Published on Aug 22, 2022 Updated 26 Days ago

मिताली एक्सप्रेस बांग्लादेश और भारत के बीच बेहतर नेटवर्क प्रदान करती है लेकिन इस सेवा की असल क्षमता तक तभी पहुंचा जा सकता है जब इसका विस्तार अन्य बंदरगाहों तक किया जाए.

मिताली एक्सप्रेस: ​​भारत-बांग्लादेश संबंधों और उप-क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिए इसके मायने

ईद के त्योहार के दौरान नौ दिनों तक इसके संचालन पर ब्रेक लगने के बाद 14 जुलाई को एक बार फिर से मिताली एक्सप्रेस पटरियों पर वापस दौड़ने लगी है. उत्तरी पश्चिम बंगाल के न्यू जलपाईगुड़ी (अब इसे उत्तर बंगाल कहा जाता है) से बांग्लादेश की राजधानी ढ़ाका तक चलने वाली इस ट्रेन ने पिछले महीने ही अपनी पहली यात्रा शुरू की थी. कोरोना महामारी की वजह से मार्च 2021 में इसके वर्चुअल उद्घाटन के बाद इसे शुरू करने में 14 महीने की देरी हुई. यह पहल उन कई पहलों में से एक है जो हाल के दिनों में भारत सरकार (जीओआई) और बांग्लादेश द्वारा दोनों देशों के बीच बेहतर संपर्क बनाने के लिए शुरू की गई हैं, जिसमें देश के पूर्वी राज्य पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर क्षेत्रों का इस्तेमाल किया गया है, जो बांग्लादेश के भीतरी इलाक़ों को अपनी राष्ट्रीय सीमा से अलग करते हैं.

यह पहल उन कई पहलों में से एक है जो हाल के दिनों में भारत सरकार (जीओआई) और बांग्लादेश द्वारा दोनों देशों के बीच बेहतर संपर्क बनाने के लिए शुरू की गई हैं

कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए जारी कोशिशों के बीच बांग्लादेश ने एक पेशकश की है जिसके तहत भारत के असम और त्रिपुरा के भू-आबद्ध राज्यों को फायदा पहुंचाने के लिए चटगांव बंदरगाह का विस्तार करना, साल 2022 के अंत तक बहुप्रतीक्षित अखौरा-अगरतला रेल लिंक को शुरू करना और बेहतर व्यापार के लिए साझा अंतर्देशीय जलमार्ग नेटवर्क के लिए बातचीत शुरू करना शामिल है. इसके अलावा बांग्लादेश ने भद्रपुर-बैरागी गलगलिया, बिराटनगर-जोगमनी और बीरगंज-रक्सौल के भूमि बंदरगाहों को सड़क के ज़रिए बंगलाबंधा-फुलबारी और बिरोल-राधिकापुर से जोड़ने का प्रस्ताव रखा है. बांग्लादेश में हाल ही में उद्घाटन किया गया पद्मा रेल-सड़क पुल भी दोनों देशों के बीच संबंधों को बेहतर बनाने की क्षमता रखता है. इस तरह की कई पहलों में, मिताली एक्सप्रेस इन देशों के बीच कनेक्टिविटी को कैसे आगे बढ़ाती है और क्या यह व्यापक उप-क्षेत्र को लाभ पहुंचा पाएगी यह विचार करने योग्य है.

जीवन को  दोबारा जोड़ने के लिए संबंधों  को नई जान देना

बांग्लादेश के साथ भारत के मज़बूत रिश्तों की जड़ें इसके सभ्यतागत इतिहास में जमी हुई हैं. साल 1947 के विभाजन के बाद 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध छिड़ने तक दोनों देशों के बीच सात रेल लिंक संचालित थे. मौज़ूदा समय में ऐसे पांच रेल लिंक पड़ोसी देशों के बीच चल रहे हैं. मिताली रेल सेवा के उद्घाटन के बाद हल्दीबाड़ी-चिलाहाटी मार्ग को फिर से खोल दिया गया है. यह एक्सप्रेस ट्रेन, बंधन एक्सप्रेस के बाद तीसरी यात्री ट्रेन के रूप में चलती है – जो खुलना और कोलकाता के बीच सप्ताह में दो बार चलती है और मैत्री एक्सप्रेस – ढ़ाका और कोलकाता के बीच सप्ताह में पांच बार चलती है. 18 जुलाई को भारतीय उच्चायुक्त विक्रम दोराईस्वामी और बांग्लादेश के रेल मंत्री मो. नुरुल इस्लाम के बीच हाल में मुलाक़ात के बाद ढ़ाका और कोलकाता के बीच एक चौथी यात्री ट्रेन की सुविधा शुरू करने पर बात हो रही है.

कनेक्टिविटी में सुधार के ज़रिए इस ट्रेन सेवा को भारत और बांग्लादेश के बीच परिवहन का एक सस्ता और भरोसेमंद साधन प्रदान करने के लिए तैयार किया गया है, जो वास्तव में द्विपक्षीय व्यापार और पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देगा.

