Published on Apr 26, 2022 Updated 1 Days ago

शुरुआती ठहराव के बावजूद हाल के दिनों में उच्च-स्तर की बातचीत से संकेत मिलते हैं कि भारत और मेक्सिको के बीच द्विपक्षीय संबंधों में नई तेज़ी आई है.

भारत-मेक्सिको संबंधों में व्यापक विस्तार के आसार!

जब बात पिछले कुछ दशकों के दौरान भारत के द्वारा मज़बूत द्विपक्षीय साझेदारी बनाने की आती है तो स्वाभाविक साझेदार के तौर पर ज़ेहन में भारत और मेक्सिको का ख़्याल नहीं आता है. लेकिन लगता है कि इसमें बदलाव होने वाला है. हाल के वर्षों में भारत और मेक्सिको के बीच उच्च-स्तरीय यात्रा में बढ़ोतरी के बीच ये स्पष्ट हो गया है कि दोनों देश कई मुद्दों पर नज़दीकी रूप से काम करने की कोशिश कर रहे हैं. इस संबंध में मेक्सिको के विदेश मंत्री मार्सेलो एबरार्द कासउबोन की इस साल 30 मार्च से 1 अप्रैल के बीच की यात्रा महत्वपूर्ण है. उनका भारत दौरा 10 दिनों के लिए मध्य-पूर्व और भारत की यात्रा का हिस्सा था. मेक्सिको के विदेश मंत्री की भारत यात्रा को भारत के विदेश मंत्री डॉक्टर एस. जयशंकर के द्वारा सितंबर 2021 में मेक्सिको की यात्रा के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है. भारतीय विदेश मंत्री मेक्सिको की स्वतंत्रता की 200वीं वर्षगांठ के अवसर पर वहां गए थे. 

भारत और मेक्सिको के बीच आर्थिक संबंध में विस्तार हो रहा है. भारत और मेक्सिको ने कोविड-19 की वजह से आई आर्थिक मंदी के बावजूद हाल में 10 अरब अमेरिकी डॉलर से ज़्यादा का  द्विपक्षीय व्यापार किया है. इसके अलावा भारत, मेक्सिको का नौवां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और दोनों देश व्यापार को और बढ़ावा देना चाहते हैं.

भारत और मेक्सिको के बीच आर्थिक संबंध में विस्तार हो रहा है. भारत और मेक्सिको ने कोविड-19 की वजह से आई आर्थिक मंदी के बावजूद हाल में 10 अरब अमेरिकी डॉलर से ज़्यादा का  द्विपक्षीय व्यापार किया है. इसके अलावा भारत, मेक्सिको का नौवां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और दोनों देश व्यापार को और बढ़ावा देना चाहते हैं. पिछले कुछ वर्षों से भारत और मेक्सिको के बीच व्यापार में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. सिर्फ़ 2020 में कोविड-19 की वजह से आई रुकावट के कारण इसमें गिरावट आई थी- जैसा कि नीचे के ग्राफ में दिखाया गया है.

Source:https://tradingeconomics.com/india/exports/mexico

द्विपक्षीय संबंधों में आई इस नई तेज़ी को बनाए रखने का एक तरीक़ा दूसरे क्षेत्रों में सहयोग के रास्तों को तलाशना- दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की हाल की इस यात्रा का एक बेहद महत्वपूर्ण उद्देश्य था. ख़ासतौर पर फार्मा, हेल्थकेयर, और अंतरिक्ष के सेक्टर में सहयोग इन यात्राओं के दौरान महत्वपूर्ण मुद्दे रहे. इससे भी महत्वपूर्ण बात ये है कि विश्व में काफ़ी बड़ी और तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के तौर पर भारत और मेक्सिको को तीन दिनों की यात्रा के दौरान महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचारों के आदान-प्रदान का काफ़ी अवसर मिला होगा. इस दौरान शायद वर्तमान बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था जैसे कि वैश्विक व्यवस्था में बढ़ता ध्रुवीकरण और संयुक्त राष्ट्र की भूमिका जैसे परेशान करने वाले संकट को लेकर भी एक राय बनाने पर चर्चा हुई होगी. मौजूदा यूक्रेन संकट को लेकर भारत और मेक्सिको का जवाब थोड़ा अलग है लेकिन तब भी दोनों देशों ने सामंजस्य बनाए रखा है. वैसे, तो भारत संयुक्त राष्ट्र के एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव से अनुपस्थित रहा जिसे  मेक्सिको ने फ्रांस के साथ मिलकर रखा था लेकिन दोनों देश मानते हैं कि यूक्रेन को लेकर रूस को घेरना मौजूदा यूक्रेन संकट का सबसे बेहतर समाधान नहीं हो सकता है. एक विशिष्ट अवसर के तौर पर भारत और मेक्सिको- दोनों देश इस साल नवंबर में इंडोनेशिया में होने वाले जी20 सम्मेलन के दौरान वैश्विक व्यवस्था को मज़बूत करने के लिए एक रणनीति बनाने में नज़दीकी रूप से काम करने की भी कोशिश करेंगे.

