Published on Sep 17, 2021 Updated 0 Hours ago

जब से नया राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून बनाया गया है तब से हांगकांग छात्रों के एक पसंदीदा गंतव्य के रूप में अपनी हैसियत खोता जा रहा है.

हॉन्गकॉन्ग में ‘देशभक्ति’ का खेल: राजनीतिक व्यवस्था के बाद क्या बीजिंग का अगला निशाना न्यायपालिका है?

नेशनल पीपुल्स कांग्रेस और चाइनीज़ पीपुल्स पॉलिटिकल कंसल्टेटिव कॉन्फ्रेंस की वार्षिक बैठक चीन के राजनीतिक कैलेंडर में काफी अहमियत रखती है. इस साल की बैठक विशेष तौर पर अहम हो जाती है क्योंकि यह 2022 की राष्ट्रीय कांग्रेस से पहले हो रही है. अगले साल राष्ट्रीय कांग्रेस में उसके शीर्ष नेता का नाम तय किया जाएगा. उस बैठक में 14वीं पंच वर्षीय योजना और 2035 तक के आर्थिक विकास के लिए एक मास्टर प्लान को मंज़ूरी दी जाएगी. इसके अलावा बैठक में चीन की संसद द्वारा स्वीकार किए गए उस प्रस्ताव को भी मंज़ूरी मिलेगी जिसमें हांगकांग की चुनावी प्रणाली में सुधार किया गया है. इस सुधार के बाद यह सुनिश्चित हो सकेगा कि हांगकांग में सार्वजनिक पदों पर केवल ‘देशभक्त’ लोग ही बैठ सकेंगे.

देशभक्त की क्या हो परिभाषा?

वैसे तो शी जिनपिंग की चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) ने अन्य क्षेत्रों में डेंग जियोपिंग के सिद्धांतों को त्याग दिया है लेकिन शहर-राज्य शासन के मसले पर उन्होंने उनके ‘देशभक्ति के सिद्धांतों’ को अपना लिया है. दरअसल, 1980 के दशक में हांगकांग को इंग्लैंड के शासन से मुक्त कर उसे चीन के सौंपने को लेकर एक प्रतिनिधिमंडल के साथ चल रही वार्ता के दौरान डेंग ने कहा था कि वह उस द्वीप (हांगकांग) के मामले को देखने के लिए देशभक्त चाहते हैं. वह देशभक्त लोगों को इस तरह परिभाषित करते थे. ऐसे लोगों के दिल में मुख्य चीन के प्रति सम्मान होना चाहिए, उन्होंने इस द्वीप पर मुख्य भूमि की संप्रभुता की बहाली का समर्थन किया हो और उनकी इच्छा एक स्थिर और समृद्ध हांगकांग की रही हो. उन्होंने कहा था, ‘‘जो इस ज़रूरत को पूरा करते हैं वे देशभक्त हैं. हम उनसे यह नहीं चाहते हैं कि वह चीन की समाजवादी प्रणाली के समर्थक हों.’’

इस तरह 2020 में तमाम लोगों ने महसूस किया कि हांगकांग के लिए एक राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून लागू करने वाला सीसीपी का यह कदम उनकी राजनीतिक आजादी और नागरिक अधिकारों के लिए ख़तरा है. 

1984 की चीन-इंग्लैंड की संयुक्त घोषणा के बाद हांगकांग फिर से चीनी नियंत्रण में आ गया. इस घोषणापत्र के अनुसार हांगकांग में 2047 तक उसकी अर्थव्यवस्था और साझी क़ानूनी प्रणाली (common law legal system) को बनाए रखने की बात कही गई थी. इस पुनर्गठन के तहत एक ‘चुनाव समिति’ बनी, जिसकी ज़िम्मेदारी हांगकांग के मुख्य कार्यकारी को चुनना है. वह समिति ही विधान परिषद (Legislative Council) के सदस्यों को नामित करेगी. चुनाव समिति को भी मौजूदा 1200 सदस्यों से बढ़ाकर 1500 किया जाएगा. चुनाव पैनल की अतिरिक्त 300 सीटों को नेशनल पीपुल्स कांग्रेस और चाइनीज़ पीपुल्स पॉलिटिकल कंसल्टेटिव कंफ्रेंस द्वारा भरा जाएगा.

