावा लोक प्रशासन, कानूनी, टैक्स सिस्टम और डिजिटल सेक्टर में भी होता है. अगर MSMEs के लोगों को एआई की जानकारी होगी तो उसकी मदद से वो इन क्षेत्रों की जटिलताओं का मुकाबला तो कर ही सकेंगे, साथ ही सरकारी योजनाओं, वित्तीय विकल्प और उनकी ज़रूरतों के लिए बनाई गई सरकारी नीतियों को भी बेहतर तरीके से समझ सकेंगे.

एक और क्षेत्र जिसमें एआई अहम भूमिका निभा सकता है वो है आंकड़ों का विश्लेषण और उसके बाद सही फैसला लेना. एआई का एल्गोरिदम ऐसा होता है कि वो बहुत कम वक्त में बहुत ज्यादा डेटा का विश्लेषण कर सकता है.


स्टॉक प्रबंधन और वित्त से जुड़े एआई टूल्स MSMEs से जुड़े कारोबारियों के पैसे बचा सकते हैं, जबकि ईमेल मार्केटिंग ऑटोमेशन से उन्हें अपने ग्राहकों को बढ़ाने में मदद मिल सकती है. एक और क्षेत्र जिसमें एआई अहम भूमिका निभा सकता है वो है आंकड़ों का विश्लेषण और उसके बाद सही फैसला लेना. एआई का एल्गोरिदम ऐसा होता है कि वो बहुत कम वक्त में बहुत ज्यादा डेटा का विश्लेषण कर सकता है. ऐसे में MSMEs को किसी भी क्षेत्र से जुड़ी अंदर की जानकारी मिल सकती है, जिसकी मदद से अपने कारोबार के विकास के लिए महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं. उदाहरण के लिए गुरूग्राम की एक एचआर कंपनी Culturro ने स्केलनट नाम के एआई टूल का इस्तेमाल किया. इस एआई की क्रूज़ मोड सर्विस कंटेंट क्रिएशन और मार्केटिंग में मदद करती है. Culturro के सह संस्थापक आशीष मनचंदा के मुताबिक एआई की मदद से उनकी जैसी छोटी कंपनियां भी कंटेंट क्रिएशन की सारी जानकारी हासिल कर लेती हैं और फिर उनका इस्तेमाल करती हैं.

एआई का पूरा फायदा लेने के लिए ये ज़रूरी है कि MSME सेक्टर में प्रबंधन स्तर के लोगों को इसकी पूरी क्षमताओं के बारे में शिक्षित किया जाए. उन्हें एआई से होने वाले लाभ के बारे में बताया जाए. वित्तीय बाधाओं को दूर करने और ज्ञान के ज़रूरी संसाधनों तक उनकी पहुंच सुनिश्चित की जाए. इसके अलावा उन्हें एआई के व्यवहारिक इस्तेमाल के बारे में बताया जाएगा तो MSMEs सेक्टर में समावेशी विकास और सटीक फैसले लेने में मदद मिलेगी.

एआई को अपनाना

तेज़ी से डिजिटल और तकनीक़ी पर निर्भर होती जा रही दुनिया में भारत इस क्षेत्र का अगुआ देश बनकर उभर रहा है. लेकिन हर तकनीक़ी विकास के साथ कुछ बाधाएं भी आती हैं. इनकी वजह से या तो बदलाव होते हैं या फिर कुछ कारोबार बंद हो जाते हैं. हालांकि ये याद रखना भी ज़रूरी है कि इस तरह की बाधाओं से व्यापार और रोज़गार के नए मौके भी पैदा होते हैं.

मौजूदा दौर में एआई की वजह से जो बदलाव हो रहे हैं, उसका असर हर किसी पर पड़ रहा है. ऐसे में कारोबारियों के लिए ये ज़रूरी है कि वो इस मौके का फायदा उठाएं. खुद में सुधार करें और इस प्रतिस्पर्धी क्षेत्र में सबसे आगे रहें. अगर वो ऐसा नहीं कर पाए तो नए अवसरों को गंवाएंगे. भारत में जिस तरह डिजिटलाइजेशन में वृद्धि हो रही है. इंटरनेट का प्रसार हो रहा है, उसे देखते हुए इस बात की प्रशंसा की जानी चाहिए कि MSMEs अपने काम में एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं. भारत के युवाओं और MSMEs सेक्टर में एआई साक्षरता को बढ़ाना इस बदलाव का प्रस्थान बिंदु हो सकता है.

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