Author : Soumya Bhowmick

Published on Aug 30, 2022 Updated 25 Days ago

इस बात को ध्यान में रखकर तत्काल कदम उठाए जाने की आवश्यकता है कि महामारी की वजह से उत्पन्न आर्थिक संकट का असर, घरेलू राजनीतिक उठापटक या फिर रूस-यूक्रेन टकराव का चिरस्थायी प्रभाव देश के भविष्य पर न पड़े यह सुनिश्चित किया जा सके.

श्रीलंका: भुगतान में संतुलन की खामी को ध्यान में रखते हुए एक विश्वेषण!

पिछले कुछ दिनों से अभूतपूर्व आर्थिक संकट में फंस जाने के बाद श्रीलंका दुनिया भर में चर्चा का विषय बना हुआ है. ऐसे में 18 अगस्त 2022 को जब श्रीलंका के सेंट्रल बैंक के गर्वनर ने यह कहा कि निर्यात में वृद्धि और आयात खर्च में कमी से चालू खाते का घाटा सिकुड़ने की वजह से विदेशी मुद्रा की स्थिति में सुधार हुआ है और अब “हम (श्रीलंकाई अर्थव्यवस्था) ज़रूरत की चीजों, मसलन पेट्रोल, डीजल और औषधियों का भुगतान करने में सक्षम हैं,” तो इस बयान में उम्मीद की एक किरण दिखाई दी है. इसके बावजूद संकट से जूझ रही अर्थव्यवस्था के इस कैलेंडर वर्ष में 8 प्रतिशत सिकुड़ने की संभावना है, जो 2020 में महामारी झेल रही अर्थव्यवस्था के 3.6 प्रतिशत सिकुड़ने का दोगुना से ज्यादा ही रहने वाला है. इस पृष्ठभूमि में इस बात का विश्लेषण करना रोचक होगा कि श्रीलंका का बैलेंस ऑफ पेमेंट्स (बीओपी) कैसे होगा और कैसे आवर्ती घाटे ने पिछले कुछ वर्षो में देश की व्यापक आर्थिक स्थिरता को संरचनात्मक रूप से कमजोर कर दिया है. 

वैकिल्पक रूप से पूंजी प्रवाह के कारण घरेलू मुद्रा के मूल्य में सुधार होगा, जो आयात को सस्ता बनाकर घरेलू मांग पैदा करेगा. इस वजह से निर्यात महंगा होगा और घरेलू सामान के मूल्य में गिरावट आएगी.

श्रीलंका में जुड़वा घाटा

श्रीलंका जुड़वा घाटे की परिकल्पना का एक बेहतरीन उदाहरण है, जिसमें कहा गया है कि किसी देश के चालू और राजकोषीय खाते की शेष राशि एक ही दिशा में चलती है. यह बात खपत-संचालित अर्थव्यवस्थाओं के विकास के लिए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों मोर्चो पर उच्च स्तर के ऋण के साथ आमतौर पर सच होती है. चूंकि देश में मांग अधिक होने की वजह से उपभोक्ता की जरूरतों को पूरा करने के लिए आयात को बढ़ाने की आवश्यकता होती है और इससे मुद्रास्फीति भी बढ़ती है, जैसा कि श्रीलंका के मामले में हुआ है. अत: घरेलू बाजार में उत्पादित होने वाली वस्तुओं को आम तौर पर वैश्विक निर्यात बाजारों में कम प्रतिस्पर्धी के रूप में देखा जाता है.

फिगर 1 : श्रीलंका के चालू खाता बैलेंस और वित्तीय बैलेंस का प्रवाह (1970-2016)

स्त्रोत : एशियाई विकास बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ श्रीलंका का डेटा.

