Published on Aug 30, 2023 Updated 0 Hours ago

सब-सहारन अफ्रीका की अर्थव्यवस्थाएं अलग-अलग हैं और फिनटेक सॉल्यूशंस को महाद्वीप के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक दोहराने का वही असर हो सकता है जो आंख मूंदकर पश्चिमी देशों से फिनटेक का आयात करने से होगा. 

अफ्रीकी फिनटेक में बारीक़ी की ज़रूरत

ग़रीबी के उन्मूलन की शुरुआत व्यापक वित्तीय प्रणाली तक पहुंच आसान बना कर होती है. पैसा भेजने, हासिल करने और जमा करने जैसी वित्तीय सेवाएं लेन-देन को आसान बनाकर और लोगों को आपात स्थिति के लिए पैसे की बचत करने का अवसर मुहैया कराकर स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को मज़बूत बनाती हैं. सब-सहारन अफ्रीका (सहारा रेगिस्तान के दक्षिण में स्थित अफ्रीका महाद्वीप के देश) में 15 साल से ज़्यादा उम्र के दो-तिहाई से अधिक वयस्कों का बैंक में खाता नहीं है जिसकी वजह से आमदनी में असमानता का एक चक्र (साइकिल) बन गया है. फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी या फिनटेक मोबाइल के बढ़ते इस्तेमाल का फायदा उठाकर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक वित्तीय सेवाएं लेकर आती है. 21वीं शताब्दी की शुरुआत में मोबाइल मनी की शुरुआत के समय से सब-सहारन अफ्रीका इसका सबसे ज़्यादा इस्तेमाल करने वाला क्षेत्र बन गया है. मोबाइल मनी ऐसी तकनीक़ है जो लोगों को सिंपल फीचर फोन के इस्तेमाल से बेसिक अकाउंट बनाये रखने की अनुमति देती है. मोबाइल मनी को अफ्रीका, ख़ास तौर पर पूर्वी अफ्रीका में, शानदार कामयाबी मिली है और इस तकनीक़ का समर्थन करने वाले लोग पूरे महाद्वीप में इसकी सफलता दोहराने के लिए उत्सुक हैं. 

फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी या फिनटेक मोबाइल के बढ़ते इस्तेमाल का फायदा उठाकर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक वित्तीय सेवाएं लेकर आती है. 21वीं शताब्दी की शुरुआत में मोबाइल मनी की शुरुआत के समय से सब-सहारन अफ्रीका इसका सबसे ज़्यादा इस्तेमाल करने वाला क्षेत्र बन गया है.

फिनटेक में संभावना है कि वो सब-सहारन अफ्रीका में रहने वाले लाखों लोगों को ग़रीबी से बाहर निकाले लेकिन फिनटेक की पहल को अमल में लाने वाली सरकारों और कंपनियों को सावधानीपूर्वक अपने लोगों की ख़ास ज़रूरतों का पता लगाना चहिए और मौजूदा फिनटेक सॉल्यूशंस को आवश्यकता के मुताबिक अपनाना चाहिए. पश्चिमी देशों के समाधान को अफ्रीकी अर्थव्यवस्थाओं में कॉपी-पेस्ट करने की कोशिश बेअसर साबित होगी और वास्तव में उस क्षेत्र में वित्तीय असमानता और बढ़ सकती है.  

वित्तीय समावेशन के लिए इनोवेटिव नज़रिया 

केन्या में वित्तीय समावेशन (फाइनेंशियल इन्क्लूज़न) में काफी तेज़ी आई क्योंकि कंपनियों ने अपनी फिनटेक पेशकश को केन्या के उपभोक्ताओं के हिसाब से तैयार किया था. 2002 में शुरू होकर केन्या के सेल्युलर प्रोवाइडर्स ये महसूस करने लगे कि यूज़र करेंसी के विकल्प के तौर पर डेटा ख़रीद रहे थे क्योंकि इसे सेल्युलर नेटवर्क पर ट्रांसफर किया जा सकता है और इसे फिर से बेचा जा सकता है. केन्या की सबसे बड़ी फोन कंपनी सफारीकॉम ने 2002 में एम-पेसा कार्यक्रम शुरू किया जिसके ज़रिये यूज़र डेटा का इस्तेमाल किये बिना अपने मोबाइल फोन के माध्यम से रकम भेजने और हासिल करने लगे. एम-पेसा प्रोग्राम ने ग्राहकों को स्थानीय मनी एजेंट के ज़रिये नकद जमा करने या निकालने की भी सुविधा दी. इसके लिए लोगों को बैंक या ATM जाने की ज़रूरत नहीं थी. इससे ग्रामीण क्षेत्रों में नकदी का प्रवाह (कैश फ्लो) बढ़ गया. 