नेशनल पीपुल्स कांग्रेस के एक उप चान हिऊ फंग (Chan Hiu-fung) ने कहा, ‘कुछ तत्व चुनावी प्रचार का इस्तेमाल राष्ट्र को तोड़ने या हांगकांग और चीन में सत्ता को उखाड़ फेंकने के विचार को प्रसारित करने के लिए कर रहे हैं.’ वर्ष 2019 में हांगकांग में एक प्रत्यर्पण क़ानून को लागू करने का कड़ा विरोध किया गया. इस क़ानून के परिणामस्वरूप हांगकांग के निवासियों को मुख्य भूमि में मुकदमे का सामना करना पड़ सकता है. इस तरह 2020 में तमाम लोगों ने महसूस किया कि हांगकांग के लिए एक राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून लागू करने वाला सीसीपी का यह कदम उनकी राजनीतिक आजादी और नागरिक अधिकारों के लिए ख़तरा है. यह विडंबना ही है कि 1997 में सत्ता हस्तांतरण के वक्त हांगकांगवासी, जो पहले कभी भी सीसीपी के अधीन नहीं रहे थे, उन्होंने इसका उत्सव मनाया था. लेकिन क़रीब दो दशक बाद एक पीढ़ी जिनके पास इस द्वीप पर ब्रिटिश शासन की यादें हैं, उन्होंने विरोध के तौर पर विधान परिषद के भीतर यूनियन जैक झंडा फहरा दिया. वर्ष 1997 में इस द्वीप पर रह रहे लोगों की पहचान के लिए एक सर्वे किया गया था. इसके नतीजे चौंकाने वाले थे. सर्वे में शामिल 5 में से केवल एक व्यक्ति ने खुद की पहचान ‘चीनी’ बताई, जबकि 2019 में 10 में से एक से भी कम व्यक्ति ऐसे थे जो खुद को विशेषतौर पर चीनी बताई. कहने का मतलब यह है कि हांगकांगवासी की पहचान में वृद्धि ही सीसीपी की असली चुनौती है.

हांगकांग एजुकेशन ब्यूरो की नई नियमावली में स्कूली बच्चों को राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून के उल्लंघन पर दंड के बारे में बताने को कहा गया है. शैक्षणिक संस्थाओं को बच्चों के व्यवहार पर नजर रखने और लोकतंत्र समर्थक आंदोलनों का किसी तरह समर्थन करने पर रिपोर्ट करने को कहा गया है. 

हांगकांगवासी चीनी हस्तक्षेप से नाराज क्यों?

हांगकांगवासी उनके मामले (शिक्षा से लेकर अर्थव्यवस्था तक) में बढ़ते मुख्य चीनी हस्तक्षेप से नाराज हैं. हांगकांग की अर्थव्यवस्था के साथ चीन व्यापक एकीकरण चाहता है. ऐसी भावना द्वीप के कुछ लोगों की भी है. ऐसे ही व्यक्ति हैं शहर-राज्य के नेशनल पीपुल्स कांग्रेस के उप और बेसिक लॉ प्रोमोशन कमेटी के सदस्य डेविड वोंग यायू कर. मुख्य चीन की ‘ग्रेटर बे एरिया’ (Greater Bay Area) परियोजना के तहत हांगकांग और गुआंगडोंग (Guangdong) के शहरों के बीच ज्यादा जुड़े हुए आर्थिक जोन बनाने की योजना है. हालांकि, इसका और पारिस्थितिक चिंताओं के कारण हांगकांग के सबसे बड़े द्वीप लांताऊ (Lantau) में सार्वजनिक आवास और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए भूमि लेने के प्रस्ताव जैसी अनपेक्षित लाभ प्राप्त करने वाली परियोजनाओं का विरोध हो रहा है. नवंबर 2020 में विधान परिषद से विरोधी सदस्यों के निष्कासन और इस्तीफ़े के एक दौर के बाद हांगकांग की सरकार ने परियोजना को शहर-राज्य की मुख्य कार्यकारी कैरी लैम के समक्ष विशेष प्राथमिकता (front burner) पर विचार करने के लिए रख दी. इसके बाद उन्होंने लांताऊ के विकास पर अपने अहम नीतिगत भाषण में जोर दिया.

