Author : Harsh V. Pant

Published on Jul 10, 2025 Commentaries 1 Hours ago
अमेरिकी विदेश मंत्री ने क्वॉड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक की मेजबानी की, जिसमें अमेरिका के सहयोगी देशों के साथ रिश्तों में तनाव पर चर्चा हुई.
ट्रम्प के बदलते रुख से लड़खड़ाता क्वॉड

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अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने 1 जुलाई को वॉशिंगटन में क्वॉड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक की मेजबानी की. यह इस साल क्वॉड विदेश मंत्रियों की दूसरी बैठक थी. पहली बैठक वॉशिंगटन में ही जनवरी में नई सरकार के सत्ता संभालने के बाद हुई थी. दूसरी बैठक ऐसे समय हुई है जब अमेरिका के सहयोगी देशों - जापान और ऑस्ट्रेलिया- व स्ट्रैटेजिक पार्टनर भारत के साथ रिश्तों में दरार काफी बढ़ गई है.

जब से डॉनल्ड ट्रंप वाइट हाउस में वापस लौटे हैं, अमेरिकी विदेश नीति में बदलाव देखा जा रहा है. इसकी आर्थिक और सुरक्षा संबंधी प्राथमिकताएं भी बदल रही हैं. राष्ट्रपति ट्रंप की ट्रेड टैरिफ नीति और बदली हुई सुरक्षा प्राथमिकताओं ने क्वॉड देशों के साथ अमेरिका के द्विपक्षीय रिश्तों को जैसे ‘रीसेट-मोड’ में ला दिया है. साल के शुरू में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और जापानी प्रधानमंत्री इशिबा की वाइट हाउस में संभावित बैठक को लेकर बातचीत सकारात्मक माहौल में शुरू हुई, लेकिन ताजा संकेत बताते हैं कि द्विपक्षीय रिश्तों में वैसा सौहार्द नहीं रहा. ताजा उदाहरण हाल में हुए नैटो सम्मेलन का है, जिसमें जापानी प्रधानमंत्री इशिबा की गैर-मौजूदगी बता रही थी कि मित्र देशों से रक्षा खर्च बढ़ाने का बढ़ता अमेरिकी आग्रह जापान को रास नहीं आ रहा.

हाल में हुए नैटो सम्मेलन का है, जिसमें जापानी प्रधानमंत्री इशिबा की गैर-मौजूदगी बता रही थी कि मित्र देशों से रक्षा खर्च बढ़ाने का बढ़ता अमेरिकी आग्रह जापान को रास नहीं आ रहा.

AUKUS की समीक्षा: ऐसे ही अमेरिका के साथ ऑस्ट्रेलिया के रिश्तों में भी तनाव दिख रहा है, खासकर वाइट हाउस द्वारा AUKUS (ऑस्ट्रेलिया, यूनाइटेड किंगडम यानी ब्रिटेन और अमेरिका) ग्रुप को समीक्षा के दायरे में लाए जाने के बाद. इस छोटे से समूह का मकसद ऑस्ट्रेलियाई नौसेना के लिए परमाणु पनडुब्बियों का इंतजाम करना है. वाइट हाउस समीक्षा इस बात की करने वाला है कि इस ग्रुप के उद्देश्य राष्ट्रपति ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति से मेल खाते हैं या नहीं. इस समीक्षा का कोई भी नेगेटिव निष्कर्ष न केवल ऑस्ट्रेलिया-अमेरिका रिश्ते पर बुरा असर डाल सकता है बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र के समुद्री सुरक्षा ढांचे को भी प्रभावित कर सकता है.

यही नहीं, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हुए युद्धविराम को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता के ट्रंप के दावों ने भारत-अमेरिका रिश्तों में असहजता ला दी है. भारत और अमेरिका के बीच व्यापार में कथित असंतुलन की बीच-बीच में की जा रही चर्चा ने भी यों तेजी से आगे बढ़ते द्विपक्षीय रिश्तों पर अनिश्चितता की तलवार लटका दी है.