इसके दो मुख्य कारण हैं. पहला यह कि केनेसियन दृष्टिकोण अपनाने की वजह से बढ़ते बजट घाटे के चलते घरेलू अवशोषण होता है और यह बढ़ते आयात का कारण बनकर चालू खाता घाटे को और बढ़ाता है. यही उल्टे क्रम में भी होता है. दूसरा, मुंडेल-फ्लेमिंग मॉडल से उद्धत करने के कारण बढ़ते बजट घाटे के कारण ब्याज दरों को बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ता है या उल्टे क्रम में भी अर्थात ब्याज दर बढ़ने की वजह से बजटीय घाटा बढ़ता है. जैसे ही ब्याज दरों में वृद्धि होती है तो घरेलू अर्थव्यवस्था विदेशी निवेशकर्ताओं के लिए आकर्षक बन जाती है. इससे पूंजी खाते में अधिशेष बढ़ने लगता है और चालू खाते का घाटा बढ़ने लगता है. ऐसे में पूंजी खाते का अधिशेष, चालू खाते को विपरीत तरीके से प्रभावित कर सकता है, जहां बढ़ी हुई पूंजी की वजह से उपभोग की मांग भी बढ़ती है और इससे आयात बढ़ाने की नौबत आ जाती है और यह चालू खाते के घाटे को और बढ़ा देती है. वैकिल्पक रूप से पूंजी प्रवाह के कारण घरेलू मुद्रा के मूल्य में सुधार होगा, जो आयात को सस्ता बनाकर घरेलू मांग पैदा करेगा. इस वजह से निर्यात महंगा होगा और घरेलू सामान के मूल्य में गिरावट आएगी. अत: इस प्रकार, चालू खाते का घाटा और बढ़ने लगेगा.

आकस्मिक रूप से आयी महामारी और इसकी वजह से लगाए गए प्रतिबंधों ने सरकार को अपरिहार्य सामाजिक सुरक्षा उपायों को जुटाने में राष्ट्रीय राजकोष से बहुत ज्यादा खर्च करने पर मजबूर किया और इसके कारण राजकोषीय घाटा और बढ़ गया था.

राजकोषीय और चालू खातों पर अतिरिक्त दबाव

श्रीलंका के सामने खड़ी व्यापक आर्थिक समस्या का कारण  यह तर्क है कि इस तरह के जुड़वा घाटे की वजह से उसकी विदेशी कर्ज पर निर्भरता बढ़ती रही है. दशकों से श्रीलंका ने बहुपक्षीय अथवा द्विपक्षीय कर्ज लेकर उसका उपयोग चालू खाते के घाटे को पूरा करने अथवा महत्वपूर्ण विकास कार्यक्रमों के लिए किया है. इसकी वजह से ही उसकी अर्थव्यवस्था सीधे तौर पर महामारी जैसे बाहरी झटकों से असुरक्षित हो गई है. इसी वजह से अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में उसके लिए कर्ज़ की उपलब्धता लगभग समाप्त हो गई है.

2019 में महामारी से पहले कर में की गई कटौती की वजह से श्रीलंका का राजस्व प्रभावित हुआ है और इस वजह से उसका राजकोषीय घाटा और भी बढ़ गया है. एक अनुमान के अनुसार 2020 और 2022 में औसतन एक मिलियन करदाताओं में कमी आयी है. यह ऐसे वक्त पर हुआ है जब देश की अर्थव्यवस्था पहले से ही भारी मात्रा में व्यापक कर चोरी का सामना कर रही थी. आकस्मिक रूप से आयी महामारी और इसकी वजह से लगाए गए प्रतिबंधों ने सरकार को अपरिहार्य सामाजिक सुरक्षा उपायों को जुटाने में राष्ट्रीय राजकोष से बहुत ज्यादा खर्च करने पर मजबूर किया और इसके कारण राजकोषीय घाटा और बढ़ गया था.

श्रीलंका, जापान से यह कहने की तैयारी में है कि वह चीन और भारत जैसे लेनदार देशों को द्विपक्षीय ऋण पुनर्गठन पर संभावित वार्ता के लिए आमंत्रित करें. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से मिलने वाली राहत की उसे तत्काल आवश्यकता है