बहुध्रुवीय विश्व में दृढ़ विश्वास

भारत और मेक्सिको ने बार-बार एक बहुध्रुवीय विश्व में अपना दृढ़ विश्वास जताया है और इसके लिए वो काम भी करना चाहते हैं, हालांकि इसके लिए इस्तेमाल किया जाने वाला तरीक़ा अलग है. ऐसे में मेक्सिको के विदेश मंत्री कासउबोन की भारत यात्रा वास्तविकता की तरफ़ बढ़ते एक  बहुध्रुवीय विश्व के भीतर ज़्यादा सहयोग की तरफ़ एक क़दम है. भारत और मेक्सिको जनवरी 2021 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में दो साल के लिए अस्थायी सदस्य के तौर पर शामिल हुए और दोनों देश विकासशील देशों को परेशान करने वाले कई मुद्दों पर काम करने के लिए सहमत हुए हैं. चूंकि दोनों देश अपनी “रणनीतिक साझेदारी” को और मज़बूती देना चाहते हैं, ऐसे में ये स्वाभाविक है कि भारत और मेक्सिको ऐसे क्षेत्रों की पड़ताल शुरू करेंगे जो ज़्यादा सहयोग का रास्ता मुहैया कराते हैं. 

भारत और मेक्सिको जनवरी 2021 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में दो साल के लिए अस्थायी सदस्य के तौर पर शामिल हुए और दोनों देश विकासशील देशों को परेशान करने वाले कई मुद्दों पर काम करने के लिए सहमत हुए हैं.

अंतरिक्ष सेक्टर में सहयोग दोनों देशों के बीच ध्यान देने के एक महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में उभरा है, जो इस यात्रा के दौरान स्पष्ट हुआ था. अंतरिक्ष के अनंत रहस्य और संभावनाओं ने लंबे समय से भारत और मेक्सिको- दोनों देशों को आकर्षित किया है और 2014 से दोनों देशों ने अंतरिक्ष खोज के क्षेत्र में सहयोग की कोशिश की है. 2014 में इसरो और मेक्सिको की अंतरिक्ष एजेंसी ने ‘शांतिपूर्ण उद्देश्य के लिए अंतरिक्ष सहयोग’ के एक समझौते पर हस्ताक्षर किया था. 2019 में मेक्सिको की अंतरिक्ष एजेंसी के तीन अधिकारियों ने रिमोट सेंसिंग के ज़रिए जंगल की आग के नियंत्रण पर प्रशिक्षण में भी हिस्सा लिया था. साझा अंतरिक्ष खोज को और ज़्यादा बढ़ाने की उत्सुकता बनी हुई है और इस यात्रा के दौरान भी मेक्सिको के विदेश मंत्री ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रमुख डॉक्टर एस. सोमनाथ से मुलाक़ात की.

अंतरिक्ष में खोजबीन और तकनीक ऐसे क्षेत्र बन गए हैं जिनमें दोनों देशों ने बहुत ज़्यादा दिलचस्पी दिखाई है, लेकिन विश्व की राजनीति की इस वक़्त की ज़रूरत के अनुकूल बेहद व्यापक चर्चा भी हुई है. जिस हफ़्ते मेक्सिको के विदेश मंत्री कासउबोन ने भारत की यात्रा की, उसी हफ़्ते भारत ने रूस और यूके के विदेश मंत्रियों की मेज़बानी भी की. साथ ही चीन के विदेश मंत्री अचानक भारत पहुंचे और अमेरिका के अधिकारी भी. वैसे तो कई देशों के विदेश मंत्रियों का अचानक भारत पहुंचना तेज़ी से बदलती दुनिया में बड़ी शक्तियों के साथ भारत के संबंधों का प्रतीक हो सकता है लेकिन मेक्सिको के विदेश मंत्री का आना इस बात को साबित करता है कि भारत बीच की शक्तियों के साथ अपने संबंधों को कितना महत्व देता है और इससे भी ज़्यादा ये कि विकासशील देशों के बीच सहयोग में मज़बूती उसके लिए कितनी अहमियत रखती है. 

मेक्सिको और भारत ने वर्ष 2007 से एक ‘विशिष्ट साझेदारी’ को साझा किया है और वर्ष 2016 में जब प्रधानमंत्री मोदी ने न्यू मेक्सिको के दौरे में मेक्सिको के पूर्व राष्ट्रपति पेना नीटो से मुलाक़ात की थी तो दोनों देशों ने संबंधों को ‘रणनीतिक साझेदारी’ के दर्जे तक बढ़ाने का फ़ैसला किया था.

ये ज़िक्र करना भी उपयुक्त है कि भारत और लैटिन अमेरिका के देशों के बीच संबंधों के बारे में बहुत ज़्यादा नहीं बताया जाता है लेकिन भारत लैटिन अमेरिका के देशों में अपनी साझेदारी के विस्तार और अपनी मौजूदगी को मज़बूत करने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है. मेक्सिको और भारत ने वर्ष 2007 से एक ‘विशिष्ट साझेदारी’ को साझा किया है और वर्ष 2016 में जब प्रधानमंत्री मोदी ने न्यू मेक्सिको के दौरे में मेक्सिको के पूर्व राष्ट्रपति पेना नीटो से मुलाक़ात की थी तो दोनों देशों ने संबंधों को ‘रणनीतिक साझेदारी’ के दर्जे तक बढ़ाने का फ़ैसला किया था. वर्ष 2016 में ही मेक्सिको ने ऐलान किया कि वो चाहता है कि भारत और मेक्सिको एक दीर्घकालीन गठबंधन का हिस्सेदार बनें और ख़रीदार-विक्रेता की साझेदारी से आगे बढ़ें. 

