Published on Apr 05, 2023 Updated 0 Hours ago

भूटान सरकार ने युवाओं के कौशल को उन्नत करने, नौकरियों के बाज़ार में मांग-आपूर्ति की खाई को पाटने और भविष्य में देश से प्रतिभा के पलायन की रोकथाम करने के लिए कई सुधार सामने रखे हैं 

भूटान: देश से युवाओं का पलायन रोकने के लिए अपनायी जा रही नीतियों की पड़ताल!

भूटान में घटते प्रजनन दर के मद्देनज़र 2021 के मध्य में देश के प्रधानमंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि “सरकार भूटानियों के बग़ैर भूटान नहीं चाहती और हम ये भी नहीं चाहते कि ये मुट्ठीभर भूटानी लोग बाक़ी देशों में काम करें”. हाल के समय में भूटान एक नए चुनौती से जूझ रहा है. वो चुनौती है- बड़ी तादाद में भूटानियों का देश के बाहर पलायन. पिछले दो वर्षों में अकेले ऑस्ट्रेलिया में ही 11,000 से भी ज़्यादा भूटानी युवाओं को शिक्षा वीज़ा हासिल हो चुका है. देश के अनेक अनुभवी और मध्यम दर्जे के नौकरशाहों, शिक्षकों और चिकित्सा विशेषज्ञों समेत निजी और राजकीय स्वामित्व वाले उद्यमों के कर्मचारी भी बेहतर अवसरों की तलाश में देश छोड़कर बाहर जा चुके हैं. नतीजतन 8 लाख से भी कम आबादी वाले इस देश के हर क्षेत्र में श्रम संसाधन की किल्लत महसूस की जा रही है. जनसंख्या से जुड़ी चुनौतियों, बुज़ुर्ग होती आबादी, घटती आर्थिक गतिविधियों और उत्पादकता में गिरावट से जुड़ी चिंताएं संसद और मीडिया घरानों में उभरती रही हैं. अनेक कारकों का इन चुनौतियों को विकराल रूप देने में योगदान रहा है. ऐसे में भूटान की सरकार बहुप्रतीक्षित सुधारों की क़वायद को आगे बढ़ा रही है. हालांकि देश के भविष्य पर इन सुधारों के प्रभाव और भावी दशादिशा को आकार देने में इनकी भूमिका अभी भविष्य के गर्भ में है.

हाल के समय में भूटान एक नए चुनौती से जूझ रहा है. वो चुनौती है- बड़ी तादाद में भूटानियों का देश के बाहर पलायन. पिछले दो वर्षों में अकेले ऑस्ट्रेलिया में ही 11,000 से भी ज़्यादा भूटानी युवाओं को शिक्षा वीज़ा हासिल हो चुका है.

पलायन को मजबूर: रोज़गार और शिक्षा की तलाश    

भूटान की सीमा चारों ओर से ज़मीनी सरहदों से घिरी है. वहां की भौगोलिक स्थिति और जलवायु से जुड़े हालात कठिनाइयों भरे हैं. ऐसे में वो लंबे अर्से से सीमित आर्थिक विकास और बेरोज़गारी की चुनौतियों का सामना करता आ रहा है. बेशक़ देश की सार्वभौम शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा नीतियों ने जनसंख्या की गुणवत्ता में सुधार लाया है. साथ ही श्रम संसाधनों की तादाद में भी बढ़ोतरी हुई है, लेकिन श्रम बाज़ार में नौकरियों की मांग और उनकी आपूर्ति में विषमता बनी हुई है. भूटान की अर्थव्यवस्था व्यापक रूप से श्रम-आधारित पूंजी-सघन विकास और पनबिजली उत्पादन पर निर्भर रही है. इसने युवाओं में बेरोज़गारी और रोज़गार के लिए अयोग्यता की समस्याओं को गहरा कर दिया है. समय के साथ-साथ भूटान की युवा बेरोज़गारी बढ़ती चली गई है. 2013 में ये 9.6 प्रतिशत थी, 2017 में बढ़कर 12.3 प्रतिशत हो गई और 2021 में 21 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई. 

