Author : Harsh V. Pant

Originally Published हिन्दुस्तान Published on Apr 08, 2025 Commentaries 1 Hours ago

प्रधानमंत्री की इस यात्रा से पता चलता है कि पूरे क्षेत्र में भारत की भूमिका बढ़ाने की बड़ी जरूरत है.

थाईलैंड से श्रीलंका तक: मोदी की विदेश यात्रा ने खोले सहयोग के नए दरवाज़े


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हाल का थाईलैंड और श्रीलंका दौरा भारतीय कूटनीति के लिए कई मायने में महत्वपूर्ण है. एशिया के इस क्षेत्र में लगभग निष्क्रिय हो चुके दक्षिण एशिया क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) के बाद क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने वाले एक संगठन की जरूरत शिद्दत से महसूस की जा रही है. ऐसे में, बिम्सटेक इस सहयोग को आकार देने में अहम साबित हो सकता है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बे ऑफ बंगाल इनिशिएटिव फॉर मल्टी-सेक्टोरल टेक्निकल ऐंड इकोनॉमिक को-ऑपरेशन (बिम्सटेक) के छठे शिखर सम्मेलन में भाग लेने बैंकॉक गए थे. इससे भारत-थाईलैंड संबंध को भी मजबूती मिली है. उनकी यात्रा से इस बात को भी बल मिला है कि दक्षिण व दक्षिण-पूर्व एशिया के दो भौगोलिक क्षेत्र आपस में जुड़े हुए हैं. दोनों को एक-दूसरे की ताकत का लाभ उठाने का मौका नहीं मिला है. इस सच्चाई को देखते हुए प्रधानमंत्री की यह यात्रा और बिम्सटेक में भारत की बढ़ती सक्रियता विशेष महत्व रखती है.

 उनकी यात्रा से इस बात को भी बल मिला है कि दक्षिण व दक्षिण-पूर्व एशिया के दो भौगोलिक क्षेत्र आपस में जुड़े हुए हैं.

बिम्सटेक का गठन 1997 में हुआ, लेकिन इसने 2016 में तब गति पकड़ी, जब मोदी ने गोवा में लीडर्स रिट्रीट के लिए संगठन के देशों को आमंत्रित किया. इसके बाद से नई दिल्ली ने समूह को और मजबूत करने के साथ-साथ -साथ क्षेत्रीय सहयोग पर ध्यान केंद्रित करने की लगातार कोशिशें की हैं. ज्ञात हो कि मोदी ने बिम्सटेक देशों के नेताओं को 2019 में अपने शपथ ग्रहण में भी आमंत्रित किया था. इसके अतिरिक्त भारत की पड़ोसी पहले नीति, एक्ट ईस्ट नीति ने भी समूह की सक्रियता को जरूरी बना दिया है.

बैंकॉक शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने समृद्ध, लचीला और खुला बिम्सटेक थीम के अनुरूप कई पहलों की घोषणा की. भारत में आपदा प्रबंधन, सतत समुद्री परिवहन, पारंपरिक चिकित्सा के साथ कृषि अनुसंधान और प्रशिक्षण पर बिम्सटेक केंद्र स्थापित किए जाएंगे. युवाओं के लिए एक नया कार्यक्रम-बोधि चलेगा. इसके तहत पेशेवरों, छात्रों, शोधकर्ताओं, राजनयिकों को प्रशिक्षण व छात्रवृत्ति दी जाएगी. भारत ने क्षेत्र में कैंसर उपचार के लिए एक क्षमता निर्माण कार्यक्रम की भी पेशकश की. क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण का आह्वान किया. बिम्सटेक चैंबर ऑफ कॉमर्स की स्थापना और भारत में हर साल बिम्सटेक बिजनेस समिट आयोजित करने की पेशकश की गई है.

प्रधानमंत्री यात्रा और की थाईलैंड उसके बाद श्रीलंका दौरे से यह पता चलता है कि भारत को इस पूरे क्षेत्र में सक्रियता बढ़ानी चाहिए.

बिम्सटेक में निवेश करके भारत यह संकेत दे रहा है कि वह दक्षिण-पूर्व एशिया में बाहरी खिलाड़ी नहीं है. बल्कि वह थाईलैंड-म्यांमार के रास्ते दक्षिण-पूर्व एशिया से नाभिनाल जुड़ा हुआ है. मोदी ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत का पूर्वोत्तर क्षेत्र बिम्सटेक के केंद्र में है.

यह यात्रा पिछले 12 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली थाईलैंड यात्रा थी. दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर किए. रक्षा पर सहयोग बढ़ाया और दक्षिण-पूर्व एशिया से जुड़नेवाले एक प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजना को गति दी. दोनों देश 1,300 किलोमीटर लंबी राजमार्ग परियोजना में तेजी लाएंगे. यह राजमार्ग म्यांमार के रास्ते पूर्वोत्तर भारत को उत्तरी थाईलैंड से जोड़ेगा. 

किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष को दिया जाने वाला श्रीलंका का सर्वोच्च नागरिक सम्मान मित्र विभूषण नरेंद्र मोदी को प्रदान किया गया. कोलंबो के मध्य में ऐतिहासिक स्वतंत्रता चौक पर मोदी का भव्य स्वागत भी किया गया, जो शायद किसी विदेशी नेता को दिया जाने वाला पहला ऐसा सम्मान था. 

बहरहाल, प्रधानमंत्री मोदी के श्रीलंका दौरे की एक अलग कहानी है. वहां की अनुरा कुमारा दिसानायके सरकार के बारे में शुरुआती आशंकाओं के बावजूद दिल्ली-कोलंबो संबंध लगातार सुधर रहे हैं. इस दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल को कोलंबो ने स्वीकार भी किया है. इसीलिए किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष को दिया जाने वाला श्रीलंका का सर्वोच्च नागरिक सम्मान मित्र विभूषण नरेंद्र मोदी को प्रदान किया गया. कोलंबो के मध्य में ऐतिहासिक स्वतंत्रता चौक पर मोदी का भव्य स्वागत भी किया गया, जो शायद किसी विदेशी नेता को दिया जाने वाला पहला ऐसा सम्मान था. मोदी ने भी राष्ट्रपति दिसानायके की भूमिका की सराहना की है. दिसानायके ने भारत को आश्वासन दिया कि श्रीलंकाई क्षेत्र को भारत की सुरक्षा के साथ-साथ क्षेत्रीय स्थिरता को हानि पहुंचाने वाली किसी भी गतिविधि के लिए उपयोग करने नहीं दिया जाएगा. वाकई, प्रधानमंत्री की इस यात्रा से पता चलता है कि पूरे क्षेत्र में भारत की भूमिका बढ़ाने की बड़ी जरूरत है.

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