Author : Ashok G. V.

Published on Aug 10, 2021 Updated 0 Hours ago

पहले परंपरागत तौर पर अंतरिक्ष यात्रियों की विशिष्टता उनके मूल्यों, शारीरिक और मानसिक मज़बूती को देखकर आंकी जाती थी लेकिन अरबपति उद्यमियों के लिए अंतरिक्ष का विषय महज़ उनके अंतरिक्ष में निवेश करने को लेकर आर्थिक जोख़िम उठाने की ताकत से जुड़ा हुआ है 

अंतरिक्ष यात्री होने के फ़ायदे!

बाह्य अंतरिक्ष संधि (ओएसटी), अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष कानून (आईएसएल) की बुनियाद दरअसल राष्ट्रों के बीच एक समझौता था, जो एक ऐसे युग में विकसित किया गया था जहां अंतरिक्ष संप्रभु महत्वाकांक्षाओं की अभिव्यक्ति और अंतरराष्ट्रीय राजनीति का एक ज़रिया थी. ओएसटी की जो मंशा और व्यवस्था थी वह उपनिवेशवाद के दर्द को ख़त्म करने के लिए था जो अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए ख़तरा था. अंतरिक्ष में खोज करने वालों के लिए जो शब्द गढ़ा गया वह “अंतरिक्ष यात्री” था, जो ना सिर्फ़ एक व्यक्ति को दर्शाता था बल्कि जो बाहरी अंतरिक्ष को समझने और जानने की शक्ति भी रखता था. लेकिन जिनकी नैतिकता और मूल्यों ने उल्टा राष्ट्रीय हितों के एजेंडे को भंग किया. वास्तव में, जिस किसी को भी किसी अंतरिक्ष यात्री के साथ बातचीत करने का अवसर मिला है, वह इस बात की पुष्टि कर सकता है कि वह वास्तव में बड़ी तस्वीर देखते हैं और उनके पास भविष्य के लिए एक परिप्रेक्ष्य और  दृष्टि है. इसलिए एक अंतरिक्ष यात्री बनने के लिए सामान्य सोच किसी बोझ और बाधा के तौर पर देखी जाती है. ऐसे में कोई भी यह कह सकता है कि किसी काम के लिए उच्चतम चरित्र अगर उसकी पहचान है तो इसकी कमी शायद अंतरिक्ष के लिए जगह बनाने में सबसे बड़ी बाधा हो सकती है.

ओएसटी में इस बात को सुनिश्चित किया गया कि अंतरिक्ष यात्रियों को धरती के संकीर्ण विवादों से दूर रखा जा सके, जिसके तरीक़ों और ढंग को रेस्क्यू कन्वेंशन में विस्तार से बताया गया है. यही वजह है कि कोई अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री अगर वेनेजुएला के मध्य में उतरता है तो उम्मीद की जाती है कि अंतरिक्ष में मानव जाति की जीत के साथ उसकी धरती पर वापसी को पूरा सम्मान और गरिमा मिल सके.


यही वजह है कि आईएसएल और ख़ास तौर पर ओएसटी समेत रेस्क्यू कन्वेंशन ने मानवता को रौशन करने वाले इन अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा  को सुनिश्चित किया, जिससे कि वो जब अंतरिक्ष में कुछ दिन व्यतीत करने के बाद धरती पर लौटैं तो उन्हें पूरे मानव जाति की गरिमा, सम्मान और कृतज्ञता से अलंकृत किया जा सके. ओएसटी में इस बात को सुनिश्चित किया गया कि अंतरिक्ष यात्रियों को धरती के संकीर्ण विवादों से दूर रखा जा सके, जिसके तरीक़ों और ढंग को रेस्क्यू कन्वेंशन में विस्तार से बताया गया है. यही वजह है कि कोई अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री अगर वेनेजुएला के मध्य में उतरता है तो उम्मीद की जाती है कि अंतरिक्ष में मानव जाति की जीत के साथ उसकी धरती पर वापसी को पूरा सम्मान और गरिमा मिल सके. इसलिए आईएसएल अपने सदस्यों को कुछ सुरक्षात्मक फायदे और प्रतिरक्षा प्रदान करती है ख़ास कर तब जबकि कोई अंतरिक्ष यात्री किसी ऐसे देश की जमीन पर पांव रखता है जो उनके देश का दुश्मन माना जाता हो.

