Author : Prasanna Karthik

Published on May 02, 2022 Updated 1 Days ago

इससे बड़ी राजनीतिक विडंबना क्या हो सकती है कि, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा उस पार्टी से हैं जिसने दासता का समर्थन किया था और उनके उत्तराधिकारी डोनाल्ड ट्रंप उस पार्टी से हैं जिसने इसे ख़त्म किया था.

संयुक्त राज्य अमेरिका: एक लोकतंत्र जिसने लंबे समय से अपने साथ ही जंग छेड़ रखी है!

यह लेख रायसीना एडिट 2022 नामक सीरिज़ का हिस्सा है.


 जिस अमेरिका देश को आज हम जानते हैं, उसे यह स्वरूप गृहयुद्ध (सिविल वॉर) के दौरान एक मोड़ पर पहुंचकर मिला. अमेरिका के पहले रिपब्लिकन राष्ट्रपति, अब्राहम लिंकन के नेतृत्व में संघ (यूनियन) ने गृहयुद्ध जीता. लिंकन दासता-विरोधी एजेंडे पर राष्ट्रपति का चुनाव लड़े और अंतत: दासता को ख़त्म किया. दूसरी तरफ़, डेमोक्रेटिक पार्टी ने दासता का समर्थन किया और नागरिक अधिकारों का विरोध किया. इससे बड़ी राजनीतिक विडंबना क्या हो सकती है कि, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा उस पार्टी से हैं जिसने दासता का समर्थन किया था और उनके उत्तराधिकारी डोनाल्ड ट्रंप उस पार्टी से हैं जिसने इसे ख़त्म किया था. अब्राहम लिंकन का राष्ट्रीय राजनीति सफ़र 1858 में अमेरिकी सीनेट में नामांकन के साथ शुरू हुआ. नामांकन के समय अपने संबोधन में उन्होंने यह मशहूर बात कही, ‘जो घर अपने ही ख़िलाफ़ बंटा हुआ हो, वह टिक नहीं सकता.’ अनेक तरीक़ों से, आज का अमेरिका इतना ध्रुवीकृत है कि यह न सिर्फ़ बंटा हुआ है, बल्कि अपने ही ख़िलाफ़ जंग में है.

अब्राहम लिंकन का राष्ट्रीय राजनीति सफ़र 1858 में अमेरिकी सीनेट में नामांकन के साथ शुरू हुआ. नामांकन के समय अपने संबोधन में उन्होंने यह मशहूर बात कही, ‘जो घर अपने ही ख़िलाफ़ बंटा हुआ हो, वह टिक नहीं सकता.’ अनेक तरीक़ों से, आज का अमेरिका इतना ध्रुवीकृत है कि यह न सिर्फ़ बंटा हुआ है, बल्कि अपने ही ख़िलाफ़ जंग में है.

राष्ट्रपति निर्वाचित होने के बाद अपने पहले भाषण में, जो बाइडेन ने अमेरिका में गंभीर और कड़वाहट भरे विभाजनों को पाटने का वादा किया. लेकिन तब तक, देश अन्य उन्नत लोकतंत्रों की तुलना में ज़्यादा तेज़ी से ख़ुद को न केवल छिन्न-भिन्न कर रहा था, बल्कि पहले किसी भी वक़्त के मुक़ाबले अधिक बंट गया था. डेमोक्रेट और रिपब्लिकन न केवल मुख्य मुद्दों पर असहमत हैं, बल्कि दोनों ख़ेमों के दस में से नौ अमेरिकी मानते हैं कि दूसरे ख़ेमे की जीत अमेरिका को दीर्घकालिक नुक़सान पहुंचायेगी. 

दो-चार वर्षों में यह सब नहीं हुआ है

आम अमेरिकियों और राजनीतिक विश्लेषकों के लिए, ट्रंप अमेरिका की प्रधान ध्रुवीकारक (polarising) शक्ति हैं. हालांकि, पीछे 2012 की शुरुआत में जाएं, तो ट्रंप के राजनीतिक मैदान में सार्वजनिक प्रवेश के काफ़ी पहले, ओबामा को उस वक़्त तक का सबसे ज़्यादा ध्रुवीकारक राष्ट्रपति करार दिया गया था. एक राष्ट्रपति जो ‘सबका राष्ट्रपति’ होने के वादे पर चुनाव लड़ा, उसकी परिणति सबसे ध्रुवीकारक राष्ट्रपति (तब तक के) के रूप में होना, अमेरिकी लोगों के बारे में बहुत कुछ ज़ाहिर करता है. अमेरिकी जनता को ध्रुवीकृत करने की ट्रंप की ताक़त का स्रोत है, दशकों से निर्मित हो रहे विभाजन का दोहन करने की उनकी क्षमता.