वातानुकूलित मिताली एक्सप्रेस ट्रेन सेवा नौ घंटे में ढ़ाका छावनी और न्यू जलपाईगुड़ी के बीच लगभग 513 किलोमीटर की दूरी तय करती है. ट्रेन के हल्दीबाड़ी और चिलाहाटी में दो तकनीकी स्टॉप हैं, क्योंकि इसे एक देश की सीमा के अंदर एक भारतीय ड्राइवर और दूसरे देश की सीमा के अंदर एक बांग्लादेशी ड्राइवर द्वारा चलाया जाता है. कनेक्टिविटी में सुधार के ज़रिए इस ट्रेन सेवा को भारत और बांग्लादेश के बीच परिवहन का एक सस्ता और भरोसेमंद साधन प्रदान करने के लिए तैयार किया गया है, जो वास्तव में द्विपक्षीय व्यापार और पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देगा. उदाहरण के लिए, बांग्लादेश को उत्तर बंगाल से जोड़कर मिताली एक्सप्रेस बांग्लादेशी पर्यटकों के लिए दार्जिलिंग, डूआर और सिक्किम जैसे पसंदीदा भारतीय पर्यटक स्थलों की यात्रा की सुविधा प्रदान करती है. इसलिए, यह लोगों से लोगों के बीच मज़बूत संपर्क स्थापित करने के ज़्यादा मौक़ा खोलता है. चूंकि भारत का उत्तर बंगाल का हिस्सा नेपाल, भूटान और बांग्लादेश के साथ सीमा साझा करता है और इसका पूर्वोत्तर हिस्सा बांग्लादेश, म्यांमार, भूटान और यहां तक ​​​​कि चीन के साथ सीमा साझा करता है. ट्रेन सेवा व्यापक उपक्षेत्र के साथ भूमि संपर्क के विस्तार के लिए भी मौक़ा प्रदान करती है, और यह भारत की ‘पड़ोसी पहले’ और ‘एक्ट ईस्ट’ नीति से साबित भी होता है. इस मार्ग को फिर से खोलने से भारत के भीतर घरेलू परिवहन को भी कई सुविधाएं मिलती हैं, क्योंकि यह कोलकाता और सिलीगुड़ी या न्यू जलपाईगुड़ी के बीच की कम दूरी को तय करता है, जिससे यात्रा के समय में चार घंटे की कमी आती है.

स्रोत: Map created by Jaya Thakur, Guest Faculty, Department of Geography, Jadavpur University, Kolkata.



बांग्लादेश के लिए भी मिताली एक्सप्रेस रेल सेवा कम फायदेमंद नहीं है. भारत के साथ ज़्यादा से ज़्यादा कनेक्टिविटी की सुविधा देकर, जो अन्य फायदे के साथ अधिक व्यापारिक मौक़ों को बढ़ाता है और यह अवामी लीग सरकार को राजनीतिक लाभ भी देता है जिसका नेतृत्व प्रधान मंत्री शेख हसीना करती हैं. ऐसा तब है जब कि वह साल 2023 में बांग्लादेश में आगामी संसदीय चुनाव की तैयारी कर रही हैं. पारस्परिक रूप से फायदेमंद साझेदारी के ज़रिए राजनयिक जीत हासिल करने के अलावा, रेल सेवा ख़ास तौर पर बढ़ते चिकित्सा संबंधी पर्यटन की मांग को लेकर बांग्लादेश के लोगों को परिवहन का एक सस्ता और आरामदायक ज़रिया भी मुहैया कराती है. बांग्लादेश को उत्तरी बंगाल से जोड़कर, यह पहल बांग्लादेशी नागरिकों को भारत के रास्ते नेपाल के लिए एक भूमि मार्ग भी देती है और हिमालयी देश को अपने कारोबार के लिए समुद्र तक पहुंच प्रदान करता है. 2021 में प्रधानमंत्री हसीना ने कहा था कि, “राजनीतिक सीमाएं कारोबार के लिए भौतिक बाधा नहीं बननी चाहिए” और यह बिलकुल इसी बात को दिखाता है. इसमें दो राय नहीं कि मिताली एक्सप्रेस उप-क्षेत्र में कनेक्टिविटी बढ़ाने की क्षमता रखती है, जो हाल के वर्षों में भारत और बांग्लादेश दोनों के लिए एक नीतिगत प्राथमिकता रही है.

उप-क्षेत्र को जोड़ने की दिशा में एक कदम?