बाद के वर्षों में जैसे-जैसे ये समस्या संगीन होती गई, भूटान ने अपने युवाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय श्रम बाज़ार के दरवाज़े खोल दिए. 2010 के दशक की शुरुआत से सरकार ने अन्य देशों के साथ नए समझौता-पत्रों पर दस्तख़त करना शुरू कर दिया. साथ ही भूटानी नागरिकों को रोज़गार देने के इच्छुक कंपनियों के साथ क़रीब से तालमेल करने की क़वायद भी शुरू कर दी गई. उसने इन इकाइयों को बुनियादी ढांचे और प्रशिक्षण से जुड़ी सुविधाएं भी मुहैया करवाई. साथ ही अपने नागरिकों के घरेलू नौकरों और ड्राइवरों के तौर पर काम करने पर रोक लगा दिया. दूसरी ओर, युवा बेरोज़गार भूटानियों को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार की थाह लेने को लेकर प्रोत्साहित करने के लिए वहां की सरकार ने सस्ते ऋण मुहैया कराना शुरू कर दिया ताकि वो इनमें से कुछ देशों की यात्राएं कर सकें. भूटानी युवाओं द्वारा स्थायी नौकरियां ढूंढ लिए जाने की सूरत में सरकार, प्रवास से जुड़े प्रतिबंधों में ढील देने को भी तैयार हो गई.

2015 में भूटान ने थाईलैंड के साथ एक समझौता पत्र पर दस्तख़त किया. इसके ज़रिए 12 हज़ार भूटानी कामगारों को थाईलैंड में रोज़गार दिए जाने की क़वायद को औपचारिक रूप दे दिया गया. उसी साल सरकार ने भूटान के 100 कामगारों के पहले जत्थे को कुवैत भेजा. 2017 में भूटानी सरकार ने अपने युवाओं को ऑस्ट्रेलिया में नौकरियों के अवसरों की तलाश करने की दिशा में मदद करने के लिए एक नई ऋण योजना की शुरुआत की. उसी साल प्रशिक्षण और कमाई कार्यक्रम के तहत भूटान से पहला जत्था जापान भेजा गया. 2019 में भूटान की सरकार जापान के साथ एक और रोज़गार कार्यक्रम पर रज़ामंद हो गई. इसे तकनीकी इंटर्नशिप प्रशिक्षण कार्यक्रम का नाम दिया गया. कोविड का प्रकोप फैलने तक भूटान के युवा मोटे तौर पर भारत, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कुवैत, क़तर, थाईलैंड, जापान और ऑस्ट्रेलिया में काम कर रहे थे.

कोविड-19 और लॉकडाउन के सख़्त प्रावधानों ने भूटान में आर्थिक दुश्वारियां पैदा कर दीं. ऐसे में अन्य देशों में अच्छी कमाई कर रहे और बेहतर जीवनशैली वाले भूटानियों ने एक लुभावने कारक की भूमिका निभाई. कोविड के प्रकोप से पहले ही भूटान में कई तरह की चुनौतियां मुंह बाए खड़ी थीं.

कोविड-19 और लॉकडाउन के सख़्त प्रावधानों ने भूटान में आर्थिक दुश्वारियां पैदा कर दीं. ऐसे में अन्य देशों में अच्छी कमाई कर रहे और बेहतर जीवनशैली वाले भूटानियों ने एक लुभावने कारक की भूमिका निभाई. कोविड के प्रकोप से पहले ही भूटान में कई तरह की चुनौतियां मुंह बाए खड़ी थीं. इनमें वेतन को लेकर निराशा, पेशेवर विकास का अभाव, कार्यक्षेत्र के ख़राब हालात, काम का भारी बोझ और बेहतरीन अवसरों का अभाव शामिल हैं. इसके अलावा रोज़गार और शिक्षा से जुड़े व्यवस्थागत मसले और नौकरियों में असुरक्षा का डर भी मौजूद था. उधर विदेशों में काम के आरामदायक घंटों के आकर्षण और कोविड पर क़ाबू पाए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय सरहदों के दोबारा खुलने से बड़े पैमाने पर पलायन को बढ़ावा मिला. छात्र, बेरोज़गार युवा और पेशेवर कामकाजी लोगों ने अब बेहतर जीवनशैली और नौकरियों की तलाश में देश छोड़ना शुरू कर दिया.

प्रवास के रुझानों का आकलन:    

विदेशों में कार्यरत भूटान के तमाम दूतावासों और मिशनों में निबंधित लोगों के बहीखातों की पड़ताल कर विदेशी मामलों और बाहरी व्यापार के मंत्रालय (MOFAET) ने ख़ुलासा किया है कि 32,258 भूटानी नागरिक 113 देशों में निवास कर रहे हैं. हालांकि आंकड़ों और रिकॉर्डिंग के सीमित संग्रह के चलते इस चुनौती का असल स्वभाव अब भी अज्ञात है. मंत्रालय के ख़ुलासे के हिसाब से टेबल 1 में भूटानी नागरिकों के शीर्ष ठिकानों की ओर इशारा किया गया है. अन्य देशों के आंकड़ों के साथ इस आकलन का क़रीब से पड़ताल करने पर ऐसे संकेत मिलते हैं कि भूटान से होने वाला प्रवास प्रमुख रूप से रोज़गार से जुड़े मौक़ों से प्रभावित होता है. इसके बाद शैक्षणिक अवसरों का क्रम आता है. 

