Published on Mar 23, 2026 Commentaries 1 Days ago

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के हालिया भारत दौरे के बाद दोनों देशों के रिश्तों में सुधार की नई शुरुआत हुई है. जानिए, इस यात्रा में व्यापार, ऊर्जा (यूरेनियम समझौता) और तकनीक जैसे क्षेत्रों में हुए अहम समझौतों ने साझेदारी को कैसे नई दिशा दी.

भारत–कनाडा: बैकडोर डील्स का दौर!

जब कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने 27 फ़रवरी से 2 मार्च 2026 के बीच भारत का दौरा किया तो दोनों देशों के रिश्तों में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला. खासकर इसलिए भी कि उनके पूर्ववर्ती जस्टिन ट्रूडो के समय संबंध काफी सख्त और सीधे अंदाज़ में चल रहे थे.

कार्नी की यात्रा का ध्यान साफ तौर पर नतीजों पर था और पुराने विवादों में समय नहीं लगाया गया. यह दौरा भारत-कनाडा रिश्तों को फिर से बेहतर बनाने की कोशिशों का हिस्सा था, जो 2025 में हुई बैठकों से शुरू हुई थीं. कनाडा ने भी व्यावहारिक तरीके से संबंध आगे बढ़ाएं. 

नई आर्थिक दिशा

बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच आर्थिक मुद्दों पर ध्यान देना स्वाभाविक था. कनाडा पर उसके दक्षिणी पड़ोसी अमेरिका का दबाव रहा है, क्योंकि उसकी आपूर्ति श्रृंखलाएँ काफी हद तक वाशिंगटन की ओर केंद्रित हैं, जो उसका दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति और यूरोप, पश्चिम एशिया तथा व्यापक लेवांत क्षेत्र में जारी संघर्षों ने वैश्विक शक्तियों की आर्थिक दिशा को प्रभावित किया है. भारत और कनाडा ऐसे देशों में शामिल हैं जो युद्ध से बचते हुए अपने देशों के लिए ठोस परिणामों पर ध्यान देना चाहते हैं. हालांकि, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएँ आपस में गहराई से जुड़ी हुई हैं, इसलिए देशों के लिए संघर्षों और नए गठबंधनों के प्रभाव से पूरी तरह बच पाना लगभग असंभव है. भारत और कनाडा व्यापार, ऊर्जा, निवेश और सुरक्षा में विविधता लाने को जरूरी मानते हैं.

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति और यूरोप, पश्चिम एशिया तथा व्यापक लेवांत क्षेत्र में जारी संघर्षों ने वैश्विक शक्तियों की आर्थिक दिशा को प्रभावित किया है. भारत और कनाडा ऐसे देशों में शामिल हैं जो युद्ध से बचते हुए अपने देशों के लिए ठोस परिणामों पर ध्यान देना चाहते हैं.

कार्नी की इस यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कम से कम आठ समझौते और अनुबंध हुए. इनमें सबसे प्रमुख व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) था, जिसके लिए समझौते की शर्तों पर हस्ताक्षर किए गए, जिससे आगे की बातचीत का रोडमैप और ढांचा तय हुआ. इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया-कनाडा-भारत प्रौद्योगिकी और नवाचार साझेदारी के तहत तकनीक और नवाचार में सहयोग के लिए एक और समझौता ज्ञापन (MoU) हुआ, जिसका उद्देश्य इन क्षेत्रों में दीर्घकालिक साझेदारी को बढ़ावा देना और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के प्रमुख देशों के साथ ओटावा की भागीदारी को मजबूत करना है.

मुख्य फोकस क्षेत्र

अनुसंधान साझेदारी को बढ़ाने, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और खाद्य तथा पोषण के क्षेत्रों में सहयोग से जुड़े अन्य समझौते भी हुए. इनमें से दो सबसे महत्वपूर्ण समझौते भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग और कनाडा की कंपनी Cameco के बीच यूरेनियम अयस्क सांद्र की आपूर्ति के लिए वाणिज्यिक अनुबंध, तथा महत्वपूर्ण खनिज सहयोग पर समझौता ज्ञापन (MoU) थे.

