मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम सोलिह ने अपनी आदत के मुताबिक, बुनियादी ढांचे के विकास, सामुदायिक सशक्तिकरण, क्षमता निर्माण, स्वास्थ्य क्षेत्र के आधुनिकीकरण, खेल और पर्यटन जैसे विविध क्षेत्रों में विकास परियोजनाओं को लगातार समर्थन देने के लिए भारत को एक बार फिर से धन्यवाद दिया. इसी क्रम में उन्होंने यह भी कहा कि ‘इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद बहुत थोड़ा काम रह जाएगा करने के लिए.‘
सोलिह ने दक्षिणी अड्डू शहर में भारत के विदेश राज्य मंत्री वी मुरलीधरन का स्वागत किया, जिसके बाद उन्होंने गन हवाई अड्डे के विस्तार और उसके लिए समुद्री भूमि के अधिग्रहण के काम का उद्घाटन किया. द्वितीय विश्व के दौरान गन हवाई अड्डा मूल रूप से यूके (यूनाइटेड किंगडम) के रॉयल एयर फोर्स का युद्ध बेस था. विदेश मंत्रालय के हाई इंपैक्ट कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोजेक्ट स्कीम के तहत भारत ने इन दोनों परियोजनाओं का वित्तपोषण किया है. विशेष रूप से गन हवाई अड्डे की विस्तार परियोजना से उसकी क्षमता बढ़कर प्रति वर्ष 15 लाख पर्यटक हो जाएगी जिससे देश के ‘आर्थिक परिदृश्य को नया रूप देने में मदद मिलेगी और दक्षिणी क्षेत्र एक मज़बूत आर्थिक केंद्र बनकर उभरेगा.‘
विदेश राज्य मंत्री मुरलीधरन की यात्रा के दौरान मालदीव और भारत के बीच जो समझौते हुए हैं उनसे दोनों देशों के बीच आपसी संबंध और मज़बूत होने और आपसी सहयोग को बढ़ावा मिलेगा.
मेहमान के साथ मुलाकात में राष्ट्रपति सोलिह उड़ीसा ट्रेन हादसे पर अपनी संवेदना व्यक्त की. बड़े मुद्दों को लेकर उनका कहना था कि विदेश राज्य मंत्री मुरलीधरन की यात्रा के दौरान मालदीव और भारत के बीच जो समझौते हुए हैं उनसे दोनों देशों के बीच आपसी संबंध और मज़बूत होने और आपसी सहयोग को बढ़ावा मिलेगा. इसी तरह राजधानी माले में मुरलीधरन और विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद के बीच हुई मुलाकात बैठक में दोनों पक्षों ने 10 और नई परियोजनाओं पर हस्ताक्षर किए जिन्हें भारत द्वारा 10 करोड़ अमेरिकी डॉलर की अतिरिक्त वित्तीय सहायता दी जाएगी.
गन उद्घाटन समारोह में बोलते हुए मुरलीधरन के कहा कि भारत की अपनी विकास यात्रा शेष दुनिया, ख़ासकर पड़ोसी देशों से बिल्कुल अलग है. उन्होंने कहा, “मालदीव हिंद महासागर में भारत का एक प्रमुख भागीदार है” और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे “भारत–मालदीव साझेदारी न केवल दोनों देशों के नागरिकों के हित में काम कर रही है बल्कि वास्तव में यह पूरे क्षेत्र के लिए शांति, स्थिरता और समृद्धि का स्रोत है.” उनका कहना था कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति सोलिह के नेतृत्व में दोनों देशों ने द्विपक्षीय संबंधों ने नई ऊंचाइयां हासिल की हैं, और साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट‘ नीति ने मालदीव की ‘इंडिया फर्स्ट पॉलिसी‘ के अनुरूप काम किया है ताकि दोनों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूत किया जा सके.