एक राष्ट्रपति जो ‘सबका राष्ट्रपति’ होने के वादे पर चुनाव लड़ा, उसकी परिणति सबसे ध्रुवीकारक राष्ट्रपति (तब तक के) के रूप में होना, अमेरिकी लोगों के बारे में बहुत कुछ ज़ाहिर करता है. अमेरिकी जनता को ध्रुवीकृत करने की ट्रंप की ताक़त का स्रोत है, दशकों से निर्मित हो रहे विभाजन का दोहन करने की उनकी क्षमता.

बिल क्लिंटन के राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान, डेमोक्रेट और रिपब्लिकन अर्थव्यवस्था को एक जैसी लाइन पर देखते थे; वास्तव में, बहुत से रिपब्लिक नेताओं ने डेमोक्रेट नेताओं या सांसदों के मुक़ाबले अर्थव्यवस्था को ज़्यादा सहमतिपूर्वक देखा.

आंकड़ा1 : पांच क्रमिक राष्ट्रपतियों के तहत अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर नज़रिया  

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Source: PEW Research

     

फिर भी क्लिंटन को रोनाल्ड रीगन के मुक़ाबले ज़्यादा ध्रुवीकारक के बतौर देखा गया, और क्लिंटन से शुरू करें, तो हर अगला राष्ट्रपति अपने पूर्ववर्ती से ज़्यादा ध्रुवीकारक रहा है.

आंकड़ा 2: पार्टी संबद्धता के आधार पर अमेरिकी राष्ट्रपतियों की स्वीकृति

Note: The difference in approval ratings between ‘among own party’ and ‘among other party’ indicates the polarisation level
Source: PEW Research

1950 का दशक राजनीतिक आम राय का युग था. उस दौरान केंद्रीय मुद्दों पर रिपब्लिकन नेताओं और डेमोक्रैट समर्थकों के बीच अधिक वैचारिक मतभेद नहीं था. हालांकि, 1960 और 1970 के दशक ने नागरिक अधिकार आंदोलन (सिविल राइट मूवमेंट), युद्ध विरोधी आंदोलन, यौन क्रांति, और द्वितीय नारीवादी आंदोलन देखे. इनको आम अमेरिकियों और अराजनीतिक सार्वजनिक शख़्सियतों ने शुरू किया. आंदोलनों का जनता में गति पकड़ने के बाद राजनीतिज्ञ इनमें शामिल हुए. दरअसल, ‘पर्सनल इज़ पॉलिटिकल’ द्वितीय नारीवादी आंदोलन को परिभाषित करने वाला नारा था. इन आंदोलनों में जनता की व्यापक भागीदारी, और आंदोलन के मुद्दों का विरोध करने वालों की जवाबी गोलबंदी को देखते हुए, जनता का इन मुद्दों के इर्द-गिर्द राजनीतिक गुटों में विभाजन अपरिहार्य हो गया- व्यक्तिगत वास्तव में राजनीतिक हो गया. नस्ली ग़ैरबराबरी से शुरू करके, धार्मिक संबद्धता, आर्थिक नीतियों तक को लेकर आम अमेरिकी बंटने लगे. इस विभाजन के ‘कंज़रवेटिव’ पक्ष की नुमाइंदगी रिपब्लिकन और ‘लिबरल’ पक्ष की नुमाइंदगी डेमोक्रेट करने लगे.

24-घंटे के ख़बरिया चैनलों व सोशल मीडिया मंचों के उदय और राजनीतिज्ञों व ध्रुवीकारक राय-निर्माताओं (ओपीनियन मेकर्स) द्वारा इनके इस्तेमाल ने अमेरिकियों को हर विषय पर सच्चाई के दो संस्करण मुहैया कराये जाने में योगदान दिया है. इसने अविश्वास और सामाजिक विभाजनों को और ज़्यादा बढ़ाया है. 