हांगकांग में सेंट्रल पीपुल्स सरकार का लाइजन ऑफिस (Liaison Office) बीजिंग और शहर-राज्य सरकार के बीच एक कड़ी के रूप में काम करता है. यही ऑफिस ‘गुयांगडोंग शीन वेंहुआ (Guangdong Xin Wenhua)’ नामक एक कंपनी के ज़रिए पब्लिशिंग हाउसों को नियंत्रित करता है. लाइजन ऑफिस ने हांगकांग में हुए विरोध प्रदर्शनों से जुड़े कथानक को अपनी मीडिया पर पकड़ के ज़रिए बदलने (mould) की कोशिश की. जून 2020 में हांगकांग में चीनी भाषा के एक अखबार वेन वेई पो (Wen Wei Po) ने कहा कि उसे पाठकों से शिकायत मिली है कि सार्वजनिक पुस्तकालयों में ऐसी किताबें थीं जिसने खुलेआम शहर-राज्य की स्वतंत्रता को बढ़ावा दिया. विधान परिषद के पूर्व सदस्य वांग गुयोजिंग (Wang Guoxing) ने आरोप लगाया कि ये किताबें नफ़रत और अलगाव को बढ़ावा देती हैं और उन्होंने आग्रह किया कि इन किताबों को अलमारियों से हटा दिया जाए. इसके बाद हांगकांग के संस्कृति विभाग ने अपने संग्रह की समीक्षा की.

चुनावी और शैक्षणिक व्यवस्था में बदलाव

एक तरफ चीन, हांगकांग शहर-राज्य में विरोध प्रदर्शन को चीन विरोधी ताकतों का करतूत करार देने में लगा हुआ है. वहीं दूसरी ओर हांगकांग के लोग प्रदर्शनों के दौरान सीसीपी की राजनीतिक लामबंदी को उन लोगों द्वारा गठित सांस्कृतिक समूहों के काम के रूप में देखते हैं जो मुख्य चीन के प्रांतों से यहां आए हैं. शहर-राज्य में राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून को लागू किए जाने के एक माह पहले हांगकांग में फूजियन एसोसिएशन ऑफ सोसायटीज (Fujian Association of Societies) के पदाधिकारियों ने चीन के अपने दौरे के दौरान सीसीपी और सरकार के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात की थी. इन लोगों में फूजी के सीसीपी के प्रमुख यू वेग्यू (Yu Weiguo) और गवर्नर तांग डेंगजी (Tang Dengjie) शामिल थे. इसके अलावा एसोसिएशन ने विशेष प्रशासित क्षेत्र में सरकार का समर्थन करने का वादा किया. इस चीज ने हांगकांगवासियों के भीतर मुख्य चीन के लोगों के बारे में संदेश पैदा कर दिया और 2019 के प्रदर्शनों के दौरान मूल फूजीवासियों और प्रदर्शनकारियों के बीच संघर्ष देखा गया. यह संघर्ष विशेषतौर पर नॉर्थ प्वाइंट जिले में देखा गया. फूजी के लोग भी सड़क पर उतरे और उन्होंने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हांगकांग की पुलिस की कार्रवाई का समर्थन किया.

चुनावी और शैक्षणिक व्यवस्था में बदलाव के साथ इस भू-भाग पर सीसीपी ने अपनी पकड़ मज़बूत बना ली है. 

