Published on Dec 26, 2020 Updated 0 Hours ago

महामारी की वजह से शिक्षकों की भूमिका बदल गई है; शिक्षक अब मदद करने वाले, सलाहकार, गाइड, मनोरंजन करने वाले, इनोवेटर, काउंसलर और दूसरी कई चीज़ों की भूमिका में आ रहे हैं.

प्रैक्टिकली: तल्लीनता वाली पढ़ाई और 3डी वर्चुअल क्लासरूम का अनुभव

ORF: किस तरह प्रैक्टिकली शिक्षा पहुंचाने के परिप्रेक्ष्य को बदल रहा है?

Charu Noheria: जैसा कि आप हमारा नाम सुनकर कह सकते हैं, शिक्षा के लिए प्रैक्टिकली का दृष्टिकोण प्रैक्टिकल है. प्रैक्टिकली एक तल्लीनता से सिखाने वाला ऐप है जो अनुभव के ज़रिए पढ़ाई बच्चों तक पहुंचाने पर ध्यान देता है. पढ़ाई हमारे चारों तरफ़ है, इसकी कोई सीमा नहीं है और ये आसान है. सीखने को तल्लीनता से कहानी कहने से जोड़ा जाता है और असल ज़िंदगी के उदाहरण में दो हफ़्ते के बाद पढ़ाई और सीखने की परंपरागत पद्धति के 30 प्रतिशत के मुक़ाबले याददाश्त 90 प्रतिशत करती है. प्रैक्टिकली सीखने का इंटरएक्टिव तरीक़ा बताती है जैसे सिमुलेशन, ऑगमेंटेंड रियलिटी कंटेंट और वर्चुअल रियलिटी प्रोग्रेसिव लर्निंग सेट ताकि पढ़ाई में मज़ा आए. हमें ख़ुशी है कि असीमित पढ़ाई को लेकर हमारे दृष्टिकोण और सिद्धांत को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में जगह मिली है जो अनुभव वाली पढ़ाई पर ज़ोर देती है. ये पढ़ाई करने वालों की अगली पीढ़ी के लिए बुनियाद होगी जिससे वो भारत का भविष्य बनाएंगे. प्रैक्टिकली शिक्षकों की भी मदद करती है ताकि वो सबसे ज़्यादा हिस्सेदारी वाली ऑनलाइन क्लास कर सकें. ‘प्रैक्टिकली’ कहें तो एक शिक्षक प्रैक्टिकली के वर्चुअल क्लास में वो सभी चीज़ें कर सकते हैं जो वो क्लासरूम में बैठकर करते हैं.

‘प्रैक्टिकली’ कहें तो एक शिक्षक प्रैक्टिकली के वर्चुअल क्लास में वो सभी चीज़ें कर सकते हैं जो वो क्लासरूम में बैठकर

ORF: आप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ऑगमेंटेड रियलिटी (AR), वर्चुअल रियलिटी (VR) और अन्य तकनीकों का इस्तेमाल पढ़ाई को रोचक बनाने में कैसे करते हैं?

Charu Noheria: मैं इस साल की शुरुआत में दुबई में थी और वहां के छात्रों ने आम तौर पर सेब और आम के बाग़ान नहीं देखे हैं क्योंकि मिडिल-ईस्ट में ये फल नहीं उगते. जब उन्होंने प्रैक्टिकली के VR अनुभव का इस्तेमाल करके किसी भी बीज को चुनकर उसे बगीचे में फेंककर बड़े पेड़ में तब्दील होते देखा तो वो बहुत ख़ुश हुए. कल्पना करके देखिए एक मानव कंकाल की सभी हड्डियों को अलग करना और फिर AR सिमुलेशन में उन्हें फिर से कंकाल में जोड़ना. इस तरह की गतिविधियों को करते हुए बच्चे जो सीखते हैं वो हैरान करने वाला है. प्रैक्टिकली रियलिटी तकनीकों जैसे AR और VR का इस्तेमाल कर पढ़ाई में जान फूंकती है. हमारे पास AI चैटबॉट भी है जिसका इस्तेमाल छात्र उस वक़्त अपनी पढ़ाई में कर सकते हैं जब शिक्षक आसपास नहीं हों, ठीक स्टडी बडी की तरह. हमारा चैटबॉट बातचीत कर सकता है और उसमें ज्ञान का भंडार है जहां अकादमिक विषयों से लेकर सामान्य ज्ञान तक की जानकारी है. हम AI का इस्तेमाल वर्चुअल क्लासरूम में ध्यान की मुद्रा के स्तर पर लगातार निगरानी के लिए भी करते हैं ताकि तुरंत फीडबैक मिल सके और शिक्षक को सावधान किया जा सके. इससे ये सुनिश्चित किया जाता है कि क्लासरूम में पढ़ाई चलती रहे, शिक्षकों और छात्रों का संवाद बना रहे और सब ऊर्जा से भरे रहें. 

