Author : Soumya Bhowmick

Published on Oct 19, 2022 Updated 24 Days ago
मणिपुर की सिंगमिला कपाई लांगकन: सोशल मीडिया के इस्तेमाल से स्थानीय जड़ी-बूटियों का सफल व्यापार!

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जिस तरह गुलाबी शिरुई लिली फूल (लिलियम मैकलिनिये), जो कि मणिपुर का राज्य फूल है, उखरुल ज़िले की पहाड़ियों में खिलता है, उसी तरह सिंगमिला कपाई लांगकन इस ज़िले में अपने उद्यम ‘हर्ब्स एंड मी’ के साथ फल-फूल रही हैं. स्थानीय स्तर पर इस तरह की वनस्पति और जीव-जंतु की जंगली प्रजाति उसी तरह दुर्लभ हैं जिस तरह सिंगमिला जैसी महिलाओं का असाधारण कारोबारी सफ़र. सिंगमिला भारत के शहरों को अलग-अलग सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म के रणनीतिक इस्तेमाल के ज़रिए क़ुदरत के नज़दीक ला रही है.

38 साल की सिंगमिला ने मणिपुर की स्थानीय जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करके हाथ से बने ऑर्गेनिक साबुन और शैंपू के अपने कारोबार की शुरुआत 2019 में एक फ़ेसबुक पेज के ज़रिए की. वो कहती है, “मैंने अपने हुनर का इस्तेमाल करके साबुन बनाने की शुरुआत इसलिए की क्योंकि हमारे गांव में अलग-अलग प्रकार की जड़ी-बूटियां हैं जिनमें इलाज की ख़ूबियां हैं और जिनका इस्तेमाल अरोमाथेरेपी (प्राकृतिक तेलों के द्वारा शरीर की मालिश की चिकित्सा विधि) में हो सकता है. इनका इस्तेमाल अलग-अलग प्रकार के अन्य उद्देश्यों में भी हो सकता है. मैंने महसूस किया कि हाथ से बने ये साबुन अपनी चिकित्सकीय विशेषताओं के ज़रिए लोगों को फ़ायदा पहुंचा सकते हैं. इसलिए जब मैंने साबुन बनाने की ट्रेनिंग कुछ हद तक हासिल कर ली तो मैंने अपने कारोबार की शुरुआत की और मणिपुर के अलग-अलग हिस्सों से कच्चा माल लेना शुरू कर दिया.” सिंगमिला का कारोबार संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य 5 (लैंगिक समानता) के भीतर योजनाबद्ध अवतार है. संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य 5 में अनुरोध किया गया है कि “महिलाओं को आर्थिक संसाधनों में समान अधिकार देने के लिए सुधारों के साथ-साथ देश के क़ानून के तहत ज़मीन और दूसरे प्रकार की संपत्तियों, वित्तीय सेवाओं, उत्तराधिकार और प्राकृतिक संसाधनों में मालिकाना हक़ और नियंत्रण तक उनकी पहुंच सुनिश्चित की जाए.” 1[i]

सिंगमिला का कारोबार संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य 5 (लैंगिक समानता) के भीतर योजनाबद्ध अवतार है. संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य 5 में अनुरोध किया गया है कि “महिलाओं को आर्थिक संसाधनों में समान अधिकार देने के लिए सुधारों के साथ-साथ देश के क़ानून के तहत ज़मीन और दूसरे प्रकार की संपत्तियों, वित्तीय सेवाओं, उत्तराधिकार और प्राकृतिक संसाधनों में मालिकाना हक़ और नियंत्रण तक उनकी पहुंच सुनिश्चित की जाए.” 

सिंगमिला का जन्म मणिपुर के उखरुल ज़िले के एक छोटे से गांव पेह (जिसका नाम पहले पाओई था) में हुआ था और वो उखरुल शहर में बड़ी हुई थी. मौजूदा समय में शादी के बाद वो उखरुल ज़िले के ही एक गांव शिरुई में रहती है. सिंगमिला अपने माता-पिता की 10 संतानों में सातवें नंबर पर है. सिंगमिला के पिता एक किसान थे जबकि मां घर का काम-काज संभालती थीं. शिक्षित होने के बावजूद मणिपुर में बहुत से लोग बेरोज़गार हैं जबकि कुछ युवा नौकरी की तलाश में दूसरे राज्य चले जाते हैं. मणिपुर के युवाओं की इस स्थिति को लेकर सिंगमिला को बहुत ज़्यादा दुख है. इस दुख ने उसे ज़रूरी हुनर से जुड़े कार्यक्रमों की ट्रेनिंग लेने और अपना कारोबार शुरू करने के लिए प्रेरित किया. वो एक स्थानीय छात्र संगठन, जिसका नाम तांगखुल कटमनाव साकलॉन्ग (TKS) था, से भी जुड़ी हुई थी. ये संगठन अलग-अलग क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं को नेतृत्व की क्षमता से लेकर डिजिटल साक्षरता तक की ट्रेनिंग देता है.