टेबल1. प्रवास के हिसाब से भूटानी नागरिकों के शीर्ष ठिकाने

देश ऑस्ट्रेलिया भारत कुवैत थाईलैंड अमेरिका संयुक्त अरब अमीरात क़तर
भूटानी नागरिकों की संख्या 10,911 9,519 3,184 1,356 1,327 828 822

स्रोत: द भूटानीज़

भूटान से बाहर निकलने को लेकर प्रोत्साहनकारी कारकों के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया में बेहतर जीवनशैली, आर्थिक अवसरों, काम के आरामदायक घंटों और शिक्षा के मौक़ों ने हाल के वर्षों में भूटान के कई लोगों को आकर्षित किया है. 2021 में ऑस्ट्रेलिया की जनगणना से पता चला कि वहां तक़रीबन 12 हज़ार भूटानी निवास करते हैं. अंतरराष्ट्रीय श्रम बाज़ार के लिए खुलने के भूटान के प्रयासों के साथ-साथ हाल के वर्षों में प्रवास से जुड़े रुझानों में बढ़ोतरी हुई है. 2001 से 2010 के बीच तक़रीबन 1,579 भूटानी नागरिक ऑस्ट्रेलिया पहुंचे. 2011-2015 के बीच ये तादाद बढ़कर 3,290 हो गई और 2016-2021 के बीच ये 6,993 तक पहुंच गई. इन प्रवासियों में से क़रीब 67 प्रतिशत ने किसी शैक्षणिक संस्थान में शिरकत नहीं की. इससे साफ़ है कि रोज़गार, इन प्रवासी भूटानियों की प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर है. शिक्षा के संदर्भ में भूटानियों के पसंदीदा ठिकाने के तौर पर धीरे-धीरे ऑस्ट्रेलिया ने भारत की जगह ले ली है. 2002-2020 के बीच ऑस्ट्रेलिया ने भूटान से आए 5,803 छात्रों की मेज़बानी की. 2021 में ऑस्ट्रेलिया में शिक्षा हासिल कर रहे भूटानी छात्रों की संख्या बढ़कर 2,659 हो गई और 2022 में ये और उछाल के साथ 4,151 तक पहुंच गया.  

पीढ़ियों से भारत और भूटान के बीच जनता के स्तर पर संबंधों को कई कारकों ने ख़ूब बढ़ावा दिया है. इनमें आर्थिक अवसर, वीज़ा से जुड़ी न के बराबर पाबंदियां, नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम, शैक्षणिक अवसर और बौद्ध पर्यटन के साथ-साथ शिक्षा शामिल हैं. भूटान के विदेशी मामलों और बाहरी व्यापार के मंत्रालय के हालिया आंकड़ों से पहले तक भूटानी नागरिकों के शीर्ष ठिकाने के तौर पर भारत का नाम आता था. पिछले कुछ वर्षों में भारत में पढ़ाई कर रहे भूटानी छात्रों के प्रतिशत और उनकी औसत संख्या में गिरावट का दौर जारी है (टेबल 2 देखिए). ऐसा लगता है कि भूटानी छात्रों को अपनी शिक्षा के लिए वैकल्पिक ठिकाने (जैसे ऑस्ट्रेलिया) मिल गए हैं. भारत में काम कर रहे भूटानी नागरिकों से जुड़े आंकड़ों के अभाव के बावजूद ये माना जा सकता है कि अब भी प्रवास की सबसे बड़ी वजह रोज़गार ही बनी हुई है. मिसाल के तौर पर 2017 में भारत ने भूटान के तक़रीबन 6580 नागरिकों की मेज़बानी की. इनमें से सिर्फ़ 2,284 ही छात्र थे (टेबल 2 देखिए). साफ़ है कि भूटान से आए बहुसंख्यक लोग रोज़गार में लगे थे या नौकरियों के अवसरों की तलाश कर रहे थे. होटल उद्योग, कॉल सेंटर्स, ब्यूटी पार्लर्स, सैलॉन और दूसरे संबंधित उद्योग भूटानी नागरिकों को रोज़गार देने वाले प्रमुख क्षेत्रों में शुमार हैं. 