अरबपति अंतरिक्ष यात्री

हालांकि, इस संस्था से जुड़ी अंतरिक्ष यात्रियों की गरिमा, सम्मान और सत्कार को अब एक विशेष वर्ग से चुनौती मिलने लगी है जिसमें अरबपति  उद्यमी शामिल हैं. अंतरिक्ष यात्रा को लेकर दूरदृष्टि रखने वाले आईएसएल की बुनियाद ऱखने वालों को भी शायद इस बात का इल्म़ नहीं रहा होगा कि उभरती मुक्त अर्थव्यवस्था और इसे संचालित करने वालों का प्रभाव इस कदर होगा कि इससे अंतरिक्ष गतिविधियों पर असर पड़ेगा. लेकिन आज सच्चाई यह है कि अरबपति उद्यमी अंतरिक्ष की यात्रा कर रहे हैं. इस कड़ी में रिचर्ड ब्रैनसन की अंतरिक्ष के बाहरी हिस्से की ऐतिहासिक यात्रा एक पहल के रूप में देखी जा सकती है. पहले परंपरागत तौर पर अंतरिक्ष यात्रियों की विशिष्टता उनके मूल्यों, शारीरिक और मानसिक मज़बूती को देखकर आंकी जाती थी लेकिन अरबपति उद्यमियों के लिए अंतरिक्ष का विषय महज़ उनके अंतरिक्ष में निवेश करने को लेकर आर्थिक जोख़िम उठाने की ताकत से जुड़ा हुआ है. ऐसे में सवाल यही उठता है कि क्या अरबपति अंतरिक्ष यात्रियों को पहले से बने अंतरिक्ष यात्रियों की संस्था में शामिल किया जाना चाहिए ? अगर इस सवाल का जवाब ‘हां’ में है तो नए युग के अंतरिक्ष यात्री हर उस फ़ायदे और प्रतिरक्षा मानकों के हक़दार होंगे जो ओएसटी और रेस्क्यू समझौते के तहत शामिल हैं. और अगर इसका जवाब ‘ना’ में है तो ओएसटी के तहत अंतरिक्ष यात्रियों को मिलने वाली तमाम सुविधाओं से अरबपति अंतरिक्ष यात्री वंचित रह जाएंगे और तो और अगर कोई अंतरिक्ष यात्री दुश्मन देश की सीमा में क़दम रखता है तो यह उसका दुर्भाग्य होगा.

वो देश जिनके पास अंतरिक्ष में निवेश करने की शक्ति है और वो असामान्य रूप से अंतरिक्ष में अपने जरिए यात्रियों को भेज कर वहां भीड़ जुटाएंगे.  मुक्त अर्थव्यवस्था ने अब उन मुल्कों को भी इस बात की आजादी दे दी है कि वो बिना किसी अंतरिक्ष इतिहास और तकनीक के भी अंतरिक्ष में अपने लोगों को भेज सकते हैं.


हालांकि, आईएसएल के पास इसका कोई पुष्ट जवाब नहीं है. आज तक अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अंतरिक्ष यात्री जैसे शब्द की किसी परिभाषा के ऊपर सहमति नहीं बन पाई है. हम जानते हैं कि वास्तविकता में ज़्यादातर परंपरागत अंतरिक्ष यात्री उनके देश का प्रतिनिधि माने जाते रहे हैं. ऐसे में उस अंतरिक्ष यात्री को उसके देश से अलग कर देखना मुमकिन नहीं है. इससे एक संभावना जो पैदा होती है वह यह कि आईएसएल अंतरिक्ष यात्री के देश और उस मुल्क के बीच के रिश्ते के आधार पर उन्हें अंतरिक्ष यात्री की मान्यता दे. दूसरी ओर इससे यह जोख़िम बढ़ जाता है कि अंतरिक्ष ज़्यादा देशों के लिए समावेशी नहीं हो सकता. ख़ास कर वो देश जिनके पास अंतरिक्ष में निवेश करने की शक्ति है और वो असामान्य रूप से अंतरिक्ष में अपने जरिए यात्रियों को भेज कर वहां भीड़ जुटाएंगे.  मुक्त अर्थव्यवस्था ने अब उन मुल्कों को भी इस बात की आजादी दे दी है कि वो बिना किसी अंतरिक्ष इतिहास और तकनीक के भी अंतरिक्ष में अपने लोगों को भेज सकते हैं. लेकिन अंतरिक्ष यात्रियों जैसे संस्थान को इस आधार पर परिभाषित करना कि इसके लिए संप्रभु राष्ट्र की मान्यता ज़रूरी होनी चाहिए, इससे अंतरिक्ष तक पहुंच बनाना सभी के लिए आसान नहीं होगा. इसके अलावा संप्रभु महत्वाकांक्षाओं के पनपने का भी जोख़िम बना रहेगा जिससे धरती पर इसका प्रतिकूल असर पड़ सकता है. क्योंकि ऐसे में अंतरिक्ष तक पहुंच सिर्फ़ संप्रभु राष्ट्रों के अंतरिक्ष यात्रियों की ही होगी. 

