Author : Soumya Bhowmick

Published on Sep 01, 2023 Updated 0 Hours ago

सभी स्तरों पर सतत् विकास लक्ष्यों को लागू करने के लिए समाज को ऐसी युवा नीतियों को बढ़ावा देना चाहिए जो साक्ष्यों पर आधारित हों, जिनसे युवाओं को लाभ होगा और समग्र सामाजिक कल्याण में वृद्धि होगी.

युवा शक्ति: मानव पूंजी के दृष्टिकोण से हटकर हमें युवाओं की बेहतरी की ओर ध्यान देना होगा

लंबे समय से यह माना जाता रहा है कि युवाओं में निवेशमानव पूंजी के विकास का एक महत्त्वपूर्ण अंग है. हालांकि, आर्थिक दृष्टिकोण से परे, युवाओं में निवेश के मुद्दे को समग्र स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी देखा जाना चाहिए. वर्तमान में युवा विकास के एजेंडे में किशोर कल्याण से जुड़े कई क्षेत्र आते हैं, जिनमें शारीरिक स्वास्थ्य और पोषण से लेकर कौशल और रोज़गार क्षमता आदि शामिल हैं. हालांकि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य जैसे कारक जीवन की खुशहाली के लिए महत्त्वपूर्ण हैं लेकिन व्यापक अर्थों में, जीवन की गुणवत्ता को उसके वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन और व्यक्ति विशेष के अनुभवों के आधार पर जांचा जा सकता है.

सारणी 1: यूथ वेल-बीइंग फ्रेमवर्क

स्रोत: रॉसएट एल. (2020), “एडोलेसेंट वेल-बीइंग: ए डेफिनिशन एंड कंसेप्चुअल फ्रेमवर्क

युवा कल्याण बनाम सतत् विकास लक्ष्य

वर्ल्ड यूथ रिपोर्ट, 2018 (संयुक्त राष्ट्र) में मौजूदा विकास परियोजनाओं की तुलना सतत् विकास लक्ष्य एजेंडा 2030 से की गई है. साक्ष्य-आधारित युवा नीतियों को लागू करके और युवा विकास कार्यक्रमों में तेजी लाकर समाज सभी स्तरों पर सतत् विकास लक्ष्यों को लागू करने की दिशा में काम कर सकते हैं. जिससे न सिर्फ़ युवा लाभान्वित होंगे, बल्कि इससे मानव पूंजी और सामाजिक कल्याण को बढ़ावा मिलेगा.

जीवन की गुणवत्ता महज़ शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है. सामाजिक संपर्क, शैक्षिक अवसर और आर्थिक सशक्तिकरण की भी इसमें अहम भूमिका होती है. युवा आबादी के उज्ज्वल भविष्य के लिए उनकी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच और कौशल विकास सुनिश्चित करना पहला कदम होगा.

एसडीजी का तीसरा लक्ष्य (अच्छा स्वास्थ्य और खुशहाली) सभी उम्र के लोगों के स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने की ज़रूरत को रेखांकित करता है.किशोरावस्था बाल्यावस्था और युवावस्था के बीच के समय को कहते हैं, जो एक युवा इंसान के जीवन का महत्त्वपूर्ण समय होता है.युवाओं और विशेष रूप से किशोरों के लिए यह समय बेहद महत्त्वपूर्ण होता है, क्योंकि इसी उम्र में दीर्घकालिक भविष्य की आधारशिला रखी जा रही होती है. शारीरिक स्वास्थ्य और उचित पोषण स्वस्थ विकास की ज़रूरी शर्तें हैं.

इसी तरह, किशोरावस्था के साथ आने वाली चुनौतियों का सामना करनेकी मानसिक मज़बूती के लिए मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक रूप से स्वस्थ मन की भूमिका महत्त्वपूर्ण है. वास्तव में, कोरोना महामारी के दौरान दुनिया भर में युवाओं ने नए सिरे से मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं साझा किया. संयुक्त राज्य अमेरिका में 2021 में मानसिक स्वास्थ्य संकट को देखा गया. हालांकि, महामारी से पहले भी, पिछले एक दशक में अमेरिका के युवाओं में स्थायी उदासी और निराशा की भावनाओं के साथ-साथ आत्मघाती विचारों और व्यवहारों की घटनाओं में लगभग 40 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई.