24-घंटे के ख़बरिया चैनलों व सोशल मीडिया मंचों के उदय और राजनीतिज्ञों व ध्रुवीकारक राय-निर्माताओं (ओपीनियन मेकर्स) द्वारा इनके इस्तेमाल ने अमेरिकियों को हर विषय पर सच्चाई के दो संस्करण मुहैया कराये जाने में योगदान दिया है. इसने अविश्वास और सामाजिक विभाजनों को और ज़्यादा बढ़ाया है. अमेरिकी आज मेक्सिको और अमेरिका के बीच दीवार जैसे एक अजीबोगरीब मुद्दे या चुनावी विश्वसनीयता जैसे जटिल मुद्दों पर ही नहीं बंटे हैं, वे मास्क की अनिवार्यता, टीकाकरण, प्रजनन अधिकारों, स्कूली शिक्षा, खेलकूद जैसे अनेक विषयों पर बंटे हैं, जो दूसरे देशों में कोई मुद्दा ही नहीं माना जायेगा. अमेरिकी हर चीज़ को एकपक्षीय दृष्टिकोण से देखते हैं, जिसका नतीजा विभाजन बढ़ने के रूप में सामने आता है. इस तरह का व्यापक विभाजन बर्नी सैंडर्स व ट्रंप जैसे राजनीतिज्ञों को तेज़ी से राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता दिलाने और उनके उत्थान, तथा उनकी लोक-लुभावन सोच को मुख्यधारा में ले आना आसान बनाता है. इन सोचों के इर्दगिर्द बना जनाधार उनकी पार्टियों को अतियों की ओर धकेलता है, और मध्य मार्ग के लिए बहुत कम गुंजाइश बचती है. इस तरह के विभाजन का नतीजा केवल एक अत्यधिक ध्रुवीकृत समाज के रूप में सामने नहीं आता, बल्कि बेहद अहम नीतिगत मुद्दों पर बारीकी से चर्चा के लिए जगह को ख़त्म करता है.

एक बंटा हुआ घर

न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका एक दुरुस्त लोकतंत्र के तीन मुख्य स्तंभ हैं. और ज़्यादातर लोकतांत्रिक राष्ट्रों में, न्यायपालिका द्विपक्षीय (सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों द्वारा समर्थित) है. हालांकि, निर्वाचित राजनीतिक नेताओं द्वारा जजों की नियुक्ति और अनुमोदन की प्रणाली अमेरिकी न्यायपालिका को पक्ष विशेष का कट्टर समर्थक और अक्सर विभाजित बनाती है. कंज़रवेटिव जज ब्रेट कैवेनॉ और लिबरल जज केटांजी ब्राउन जैक्सन के कड़वाहट भरे अनुमोदन सार्वजनिक तमाशे थे, जिन्होंने न्यायपालिका में पहले ही कम भरोसे को और क्षीण किया.

निष्पक्ष चुनाव और सत्ता का शांतिपूर्ण हस्तांतरण, ठीक से काम कर रहे किसी लोकतंत्र की एक मुख्य विशेषता है. पिछले कुछ सालों में, चुनावी नतीजों की वैधता पर रिपब्लिकनों और डेमोक्रेटों दोनों ने सवाल उठाये हैं. अमेरिका में चुनाव विश्वसनीयता खो रहे हैं क्योंकि निर्वाचित अधिकारी चुनाव प्रशासन के प्रभारी हैं, और उनकी प्रवृत्ति उस पार्टी की ओर झुकाव की होती है जिसकी वे नुमाइंदगी करते हैं. यह अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा संपुष्ट एक दुर्भाग्यपूर्ण परिघटना है. अमेरिकियों की एक बड़ी संख्या के लिए, 2016 के चुनाव में रूसी सांठगांठ की धारणा और 2020 के चुनाव में बेईमानी के आरोप कार्यपालिका की वैधता बहाल करने में क़तई मददगार नहीं हैं.

पिछले कुछ सालों में, चुनावी नतीजों की वैधता पर रिपब्लिकनों और डेमोक्रेटों दोनों ने सवाल उठाये हैं. अमेरिका में चुनाव विश्वसनीयता खो रहे हैं क्योंकि निर्वाचित अधिकारी चुनाव प्रशासन के प्रभारी हैं, और उनकी प्रवृत्ति उस पार्टी की ओर झुकाव की होती है जिसकी वे नुमाइंदगी करते हैं.

अमेरिकी विधायिका खंडित है, न सिर्फ़ दो बड़ी पार्टियों के बीच, बल्कि पार्टियों के अपने भीतर भी. अमेरिकी कांग्रेस में बाइडन का विरोध करने वाले डेमोक्रेट उनके शासन एजेंडे को पटरी से उतार रहे हैं. कांग्रेस में ट्रंप का विरोध करने वाले रिपब्लिकन अपने समर्थकों और पार्टी के अपने साथी सहकर्मियों की नाराज़गी झेल रहे हैं. लेकिन अमेरिकी विधायिका वॉशिंगटन से ज़्यादा राज्यों में ठीक से काम नहीं कर पा रही है. यह सार्थक ढंग से क़ानून बना पाना कठिन बनाता है. नतीजतन, 1997 से, संघीय सरकार और उसकी शाखाओं में भरोसे का स्तर तेज़ी से गिरा है.