AI का इस्तेमाल वर्चुअल क्लासरूम में ध्यान की मुद्रा के स्तर पर लगातार निगरानी के लिए भी करते हैं ताकि तुरंत फीडबैक मिल सके और शिक्षक को सावधान किया जा सके. इससे ये सुनिश्चित किया जाता है कि क्लासरूम में पढ़ाई चलती रहे, शिक्षकों और छात्रों का संवाद बना रहे और सब ऊर्जा से भरे रहें.

ORF: हमें ये बताइए कि आपने मेक इन इंडिया इनोवेशन पहल को आगे बढ़ाते हुए किस तरह सफलतापूर्वक वैश्विक बाज़ार में विस्तार किया और आपके एजेंडे में आगे क्या है. 

Charu Noheria: प्रैक्टिकली भारत में लॉकडाउन के दौरान अप्रैल में लॉन्च हुई. प्रैक्टिकली को भारत में सभी तरह के स्कूल ने हाथों हाथ लिया. हमारा वर्चुअल क्लासरूम सॉल्यूशन शिक्षकों के बीच बेहद हिट साबित हुआ है. इस कामयाबी को आगे बढ़ाते हुए हमने पश्चिम एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के बाज़ारों में भी प्रैक्टिकली को लॉन्च किया और कुछ बड़े प्रतिष्ठित स्कूल ब्रांड को ग्राहक और क्षेत्रीय साझेदार के तौर पर अपने साथ जोड़ा है. खाड़ी सहयोग परिषद का इलाक़ा हमारे लिए निवेश और अपने काम-काज को आगे बढ़ाने के मामले में काफ़ी अच्छा साबित हुआ है. प्रैक्टिकली के एनिमेटेड वीडियो कंटेंट को आसानी से किसी भी भाषा में बदला जा सकता है. हालांकि हमारे लिए निकट भविष्य की योजना अंग्रेजी बोलने वाले देशों में विस्तार करने की है लेकिन हम उन देशों में भी साझेदार को तलाश रहे हैं जहां दूसरी भाषाओं में कंटेंट की ज़रूरत है.

ORF: आप शिक्षकों और अभिभावकों को नई डिजिटल दुनिया में आने में कैसे मदद कर रहे हैं, ख़ास तौर पर कोविड-19 महामारी के साथ?

Charu Noheria: इस बात की कल्पना कीजिए कि छात्र अपने घर के आरामदायक माहौल से बिना किसी ख़र्च के भौतिकी और रसायन शास्त्र के प्रयोग कर रहे हैं. इस बात की कल्पना कीजिए कि शिक्षक अपने छात्र को एक-एक कण से पॉलीमर बनाना सिखा रहे हैं. इस बात की कल्पना कीजिए कि शिक्षक और छात्र एक डिजिटल प्लेटफॉर्म के ज़रिए एक-दूसरे से जुड़ रहे हैं जहां भागीदारी का स्तर वास्तविक क्लासरूम के बराबर या उससे ज़्यादा है. प्रैक्टिकली का अनुभव कई मायनों में अनोखा है और बताता है कि ‘स्कूल फ्रॉम होम’ आसान होने के साथ-साथ मनोरंजक भी है. अब शिक्षक और अभिभावक फ़ोन और टैबलेट को फेंकने के लिए लड़ाई नहीं लड़ रहे हैं बल्कि पढ़ाई की सभी गतिविधियों के लिए तकनीक के इस्तेमाल के समर्थक बन गए हैं. प्रैक्टिकली में हमने शिक्षकों को इस बात के लिए तैयार किया है कि वो इस मुश्किल समय में पढ़ाना जारी रखें. महामारी की वजह से शिक्षकों की भूमिका बदल गई है; शिक्षक अब मदद करने वाले, सलाहकार, गाइड, मनोरंजन करने वाले, इनोवेटर, काउंसलर और दूसरी कई चीज़ों की भूमिका में आ रहे हैं. प्रैक्टिकली के साथ ये नये ज़माने के टीचर तकनीक को आसानी से अपना रहे हैं और प्रायोगिक तरीक़ों का इस्तेमाल करके पढ़ाई के नये तरीक़ों के साथ प्रयोग कर रहे हैं.

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