हालांकि, जीवन की गुणवत्ता महज़ शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है. सामाजिक संपर्क, शैक्षिक अवसर और आर्थिक सशक्तिकरण की भी इसमें अहम भूमिका होती है. युवा आबादी के उज्ज्वल भविष्य के लिए उनकी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच और कौशल विकास सुनिश्चित करना पहला कदम होगा. हालांकि एसडीजी के तीसरा लक्ष्य युवाओं की खुशहाली पर ध्यान केंद्रित करता है, लेकिन युवा-कल्याण के लिए एसडीजी के अन्य लक्ष्य भी उतने ही ज़रूरी हैं.

कोई भी समाज व्यवस्था के स्तर पर असमानताओं को दूर करके और लक्षित सहायता प्रदान करके एक समावेशी वातावरण तैयार कर सकता है जो सभी युवाओं की भलाई के लिए काम करे.

एसडीजी का चौथा लक्ष्य (गुणवत्तापूर्ण शिक्षा) युवा-कल्याण के लिए विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण है. गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच की बदौलत युवा उचित शिक्षा और कौशल हासिल कर सकते हैं, जिनसे उनके बेहतर रोज़गार पाने की संभावनाएं बढ़ती हैं और उन्हें इतना सशक्त बनाती हैं कि वे अपने जीवन और स्वास्थ्य के बारे में उचित निर्णय ले सकें. यूनेस्को के अनुसार, एजेंडा 2030 में उल्लेखित विकास उद्देश्यों को पूरा करने के लिए वार्षिक शिक्षा व्यय को 2015 में 149 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़ाकर 2030 तक 300 अरब अमेरिकी डॉलर करने की अनुमानित आवश्यकता है. इसके अलावा, एसडीजी का आठवां लक्ष्य (अच्छा काम और आर्थिक विकास) रोज़गार अवसरों के निर्माण और आर्थिक सशक्तिकरण के माध्यम युवा-कल्याण को बढ़ावा देता है.

मानवाधिकार का दृष्टिकोण

कॉमनवेल्थ यूथ प्लान ऑफ एक्शन युवा विकास के लिएमानवाधिकार के दृष्टिकोण को अपनाने और उसके आधार खुशहाली को परिभाषित करने पर ज़ोर देता है. यह दृष्टिकोण हाशिए के समूहों के अधिकारों की वकालत करके और युवाओं को कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से सक्षम बनाकर और व्यक्तिगत विकास और सामाजिक प्रगति के लिए रोज़गार के अवसरों को उपलब्ध कराकरशक्ति-असंतुलन और भेदभाव जैसी समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करता है. इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए यह योजना “युवाओं को मुख्यधारा में लाने” की बात करती है, जिसमें युवा विकास के लिए बजट आवंटन, संबंधित सरकारी विभागों में युवाओं के दृष्टिकोण को अपनाना, नीति निर्धारण में युवाओं की भागीदारी को बढ़ावा देना, देश में युवाओं की स्थिति पर नज़र रखना और युवा सशक्तिकरण की दिशा में ज्ञान का सृजन करना आदि शामिल है.

मानवाधिकार के सिद्धांत युवा-कल्याण की व्यापक समझ बनाने में मदद करते हैं. इससे उनकी उन चुनौतियों को पहचानने में मदद मिलती है जिनका सामना कमज़ोर वर्ग के युवाओं को करना पड़ता है, जिसमें वंचित वर्ग, जातीय अल्पसंख्यक और विकलांग समुदाय के लोग शामिल हैं. कोई भी समाज व्यवस्था के स्तर पर असमानताओं को दूर करके और लक्षित सहायता प्रदान करके एक समावेशी वातावरण तैयार कर सकता है जो सभी युवाओं की भलाई के लिए काम करे. और नीति-निर्माण और निर्णयन प्रक्रिया में युवाओं को शामिल करने से यह सुनिश्चित होता है कि शासन के स्तर पर उनकी ज़रूरतों और दृष्टिकोण पर विचार किया गया है. सामुदायिक विकास परियोजनाओं और सामाजिक पहलों में युवाओं को भागीदारी का मौका देने से उनके भीतर उद्देश्यपूर्ण जीवन की भावना मज़बूत होती है और समाज में सकारात्मक बदलाव आता है. इसके अलावा, किशोर बच्चों की भलाई से जुड़े विविध आयामों को पहचानकर वैश्विक समुदाय को युवा-कल्याण से जुड़े सतत् विकास लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में काम करना चाहिए. इसके अतिरिक्त, युवा-कल्याण के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए साक्ष्य-आधारित नीतियों का निर्माण करना, शिक्षा, स्वास्थ्य में वित्तीय निवेश को बढ़ाना और समग्र विकास पर ज़ोर देना आवश्यक है.

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