बढ़ती उप राष्ट्रवाद की भावना का मुकाबला करने के लिए बीजिंग का जवाब शिक्षा के ज़रिए अधिक से अधिक राजनीतिक लामबंदी करना है. ‘कैच देम यंग’ सीसीपी का मंत्र प्रतीत होता है और क्लासरूम नई राजनीतिक प्रयोगशाला. चाइनीज़ पीपुल्स पॉलिटिकल कंसल्टेटिव कंफ्रेंस की स्टैंडिंग कमेटी के एक सदस्य एन्नी वु सुक-चिंग (Annie Wu Suk-ching) ने हांगकांग के शैक्षणिक संस्थाओं में चीन के इतिहास को पढ़ाने पर ज्यादा जोर देने की ज़रूरत बताई है. हांगकांग यूनिवर्सिटी की 2020 प्रवेश परीक्षा से संबंधित एक पेपर में ‘20वीं सदी में चीन में जापान के योगदान’ पर प्रकाश डालने को कहा गया था. इसको लेकर मुख्य चीन में जन विरोध हुआ था. वर्ष 2019 में ‘शी जिनपिंग के विचार’ (Xi Jinping Thought) के तहत राजनीतिक लामबंदी के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए गए, जैसे- स्कूलों में राष्ट्रीय चेतना का निर्माण और परिसरों में कम्युनिस्ट यूथ लीग की अधिक से अधिक पहुंच. हांगकांग एजुकेशन ब्यूरो की नई नियमावली में स्कूली बच्चों को राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून के उल्लंघन पर दंड के बारे में बताने को कहा गया है. शैक्षणिक संस्थाओं को बच्चों के व्यवहार पर नजर रखने और लोकतंत्र समर्थक आंदोलनों का किसी तरह समर्थन करने पर रिपोर्ट करने को कहा गया है. यह स्पष्ट है कि सीसीपी हांगकांग की शिक्षा व्यवस्था को औपनिवेशिक शासन की एक विरासत के रूप में देखता है. इसलिए इसे हटाकर ‘चीनी विशेषता’ वाली एक शिक्षा प्रणाली को लागू करने की कोशिश की जा रही है. जब से नया राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून बनाया गया है तब से हांगकांग छात्रों के एक पसंदीदा गंतव्य के रूप में अपनी हैसियत खोता जा रहा है. चाइनीज़ यूनिवर्सिटी ऑफ हांगकांग और यूनिवर्सिटी ऑफ हांगकांग दोनों का कहना है कि छात्रों के आवेदन में कमी आई है. सीसीपी के शीर्ष पदाधिकारियों के एक सम्मेलन 2019 प्लेनम (Plenum) में हांगकांग और मकाऊ में राष्ट्रीय सुरक्षा बनाए रखने के लिए चीन की शासन प्रणाली और क्षमता को बढ़ाने का संकल्प लिया गया. इसके तहत न्यायिक और प्रवर्तन तंत्र में सुधार लाने की बात कही गई. जहां इस साल सीसीपी अपना शताब्दी वर्ष मना रहा है वहीं सीसीपी के महासचिव के रूप में शी की तीसरा कार्यकाल हासिल करने की इच्छा उनके राजनीतिक सुदृढ़ीकरण पर निर्भर करता है. शहर-राज्य में लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन और उनके लिए लोकप्रिय समर्थन ने उसी पर सवालिया निशान लगा दिया है. हालांकि, इस उप-राष्ट्रवाद के प्रति बीजिंग की प्रतिक्रिया विधान परिषद जैसी राजनीतिक संस्थानों को कमज़ोर करने और परिसरों में अधिक वैचारिक अनुरूपता को बढ़ावा देने वाली रही है. यह व्यापक स्तर पर स्वीकार किया जाता है कि हांगकांग की आर्थिक सफलता का श्रेय उसकी कारोबार और समाज के प्रति ‘अबंध नीति’ (laissez faire) वाले दृष्टिकोण को जाता है. उसकी ब्रिटिश औपनिवेशिक विरासत ने एक समान न्यायिक व्यवस्था के ज़रिए संपत्ति अधिकार और नागरिक स्वतंत्रता को सुरक्षा प्रदान की. अगस्त 2019 तक इस द्वीप पर 1500 बहुराष्ट्रीय कंपनियों के उनके क्षेत्रीय मुख्यालय थे. इसका शेयर बाज़ार, चीन के बाज़ारों और टोक्यो के बाद दुनिया का चौथा सबसे बड़ा बाज़ार है. सीसीपी उन स्तंभों को कमज़ोर करी है जिसने हांगकांग की जीत में योगदान दिया है- जैसे इसकी राजनीतिक संरचना और मानव पूंजी निर्माण. लंबे समय में शी एक ऐसा समाज चाहते हैं जिसको प्रशासित करना आसान हो, लेकिन यदि इसकी अगली पीढ़ी आलोचनावादी सोच विकसित करने में कम योग्य साबित होती है तो यह निश्चित तौर पर हांगकांग को नुकसान पहुंचाएगा. चुनावी और शैक्षणिक व्यवस्था में बदलाव के साथ इस भू-भाग पर सीसीपी ने अपनी पकड़ मज़बूत बना ली है. अब अनुमान जताया जा रहा है कि इसका अगला निशाना इसकी क़ानूनी व्यवस्था होगी या नहीं. इसके बारे में सीसीपी समर्थक मीडिया में परोक्ष संकेत दिए हैं. एक अखबार ने संकेत दिया कि हिंसक प्रदर्शनकारियों को बरी करने के बाद एक न्यायाधीश के दिल में उनके प्रति नरम भावना थी और उसने पुलिस अधिकारियों की गवाही को अविश्वसनीय पाया.

अभी तक क़ानून के शासन की सर्वोच्चता ने हांगकांग में बहुराष्ट्रीय कंपनियों, प्रतिभाओं और निवेश को आकर्षित किया है. इसने हांगकांग को दुनिया के अग्रणी शहरों में से एक बनाया है. चीन की अपारदर्शी अदालतों के आधार पर किसी संस्था को फिर से तैयार (remodel) करने का कोई भी प्रयास मुख्य हांगकांग को जख्मी कर देगा. ये संस्थाएं ही कारोबार के इस वैश्विक केंद्र की रीढ़ की तरह काम करती हैं.

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