Author : Manoj Joshi

Published on Oct 18, 2022 Updated 0 Hours ago

शी जिनपिंग के कार्यकाल की उपलब्धियों को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया दी जा सकती है लेकिन उनकी सबसे बड़ी सफलता सैन्य और सुरक्षा तंत्र के व्यापक सुधारों को पूरा करने में रही है.

सीसीपी अधिवेशन: शी के कार्यकाल का आकलन

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) की 20 वीं बैठक शुरू हो गई है और महासचिव के तौर पर शी जिनपिंग की तीसरी बार ताजपोशी भी तय है तो ऐसे में अब तक के उनके कार्यकाल का आकलन करने के कई तरीक़े हैं. शायद सबसे महत्वपूर्ण और अलग उपलब्धि तो यह है कि चीन ने डेंग शियोपिंग के उस सिद्धांत को तिलांजलि दे दी जिसके तहत राष्ट्र की लो प्रोफ़ाइल छवि रखने की कोशिश की गई थी. शी के कार्यकाल के पहले दिन से ही चीनी आक्रामकता की झलक सेनकाकू से लेकर दक्षिण चीन सागर और हिमालय तक दिखी. इसके साथ ही देश के अंदर भी हर एक स्तर पर सीपीसी की बढ़ती भूमिका का  दावा किया गया.

सबसे महत्वपूर्ण और अलग उपलब्धि तो यह है कि चीन ने डेंग शियोपिंग के उस सिद्धांत को तिलांजलि दे दी जिसके तहत राष्ट्र की लो प्रोफ़ाइल छवि रखने की कोशिश की गई थी. शी के कार्यकाल के पहले दिन से ही चीनी आक्रामकता की झलक सेनकाकू से लेकर दक्षिण चीन सागर और हिमालय तक दिखी.

शी का “चाइना ड्रीम”

हालांकि इन घटनाओं को अर्थव्यवस्था की सुस्त रफ्तार के साथ मिलाकर देखने पर शी जिनपिंग की उपलब्धियों की एक मिलीजुली तस्वीर सामने आती है.

हालांकि, एक क्षेत्र जिसमें शी जिनपिंग ने अभूतपूर्व सफलता हासिल की है वह है सैन्य और  देश के राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र में सुधार. पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) अब एक काफी आधुनिक शक्ति है जो मातृभूमि-केंद्रित रक्षा बल से तब्दील होकर क्षेत्रीय चुनौतियों से निपटने में सक्षम है.

देश के महासचिव और राष्ट्रपति के रूप में, शी जिनपिंग ने “चाइना ड्रीम” की अपनी धारणा के ज़रिए एक व्यापक राष्ट्रवादी दृष्टि प्रदान की, जिसके तहत विश्व व्यवस्था में चीन के वर्चस्व को फिर से स्थापित करने के लक्ष्य के तौर पर सैन्य आधुनिकीकरण को शामिल किया गया. उन्होंने जोर देकर कहा कि पीएलए को अधिक यथार्थवादी प्रशिक्षण, अधिक सुव्यवस्थित संगठन और बेहतर हथियारों और उपकरणों के ज़रिए अपनी युद्ध क्षमता विकसित करके “युद्ध लड़ने और जीतने” का लक्ष्य रखना चाहिए. इसके बाद उन्होंने पीएलए के इतिहास में इसके  संगठनात्मक और कमांड ढांचे को बदल कर सबसे गंभीर सुधार को अंजाम दिया साथ ही इसके तकनीकी परिवर्तन को भी बढ़ावा दिया.
2000 के दशक के मध्य से ही शी जिनपिंग के सुधार की दिशा परिलक्षित होने लगे थे लेकिन शी की अगुआई में दोतरफा प्रयास की शुरुआत हुई. एक तरफ चीनी सैन्य और आंतरिक सुरक्षा प्रणाली को चलाने, संगठित, प्रशिक्षित और सुसज्जित करने के तरीक़े में पूरी तरह बदलाव करने पर ध्यान केंद्रित किया गया. यह पीएलए में भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता को लेकर उठ रहे सवालों और पोलित ब्यूरो की स्थायी समिति के सदस्य झोउ योंगकांग, कभी पीएलए को चलाने वाले केंद्रीय सैन्य आयोग (सीएमसी) के डिप्टी चेयरमैन के रूप में सर्वोच्च पदों पर कार्य करने वाले जनरल शू कैहोउ और गुओ बॉक्सिओंग जैसे ताक़तवर सुरक्षा जारों की  गिरफ्तारी पर आधारित था.

देश के महासचिव और राष्ट्रपति के रूप में, शी जिनपिंग ने “चाइना ड्रीम” की अपनी धारणा के ज़रिए एक व्यापक राष्ट्रवादी दृष्टि प्रदान की, जिसके तहत विश्व व्यवस्था में चीन के वर्चस्व को फिर से स्थापित करने के लक्ष्य के तौर पर सैन्य आधुनिकीकरण को शामिल किया गया.