इसके साथ ही अप्रैल 2020 में संपूर्ण रूप से जैविक खेती को अपनाने की वजह से श्रीलंका के मजबूत कृषि क्षेत्र के कुछ हिस्से पूरी तरह तबाह हो गए. इस कारण अनाज उत्पादकता में कमी, कृषि क्षेत्र में अधिक मांग आदि समस्याएं भी सिर उठाने लगी. श्रीलंकाई अर्थव्यवस्था की चावल उत्पादन में आत्मनिर्भरता पूरी तरह बाधित हुई और उसे म्यांमार तथा चीन जैसे देशों से चावल का आयात करना पड़ा. इसके अलावा, देश के अनियोजित कृषि सुधारों की वजह से देश की प्रमुख निर्यात वस्तु, चाय का उत्पादन भी प्रभावित हुआ. दिसंबर 2021 और मार्च 2022 के बीच व्यापार घाटा 1085 मिलियन अमेरिकी डॉलर से गिरकर 762 मिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया. विदेशी मुद्रा के घटते भंडार ने श्रीलंकाई रुपए के मूल्य को भी नुकसान पहुंचाया है. 2021 में मुद्रा लगभग 7.3 प्रतिशत गिर गई, जिसकी वजह से आयात की लागत में तेज उछाल देखा गया और इसके कारण ही मुद्रास्फीति भी बढ़ने लगी.  इस वजह से श्रीलंका में सामाजिक अशांति फैलने लगी. ऐसे में राजकोषीय और चालू खातों पर अतिरिक्त दबाव ने श्रीलंका की स्थिति को और खराब कर दिया है.

बीओपी : चालू और पूंजी खाते 

श्रीलंका में ऐतिहासिक रूप से चालू और पूंजी खाते की बैलेंस राशि एक दूसरे की विपरीत दिशा में ही चलती रही है. चालू खाते के आंकड़े तो बेहद निराशाजनक और सुस्त हैं, लेकिन पूंजी खाते में अब अधिशेष के स्तर देखे जा रहे हैं. ऐसे में स्वाभाविक रूप से सरकार ने विदेशी निवेशकर्ताओं को आकर्षित कर स्थिति में स्थिरता लाने की कोशिश की है. अब उसने चीन निर्मित कोलंबो पोर्ट सिटी को 40 वर्षो के लिए कर राहत वाली प्रणाली के तहत चलाने की अनुमति दी है. यह इस बात का एक और उदाहरण है कि श्रीलंका सरकार विदेशी निवेशकों पर ही निर्भर करती है, जो इस तरह की अस्थिर आधार पर बनी अर्थव्यस्था में निवेश करने को लेकर उत्सुक नहीं थे.

फिगर 2 : श्रीलंका के चालू और पूंजी खाता बैलेंस का ऐतिहासिक प्रवाह (मिलियन अमेरिकी डॉलर में)

स्त्रोत:  मैत्र (2017)

तेजी से नीचे जाता चालू खाता और कमोबेश धीरे से बढ़ता पूंजी खाता ही बीओपी घाटे के, खासकर पिछले एक वर्ष में, बड़ा मुद्दा बनने का कारण है. इसी कारण सरकार आम लोगों की आम जरूरतों की मांग को पूरा करने में सफल नहीं हो पा रही है. इस बात को ध्यान में रखकर तत्काल कदम उठाए जाने की आवश्यकता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि देश के भविष्य पर महामारी की वजह से उत्पन्न आर्थिक संकट का असर, घरेलू राजनीतिक उठापटक या फिर रूस-यूक्रेन टकराव का चिरस्थायी प्रभाव न पड़े. 

फिगर 3 : श्रीलंका का हालिया भुगतान संतुलन (बीओपी) प्रवाह (मिलियन अमेरिकी डॉलर में)

स्त्रोत: सीईआईसी, सेंट्रल बैंक ऑफ श्रीलंका का डेटा.

श्रीलंका, जापान से यह कहने की तैयारी में है कि वह चीन और भारत जैसे लेनदार देशों को द्विपक्षीय ऋण पुनर्गठन पर संभावित वार्ता के लिए आमंत्रित करें. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से मिलने वाली राहत की उसे तत्काल आवश्यकता है ताकि वह उसकी पहुंच उस धन तक बना सके, जिसकी उसे बेसब्री से जरूरत है. इसके अलावा यह उसे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों तक भी पहुंच बनाने में सहायता देगा. फिलहाल अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में श्रीलंका को कर्ज़ देने को लेकर अनिच्छा का माहौल देखा जा रहा है, क्योंकि उसने इस साल की शुरुआत में आधिकारिक तौर पर बकाया कर्ज़ का भुगतान रोक दिया था.

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