स्रोत: राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2019-212[ii]

हाथ से बने उत्पादों को लेकर सिंगमिला की दिलचस्पी बुनाई और कशीदाकारी को लेकर उसकी मां के प्यार से प्रेरित थी. वो कहती हैं, “हम ऐसी दुनिया में रह रहे हैं, जहां कृत्रिम सुगंधित साबुन हर जगह उपलब्ध हैं. ये बड़े दुख की बात है कि मेरे जैसे व्यक्ति समेत हर कोई इस तरह के सस्ते उत्पादों को ख़रीद रहा है जो अक्सर हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं. 3[iii] इसलिए मैंने हाथ से तैयार साबुनों और शैंपू को बेचने की पहल की. काफ़ी लोगों ने मेरे साबुनों और शैंपू की परंपरागत अहमियत को समझा और फिर सोशल मीडिया ने मुझे जागरुक किया कि वास्तव में इस तरह के उत्पादों के लिए एक बहुत बड़ा बाज़ार है.”

निजी और पेशेवर रूप से तकनीक ने सिंगमिला के जीवन को बहुत ज़्यादा सशक्त बनाया है. कुछ साल पहले मणिपुर की रहने वाली उसकी एक दोस्त ने सिंगमिला को महिलाओं के उद्यम से जुड़े कार्यक्रम फ्रेंड्स ऑफ वुमेंस वर्ल्ड बैंकिंग (FWWB) के बारे में बताया था. फ्रेंड्स ऑफ वुमेंस वर्ल्ड बैंकिंग ने अपने कार्यक्रम ‘इनेबलिंग टेक्नोलॉजी फॉर वुमेन एंटरप्रेन्योर्स’ के ज़रिए सिंगमिला को छोटे कारोबार में क्षमता निर्माण की ट्रेनिंग मुहैया कराई. इस कार्यक्रम का समर्थन रिलायंस फाउंडेशन और USAID ने वुमेन कनेक्ट चैलेंज इंडिया इनिशिएटिव के ज़रिए किया. वो याद करती है कि किस तरह कारोबार की तरफ़ उसके सफ़र के शुरुआती दौर में सोशल मीडिया मददगार रहा. फ्रेंड्स ऑफ वुमेंस वर्ल्ड बैंकिंग के कई वॉट्सऐप ग्रुप थे जिनके ज़रिए आस-पास रहने वाले लोगों के बीच उसकी योजनाओं के प्रचार में मदद मिली. साथ ही इन वॉट्सऐप ग्रुप से सिंगमिला की तरह के दूसरे लोगों को भी जोड़ा गया जो इस कार्यक्रम के वित्तीय प्रबंधन और डिजिटल साक्षरता की ट्रेनिंग के मापदंड से लाभ उठा सकते थे. फ़ेसबुक और वॉट्सऐप के अलावा इस कार्यक्रम ने दूसरे सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म जैसे कि इंस्टाग्राम और पिंट्रेस्ट के इस्तेमाल को भी बढ़ावा दिया ताकि महिला उद्यमियों के उत्पादों के लिए रचनात्मक आइडिया उत्पन्न किया जा सके.

कुछ साल पहले मणिपुर की रहने वाली उसकी एक दोस्त ने सिंगमिला को महिलाओं के उद्यम से जुड़े कार्यक्रम फ्रेंड्स ऑफ वुमेंस वर्ल्ड बैंकिंग (FWWB) के बारे में बताया था. फ्रेंड्स ऑफ वुमेंस वर्ल्ड बैंकिंग ने अपने कार्यक्रम ‘इनेबलिंग टेक्नोलॉजी फॉर वुमेन एंटरप्रेन्योर्स’ के ज़रिए सिंगमिला को छोटे कारोबार में क्षमता निर्माण की ट्रेनिंग मुहैया कराई. इस कार्यक्रम का समर्थन रिलायंस फाउंडेशन और USAID ने वुमेन कनेक्ट चैलेंज इंडिया इनिशिएटिव के ज़रिए किया.