ये सहयोग क्षेत्र भारत की वर्तमान जरूरतों के साथ-साथ भविष्य की उस रूपरेखा से भी जुड़े हैं, जिसमें प्रौद्योगिकी और महत्वपूर्ण खनिज बेहद जरूरी हैं. पहला, आधुनिक युग में तकनीक और रोजमर्रा के जीवन के लिए महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षित करने की वैश्विक दौड़ चल रही है. दूसरा, महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति आज कुछ ही देशों, खासकर चीन, के हाथों में ज्यादा है. हाल में टैरिफ के जवाब में चीन ने इन खनिजों की सप्लाई का इस्तेमाल अपने प्रभाव के लिए किया. इससे दूसरे देशों को समझ आया कि संकट के समय अपनी सप्लाई सुरक्षित रखना जरूरी है. इसलिए भारत और कनाडा ने महत्वपूर्ण खनिजों पर सहयोग बढ़ाया है. यह कदम पैक्स सिलिका समूह के साथ मिलकर एआई और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में साझेदारी मजबूत करने में मदद करेगा.

कनाडा के साथ यूरेनियम अयस्क की सप्लाई का लंबा समझौता होने से भारत को ईंधन नियमित और भरोसेमंद तरीके से मिल सकेगा, जिससे भविष्य में ऊर्जा की योजना बनाना आसान होगा.

ऊर्जा पर विशेष ध्यान

भारत और कनाडा जिन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना चाहते थे, उनमें ऊर्जा सबसे महत्वपूर्ण रही. भारत के लिए विकास का आधार स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग होना चाहिए, क्योंकि उसके सतत विकास लक्ष्य और शून्य-उत्सर्जन (zero-emission) के लक्ष्य हैं.

भारत के लिए ऊर्जा की स्थिरता और भरोसेमंद आपूर्ति सुनिश्चित करने का सबसे तेज तरीका यह है कि वह बाहरी ऊर्जा आयात पर अपनी निर्भरता कम करे और धीरे-धीरे देश में ही ऊर्जा उत्पादन बढ़ाए. तर्कसंगत रूप से, इसे हासिल करने का सबसे प्रभावी तरीका भारत की ऊर्जा मिश्रण में परमाणु ऊर्जा की भूमिका बढ़ाना है. इसी दिशा में भारत द्वारा 2025 में पारित भारत में बदलाव के लिए परमाणु ऊर्जा का सतत दोहन और उन्नति (SHANTI) Bill को एक महत्वपूर्ण कदम माना गया. कनाडा के साथ यूरेनियम अयस्क की सप्लाई का लंबा समझौता होने से भारत को ईंधन नियमित और भरोसेमंद तरीके से मिल सकेगा, जिससे भविष्य में ऊर्जा की योजना बनाना आसान होगा.

कुल मिलाकर, ऊर्जा के लिए बाहरी स्रोतों पर भारत की निर्भरता लगातार चल रहे वैश्विक संघर्षों के इस दौर में उसे कमजोर बना सकती है. इसलिए कनाडा के साथ हुआ यूरेनियम समझौता भारत के लिए बेहद उपयुक्त है, जिससे बाहरी जोखिम कम होंगे, विकास लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिलेगी और 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा क्षमता प्राप्त करने के लक्ष्य की दिशा में भी प्रगति होगी.


यह लेख मूल रूप से द हिंदू में प्रकाशित हुआ था. 

The views expressed above belong to the author(s). ORF research and analyses now available on Telegram! Click here to access our curated content — blogs, longforms and interviews.

Authors

Harsh V. Pant

Harsh V. Pant

Professor Harsh V. Pant is Vice President at Observer Research Foundation, New Delhi. He is a Professor of International Relations with King's India Institute at ...

Read More +
Vivek Mishra

Vivek Mishra

Vivek Mishra is Deputy Director – Strategic Studies Programme at the Observer Research Foundation. His work focuses on US foreign policy, domestic politics in the US, ...

Read More +