राजनीति का थियेटर बनाम ‘अंतरिक्ष’ 

यह बहस 21 वीं सदी के लिए और भी ज़्यादा अहम हो जाती है क्योंकि बहुत ही कम वक़्त में अंतरिक्ष की यात्रा को अंतरिक्ष से जुड़ी अर्थव्यवस्था और कारोबार के तौर पर प्रस्तावना मान लिया जाएगा. जैसे खनन और क्या लंबी अवधि में,हम उस दिन को देखने के लिए जीवित रहेंगे, या फिर दूसरी दुनिया को देखने और अन्य सभ्यताओं से मिलने की हमारी कोशिश की यह एक शुरुआत कही जाएगी? जैसा कि हम अंतरिक्ष के क्षेत्र को आर्थिक रूप से बढ़ावा देने और उसे उपनिवेश बनाने की कोशिशों में जुटे हैं और संभवत: इसके ज़रिये कूटनीतिक रिश्ते गांठने और नई दुनिया और सभ्यता से मिलने की कोशिश कर रहे हैं तो ऐसे में क्या हम ऐसे युग परिवर्तनकारी खोज में सामान्य इंसानी काबिलियत को स्वीकार करेंगे? या फिर हम इस नए और अनजाने सरहद के प्रतिनिधित्व के लिए अपने सबसे बेहतर दिमाग का इस्तेमाल करेंगे? अगर इतिहास की बात करें तो यूरोप के संप्रभु संस्थानों का प्रतिनिधित्व करने का दावा करने वाले एक निजी खोजकर्ता ने ना केवल अमेरिका में भयानक अत्याचार किया बल्कि इस उपदंश को उसने दुनिया के बाकी हिस्सों में भी फैलाया. इस लिहाज़ से, अंतरिक्ष में भविष्य के खोजकर्ता कौन हो सकते हैं, अंतरिक्ष की संस्था के ज़रिये, इसका पता लगाने के लिए इतिहास से बेहतर सबक को आगे बढ़ाने की ज़रूरत है और इसके बुरे सबक बचने के लिए अहम भी हैं.

अंतर्राष्ट्रीय कानून समुदाय अब इसे लेकर काफ़ी सशक्त हो चुका है और वह ओएसटी जैसी संस्था को कमज़ोर नहीं होने देगा और अंतरिक्ष से जुड़ी व्यापारिक गतिविधियों पर किसी तरह का कानून नहीं थोपेगा. 


हमारी बहस का जो भी आख़िरी नतीजा होगा लेकिन वास्तविकता यही है कि अंतरिक्ष किसी भी हालत में मुल्कों की राजनीति का थिएटर नहीं बन सकता है, बल्कि एक प्रजातांत्रिक तरीक़े से अंतरिक्ष की बेहतरी का ख़्याल रखते हुए कोई भी इसे लेकर दावा कर सके इसका इंतजार है. अंतर्राष्ट्रीय कानून समुदाय अब इसे लेकर काफ़ी सशक्त हो चुका है और वह ओएसटी जैसी संस्था को कमज़ोर नहीं होने देगा और अंतरिक्ष से जुड़ी व्यापारिक गतिविधियों पर किसी तरह का कानून नहीं थोपेगा. इसके अलावा जेफ़ बेजोस और रिचर्ड ब्रैनसन जैसे अरबपति उद्यमियों को शामिल करने वाली अंतरिक्ष की नई गतिविधियां जिसमें वो अंतरिक्ष की बाहरी कक्षा तक सैर कर वापस लौटते हैं, अंतरिक्ष से जुड़े कानून उनके ऐसे साहसिक कदम में मदद की भूमिका में रहेंगी, क्योंकि अंतरिक्ष की यात्रा का ऐसा जोख़िम उठाकर वो इसे दूसरों के लिए आसान बनाएंगे और इंसानी हित के लिए इसे संतुलित करने का प्रयास भी करेंगे.

The views expressed above belong to the author(s). ORF research and analyses now available on Telegram! Click here to access our curated content — blogs, longforms and interviews.