वैसे तो सिंगमिला ने शुरुआत में पर्चियां छपवाकर और दूसरे लोगों को अपने उत्पादों के बारे में बताकर ग्राहक बढ़ाने की कोशिश की लेकिन उसे जल्द ही एहसास हो गया कि इससे काम नहीं हो पा रहा है. सिंगमिला कहती है, “मैंने छह महीनों के लिए एक दुकान खोली. लेकिन महामारी की वजह से लगभग एक साल तक कोई काम नहीं हो पाया. चूंकि बिना काम-काज के मैं दुकान का किराया चुकाने में समर्थ नहीं थी, इसलिए मैंने स्थायी तौर पर दुकान बंद कर दी.” दुकान के बदले सिंगमिला ने दोस्तों, परिवार के सदस्यों और देश भर में व्यापक ग्राहकों तक अपने उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए फ़ेसबुक और वॉट्सऐप का इस्तेमाल किया. वैश्विक स्तर पर 2021 तक के आंकड़ों के मुताबिक़ भारत में सबसे ज़्यादा वॉट्सऐप (53 करोड़), 4[iv] यूट्यूब (44 करोड़ 80 लाख), फ़ेसबुक (41 करोड़) और इंस्टाग्राम (21 करोड़) का इस्तेमाल करने वाले लोग हैं. ग़ौर करने वाली बात ये है कि तकनीक के बिना सिंगमिला का कारोबार नहीं चल सकता था या कोविड-19 महामारी के बाद उबर नहीं सकता था. साथ ही बिना तकनीक के सिंगमिला को अपने काम के लिए पहचान नहीं मिल सकती थी. अब बाज़ार में महामारी से जुड़ी पाबंदियों के ख़त्म होने और वित्तीय स्थिति बेहतर होने के बाद सिंगमिला एक बार फिर से अपनी दुकान खोलना चाहती है.

महामारी ने हर तरह के कारोबार में सोशल मीडिया के अलग-अलग इस्तेमाल के लिए एक मज़बूत प्रोत्साहन मुहैया कराया है. महामारी के शुरुआती महीनों में जनवरी से मार्च 2020 के बीच सोशल मीडिया की गतिविधियों में 50 गुना तेज़ी आई5[v] और सोशल मीडिया तक पहुंच के लिए लोगों ने सबसे ज़्यादा मोबाइल को पसंद किया (आंकड़ा 1 देखें). वास्तव में मार्च 2020 में लॉकडाउन के पहले हफ़्ते के दौरान ही भारत में सोशल मीडिया के इस्तेमाल में 87 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई.6[vi] वैसे तो भारत के पूर्वोत्तर इलाक़े में रहने वाले 80 प्रतिशत व्यापारियों की पहुंच बिना किसी दिक़्क़त के डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर तक नहीं है- शहरी-ग्रामीण भेद और महत्वपूर्ण लैंगिक अंतर से इसका लक्षण पता चलता है- लेकिन इस इलाक़े में रिटेल डिजिटाइज़ेशन का मौक़ा लगभग 18 अरब अमेरिकी डॉलर होने का अनुमान है. 7[vii] इसके साथ-साथ इंटरनेट की कनेक्टिविटी एक चिंता का विषय है. सिंगमिला इस बात के लिए दुख जताते हुए कहती है कि वो अपने ज़्यादातर ऑर्डर वॉट्सऐप और फ़ेसबुक के ज़रिए हासिल करती है लेकिन इंटरनेट कनेक्टिविटी की वजह से उसके कारोबार पर काफ़ी असर पड़ता है. सिंगमिला कहती है, “मैं अपने उत्पादों के बारे में ठीक ढंग से प्रचार नहीं कर पाती क्योंकि हम लोग अभी भी बुनियादी समस्याओं से जूझ रहे हैं. तकनीक पर मेरी अच्छी पकड़ है और अलग-अलग सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म के इस्तेमाल में भी मुझे कोई दिक़्क़त नहीं है. लेकिन जब भी मेरे गांव में बिजली चली जाती है तो मुझे अपने कारोबार को लेकर चिंता होती है. हमारे क्षेत्र में पावर बैकअप की सुविधा नहीं है जिसकी वजह से अक्सर हम बिना किसी नेटवर्क के रह जाते हैं या अपने मोबाइल को चार्ज नहीं कर पाते.”

