भूमिका
आज दुनिया की 90 प्रतिशत से भी ज्यादा व्यापार समुद्री रास्तों के माध्यम से होती है. ऐसे में इन रास्तों को सुगम और समावेशी बनाना दुनिया के देशों के लिए जरूरी बन गया है. जैसे-जैसे तकनीकी समृद्धि, जलवायु संबंधी चुनौतियां और भू राजनीतिक हलचल बढ़ रही हैं वैसे-वैसे सामुद्रिक गतिविधियां दिन-प्रतिदिन और भी अधिक जटिल होती जा रही हैं, जिससे कि वैश्विक सहयोग की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा अब बढ़ गई है.
भारत जो 2027 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर काम कर रहा है तो ऐसे में इसके लिए यह जरूरी हो जाता है कि वो अपनी भू-आर्थिकी स्थिति और सामुद्रिक विरासत का लाभ उठाते हुए अपनी बंदरगाहों को और भी अत्याधुनिकीकरण कर, लॉजिस्टिक्स को सुव्यवस्थित करे और सामुद्रिक प्रौद्योगिकी को बढ़ावा दे. इन्हीं सब प्रयासों के चलते सागरमाला, मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 और अमृतकाल विजन 2047 जैसे पहाड़ों के जरिए समावेशिता और स्थायित्व की दिशा में एक सकारात्मक गति पकड़ सकता है. इसी समय, वैश्विक स्तर पर सामुद्रिक क्षेत्र तीन प्रमुख और बड़े स्तंभों — डिजिटलीकरण, डीकार्बोनाइजेशन (कार्बन उत्सर्जन को कम करके) और नवाचार के द्वारा एक नया आकार मिल रहा है, जिसके केंद्र में हमारे तटीय समुदाय हैं जो आगे चलकर भविष्य कीसामुद्रिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनेगी.
पिछले साल 18 से 19 नवंबर 2024 को नई दिल्ली में पहला सागरमंथन: द ग्रेट ओशन डायलॉग का आयोजन किया गया जो भारत के अंतरराष्ट्रीय सामुद्रिक सहयोग में एक मील का पत्थर साबित हुआ. यह डायलॉग भारत सरकार के पत्तन, पोर्ट परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय तथा ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के संयुक्त प्रयास से आयोजित किया गया था जिसमें दुनिया के 61 देश के 1500 से अधिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. इसमें विशेष रूप से ग्लोबल साउथ और छोटे द्वीपीय देश के प्रतिनिधि शामिल थे.
इस संवाद ने नीति निर्माता, उद्योग जगत के नेताओं, शिक्षाविदों, नागरिक समाज के प्रतिनिधियों, मीडिया और बहुपक्षीय संगठनों को एक मंच पर लाकर महासागरों के भविष्य पर होने वाले विमर्श को एक समान, नवाचार उन्मुख और स्थिरता पर आधारित एक साझा दृष्टिकोण को आगे बढ़ाया.
इस वार्षिक संवाद का दूसरा संस्करण 27 से 29 अक्टूबर 2025 को देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में आयोजित किया जाएगा. इस आगामी आयोजन के भूमिका के रूप में सागरमंथन संवाद 2025 के प्रमुख लेखों को भूमिका के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है. सागरमंथन संवाद 2025 एक ऐसा मंच, जो विभिन्न क्षेत्रों और देशों की विविध आवाज़ों को एक साथ लाकर, शिपिंग, संपर्क, वैश्विक सहयोग, निवेश, नवाचार, स्थायित्व और समावेशी समुद्री विकास जैसे विषयों पर महत्वपूर्ण विचार और विश्लेषण प्रस्तुत करेगा.
यह पहल न केवल आगामी संवाद के लिए विचारभूमि तैयार करेगी, बल्कि महासागरों के भविष्य को लेकर एक सार्थक, बहुपक्षीय और समावेशी विमर्श को भी सशक्त बनाएगी.