सेंट्रल अफ्रीकन CFA फ्रैंक को औपनिवेशिक युग के अवशेष के रूप में यूरो के साथ जोड़ा गया है; अपने समकक्ष वेस्ट अफ्रीकन CFA फ्रैंक के साथ इसका एक्सचेंज रेट भी है. 

जहां पश्चिमी देशों में फिनटेक काफी हद तक इंटरनेट कनेक्टिविटी के इर्द-गिर्द घूमता है, वहीं एम-पेसा प्रोग्राम टेक्स्ट मैसेज के ज़रिये लेन-देन को पूरा करने के लिए सेल्युलर कनेक्शन पर निर्भर करता है. ये मॉडल केन्या में काफी सुलभ है जहां मोबाइल का इस्तेमाल इंटरनेट के इस्तेमाल से बहुत ज़्यादा है, ख़ास तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में. टेक्स्ट मैसेज के इंटरफेस का ये भी मतलब है कि ट्रांज़ैक्शन स्मार्ट फोन की जगह फीचर फोन का इस्तेमाल करके भी पूरा हो सकता है. इससे ग़रीब लोग भी इस तकनीक़ का इस्तेमाल कर सकते हैं. आज केन्या के 90 प्रतिशत लोग एम-पेसा अकाउंट के माध्यम से फाइनेंशियल इकोसिस्टम से जुड़े हुए हैं. 

एम-पेसा प्रोग्राम इसलिए कामयाब हुआ क्योंकि इसने केन्या की अर्थव्यवस्था की विशेष आवश्यकताओं को पूरा किया. मोबाइल मनी मॉडल ने एक ऐसे बाज़ार की ज़रूरतों को पूरा किया  जहां मोबाइल का इस्तेमाल करने वाले लोग काफी ज़्यादा थे, इंटरनेट का उपयोग करने वाले लोग अपेक्षाकृत कम थे और बैंकिंग सेवाओं तक कम लोगों की पहुंच थी. सब-सहारन अर्थव्यवस्थाओं में ये विशेषताएं सामान्य हैं और इसने पूरे महाद्वीप में मोबाइल मनी की लोकप्रियता बढ़ाने में योगदान दिया है. एम-पेसा को व्यापक स्तर पर अपनाना इसलिए संभव हुआ क्योंकि ये अफ्रीका की अर्थव्यवस्थाओं के सामने मौजूद समस्याओं को देखते हुए सावधानीपूर्वक तैयार किया गया था. दूसरी अर्थव्यवस्थाओं जिन्होंने पश्चिमी देशों के फिनटेक सॉल्यूशंस को बिना महत्वपूर्ण फेरबदल के अपनाने  की कोशिश की थी वो मोबाइल मनी सेक्टर की सफलता को नहीं दोहरा सके. 

क्रिप्टोकरेंसी के लिए सावधानी की कहानी 

एम-पेसा की पहल के विपरीत सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक (CAR) का सैंगो प्रोजेक्ट अपने देश के एक औसत नागरिक की ज़रूरतों के ऊपर क्रिप्टोकरेंसी इंडस्ट्री को लुभाने को प्राथमिकता देता है. राष्ट्रपति फॉस्टिन-आर्चेंज टूआडेरा के द्वारा शुरू सैंगो प्रोजेक्ट बेहद महत्वपूर्ण योजना है जिसका उद्देश्य क्रिप्टोकरेंसी के ज़रिये अपने देश की अर्थव्यवस्था को मज़बूत करना है. इसमें बिटकॉइन ब्लॉकचेन की तर्ज पर बनी एक राष्ट्रीय क्रिप्टोकरेंसी को ढालना और प्राकृतिक संसाधनों का टोकेनाइज़ेशन शामिल है. सैंगो कॉइन में निवेश के बदले टूआडेरा ने निवेशकों को नागरिकता, ई-रेज़ीडेंसी और राजधानी बांगुई में ज़मीन का प्लॉट ख़रीदने के अवसरों की पेशकश की है. 