सिंगमिला का सफ़र कठिन रहा है. बिल्कुल शुरू से कारोबार स्थापित करने से लेकर महामारी की वजह से लगाई गई पाबंदियों का सामना सिंगमिला ने मुश्किलों से किया है. लेकिन सिंगमिला कहती है कि अपने कारोबार पर आए संकट से निपटने में उसे सरकार की तरफ़ से पर्याप्त समर्थन नहीं मिला. हालांकि, ये युवा उद्यमी अपने परिवार से मिले समर्थन के लिए आभार व्यक्त करती है. सिंगमिला के परिवार ने साबुन बनाने, उसकी पैकेजिंग और डिलीवरी में सिंगमिला की मदद की. सिंगमिला ट्रेनिंग और अलग-अलग तरह की दूसरी कारोबारी जानकारियों के लिए फ्रेंड्स ऑफ वुमेंस वर्ल्ड बैंकिंग और दूसरे NGO का शुक्रिया भी अदा करती है.

इन चुनौतियों के बावजूद सिंगमिला को इस बात को लेकर काफ़ी संतोष है कि वो अपने समाज के युवाओं के लिए प्रेरणा बनने में सक्षम रही है ताकि वो अपने सपनों को साकार कर सकें और कारोबारी बनने के अपने लक्ष्य को हासिल करने का रास्ता चुन सकें. अलग-अलग स्थानीय संगठन अक्सर सिंगमिला को उसके तकनीक आधारित कारोबारी सफ़र पर बातचीत के लिए और विभिन्न प्रकार की शिल्प कलाओं की ट्रेनिंग देने के लिए न्योता देते हैं. सिंगमिला उत्साह के साथ कहती है, “हां, मैंने लोगों को तकनीक के इस्तेमाल में हुनरमंद बनने के लिए प्रेरित किया है. मेरे फ़ेसबुक पेज ने मेरे इलाक़े की कई महिलाओं को अपने उत्पादों के ऑनलाइन प्रचार के लिए प्रेरित किया है. पहले मैं अपने गांव के ज़्यादातर लोगों की तरह इंटरनेट का इस्तेमाल मनोरंजन के लिए करती थी जैसे कि वीडियो देखने के लिए या गाना सुनने के लिए. लेकिन मेरे कारोबार ने मुझे सिखाया कि ग्राहकों को बढ़ाने के मामले में सोशल मीडिया कितना मज़बूत टूल है. वर्तमान में सिंगमिला फ्रेंड्स ऑफ वुमेंस वर्ल्ड बैंकिंग को मणिपुर और नागालैंड में कार्यक्रम चलाने में भी मदद करती है.

छठी आर्थिक गणना (2013-14) के मुताबिक़ पूर्वोत्तर के आठ राज्यों में मणिपुर में संपत्तियों का मालिकाना हक़ रखने वाली महिलाओं का प्रतिशत सबसे कम है. त्रिपुरा के 89 प्रतिशत (पूर्वोत्तर में सबसे ज़्यादा) के मुक़ाबले मणिपुर में सिर्फ़ 20 प्रतिशत महिलाएं संपत्ति में मालिकाना हक़ रखती हैं जबकि राष्ट्रीय औसत 78 प्रतिशत है. 

छठी आर्थिक गणना (2013-14) के मुताबिक़ पूर्वोत्तर के आठ राज्यों में मणिपुर में संपत्तियों का मालिकाना हक़ रखने वाली महिलाओं का प्रतिशत सबसे कम है. त्रिपुरा के 89 प्रतिशत (पूर्वोत्तर में सबसे ज़्यादा) के मुक़ाबले मणिपुर में सिर्फ़ 20 प्रतिशत महिलाएं संपत्ति में मालिकाना हक़ रखती हैं जबकि राष्ट्रीय औसत 78 प्रतिशत है. 8[viii] हालांकि राष्ट्रीय सैंपल सर्वे (2018) के 73वें चरण के अनुसार मणिपुर में हर 1,000 सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) में महिलाओं के स्वामित्व वाले 481 MSME हैं जबकि राष्ट्रीय स्तर पर ये आंकड़ा हर 1,000 MSME पर 195 है. इस तरह मणिपुर सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला राज्य है (दूसरा आंकड़ा देखें). बेशक, सिंगमिला जैसे उद्यमियों ने न सिर्फ़ अपने कारोबार पर ध्यान देकर इस आंकड़े में बड़ा योगदान दिया है बल्कि दूसरी महिलाओं को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित करके भागीदारी निभाई है.