एक तरह से, सोलिह की दक्षिणी क्षेत्र की यात्रा सितंबर में दोबारा होने वाले चुनावों को देखते हुए एक लंबे चुनावी प्रचार अभियान का एक हिस्सा भर है. अड्डू में आधिकारिक और राजनीतिक कार्यक्रमों में बोलते हुए उन्होंने कहा कि अगले पांच सालों में देश की जीडीपी 177 अरब MVR हो जाएगी. पिछले साल उन्होंने सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों के विभिन्न वर्गों के लिए वेतन में वृद्धि का आदेश दिया था, और इस साल उन्होंने इस महीने से विकलांगता भत्ता बढ़ाने और चुनावी घोषणा पत्र में वरिष्ठ नागरिकों के लिए सहायता राशि के प्रावधान को शामिल करने का वादा किया था. जहां इस वित्तीय वर्ष को ख़त्म होने में छह महीने बचे हैं, वहीं आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक लोकप्रिय आसंधा स्वास्थ्य बीमा योजना के मद में महज़ 13 करोड़ MVR बचे हैं जबकि इसका बजट 90 करोड़ MVR है, जो साफतौर पर यह बताता है कि इस सरकारी बीमा योजना की लोकप्रियता बढ़ती जा रही है.
जटिल राजनीति
वरिष्ठ नागरिकों के लिए सहायता योजना और आसंधा स्वास्थ्य बीमा योजना, दोनों ही, पहले से चली आ रही परियोजनाएं हैं, जिनकी शुरुआत MDP (मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी) प्रमुख मोहम्मद नशीद द्वारा की गई थी जब वह 2008–12 के बीच देश के पहले बहुदलीय लोकतांत्रिक राष्ट्रपति चुने गए थे. इस साल सितंबर में होने वाले चुनावों से पहले MDP प्राइमरी में इब्राहिम सोलिह मोहम्मद नशीद को हराकर राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बन गए और इसके बाद से ही बचपन के इन दोस्तों और राजनीतिक सहयोगियों के बीच दूरियां बढ़ने लगीं.
इसका मतलब है कि इस द्वीपीय देश की राजनीति और जटिल हो गई है. जहां एक तरफ़, नशीद सत्तारूढ़ दल के अध्यक्ष चुने गए हैं, भले ही MDP के संसदीय समूह ने 87 सदस्यों वाली संसद के अध्यक्ष पद से नशीद को हटाने का फैसला किया हो. ऐसा तब हुआ जब पार्टी ने संसद की उपाध्यक्ष इवा अब्दुल्ला (जो नशीद की चचेरी बहन हैं) के खिलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया और उसके बाद उन्होंने और 11 अन्य MDP सांसदों ने (जिनमें से एक को पहले बर्खास्त किया गया था) पार्टी को छोड़ दिया और सोलिह और अन्य नेताओं के खिलाफ़ राष्ट्रपति पद का नया उम्मीदवार खड़ा करने के इरादे से एक नई पार्टी, ‘द डेमोक्रेट्स‘ का गठन किया.
नई पार्टी के पंजीकरण को अभी चुनाव आयोग द्वारा औपचारिक मान्यता नहीं दी गई है. हालांकि, राज्य द्वारा वित्तीय सहयोग पाने के लिए एक राजनीतिक पार्टी के न्यूनतम 10,000 सदस्य होने चाहिए.
नशीद को पद से हटाने के फ़ैसले पर MDP के संसदीय समूह के नेता मोहम्मद असलम का कहना था, ‘इससे ज्यादा हम बर्दाश्त नहीं कर सकते… नशीद ने हमारा भरोसा खो दिया है… वह अपने निजी एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं.‘ नशीद और ईवा को हटाने के लिए पेश किए गए अलग–अलग अविश्वास प्रस्तावों पर क्रमशः 56 और 50 MDP सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं, जबकि उन्हें पद से हटाने के लिए महज़ 44 लोगों का साधारण बहुमत चाहिए. उसके बाद से सरकार अध्यक्ष नशीद के उस फ़ैसले का विरोध कर रही है जिसके अनुसार
संसद की जिस सामान्य प्रयोजन समिति को आगे की कार्रवाई के लिए अधिकृत किया गया है, जब तक 12 MDP सदस्यों के निष्कासन पर विचार करने के लिए नए सदस्यों के साथ समिति का पुनर्गठन नहीं किया जाता तब तक के लिए ईवा अब्दुल्ला और अन्य सदस्यों के खिलाफ़ अविश्वास मत मान्य नहीं है.
वहीं दूसरी ओर, अपने गठन की घोषणा के कुछ ही दिनों के भीतर नई पार्टी ने 3,560 व्यक्तियों की सदस्यता के फॉर्म जमा किए हैं जबकि न्यूनतम 3000 व्यक्तियों की सदस्यता का नियम है. नई पार्टी के पंजीकरण को अभी चुनाव आयोग द्वारा औपचारिक मान्यता नहीं दी गई है. हालांकि, राज्य द्वारा वित्तीय सहयोग पाने के लिए एक राजनीतिक पार्टी के न्यूनतम 10,000 सदस्य होने चाहिए. डेमोक्रेट्स द्वारा दाखिल किए गए कुछ सदस्यता फॉर्मों को ऑनलाइन लीक कर दिया गया है. जिनकी जांच के बाद चुनाव आयोग ने पाया कि यह काम पार्टी का नहीं था.
