Author : Harsh V. Pant

Published on Apr 23, 2026 Commentaries 0 Hours ago

डोनाल्ड ट्रंप और जेडी वेंस के रिश्ते में बराबरी से ज्यादा 'उपयोग और वफादारी' का समीकरण दिखता है. जहां वेंस ट्रम्प की लाइन को आगे बढ़ाते हैं और कई बार जोखिम भी अपने ऊपर लेते हैं लेकिन यही रणनीति वेंस की अपनी पहचान के लिए खतरा बन सकती है. अमेरिकी राजनीति में शक्ति, वफादारी और जोखिम के जटिल खेल को सरल तरीके से समझने के लिए पढ़ें पूरा लेख.

ट्रम्प-वेंस: कौन किसे इस्तेमाल कर रहा?

अगर आज की अमेरिकी राजनीति में ट्रम्प और वेंस के रिश्ते को समझें तो यह बराबरी की साझेदारी से ज्यादा एक ऊपर-नीचे वाले संबंध जैसा दिखता है. यह रिश्ता दिखावटी वफादारी और जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल करने की सोच पर टिका है. डोनाल्ड ट्रम्प, जेडी वेंस पर दो तरह से निर्भर रहते हैं- पहला, वेंस उनके विचारों यानी ‘ट्रम्पवाद’ को आक्रामक अंदाज में लोगों तक पहुंचाते हैं और दूसरा, वे ट्रम्प के जोखिम भरे फैसलों का असर खुद पर ले लेते हैं जिससे ट्रम्प सीधे आलोचना से बच जाते हैं.

सार्वजनिक रूप से वेंस इस भूमिका को लगभग पाठ्यपुस्तक जैसी सटीकता के साथ निभाते हैं. वे आक्रामक, वैचारिक रूप से मेल खाते हुए और पूरी तरह आज्ञाकारी दिखते हैं-चाहे ईरान से जुड़े मुद्दों पर आक्रामक रुख का समर्थन करना हो या सांस्कृतिक विवादों में शामिल होना, जिनमें पोप लियो XIV जैसे व्यक्तित्व भी शामिल हैं. दूसरी ओर, ट्रम्प वेंस को 2028 के संभावित नेता के रूप में प्रस्तुत कर अपनी स्वीकृति का संकेत देते हैं. लेकिन इस सतही संतुलन के पीछे शक्ति का स्पष्ट असंतुलन छिपा है. ईरान को लेकर वेंस की पहले की हिचकिचाहट पर ट्रम्प की टिप्पणियां केवल आलोचना नहीं, बल्कि एक तरह की याद दिलाने वाली रणनीति हैं-जो महत्वाकांक्षा को आज्ञाकारिता के दायरे में बनाए रखने के लिए की जाती हैं.

रिश्ते की असल परीक्षा

हाल का ईरान प्रकरण इस रिश्ते की प्रकृति को और स्पष्ट करता है. इस्लामाबाद में उच्च-स्तरीय वार्ता के लिए वेंस की नियुक्ति वास्तव में अवसर से ज्यादा एक सोची-समझी जोखिम भरी जिम्मेदारी थी. अपेक्षित रूप से नतीजे अनिर्णायक रहे, जिससे ट्रम्प को असफलता का दोष वेंस पर डालने और सफलता का श्रेय खुद लेने का अवसर मिला. ‘अगर वार्ता असफल होती है तो जेडी वेंस को दोष देंगे’ जैसी उनकी टिप्पणी केवल हल्की-फुल्की बात नहीं थी, बल्कि उस शासन शैली का संकेत थी जो जिम्मेदारी से बचने की रणनीति पर आधारित है.

ट्रम्प वेंस को 2028 के संभावित नेता के रूप में प्रस्तुत कर अपनी स्वीकृति का संकेत देते हैं. लेकिन इस सतही संतुलन के पीछे शक्ति का स्पष्ट असंतुलन छिपा है. ईरान को लेकर वेंस की पहले की हिचकिचाहट पर ट्रम्प की टिप्पणियां केवल आलोचना नहीं, बल्कि एक तरह की याद दिलाने वाली रणनीति हैं.

इस बीच वेंस को इसका नुकसान उठाना पड़ता है-उनकी लोकप्रियता घटती है और लोगों में सरकार को लेकर असमंजस बढ़ता है. ऐसा पहले भी हुआ है. माइक पेंस ने 2020 चुनाव में संविधान के अनुसार फैसला लिया, लेकिन ट्रम्प से अलग होने के बाद उनकी राजनीतिक अहमियत लगभग खत्म हो गई. इसके विपरीत, वेंस ने इस तरह के टकराव से बचने के लिए खुद को ट्रम्प के साथ पूरी तरह जोड़ लिया है. जहां पेंस की पहचान अंत में सिद्धांतों के पक्ष में खड़े होने से बनी, वहीं वेंस की पहचान शुरुआत से ही राजनीतिक जरूरतों के सामने पूर्ण समर्पण की रही है.

