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केप टाउन कन्वर्सेशन 2025 ऐसे समय में हो रहा है जब दुनिया अनिश्चितताओं से भरी है, लेकिन उम्मीदें भी नई हैं. दक्षिण अफ्रीका G20 की अध्यक्षता कर रहा है और एकजुटता, समानता और टिकाऊ विकास पर ज़ोर दे रहा है. इस पृष्ठभूमि में CTC 2025 दिखाता है कि आज दुनिया को सामूहिक प्रयासों की पहले से ज़्यादा ज़रूरत है. G20 में अफ्रीकन यूनियन की भूमिका बताती है कि वैश्विक दक्षिण अब वैश्विक शासन और विकास का अहम भागीदार है. भारत की G20 अध्यक्षता के दौरान शुरू हुआ यह संवाद मंच अब भी नए विचारों, मजबूत साझेदारियों और समावेशी बातचीत को आगे बढ़ा रहा है.
2025 में दुनिया कई चुनौतियों का सामना कर रही है —
• संघर्ष जारी हैं,
• बहुपक्षीय संस्थाएं कमजोर पड़ रही हैं,
• व्यापार तनाव बढ़ रहे हैं,
• जलवायु आपदाएं तीव्र हो रही हैं,
• और तेज़ तकनीकी बदलाव राजनीति और समाज को हिला रहे हैं.
वैश्विक दक्षिण के लिए विकास के मार्ग संकुचित हो रहे हैं और वैश्विक बाज़ारों तक पहुंच और कठिन हो रही है. बदलती वैश्विक व्यवस्था का असर सभी देशों — चाहे विकसित हों या विकासशील — पर स्पष्ट दिख रहा है.
लेकिन इसी समय बड़े अवसर भी मौजूद हैं. नई तकनीकें शासन, नवाचार और सार्वजनिक सेवाओं के नए रास्ते खोल रही हैं. AI केवल शक्ति की दौड़ नहीं है — यह विकास को अधिक समावेशी और अर्थव्यवस्थाओं को अधिक गतिशील बना सकता है. भारत का AI Impact Summit इस दिशा को और मजबूती देगा. साथ ही, खाद्य, स्वास्थ्य और जलवायु लचीलापन में हुए प्रगति के संकेत एक बदलते भविष्य की उम्मीद जगाते हैं.
दक्षिण अफ्रीका की G20 प्राथमिकताएँ — ऋण स्थिरता, न्यायपूर्ण ऊर्जा परिवर्तन, आपदा लचीलापन, हरित उद्योगों के लिए खनिज, और अफ़्रीकी महाद्वीपीय मुक्त व्यापार क्षेत्र — इस क्षण की ज़रूरत और क्षमता दोनों को दर्शाती हैं. यही केप टाउन कन्वर्सेशन का उद्देश्य भी है: विभिन्न आवाज़ों और हितधारकों को साथ लाना और साझा समाधान तैयार करना.
CTC 2025 का ज़ोर इस पर है —
• खनिज-समृद्ध क्षेत्रों को वैश्विक बाज़ारों से जोड़ने वाली स्मार्ट कनेक्टिविटी
• विकास और जलवायु लक्ष्यों के बीच संतुलित ऊर्जा संक्रमण
• वैश्विक दक्षिण के अरबों लोगों के लिए नई तकनीकों का उपयोग
• और वैश्विक संस्थाओं को परिणाम-उन्मुख बनाना
नीचे दिए गए लेख उसी विशेष शृंखला का हिस्सा हैं, जिन्हें आप पढ़ सकते हैं।