इस सुधार प्रक्रिया में दो प्रमुख बिंदु रहे हैं – 2012 में सीपीसी की 18वीं कांग्रेस, जहां पीएलए के सुधार के साथ आगे बढ़ने का मूल निर्णय लिया गया था और सीपीसी के महासचिव शी जिनपिंग को भविष्य में कार्य करने के लिए आजादी देना शामिल था. इसके लिए सीपीसी के महासचिव के रूप में उनकी नियुक्ति के साथ-साथ सीएमसी की अध्यक्षता के लिए शी की ताजपोशी को मुमकिन किया गया.

दूसरा नवंबर 2013 में 18वीं केंद्रीय समिति का तीसरा विस्तृत अधिवेशन था, जहां रक्षा सुधारों की बुनियादी रूपरेखा के बारे में और उन्हें कैसे साकार किया जाए उसके तरीक़ों को तय किया गया. मार्च 2014 में शी जिनपिंग ने राष्ट्रीय रक्षा और सैन्य सुधार को असरदार बनाने के लिए सीएमसी के अग्रणी समूह की स्थापना की और इसकी अध्यक्षता की ज़िम्मेदारी ली.  इसके अलावा, सुधारों को आकार देने में 200 से अधिक सैन्य विशेषज्ञों और सैन्य विज्ञान अकादमी और राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय से सलाह ली गई थी.

तीसरे अधिवेशन का संबंधित नतीजा राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग के रूप में सामने आया. इसने अपने अध्यक्ष शी जिनपिंग के हाथों में आंतरिक सुरक्षा से संबंधित शक्तियों को दिया जो आतंकवाद, अलगाववाद और धार्मिक उग्रवाद जैसे आंतरिक मुद्दों और इन चुनौतियों से निपटने में उच्च स्तरीय समन्वय को बढ़ाने की ज़रूरतों से संबंधित थे. सीपीसी संरचना में निचले स्तर तक अधीनस्थ एनएससी की संरचना को खड़ा किया गया.

नवंबर 2014 में शी जिनपिंग ने सीधे पीएलए से संपर्क किया और सीपीसी के 1929 गुटियन सम्मेलन की 85वीं वर्षगांठ को एक मंच के रूप में इस्तेमाल करते हुए सुधार के अपने एज़ेंडे पर समर्थन की  मांग की. माओत्से तुंग द्वारा संबोधित मूल बैठक में मौज़ूद ज़्यादा सैनिक थे; माओ ने जोर देकर कहा कि पीएलए की भूमिका उतनी ही लड़ने की है जितनी कि चीनी क्रांति के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए ज़रूरी है. यह वही बैठक थी जिसने पीएलए और सीपीसी के बीच अनूठे संबंध को आकार दिया. साल 2014 में गुटियन सम्मेलन में शी जिनपिंग ने अपने संबोधन में इसी पर अधिक जोर देने की मांग की. इसने शी को सर्वोच्च नेता के रूप में पेश करने की मांग की; अपने भाषण में शी ने अपना एज़ेंडा स्पष्ट किया: सेना के पार्टी नियंत्रण पर जोर, राजनीतिक रूप से विश्वसनीय अधिकारियों को बढ़ावा देने की ज़रूरत, भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का महत्व और अंत में युद्ध और युद्ध दक्षता की अहमियत को उन्होंने रेखांकित किया.

इस बैठक में सभी शीर्ष जनरलों और अधिकारियों को शामिल किया गया था और यह देश में बड़ी उथल-पुथल के फौरन बाद आयोजित हुई थी, जिसमें जू और गुओ की गिरफ्तारी देखी गई थी  जो कथित तौर पर उच्चतम बोली लगाने वालों को पीएलए के ऊंचे पद बेच रहे थे. शी जिनपिंग को पता था कि उपस्थित लोगों में से अधिकांश किसी न किसी तरह जू और गुओ की गतिविधियों में शामिल रहे होंगे. स्पष्ट रूप से, शी का उद्देश्य पीएलए के शीर्ष अधिकारियों को उनके भ्रष्टाचारी गतिविधियों में शामिल रहने को लेकर चेतावनी देना था. इसके बाद  भ्रष्टाचार विरोधी अभियान में सैकड़ों पीएलए अधिकारियों को बर्ख़ास्त कर दिया गया और गिरफ्तार कर लिया गया.