भारत-बांग्लादेश राजनयिक संबंधों के 50 साल पूरे होने का जश्न मनाने के लिए मार्च 2021 में ढ़ाका में भारत और बांग्लादेश के बीच हुई शिखर बैठक में, दोनों राष्ट्राध्यक्षों ने “उप-क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की, जो न केवल पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत, बांग्लादेश, नेपाल और भूटान के बीच ज़्यादा व्यापार को बढ़ाने बल्कि भारत-प्रशांत क्षेत्र को भी मज़बूत करता है”. इस व्यापक एज़ेंडे को ध्यान में रखते हुए दोनों देशों ने बांग्लादेश, भूटान, भारत और नेपाल (बीबीआईएन) मोटर वाहन समझौते के शीघ्र संचालन के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर करने में तेजी लाने पर चर्चा की. यह बांग्लादेश, भारत और नेपाल को यात्रियों और सामानों का परिवहन शुरू करने की अनुमति देगा, जिसमें भूटान के भविष्य में शामिल होने की गुंजाइश रहेगी. भूमि संपर्क के विस्तार के क्रम में, बांग्लादेश ने चिलाहाटी-हल्दीबाड़ी के मार्ग के माध्यम से भूटान के साथ रेल संपर्क की मांग की थी, जिस पर वर्तमान में मिताली एक्सप्रेस चलती है. वास्तव में यह ट्रेन सेवा उप-क्षेत्र में अधिक याताताय के मौक़े को बढ़ाती है क्योंकि अनुमान यह लगाया जाता है कि यह ट्रांस-एशियन रेलवे नेटवर्क (टीएआरएन) परियोजना में एक लिंक के रूप में काम कर सकती है.

बीबीआईएन की पहल के अलावा, भारत और बांग्लादेश क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ावा देने के लिए बिम्सटेक के मंच पर भी चर्चा कर रहे हैं. द बे ऑफ बंगाल मल्टी सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन (बीआईएमएसटीईसी – बिम्सटेक) एक क्षेत्रीय संगठन है जो विशेष रूप से बंगाल की खाड़ी क्षेत्र को लेकर है, जिसके सदस्य भारत और बांग्लादेश दोनों देश हैं. “ट्रांसपोर्ट कनेक्टिविटी पर बिम्सटेक मास्टर प्लान जो अप्रैल 2022 में एशियाई विकास बैंक द्वारा जारी किया गया था, रेल परिवहन के लिए एक पूरे हिस्से को समर्पित करता है क्योंकि इसके सात सदस्य देशों में से छह भूमि से जुड़े हुए हैं. हालांकि इस योजना के मुताबिक़, “इंट्रा-बिम्सटेक ट्रांसपोर्ट के लिए रेलवे क्षेत्र कम महत्वपूर्ण होता जा रहा है और रेल के इस्तेमाल में पर्यावरणीय कारण इस प्रवृत्ति को शायद ही जल्द बदलने की स्थिति में है“. ऐसा इसलिए है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय रेल सेवाओं को बढ़ाने के संबंध में साझेदारी को लेकर कई देशों के बीच बेहद कम दिलचस्पी है. इसलिए रेल की बुनियादी संरचना को आगे बढ़ाना आसान नहीं है. रेल लिंक के लिए एकमात्र सामान्य आवश्यकता महत्वपूर्ण बंदरगाहों तक पहुंच है, जो विशेष रूप से बिम्सटेक के भूमिबद्ध सदस्य राज्यों के लिए अहम है. हाल ही में साझा बौद्ध और मंदिर सर्किट को विकसित करना भी रेल संपर्क में सुधार की वज़हों में से एक कारण के रूप में पहचाना गया.

बीबीआईएन की पहल के अलावा, भारत और बांग्लादेश क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ावा देने के लिए बिम्सटेक के मंच पर भी चर्चा कर रहे हैं. द बे ऑफ बंगाल मल्टी सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन (बीआईएमएसटीईसी – बिम्सटेक) एक क्षेत्रीय संगठन है जो विशेष रूप से बंगाल की खाड़ी क्षेत्र को लेकर है

सब रीज़नल (उप-क्षेत्रीय) दृष्टिकोण से यह समझा जा सकता है कि रेलवे के टेढ़े-मेढ़े रास्तों की उपयोगिता सीमित होती है. हालांकि परिवहन के दूसरे माध्यमों के साथ जोड़े जाने पर इसका दायरा बढ़ जाता है. इसलिए, मिताली एक्सप्रेस जैसी ट्रेन सेवा की वास्तविक क्षमता की पहचान करने के लिए, इसकी पहुंच को प्रमुख बंदरगाहों के साथ-साथ नेपाल और भूटान – मल्टी-मॉडल माध्यमों के ज़रिए इसे बिम्सटेक के दूसरे लैंडलॉक्ड सदस्य तक बढ़ाने की ज़रूरत है. हालांकि यह इसके मौज़ूदा अहमियत को कम नहीं करता है, जो द्विपक्षीय संबंधों को लेकर ज़्यादा महत्वपूर्ण है. इसकी महत्ता दो पड़ोसी देशों को जोड़ने और उन लोगों के बीच सामाजिक और सांस्कृतिक संबंधों को मज़बूत करने में है जो जातीय, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से कई समानताएं साझा करते हैं. यहां तक कि नीतिगत दृष्टिकोण से भी, यह भारत-बांग्लादेश संबंधों में बढ़ते सौहार्द्र को रेखांकित करता है.

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