टेबल 2. भारत में भूटानी छात्र  

साल 2012-13 2013-14 2014-15 2015-16 2016-17 2017-18 2018-19 2019-20 2020-21
छात्रों की संख्या 2468 2891 2697 2925 2284 1999 1811 1851 1827
भारत के कुल अंतरराष्ट्रीय छात्रों में भूटान का हिस्सा 7% 7% 6% 6% 4.8% 4.3% 3.8% 3.8% 3.8%

स्रोत: उच्च शिक्षा पर अखिल भारतीय सर्वेक्षण (2012-2021)

रोज़गार, बेहतर तन्ख़्वाहों और ऊंची जीवनशैली ने भूटानी नागरिकों को खाड़ी देशों का रुख़ करने को प्रोत्साहित किया है. इनमें कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और क़तर जैसे देश शामिल हैं. कुवैत की ओर प्रवास के रास्ते तो 2014 से ही वजूद में थे, जबकि खाड़ी के अन्य देश हाल के वर्षों में भूटानियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गए हैं. दरअसल, ऑस्ट्रेलिया में डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के लिए वीज़ा से इनकार कर दिए जाने के लगातार बढ़ते मामलों और भूटान में शिक्षा ऋणों पर रोक के चलते ऐसे हालात बने हैं. खाड़ी के देशों में कार्यरत श्रमशक्ति में स्कूल और कॉलेज शिक्षित, दोनों प्रकार के लोग हैं. हालांकि क़तर में तक़रीबन 70 फ़ीसदी भूटानी कामगार ग्रेजुएट हैं.

अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय, सांस्कृतिक समानता और नौकरियों के अवसरों के चलते भूटान के अनेक नागरिक थाईलैंड की ओर आकर्षित हुए हैं. 2020 में ऑस्ट्रेलिया और भारत के बाद थाईलैंड, भूटानी छात्रों का तीसरा सबसे पसंदीदा ठिकाना बन गया. भूटान ने अपने नागरिकों को थाईलैंड में स्थायी नौकरी ढूंढने और अवसरों की तलाश करने को लेकर प्रेरित भी किया है. 2012 से भूटानी नागरिकों को थाईलैंड में अग्रेज़ी पढ़ाने की इजाज़त दिए जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी. भर्ती एजेंसियां, अन्य उद्योगों (जैसे जहाज़रानी उद्योग और होटल) में भी भूटानी नागरिकों को रोज़गार दिलाने की कोशिशें करती आ रही हैं.

ज़ाहिर तौर पर शिक्षा और रोज़गार, प्रवास के लिए आकर्षक कारक रहे हैं. ऐसे में अमेरिका में भूटानी नागरिकों का प्रवास कहीं ज़्यादा पेचीदा सबब रहा है. साल 2000 में अमेरिका तक़रीबन 200 भूटानी नागरिकों की मेज़बानी कर रहा था. आज अमेरिका में रह रहे ज़्यादातर भूटानी नागरिक शरणार्थी/पनाह चाहने वालों के तौर पर स्थायी निवास के परमिट की जुगत लगाए हुए हैं (टेबल 3 देखिए). प्रवास से जुड़ी भूटान की मौजूदा चुनौतियों के लिहाज़ से ये ज़्यादा चिंताजनक बात नहीं है. अमेरिका में प्रवास से जुड़ी प्राथमिक चुनौती अमेरिका में मौजूद भूटानी छात्रों से जुड़ी है. इसके मद्देनज़र भूटानी परिवारों और नज़दीकी रिश्तेदारों ने अमेरिका की ओर प्रवास के अवसर मुहैया कराने में अहम भूमिका निभाई है. अमेरिका में अस्थायी कार्य वीज़ा पर चंद मुट्ठीभर भूटानी नागरिक ही निवास करते आ रहे हैं. रोज़गार से जुड़े अपने अनुभवों के ज़रिए अमेरिका में स्थायी निवास का दर्जा हासिल कर पाने वाले भूटानियों की तादाद तो और भी कम है.       