घरेलू स्तर पर सैंगो प्रोजेक्ट को काफी विरोध का सामना करना पड़ा है, इनमें सबसे ज़्यादा विरोध न्यायपालिका की तरफ से हुआ है. सैंगो कॉइन में निवेश करने वाले लोगों को प्रोत्साहन के तौर पर नागरिकता और ई-रेज़िडेंसी की सुविधा देने को 2022 में असंवैधानिक घोषित कर दिया गया था. इसके बावजूद सरकार ने सैंगो टोकन को ढालने का काम इस वादे के साथ जारी रखा है कि निवेशकों को प्रोत्साहन अगले दौर में उपलब्ध होगा. टूआडेरा सैंगो प्रोजेक्ट का कानूनी दर्जा सुरक्षित रखने में कामयाब हो भी जाते हैं तब भी क्रिप्टोकरेंसी के वेंचर के हिसाब से भी ये प्रोजेक्ट जटिल है. सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक के ज़्यादातर लोगों के लिए ये प्रोजेक्ट पूरी तरह पहुंच के बाहर है. वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के बदले सैंगो कॉइन केवल सेंट्रल अफ्रीकन अर्थव्यवस्था के ऊपर अमीर विदेशियों के असर को बढ़ाने का काम करता है और बैंकिंग सुविधाओं से बाहर लोगों को और ज़्यादा नज़रअंदाज़ करता है. 

सब-सहारन अफ्रीका की अर्थव्यवस्थाएं अलग-अलग क्षेत्रों में काफी अलग हैं और महाद्वीप के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक फिनटेक सॉल्यूशंस को दोहराने की कोशिश का वही उत्साहहीन असर हो सकता है जो पश्चिमी देशों से आंख मूंद कर फिनटेक का आयात करने का हो सकता है.

अंतर्राष्ट्रीय स्तर की बात करें तो क्षेत्रीय साझेदारों ने सैंगो प्रोजेक्ट की निंदा की है. सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक एक ऐसे करेंसी ज़ोन का हिस्सा है जो अपनी राष्ट्रीय करेंसी के रूप में सेंट्रल अफ्रीकन CFA फ्रैंक का उपयोग करता है. सेंट्रल अफ्रीकन CFA फ्रैंक को औपनिवेशिक युग के अवशेष के रूप में यूरो के साथ जोड़ा गया है; अपने समकक्ष वेस्ट अफ्रीकन CFA फ्रैंक के साथ इसका एक्सचेंज रेट भी है. सेंट्रल अफ्रीकन इकोनॉमिक एंड मॉनेटरी कम्यूनिटी (CEMAC) के अधिकारी कहते हैं कि सेंट्रल अफ्रीका के लोगों को सेंट्रल अफ्रीकन CFA फ्रैंक की जगह सैंगो कॉइन का इस्तेमाल करने के लिए बढ़ावा देने से पूरे क्षेत्र में मौद्रिक नीति को संभालना मुश्किल हो जाएगा, ख़ास तौर पर इसलिए क्योंकि सैंगो कॉइन के चलन की शुरुआत में बिटकॉइन को एक लीगल टेंडर के तौर पर मान्यता मिली और सैंगो कॉइन से सेंट्रल अफ्रीकन CFA फ्रैंक में बदलने की गारंटी दी गई. इस विशेष उपाय को अब रद्द कर दिया गया है लेकिन सेंट्रल अफ्रीकन CFA फ्रैंक की मौद्रिक संप्रभुता कमज़ोर होने को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं. 

सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक के द्वारा असरदार सॉल्यूशंस विकसित करने में स्थानीय लोगों के साथ भागीदारी में सैंगो प्रोजेक्ट की नाकामी का एक और सबूत है सैंगो कॉइन को विकसित करते समय आर्थिक साझेदारों के साथ संवाद की कमी. सब-सहारन अफ्रीका में भेजी गई रकम (रेमिटेंस) GDP का 2.5 प्रतिशत है. ग्रामीण क्षेत्रों में परिवार के सदस्यों को सुरक्षित ढंग से रकम भेजने की सुविधा मोबाइल मनी की लोकप्रियता का एक प्राथमिक कारण है. कोई भी सिस्टम जो खुद को व्यापक आर्थिक समुदाय से अलग करता है और क्षेत्र के भीतर एकीकरण की संभावना को ख़त्म करता है वो सेंट्रल अफ्रीकन अर्थव्यवस्था की तात्कालिक ज़रूरतों को पूरा करने में नाकाम है. सब-सहारन अफ्रीका में वित्तीय समावेशन के उद्देश्य से फिनटेक के समर्थकों के लिए सैंगो प्रोजेक्ट एक सबक है. सैंगो प्रोजेक्ट को फिनटेक की पहल और इस पहल के ज़रिए जिन लोगों को ग़रीबी से बाहर निकालने का लक्ष्य है, उनके बीच खुले संवाद के महत्व की याद दिलाने के तौर पर काम करना चाहिए.        

