रायसीना एडिट 2026 ऐसे समय में सामने आ रहा है जब दुनिया बड़े बदलावों के दौर से गुजर रही है. शक्ति का संतुलन बदल रहा है और देशों के बीच प्रतिस्पर्धा भी बढ़ रही है. पिछली सदी के लिए बनाए गए वैश्विक संस्थान आज की नई चुनौतियों के दबाव में कमजोर पड़ते दिख रहे हैं. विकास की जरूरतें और रक्षा की प्राथमिकताएँ एक-दूसरे से टकरा रही हैं. जलवायु परिवर्तन की तात्कालिकता राजनीतिक हिचकिचाहट से टकरा रही है, जबकि तकनीक नियमों से कहीं तेज़ी से आगे बढ़ रही है. सीमाओं पर होने वाले विवादों से लेकर डिजिटल दुनिया के नियंत्रण तक, हर क्षेत्र में वैश्विक व्यवस्था के नियम बदलते दिखाई दे रहे हैं.
इस साल का रायसीना एडिट छह प्रमुख विषयों पर आधारित है. इन विषयों के माध्यम से यह समझने की कोशिश की गई है कि कौन-सी ताकतें और बदलाव आज की दुनिया को नए तरीके से आकार दे रहे हैं.
कॉन्टेस्टेड फ्रंटियर्स: पावर, पोलैरिटी और पेरिफेरी: यह विषय आज की बदलती भू-राजनीति की कठोर होती सीमाओं को समझने की कोशिश करता है. इसमें बताया गया है कि दुनिया में शक्ति अब कुछ ही देशों तक सीमित नहीं रही, बल्कि अलग-अलग क्षेत्रों में फैल रही है. साथ ही संघर्षों का स्वरूप भी बदल रहा है और समुद्र, अंतरिक्ष तथा साइबर स्पेस जैसे वैश्विक संसाधन अब सहयोग की जगह प्रतिस्पर्धा के मैदान बनते जा रहे हैं.
रिपेयरिंग द कॉमन्स: न्यू ग्रुप्स, न्यू गार्जियंस, न्यू एवेन्यूज़: यह विषय इस बात पर ध्यान देता है कि जब पुरानी वैश्विक संस्थाएँ कमजोर पड़ रही हैं, तब नए देशों के समूह, लचीले सहयोग मंच और उभरते साझेदारी मॉडल सामने आ रहे हैं. ये नए गठबंधन मिलकर वैश्विक संसाधनों की सुरक्षा और बेहतर प्रबंधन के लिए नए रास्ते और नई व्यवस्था बनाने की कोशिश कर रहे हैं.
व्हाइट व्हेल: एजेंडा 2030 की खोज में यह सवाल उठाया गया है कि जैसे-जैसे 2030 करीब आ रहा है, क्या सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को पूरा करने की महत्वाकांक्षा थकान के माहौल में बचाई जा सकती है, और क्या बंटी हुई दुनिया में फिर से सहयोग की भावना पैदा हो सकती है.
द इलेवंथ आवर: क्लाइमेट, कॉन्फ्लिक्ट और देरी की कीमत यह बताता है कि जलवायु कार्रवाई अब नैतिक और व्यावहारिक दोनों दृष्टि से बेहद जरूरी हो गई है. अगर कार्रवाई में देरी होती है तो इससे खतरे और असमानताएँ दोनों बढ़ती जाती हैं.
टुमॉरोलैंड: टेक-टोपिया की ओर डिजिटल दुनिया और नई तकनीकों पर ध्यान देता है. इसमें यह सवाल उठता है कि क्या सरकारें और नियम तकनीकी नवाचार की रफ्तार के साथ चल पाएंगे, और क्या इंसान अभी भी उन तकनीकों को दिशा दे पाएगा जो धीरे-धीरे हमारी दुनिया को आकार दे रही हैं.
अंत में, ट्रेड इन द टाइम ऑफ टैरिफ्स: रिकवरी, रेज़िलिएंस और रीइन्वेंशन वैश्विक व्यापार में हो रहे बदलावों को समझने की कोशिश करता है. इसमें दिखाया गया है कि आज के समय में देश अपनी संप्रभुता को बचाते हुए भी एक-दूसरे पर निर्भर हैं, और नए हालात में व्यापार को मजबूत बनाने के लिए नए तरीके अपनाए जा रहे हैं.
ये सभी विषय मिलकर उस दुनिया की तस्वीर दिखाते हैं जो स्थिरता के बजाय लगातार बदलाव के दौर से गुजर रही है. आज का समय निश्चितता का नहीं, बल्कि परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने का समय है.
रायसीना एडिट 2026 दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों और उनके विशेषज्ञों की आवाज़ों को एक साथ लाता है, ताकि इस बदलते वैश्विक दौर को बेहतर ढंग से समझा जा सके. इसका उद्देश्य सिर्फ दुनिया में फैली अव्यवस्था को बताना नहीं है, बल्कि एक अधिक संतुलित, जवाबदेह और मजबूत अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की दिशा में संभावित रास्तों को भी सामने लाना है.