टेबल 3. अमेरिकी में भूटानी नागरिक

साल 2012 2013 2014 2015 2016 2017 2018 2019 2020 2021
स्थायी निवासी 10,198 8,954 7,298 6,325 4,217 2,940 2,350 1,441 1091 137
स्थायी निवासी (शरणार्थी/शरण चाहने वाले) 10,171 8,911 7,254 6,290 4,153 2,873 2,283 1,360 1,045 80
स्थायी निवासी (रोज़गार आधारित पसंद) 4 9 ख़ुलासा नहीं 4 11 6 7 17 ख़ुलासा नहीं ख़ुलासा नहीं
स्थायी निवासी (परिवार प्रायोजित/क़रीबी रिश्तेदार) 19 29 33 28 50 49 55 56 31 46
छात्र और आदान-प्रदान अतिथि 140 158 197 255 233 233 226 226 75 106
अस्थायी कामगार प्रवेश और परिवार 9 14 22 18 16 28 24 29 17 उपलब्ध नहीं

स्रोत: ईयरबुक ऑफ़ इमिग्रेशन स्टैटिस्टिक्स, डिपार्टमेंट ऑफ़ होमलैंड सिक्योरिटी (2012-21)

आगे की राह:

इस तरह की मौजूदा चुनौती के साथ भूटान की सरकार ने कुछ बहुप्रतीक्षित और विशाल पैमाने के सुधारों को लागू किया है. अकेले 2022 के आख़िर में ही सरकार ने सुधारों से जुड़े 46 क़ानून संसद के सामने रखे. इन सुधारों के तहत सिविल सेवा में लेटरल एंट्री की सुविधा शुरू किए जाने की बात शामिल है. इसके अलावा मंत्रालयों और संगठनों के पुनर्गठन के साथ-साथ सेवाओं की जवाबदेही, वेतनमान और सेवानिवृति की आयु में बढ़ोतरी की क़वायद भी इस सूची में शामिल है. अफ़सरशाही में लालफ़ीताशाही को सीमित करने के लिए भी उपाय किए जा रहे हैं. साथ ही देश में निजी क्षेत्र, निवेश, कारोबार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए भी कई क़दम उठाए गए हैं. पहले से ज़्यादा कौशल और रोज़गार क्षमता तैयार करने के लिए शिक्षा क्षेत्र में सुधारों की बयार बहाई गई है. देश के श्रम बाज़ार में खाई को बढ़ावा देने वाले शैक्षणिक कार्यक्रमों को या तो हटा दिया गया है या नए सिरे से उनका स्वरूप तैयार किया गया है.

पहले से ज़्यादा कौशल और रोज़गार क्षमता तैयार करने के लिए शिक्षा क्षेत्र में सुधारों की बयार बहाई गई है. देश के श्रम बाज़ार में खाई को बढ़ावा देने वाले शैक्षणिक कार्यक्रमों को या तो हटा दिया गया है या नए सिरे से उनका स्वरूप तैयार किया गया

सरकार ने ग्यालसुंग परियोजना को भी आगे बढ़ाया है. इस कार्यक्रम के तहत 18 साल की आयु पूरी कर लेने वाले भूटानी नागरिकों को एक साल का प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरा करना होगा. इसमें तीन महीनों के बुनियादी फ़ौजी प्रशिक्षण के बाद कुछ क्षेत्रों में 9 महीनों के विशिष्टतापूर्ण प्रशिक्षण को शामिल किया गया है. इनमें निर्माण प्रौद्योगिकियां, कम्प्यूटिंग, उद्यमिता, कृषि आदि शामिल हैं. ये परियोजना 2024 में शुरू होगी और इसमें तक़रीबन 13 हज़ार भूटानी युवा शामिल होंगे. उम्मीद की जा रही है कि ये कार्यक्रम युवाओं में देशभक्ति की भावना भरने के साथ-साथ उनके कौशल को उन्नत करेगा. इससे रोज़गार के बाज़ार में मांग-आपूर्ति से जुड़ी खाई को पाटने में मदद मिलेगी और देश से प्रतिभाओं के पलायन को रोकना मुमकिन हो सकेगा.

निश्चित तौर पर वक़्त पर इन सुधारों को अमल में लाए जाने से भूटान में थोड़ी-बहुत आशा के किरण का संचार हुआ है. ज़ाहिर है देश के आर्थिक हालात को सुधारने और आगे प्रवास की रोकथाम करने में इन उपायों के प्रभाव और कार्यकुशलता का देश के भविष्य पर निर्णायक असर होने वाला है.  


लेखक प्राथमिक आंकड़ों के संग्रह में सहायता करने के लिए ORF इंटर्न हैरिस अमजद के आभारी हैं.

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Aditya Gowdara Shivamurthy

Aditya Gowdara Shivamurthy

Aditya Gowdara Shivamurthy is an Associate Fellow with the Strategic Studies Programme’s Neighbourhood Studies Initiative.  He focuses on strategic and security-related developments in the South Asian ...

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