इस प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण पहलू सीएमसी का सुधार था, जो पीएलए को चलाने वाली संस्था है. संगठन के चार नौकरशाही विभागों को भंग कर दिया गया और उन्हें छोटे विभागों और आयोगों में बांट दिया गया, जिन पर शी ने प्रत्यक्ष तौर पर निगरानी की. सीएमसी का आकार 11 से घटाकर सात कर दिया गया और तटरक्षक और अर्धसैनिक बलों की पीपुल्स आर्म्ड पुलिस को सीएमसी की सीधी कमान के तहत लाया गया. इसके अलावा, पीएलए में किए जा रहे सुधारों को दिखाने के लिए सीएमसी की संरचना में बदलाव किया गया था.जो केंद्रीकरण इसके द्वारा लाया गया था, उसे चीन ने “सीएमसी चेयरमैन रिस्पॉन्सिबिलिटी सिस्टम” कहा था, जिसने शी को खुद पीएलए का शीर्ष कार्यकारी अधिकारी बना दिया था.

दूसरी अहम बात सितंबर 2015 में वो घोषणा थी, जिसके तहत कहा गया कि पीएलए को 300,000 तक कम कर दिया जाएगा, जो मैनपावर इन्टेंसिव संगठन से इसे  टेक्नोलॉजी इन्टेंसिव संगठन में बदलने के गंभीर इरादे को दर्शाता है. इसका नतीजा यह हुआ कि साल 2019 तक पीएलएजीएफ भारतीय सेना के आकार से छोटा हो गया था.

पीएलए को पांच भौगोलिक संयुक्त थिएटर कमांडों में पुनर्गठित किया गया था, जो अपने क्षेत्र के लिए विशिष्ट रणनीति और योजनाओं को विकसित करने के लिए ज़िम्मेदार कहलाए. पीएलए के चार स्तम्भ – ग्राउंड फोर्स या आर्मी, वायु सेना, नौसेना और रॉकेट फोर्स – को एक नए स्ट्रैटेजिक सपोर्ट फोर्स द्वारा समर्थित किया गया था, जिसने अपनी जगह  साइबर और इलेक्ट्रॉनिक क्षमताओं को एक साथ आगे बढ़ाया था. साल 2016 में वुहान में बनाए गए पीएलए लॉजिस्टिक सपोर्ट डिपार्टमेंट के मुख्यालय ने रणनीतिक स्तर पर पीएलए के लॉजिस्टिक को एकीकृत करने का काम किया.

24-26 नवंबर 2015 को सीएमसी के एक प्रमुख कार्य सम्मेलन में बदलावों को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया था, जिसे शी द्वारा एक महीने बाद 31 दिसंबर 2015 को घोषित किया गया  जहां उन्होंने पीएलए ग्राउंड फोर्सेज (पीएलएजीएफ), पीएलए स्ट्रैटिजिक सपोर्ट फोर्स (पीएलएएसएसएफ) और पीएलए रॉकेट फोर्स ( पीएलएआरएफ ) के लिए नई  रूपरेखा प्रस्तुत की. यहां, शी जिनपिंग ने एक ऐसी सेना बनाने का आह्वान किया जो सूचना युग में लड़ सके और जिसमें तीन मोर्चों पर युद्ध-लड़ने की क्षमता हो. महीनों बाद, अप्रैल 2016 में  उन्होंने संयुक्त ऑपरेशन कमांड सेंटर के कमांडर-इन-चीफ का ख़िताब भी हासिल किया, जहां वो सेना के निरीक्षण के दौरान युद्ध की वर्दी में दिखाई दिए.

सुधार से संबंधित विवरण “राष्ट्रीय रक्षा और सैन्य सुधार को असरदार बनाने पर सीएमसी की राय” पर एक दस्तावेज द्वारा आगे बढ़ाया गया था, जिसे 2016 के नए साल में जारी किया गया था  और जिसमें बताया गया था कि चीनी सेना के सीएमसी की उच्च कमान में आमूल चूल परिवर्तन किया गया था.

सीएमसी ने सात सैन्य क्षेत्रों को बदलने वाले पांच भौगोलिक संयुक्त थिएटर कमांड का सीधे तौर पर प्रभार लिया. पीएलए ग्राउंड फोर्सेज (पीएलएजीएफ), पीएलए नेवी (प्लान), पीएलए एयर फोर्स (पीएलएएएफ), पीएलए स्ट्रेटेजिक सपोर्ट फोर्स (पीएलएएसएसएफ) और पीएलए रॉकेट फोर्स (पीएलएआरएफ) का मुख्यालय थिएटर कमांड से अलग होगा और सैनिकों के प्रशिक्षण और प्रावधान के लिए ज़िम्मेदार होगा. पीएलए ग्राउंड फोर्स को सीएमसी से अलग कर दिया गया और इसे अलग पहचान और मुख्यालय दी गई साथ में नए पीएलएएसएसएफ और पीएलएआरएफ को भी दिया गया.