फिनटेक के पॉज़िटिव असर का विस्तार 

फिनटेक पश्चिमी देशों और अफ्रीका के समाज में एक पूरी तरह अलग भूमिका निभाती है. पश्चिमी देशों में फिनटेक अक्सर क्रिप्टोकरेंसी का रूप ले लेती है जिस पर श्वेत, पुरुष निवेशकों का दबदबा है. फाइनेंशियल इन्क्लूज़न को बढ़ाने के मक़सद से अफ्रीका में फिनटेक पहल के लिए पहले से मौजूद नज़रिया अफ्रीका के लोगों के हिसाब से होना चाहिए ताकि गैर-बराबरी को हटाने की जगह अमीर और ग़रीब के बीच खाई बढ़ाने से परहेज किया जा सके. केन्या में एम-पेसा प्रोजेक्ट स्थानीय समुदायों की आवश्यकताओं को पूरा करने में फिनटेक का एक अच्छा उदाहरण है. दूसरी तरफ सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक में सैंगो प्रोजेक्ट फिनटेक के द्वारा महत्वपूर्ण फैसलों से स्थानीय समुदायों को बाहर रखने की मिसाल है. 

आने वाले समय में अलग-अलग सरकारों को सब-सहारन अफ्रीका के भीतर फिनटेक को लेकर सामान्य नतीजे पर पहुंचने के बारे में एहतियात बरतने की भी ज़रूरत है. सब-सहारन अफ्रीका की अर्थव्यवस्थाएं अलग-अलग क्षेत्रों में काफी अलग हैं और महाद्वीप के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक फिनटेक सॉल्यूशंस को दोहराने की कोशिश का वही उत्साहहीन असर हो सकता है जो पश्चिमी देशों से आंख मूंद कर फिनटेक का आयात करने का हो सकता है. मिसाल के तौर पर, नाइजर में रिसर्चरों ने मोबाइल मनी ट्रांसफर के लिए लोगों की दिलचस्पी को समझा है लेकिन इसके बावजूद मोबाइल मनी को अपनाने की दर 9 प्रतिशत ही है. पश्चिमी अफ्रीका, ख़ास तौर पर नाइजर, की अर्थव्यवस्था केन्या, जहां मोबाइल मनी की शुरुआत हुई थी, की अर्थव्यवस्था से पूरी तरह भिन्न है. नाइजर में मोबाइल मनी एजेंटों के एक मज़बूत, भरोसेमंद नेटवर्क की कमी है और टेक्स्ट एवं पिन के ज़रिये पैसा भेजना ऐसे देश में कठिन है जहां के सिर्फ़ 37 प्रतिशत वयस्क ही पढ़े-लिखे हैं. 

इस तरह की समस्याओं को हल करने के लिए उन लोगों से सलाह के ज़रिये लगातार बदलाव करने की आवश्यकता है जिनको ध्यान में रखकर फिनटेक को अपनाया गया है. इससे फिनटेक प्रासंगिक और प्रभावी बनी रहेगी. फिनटेक प्रोग्राम को बनाने के दौरान और उसे लागू करते समय टारगेट किये गये लोगों से नज़दीकी संपर्क बरकरार रखकर और इनोवेशन के लिए खुला रहकर सब-सहारन अफ्रीका में सरकारें और व्यवसाय वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने और पूरे महाद्वीप की आर्थिक स्थिति में सुधार लाने के लिए फिनटेक का पूरा फायदा उठा सकते हैं.


जेना स्टीफेंसन ऑब्ज़र्वर रिसर्च फाउंडेशन के जिओइकोनॉमिक्स प्रोग्राम में इंटर्न हैं.

The views expressed above belong to the author(s). ORF research and analyses now available on Telegram! Click here to access our curated content — blogs, longforms and interviews.