यह रणनीति वेंस के लिए जोखिम भरी है. ट्रम्पवाद से ज्यादा जुड़ाव के कारण उनकी अलग पहचान कम हो गई है. पहले वे विदेश हस्तक्षेप पर संदेह जताते थे, लेकिन अब ईरान का समर्थन करते हैं, जिससे वे अवसरवादी लगते हैं. उन्हें ढाल की तरह इस्तेमाल करने से उनकी राजनीतिक ताकत कमजोर हो रही है.

वफादारी: ताकत या जाल?

असल सवाल यह नहीं है कि वेंस अभी इस भूमिका को निभा सकते हैं या नहीं-वे निभा सकते हैं. असली बात यह है कि क्या वे लंबे समय तक ऐसा कर पाएंगे. फिलहाल, MAGA राजनीति में उनकी सबसे बड़ी ताकत ट्रम्प के प्रति उनकी वफादारी है. लेकिन आगे चलकर यही वफादारी उन्हें कमजोर भी बना सकती है, क्योंकि ट्रम्प जरूरत के हिसाब से लोगों का इस्तेमाल करते हैं और फिर उन्हें बदल भी देते हैं. उनके साथ कोई भी स्थायी नहीं होता.

वेंस के लिए समय एक मौका भी है और चुनौती भी. 41 साल की उम्र में उनके पास काफी समय है कि वे गलतियों से सीखकर अपनी छवि सुधार सकें और फिर से मजबूत बन सकें. वे केवल एक चुनाव तक सीमित नहीं हैं और लंबे समय तक राजनीति कर सकते हैं. लेकिन अभी जो भूमिका वे निभा रहे हैं, वह बहुत ज्यादा दबाव वाली है. इससे लोगों की उनके बारे में राय जल्दी तय हो सकती है, जिसे बाद में बदलना मुश्किल हो जाएगा.

डोनाल्ड ट्रम्प को वेंस की वह क्षमता लाभ देती है, जिसमें वे राजनीतिक झटकों को अपने ऊपर ले लेते हैं, जबकि वेंस को सत्ता के करीब रहने और भविष्य में संभावित उत्तराधिकार का अवसर मिलता है. भले ही वह अनिश्चित हो, लेकिन यह संतुलन ट्रम्प की राजनीति की ही तरह है.

ट्रम्प की राजनीति में काम की उपयोगिता को रिश्तों की स्थिरता से ज्यादा महत्व दिया जाता है. उनके साथ कोई भी सहयोगी हमेशा के लिए नहीं होता और आगे किसे मौका मिलेगा, यह तय नहीं होता. ऐसे माहौल में वेंस के लिए स्थिति बदलना आसान नहीं है. अगर वे ट्रम्प से थोड़ा भी अलग दिखते हैं, तो इसे बेवफाई माना जाएगा. यहां पूरी और लगातार वफादारी जरूरी है. छोटी सी असहमति भी बड़ी बात बन जाती है और सजा मिल सकती है, इसलिए बदलाव करना जोखिम भरा है.

ईरान: एक परीक्षण

इस संदर्भ में ईरान का मुद्दा एक संभावित निर्णायक मोड़ की तरह उभरता है. यह केवल विदेश नीति की चुनौती नहीं है, बल्कि यह भी परख है कि वेंस अपनी राजनीतिक पहचान को खोए बिना अधीनता की सीमाओं को कितनी दूर तक खींच सकते हैं. उन्हें उच्च जोखिम वाली वार्ताओं की जिम्मेदारी देना-और फिर अप्रत्यक्ष रूप से असफलता का बोझ भी उन पर डालना-उन्हें एक कमजोर स्थिति में रखता है. यह स्थिति एक गहरे द्वंद्व को उजागर करती है: क्या कोई नेता एक साथ महत्वाकांक्षी भी रह सकता है और एक उपयोगी लेकिन त्याज्य उपकरण भी बना रह सकता है. वेंस जितना ट्रम्प के रक्षक बनकर काम करते हैं, उतना ही खतरा है कि उनकी पहचान उसी तक सीमित रह जाए और वे खुद नेता के रूप में कमजोर पड़ें. उन्हें वफादारी भी दिखानी है और अपनी अलग पहचान भी बनानी है, लेकिन यह संतुलन बनाना मुश्किल और अस्थिर है.

फिलहाल, यह संतुलन बना हुआ है, जो आपसी विश्वास से अधिक पारस्परिक उपयोगिता पर आधारित है. डोनाल्ड ट्रम्प को वेंस की वह क्षमता लाभ देती है, जिसमें वे राजनीतिक झटकों को अपने ऊपर ले लेते हैं, जबकि वेंस को सत्ता के करीब रहने और भविष्य में संभावित उत्तराधिकार का अवसर मिलता है-भले ही वह अनिश्चित हो. लेकिन यह संतुलन ट्रम्प की राजनीति की ही तरह है: लेन-देन आधारित, असमान और अंततः नाजुक. लंबे समय में, ऐसे समीकरण अक्सर टिक नहीं पाते और प्रतिस्पर्धी महत्वाकांक्षाओं तथा मजबूत संस्थागत आधार की कमी के कारण टूट जाते हैं.


यह लेख मूल रूप से एनडीटीवी में प्रकाशित हुआ था. 
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