एक अलग घटनाक्रम में, चुनाव आयोग ने अपने एक फैसले पर सिविल कोर्ट द्वारा रोक लगाने के बाद उसके खिलाफ़ अपील करने का निर्णय लिया है. गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने पूर्व राष्ट्रपति मौमून अब्दुल गयूम द्वारा गठित और उनके बेटे फारिस गयूम की अध्यक्षता वाली मौमून रिफॉर्म मूवमेंट (MRM) पार्टी के पंजीकरण को रद्द कर दिया था क्योंकि कथित रूप से पार्टी की सदस्य संख्या 3,000 से कम हो गई थी.
चागोस मुद्दा और रैली
इसी बीच ‘नशीद गुट‘ अटॉर्नी जनरल इब्राहिम रिफाथ और विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद के खिलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए विपक्षी दलों के साथ समझौता किया. संख्या को देखते हुए, उम्मीद है कि दोनों कैबिनेट मंत्री प्रस्ताव के खिलाफ़ खुद को बचाए रखने में कामयाब रहेंगे. संसद को चारों प्रस्तावों (रिफाथ, शाहिद, ईवा, और नशीद) को क्रमिक रूप से उनके दाखिले की तारीख़ के मुताबिक पेश करना है, इनमें से नशीद के खिलाफ़ प्रस्ताव को दाखिल किया जाना बाकी है. भले ही नशीद को अध्यक्ष के पद से हटाया जाता है या नहीं, लेकिन उनका MDP के अध्यक्ष पद पर बने रहना अस्थिर हो सकता है, ख़ासकर तब जब पार्टी की राष्ट्रीय परिषद पर सोलिह गुट का दबदबा है.
कहानी में एक और मोड़ तब आया, जब चागोस द्वीप समूह को लेकर मॉरीशस और मालदीव के बीच अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सीमा विवाद पर ITLOS के फैसले पर सरकार की स्थिति के विरोध में निकाली गई एक रैली में डेमोक्रेट ने जेल में बंद पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन और कुछ अन्य विपक्षी दलों और नेताओं के PPM-PNC (प्रोग्रेसिव पार्टी ऑफ मालदीव और पीपुल्स नेशनल कांग्रेस) गठबंधन से हाथ मिला लिया. रैली को संबोधित करने वाले नेताओं में MNP (मालदीव नेशनल पार्टी) के प्रमुख कर्नल मोहम्मद नजीम (सेवानिवृत्त) और एक समय पर यामीन के मंत्रिस्तरीय सहयोगी रहे उमर नसीर और राष्ट्रपति पद के दोनों उम्मीदवार, डॉ. मोहम्मद मुनव्वर और ऐशथ अज़ीमा शुकुर शामिल थे. कर्नल नजीम राष्ट्रपति पद के पहले उम्मीदवार हैं, जिन्होंने अपना चुनावी घोषणापत्र भी जारी कर दिया है, जिसमें उन्होंने सरकार बनने के 30 दिनों के भीतर ‘मालदीव क्षेत्र‘ को वापिस लेने का वादा किया है.
जब चागोस द्वीप समूह को लेकर मॉरीशस और मालदीव के बीच अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सीमा विवाद पर ITLOS के फैसले पर सरकार की स्थिति के विरोध में निकाली गई एक रैली में डेमोक्रेट ने जेल में बंद पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन और कुछ अन्य विपक्षी दलों और नेताओं के PPM-PNC गठबंधन से हाथ मिला लिया.