वो सभी युवा जो निरर्थक उद्देश्यों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल के पक्ष में हैं, उनके लिए सिंगमिला का संदेश सीधा है: “युवाओं को सबसे पहले इस बात की पहचान करनी चाहिए कि वो क्या पसंद करते हैं और तब अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए पूरे मन से तकनीक का इस्तेमाल करना चाहिए. इसे अपग्रेड करना चाहिए और उनके जीवन में सुधार करना चाहिए.”

ज़रूरी सबक़

  • बिजली और इंटरनेट कनेक्टिविटी जैसे ज़रूरतों तक पहुंच में सुधार करना कुछ बाधाओं, जो MSME चलाने के लिए तकनीक का बेहतरीन फ़ायदा उठाने में रुकावट डाल सकते हैं, को ख़त्म करने के लिए ज़रूरी है. देश के दूर-दराज़ के हिस्सों के लिए ये ख़ास तौर पर महत्वपूर्ण है.
  • डिजिटल साक्षरता हासिल करके व्यवस्थित ढंग से अपने कारोबार का दायरा बढ़ाने के लिए महिला उद्यमियों की कोशिशों को बढ़ावा देने में सार्वजनिक और निजी किरदारों के साथ-साथ सिविल सोसायटी संगठनों से समर्थन के बेहतरीन माहौल की ज़रूरत है. उदाहरण के लिए, परंपरागत लाइफस्टाइल से जुड़े सामानों पर ध्यान देने वाली महिला उद्यमी अपने उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए सोशल मीडिया और दूसरे डिजिटल संसाधनों के इस्तेमाल के ज़रिए एक व्यापक बाज़ार तक पहुंचने में सक्षम हैं

NOTES

[i]1 “Goal 5, Sustainable Development Goals,” United Nations.

[ii]2 International Institute for Population Sciences, National Family Health Survey (NFHS-5), 2019–21: India: Volume 1, March 2022

[iii]3 Lauren Zanolli, “Why smelling good could come with a cost to health,” The Guardian, May 23, 2019, https://www.theguardian.com/us-news/2019/may/23/fragrance-perfume-personal-cleaning-products-health-issues

[iv]4 Harsh Upadhyay, “Govt says WhatsApp has 530 Mn users in India,” entrackr, February 25, 2021, https://entrackr.com/2021/02/govt-says-whatsapp-has-530-mn-users-in-india/

[v]5 Smita Balram, “Covid-19 Impact: Social media activity in the country grew 50x in early march says Nielsen,” The Economic Times, March 28, 2020, https://economictimes.indiatimes.com/tech/internet/covid-19-impact-social-media-activity-in-the-country-grew-50x-in-early-march-says-nielsen/articlesh ow/74833596.cms?from=mdr

[vi]6 “Coronavirus: 87% increase in social media usage amid lockdown; Indians spend 4 hours on Facebook, WhatsApp,” Business Today, March 30, 2020, https://www.businesstoday.in/technology/news/story/coronavirus-87-percent-increase-in-social-media-usage-amid-lockdown-indians-spend-4-hours-on-fa cebook-whatsapp-253431-2020-03-30

[vii]7 Ministry of Electronics & Information Technology, Government of India and Better Than Cash Alliance, “Catalysing Responsible Digital Payments in the North East Region of India,” 2017), 6, https://www.rfilc.org/wp-content/uploads/2021/09/Catalyzing-Responsible-Digital-Payments-in-the-North-East-Region-of-India.pdf

[viii]8 Antara Dutta “Present Status of Women Entrepreneurship in North-east India: Potentialities and, Struggles,” Compliance Engineering Journal, Volume 10, Issue 10, 2019, http://ijceng.com/gallery/1-cej-2356-f.pdf

[ix]9 “Digital and Social Media Landscape in India,” Acumen, https://acumen.education/digital-and-social-media-landscape-in-india/

[x]10 Ministry of Micro,Small & Medium Enterprises, Government of India, “Women owned MSMEs,” January 1, 2018, https://pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=1514859

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