पीएलए को पांच भौगोलिक संयुक्त थिएटर कमांडों में पुनर्गठित किया गया था, जो अपने क्षेत्र के लिए विशिष्ट रणनीति और योजनाओं को विकसित करने के लिए ज़िम्मेदार कहलाए. पीएलए के चार स्तम्भ – ग्राउंड फोर्स या आर्मी, वायु सेना, नौसेना और रॉकेट फोर्स – को एक नए स्ट्रैटेजिक सपोर्ट फोर्स द्वारा समर्थित किया गया था.

इतना ही नहीं, शी जिनपिंग ने पीएलए के तकनीकी ओरिएंटेशन (अभिविन्यास)  को बढ़ावा देने के लिए मिलिट्री –सिविल फ्यूज़न (एमसीएफ) की रणनीति को मज़बूत किया. एमसीएफ का लक्ष्य सैन्य क्षमता को बढ़ावा देने के लिए नागरिक उपयोग के लिए चीन द्वारा विकसित की जा रही कई उच्च तकनीकों का लाभ उठाना था.एक महत्वपूर्ण  सिविल इंडस्ट्रियल और रिसर्च एंड डेवलपमेंट आधार को स्थापित करने के लिए जासूसी और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर सहित कई तरह के साधनों का इस्तेमाल करने के बाद, बीजिंग अब यह सुनिश्चित करना चाहता था कि पारंपरिक रूप से बिना हस्तक्षेप के सैन्य क्षेत्र इससे लाभान्वित होंगे.इसके अलावा यह उम्मीद की गई कि  एआई, उन्नत और नई सामग्री  और ऊर्जा प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में चीन की राष्ट्रीय क्षमताएं संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएस) से मेल खाएं और यहां तक कि उससे एक कदम आगे निकल सकें.

शी जिनपिंग ने अक्टूबर 2017 में 19वीं सीपीसी कांग्रेस के सामने अपनी कार्य रिपोर्ट में पीएलए के लक्ष्यों को रखा. उन्होंने कहा कि 21वीं सदी के मध्य तक  पीएलए को “एक विश्व स्तरीय सेना” बन जाना चाहिए.युद्ध कौशल में तकनीक का महत्व होगा और इनोवेशन पर ज़्यादा से ज़्यादा जोर दिया जाएगा. पीएलए को अपनी संयुक्त युद्ध क्षमताओं को बढ़ाना होगा, साथ ही कहीं भी संचालन और लड़ने की क्षमता विकसित करनी होगी.

इसके साथ ही बड़े लक्ष्य भी निर्धारित किए गए : 2020 तक, मशीनीकरण “मूल रूप से हासिल किया जाएगा” क्योंकि सूचना प्रौद्योगिकी एप्लीकेशन तब तक एक लंबा सफर तय कर चुका होगा और रणनीतिक क्षमताओं में बेहद सुधार हो चुका होगा. ऐसे में साल 2035 तक आधुनिकीकरण का काम काफी हद तक पूरा हो जाएगा.

कुल मिलाकर इन लक्ष्यों को वास्तव में हासिल कर लिया गया है.हालांकि इसी दौरान शी जिनपिंग ने देंग शियोपिंग की “अपनी क्षमता को छिपा कर रखें” वाली रणनीति को छोड़कर चीन के सैन्य आधुनिकीकरण पर भी जोर दिया. नतीज़तन चीनी नीतियों से दुनिया भर में हलचल मच गई और आख़िरकार 2018 से  अमेरिका और यूरोप ने प्रमुख प्रौद्योगिकी और हाई इंड सेमी कंडक्टरों तक चीनी पहुंच को बाधित करना शुरू कर दिया. चीनी आक्रामकता के परिणामस्वरूप पीएलए को अब जापान, ताइवान, फिलीपींस से लेकर अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और भारत तक हिंद-प्रशांत विरोधियों का सामना करना पड़ रहा है.

इस साल की शुरुआत में मनोज केवलरमानी और सुयश देसाई द्वारा शी जिनपिंग के सैन्य सुधारों के आकलन से पता चलता है कि उनके शासनकाल के सुधारों ने वास्तव में चीन को अपने राष्ट्रीय सुरक्षा हितों को आगे बढ़ाने में मदद की है  लेकिन पीएलए का एज़ेंडा “विदेशों में ख़ुद को ताक़तवर साबित करना” बेहद सीमित है और भविष्य में भी यह सीमित ही रहेगा. हालांकि इसमें निश्चित रूप से भारत जैसे देशों के ख़िलाफ़ ख़ुद को ताक़तवर साबित करने की क्षमता है, जिसके साथ इसका क्षेत्रीय विवाद लंबे समय से रहा है  लेकिन “पीएलए की युद्ध की तैयारी को जंग के मैदान पर अभी परखा जाना बाकी है”.

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Manoj Joshi

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Manoj Joshi is a Distinguished Fellow at the ORF. He has been a journalist specialising on national and international politics and is a commentator and ...

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