ऊर्जा सहयोग, अंतरिक्ष में खोजबीन, आईटी, फार्मास्युटिकल, एयरोस्पेस तकनीक, कृषि, नवीकरणीय ऊर्जा के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन एवं प्राकृतिक आपदाओं पर साझा रिसर्च के क्षेत्र में संभावनाओं, जिनका ज़िक्र 2016 में पीएम मोदी की यात्रा के दौरान किया गया था, ने दोनों देशों के बीच फलती-फूलती साझेदारी में स्थायी बढ़ोतरी की है. 

विशिष्ट साझेदारी

इस तरह का विकास भारत और मेक्सिको के बीच इतिहास के उपयुक्त है. ये ध्यान दिया जाना चाहिए कि मेक्सिको लैटिन अमेरिका के क्षेत्र में पहला देश है जिसने स्वतंत्रता के बाद भारत को मान्यता दी थी. दोनों देशों के बीच वर्ष 1950 में कूटनीतिक संबंध स्थापित हुए यानी भारत के द्वारा दुनिया के ज़्यादातर देशों के साथ कूटनीतिक संबंध की स्थापना से पहले. भारत की स्वतंत्रता को लेकर मेक्सिको के इस तरह के उत्साहपूर्ण रवैये के फ़ौरन बाद दोनों देशों के बीच उच्च-स्तरीय यात्रा की शुरुआत हुई, वो भी तब जब दोनों देशों के बीच भौगोलिक दूरी बहुत ज़्यादा है. इन यात्राओं में भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के द्वारा वर्ष 1961 में मेक्सिको की यात्रा शामिल है. पंडित नेहरू की इस यात्रा के बाद मेक्सिको के राष्ट्रपति एडोल्फो लोपेस मेटियोस ने 1962 में भारत का दौरा किया. 

भारत-मेक्सिको की साझेदारी का दर्जा बढ़ने के समय से दोनों देशों ने व्यापक संपर्क बनाने की तरफ़ नज़दीकी तौर पर काम किया है. इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए भारत की पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल ने 2008 में मेक्सिको का दौरा किया. 

लेकिन दोनों देशों के बीच द्वीपक्षीय संबंधों में इस शुरुआती तेज़ी के बाद उस तरह का उत्साह कायम नहीं रह सका और अपेक्षाकृत रूप से शिथिलता बनी रही. लेकिन हाल के वर्षों में, ख़ास तौर पर 2007 में, दोनों देशों के बीच संबंधों में ये निष्क्रियता ख़त्म हुई है जब मेक्सिको के राष्ट्रपति फेलिप कालडेरोन ने भारत का दौरा करने का फ़ैसला लिया. उनकी इस यात्रा के दौरान भारत और मेक्सिको ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा दिया और इसे ‘विशिष्ट साझेदारी’ के दर्जे तक बढ़ाया. भारत-मेक्सिको की साझेदारी का दर्जा बढ़ने के समय से दोनों देशों ने व्यापक संपर्क बनाने की तरफ़ नज़दीकी तौर पर काम किया है. इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए भारत की पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल ने 2008 में मेक्सिको का दौरा किया. 

भारत और मेक्सिको लंबी दूरी की वजह से प्रतिकूल भौगोलिक परिस्थितियों का सामना करते हैं. लेकिन इस दूरी के बावजूद भारत और मेक्सिको इंडो-पैसिफिक क्षेत्र समेत विश्व के कई मुद्दों पर एक जैसी राय साझा करते हैं. संयुक्त राष्ट्र, जी-77, जी-15 और जी-20 जैसे वैश्विक मंचों पर उनकी बढ़ती समानता ने द्विपक्षीय और बहुपक्षीय मुद्दों के लिए नये अवसरों को सामने किया है. जैसे-जैसे दोनों देशों ने भौगोलिक नज़दीकी में कमी की अपनी परंपरागत बाधाओं से पार पाना और तेज़ी से बदलती दुनिया में अपनी स्थिति को मज़बूत करना शुरू किया है, वैसे-वैसे उनके बीच द्विपक्षीय संबंधों में लगातार बढ़ोतरी आने वाली है. 

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Authors

Vivek Mishra

Vivek Mishra

Vivek Mishra is a Fellow with ORF’s Strategic Studies Programme. His research interests include America in the Indian Ocean and Indo-Pacific and Asia-Pacific regions, particularly ...

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Aparaajita Pandey

Aparaajita Pandey

Dr. Aparaajita Pandey is Senior Research Associate at ShowTime Consulting &amp: a Ph.D. from Centre for Latin American Studies Jawaharlal Nehru University.

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