चीन से समझौते का असर: क्वॉड के सदस्य देशों के साथ अमेरिका के रिश्तों में चल रही इस उथलपुथल के मद्देनजर देखा जाए तो पेइचिंग और वॉशिंगटन के बीच व्यापार समझौते की खबर इस ग्रुप के लिए भी कई बड़े सवाल लेकर आती है. चूंकि ट्रंप अपनी विदेश नीति संबंधी प्राथमिकताओं को उलटते-पलटते दिख रहे हैं, इसलिए स्वाभाविक रूप से इस ग्रुप को भी अपनी प्राथमिकताओं पर नए सिरे से विचार-विमर्श करना होगा.

हालांकि इस सबके बावजूद क्वॉड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक इस ग्रुप के अजेंडा को आगे बढ़ाने के लिहाज से फलप्रद साबित हुई. बातचीत के आखिर में जारी संयुक्त बयान में चार ऐसे मुख्य क्षेत्र रेखांकित किए गए हैं जो इस ग्रुप का अजेंडा तय करने में सहायक होंगे. ये हैं - समुद्री व अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक समृद्धि तथा सुरक्षा, उभरती महत्वपूर्ण टेक्नॉलजी और आपातकालीन मानवीय मदद.

गौर करने की बात है कि ग्रुप ने क्वॉड क्रिटिकल मिनरल्स इनीशिएटिव भी लॉन्च किया, जिसका मकसद क्रिटिकल मिनरल्स सप्लाई चेन में विविधता लाना और उन्हें सुरक्षित बनाए रखना है.

हिंद-प्रशांत क्षेत्र की विशालता को देखते हुए क्वॉड ASEAN, IORA और पैसिफिक आइलैंड फोरम जैसे क्षेत्रीय संगठनों के साथ सहयोग लगातार बनाए रखता है. इस बैठक में भी ऐसी कई घोषणाएं की गईं जिनसे इन चारों क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं मजबूत होंगी. गौर करने की बात है कि ग्रुप ने क्वॉड क्रिटिकल मिनरल्स इनीशिएटिव भी लॉन्च किया, जिसका मकसद क्रिटिकल मिनरल्स सप्लाई चेन में विविधता लाना और उन्हें सुरक्षित बनाए रखना है.

आतंकवाद पर सही रुख: दुनिया भर में जारी उथल-पुथल को देखते हुए, इस ग्रुप ने ईस्ट और साउथ चाइना सी क्षेत्रों में चीन की बढ़ती आक्रामकता पर चिंता जताई, हालांकि नाम नहीं लिया. ग्रुप ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले का भी न केवल जिक्र किया बल्कि हिंसक अतिवाद की खुलकर निंदा की. भारत के लिए यह निश्चित रूप से आश्वस्त करने वाली बात है. खासकर शंघाई कोऑपरेशन ऑग्नाइजेशन (SCO) में पिछले दिनों मिले अनुभव के बाद जहां संयुक्त बयान में पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र न होने से आतंकवाद पर उस ग्रुप की प्रतिबद्धता सवालों से घिर गई.

अनिश्चितताओं के बीच भी क्वॉड विदेश मंत्रियों की बैठक हिंद प्रशांत क्षेत्र में नियम आधारित व्यवस्था कायम करने को लेकर ग्रुप की प्रतिबद्धता एक बार फिर रेखांकित करने में सफल रही. क्वॉड नेताओं की अगली शिखर बैठक इसी साल भारत में होने वाली है. दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चलते युद्ध और जारी तनाव के बीच हिंद प्रशांत क्षेत्र में अस्थिरता का खतरा लगातार बना हुआ है. ऐसे में मतभेदों के बीच भी क्वॉड की जरूरत और सार्थकता लगातार बनी हुई है.


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