विडंबना इस बात की है कि रैली का आयोजन करने वाले PPM-PNC गठबंधन ने यामीन को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया था. डेमोक्रेट भी अपने उम्मीदवार को खड़ा करने के फैसले पर अडिग हैं. हालांकि, जम्हूरी पार्टी (JP) के संस्थापक क़ासिम इब्राहिम भी उम्मीदवार के तौर पर मैदान में शामिल हैं, और उनकी पार्टी विपक्षी दलों की संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में शामिल थी, लेकिन वह यह कहकर रैली से बाहर चले गए कि इससे इस मामले में कोई मदद नहीं मिलेगी. ऐसा कहा जा रहा है कि क़ासिम अपनी उम्मीदवारी के लिए समर्थन पाने के बाद नशीद खेमे के यू–टर्न से नाराज थे, लेकिन उनकी पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर ज़रूरत पड़ी तो वे नशीद के साथ गठबंधन करेंगे. इससे पहले एक टीवी साक्षात्कार में, क़ासिम ने कहा था कि यह सरकार भी अपने पूर्ववर्तियों की तरह उनके विला ग्रुप के व्यवसायों को निशाना बना रही है. जब से संवैधानिक रूप से नियुक्त एंटी–करप्शन कमीशन (ACC) ने सरकार द्वारा विला ग्रुप को एक लैगून बेचने पर रोक लगाई है, तब से उसे नुकसान उठाना पड़ रहा है.
संयोग से, पैनल के मुखिया और MDP के संसदीय समूह के नेता मोहम्मद असलम द्वारा राष्ट्रपति सोलिह द्वारा नवंबर 2022 में लिखे गए पत्र को पेश करने की मांग उठने के बाद सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा मुद्दे पर मॉरीशस के प्रधानमंत्री को लिखे गए इस पत्र को संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति (241 समिति) के समक्ष प्रस्तुत करने की पेशकश की है. कानून के मुताबिक इसके लिए पहले सदन से पूर्व मंजूरी लेनी होगी. यह कानून तब बनाया गया था और नशीद राष्ट्रपति थे और सदन पर विपक्षी पार्टियों का नियंत्रण था.
यू-टर्न की सोची-समझी रणनीति
‘चागोस रैली‘ में ‘इंडिया आउट‘ की तख्तियां लहराई गईं और PPM-PNC गठबंधन और डेमोक्रेट, दोनों, रैली को बर्बाद करने की कोशिश के लिए सरकार को दोषी ठहराया. सरकार ने तुरंत इन आरोपों का खंडन किया. इसलिए, यह जानना दिलचस्प होगा कि सबसे पहले PPM-PNC गठबंधन के नेता यामीन ने इस मसले पर अभियान शुरू किया और इसे राष्ट्रपति चुनाव के एक एजेंडे के रूप में शामिल करने की भी मांग की थी. लेकिन अब वह एक सोची–समझी रणनीति के तहत इस मुद्दे से पीछे हट रहे हैं..
इसका कारण यह है कि चागोस रैली में डेमोक्रेट भी मौजूद थे और उनके राजनीतिक गुरु नशीद द्वारा यामीन खेमे के ‘इंडिया आउट‘ अभियान की कड़ी आलोचना की जा रही थी. उनका दबाव प्रमुख कारण था कि जिसके बाद सोलिह सरकार को इस अभियान पर प्रतिबंध लगाना पड़ा. संभवतः चुनाव आयोग द्वारा पंजीकरण रद्द करने की आशंका के चलते यामीन ने इस अभियान को तुरंत रोक दिया.
संयोग से, PPM-PNC ने अभी तक किसी वैकल्पिक उम्मीदवार की घोषणा नहीं है, जबकि यामीन 11 साल से मनी–लॉन्ड्रिंग के मामले में जेल में बंद हैं. 3 अगस्त नामांकन की आखिरी तारीख़ है, उससे पहले तक उनके जेल से बाहर की संभावना नहीं है. अगर ट्रायल कोर्ट नामांकन बंद होने से पहले लंबित पड़े तीसरे मामले में उनके खिलाफ़ कोई फैसला सुनाती है तो वह ख़ासे मुसीबत में पड़ सकते हैं. तब तक उनके पास इतना समय नहीं होगा कि वह उच्च न्यायालय से अपने पक्ष में किसी फैसले का इंतज़ार कर सकें. सुप्रीम कोर्ट ने पहले तीन मामलों में यामीन को बरी कर दिया है.
रिपोर्टों के अनुसार, यामीन के उम्मीदवार न बन पाने की स्थिति में PPM की सीनेट किसी दूसरी योजना पर काम कर रही है, लेकिन शीर्ष नेतृत्व झुकने को तैयार नहीं है. अगले महीने नामांकन प्रक्रिया के शुरू होने की तारीख़ (23 जुलाई) से पहले तक यह तस्वीर साफ़ हो जाएगी जब यामीन के अदालती मामलों की प्रगति भी सामने आ जाएगी.
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