चित्र तीन: विभिन्न स्तर की सरकारों में अमेरिकियों का भरोसा बनाम ऐतिहासिक औसत

अमेरिका में सरकारों के घटक 1997 – 2021 औसत 2020 2021
% % %
संघीय सरकार
वैश्विक मुद्दों को संभालने वाली संघीय सरकार 59 48 39
घरेलू मुद्दों को संभाल रही संघीय सरकार 53 41 39
संघीय सरकार की शाखाएं
न्यायिक शाखा 68 67 54
कार्यकारी शाखा 52 43 44
विधायी शाखा 47 33 37
राज्य और स्थानीय सरकारें
राज्य सरकार राज्य की समस्याओं को संभाल रही है 62 60 57
स्थानीय समस्याओं को संभाल रही स्थानीय सरकार 70 71 66

Source: Gallup

विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के अलावा, अमेरिका की वैश्विक हैसियत उसकी राष्ट्रीय राजनीति और उदारदवादी विश्व व्यवस्था के लिए केंद्रीय भूमिका में है. भले ही ट्रंप के अधीन उसकी वैश्विक हैसियत बहुत तेज़ी से क्षीण हुई, लेकिन गिरावट बहुत पहले ही शुरू हो गयी थी, और बाइडेन अपनी कम स्वीकृति वाली रेटिंग के साथ, लहर को उलट नहीं पाये हैं.

आंकड़ा 4 : अमेरिकी वैश्विक छवि की धारणा

Source: PEW Research

वैश्विक कूटनीति पर ट्रंप के ‘अमेरिका फर्स्ट’ दृष्टिकोण को ख़ारिज करने के बावजूद, बाइडेन ने अफ़ग़ानिस्तान से हटने की अपने पूर्ववर्ती की डील का पालन किया, जो अमेरिका के नेटो सहयोगियों को निराश करने के लिए काफ़ी था. बाइडेन ने ऑस्ट्रेलिया के साथ फ्रांस के 40 अरब अमेरिकी डॉलर के पनडुब्बी सौदे को नाकाम करा दिया, जिसकी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का यूक्रेन पर आक्रमण नेटो को नयी ज़िंदगी दे रहा है, इसके बावजूद इस संघर्ष पर बाइडेन का रुख़ उनकी हैसियत को उनके सहयोगियों या अमेरिकी जनता के बीच बढ़ाता नहीं लगता. घरेलू विभाजनों ने अमेरिका की वैश्विक हैसियत का क्षरण किया है, लेकिन इसके ठीक उलट बात भी उतनी ही सही है और देश को लगातार गिरावट के चक्र में धकेलती है.

अमेरिकी शासन संरचना को परिभाषित करने वाले कारक घरेलू अविश्वास और दलगत बंटवारे से बुरी तरह ग्रसित हैं. यह न केवल लोकतंत्र के प्रति वैश्विक मोहभंग को बढ़ाता है, बल्कि अधिकांश अमेरिकियों को उनके भीतर की जंग में हारने के लिए छोड़ देगा.

भू-राजनीतिक अखाड़े में जब अमेरिका ही अकेला तगड़ा पहलवान नहीं है, ऐसे वक़्त में उसकी शासन कला (statecraft) कड़े इम्तिहान से गुज़र रही है. चीन को अपनी महत्वाकांक्षाओं को लेकर कोई शर्म नहीं है. वह अपने बाजू चमका रहा है और अपनी वैश्विक प्रमुखता का विस्तार कर रहा है. वॉशिंगटन के उलट, बीजिंग की घरेलू राजनीति की कोई मजबूरी नहीं है. शासन के एक सिद्धांत के बतौर लोकतंत्र के प्रति असंतुष्टि का इज़हार करने वाले लोगों की लोकतांत्रिक राष्ट्रों में बढ़ती संख्या के साथ, लोकतंत्र का सबसे पुराना और सबसे प्रमुख पैरोकार अमेरिका एक नये मोड़ पर खड़ा है. अमेरिकी शासन संरचना को परिभाषित करने वाले कारक घरेलू अविश्वास और दलगत बंटवारे से बुरी तरह ग्रसित हैं. यह न केवल लोकतंत्र के प्रति वैश्विक मोहभंग को बढ़ाता है, बल्कि अधिकांश अमेरिकियों को उनके भीतर की जंग में हारने के लिए छोड़ देगा.

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Prasanna Karthik

Prasanna Karthik

Prasanna Karthik is a strategy consultant and public policy professional based out of New Delhi. He is a Fulbright as well as Clinton Global Initiative ...

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