Published on Mar 09, 2026 Commentaries 23 Hours ago


अब विदेश नीति सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं, हरियाणा जैसे राज्य भी अफ्रीका के साथ मिलकर विकास की नई कहानी लिख रहे हैं. हरियाणा-अफ्रीका साझेदारी के जरिए समझिए कि स्थानीय स्तर पर सहयोग से विकास की नई और मजबूत दिशा बन सकती है.

विदेश नीति अब राज्यों तक! पढ़िए हरियाणा-अफ्रीका मॉडल

आज की बदलती वैश्विक व्यवस्था में, जहाँ दुनिया बहुध्रुवीयता की ओर बढ़ रही है, 'उप-राष्ट्रीय कूटनीति' (Sub-national Diplomacy) एक शक्तिशाली उपकरण के रूप में उभरी है. इसका सबसे सटीक और जीवंत उदाहरण हरियाणा-अफ्रीका रणनीतिक साझेदारी के रूप में देखने को मिलता है. हाल ही में फरीदाबाद के प्रसिद्ध सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेले के दौरान आयोजित कॉन्क्लेव ने यह सिद्ध कर दिया कि अब अंतरराष्ट्रीय संबंध केवल देशों की राजधानियों (जैसे दिल्ली या वाशिंगटन) तक सीमित नहीं हैं बल्कि राज्यों के स्तर पर भी वैश्विक विकास की इबारत लिखी जा सकती है.

सूरजकुंड मेले के मंच पर आयोजित इस सम्मेलन में मलावी, मोजाम्बिक, तंजानिया, मेडागास्कर और नाइजीरिया सहित 21 अफ्रीकी देशों के राजदूतों और वरिष्ठ राजनयिकों ने भाग लिया. इसके साथ ही भारत के विदेश मंत्रालय और हरियाणा सरकार के मंत्रियों की उपस्थिति ने इसे एक अत्यंत गंभीर और रणनीतिक मंच बना दिया. इस साझेदारी की आत्मा 'दक्षिण-दक्षिण सहयोग' (South-South Cooperation) में बसी है. यह सहयोग समानता, आपसी लाभ और साझा अनुभवों पर आधारित है. हरियाणा, जो आज कृषि, विनिर्माण (Manufacturing), MSMEs और स्टार्टअप्स में भारत के अग्रणी राज्यों में से एक है, के पास वह अनुभव है जिसकी अफ्रीका की उभरती अर्थव्यवस्थाओं को सख्त जरूरत है. अफ्रीका के कई देश आज उन्हीं चुनौतियों का सामना कर रहे हैं जिनसे हरियाणा ने पिछले कुछ दशकों में सफलतापूर्वक निपटना सीखा है-जैसे कि खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, युवाओं के लिए रोजगार पैदा करना और उद्योगों का आधुनिकीकरण करना.

भारत के विदेश मंत्रालय और हरियाणा सरकार के मंत्रियों की उपस्थिति ने इसे एक अत्यंत गंभीर और रणनीतिक मंच बना दिया. इस साझेदारी की आत्मा 'दक्षिण-दक्षिण सहयोग' में बसी है. यह सहयोग समानता, आपसी लाभ और साझा अनुभवों पर आधारित है.

हरियाणा ने इस दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए एक समर्पित 'विदेशी सहयोग विभाग' की स्थापना की है. ऐसा करने वाला यह भारत के शुरुआती राज्यों में से एक है, जो यह दर्शाता है कि अब राज्य अपनी अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं.

कृषि: सहयोग का सबसे उपजाऊ क्षेत्र

कृषि इस साझेदारी का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ है. हरियाणा ने सिंचाई प्रबंधन, फसल विविधीकरण (Crop Diversification) और डेयरी विकास में विश्व स्तरीय मानक स्थापित किए हैं. केन्या, तंजानिया और रवांडा जैसे अफ्रीकी देशों के लिए हरियाणा की 'पोस्ट-हार्वेस्ट मैनेजमेंट' (फसल कटाई के बाद का प्रबंधन) और मशीनीकरण की तकनीकें बेहद उपयोगी साबित हो सकती हैं. यह सहयोग अब केवल 'मदद' तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संयुक्त खेती के उपक्रमों और बीज प्रौद्योगिकी के आदान-प्रदान की ओर बढ़ रहा है. यह मॉडल 'दानकर्ता और प्राप्तकर्ता' के पुराने रिश्तों को बदलकर 'सह-विकास' (Co-development) की एक नई परिभाषा लिख रहा है.

औद्योगिक और डिजिटल परिवर्तन

साझेदारी का दूसरा प्रमुख स्तंभ औद्योगिक सहयोग है. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) का हिस्सा होने के कारण हरियाणा के पास रसद (Logistics) और बुनियादी ढांचे की जबरदस्त ताकत है. ऑटोमोबाइल और विनिर्माण क्षेत्र में हरियाणा की विशेषज्ञता अफ्रीका के उन देशों के लिए एक मॉडल का काम कर सकती है जो अपने यहाँ औद्योगीकरण को बढ़ावा देना चाहते हैं. तंजानिया निवेश केंद्र जैसे संस्थानों के साथ हुए समझौते यह बताते हैं कि कैसे दोनों पक्ष एक-दूसरे के यहाँ निवेश को आसान बना रहे हैं. इसके अलावा, 'डिजिटल इंडिया' की तर्ज पर हरियाणा ने सरकारी सेवाओं को जिस तरह डिजिटल बनाया है, वह अफ्रीकी देशों के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण है.

हरियाणा ने सिंचाई प्रबंधन, फसल विविधीकरण और डेयरी विकास में विश्व स्तरीय मानक स्थापित किए हैं. केन्या, तंजानिया और रवांडा जैसे अफ्रीकी देशों के लिए हरियाणा की 'पोस्ट-हार्वेस्ट मैनेजमेंट' और मशीनीकरण की तकनीकें बेहद उपयोगी साबित हो सकती हैं.

पर्यावरण और सतत विकास  

पर्यावरण के क्षेत्र में भी दोनों के बीच एक दिलचस्प जुड़ाव है. भारत का 'अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट', जो हरियाणा से होकर गुजरता है, काफी हद तक अफ्रीका के 'ग्रेट ग्रीन वॉल' प्रोजेक्ट से प्रेरित है. दोनों ही क्षेत्रों का लक्ष्य मरुस्थलीकरण को रोकना और नष्ट हो चुकी भूमि को फिर से हरा-भरा बनाना है. सौर ऊर्जा और जल संरक्षण के साझा प्रयास यह दर्शाते हैं कि जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक समस्याओं का समाधान भी स्थानीय स्तर पर एक-दूसरे से सीख कर निकाला जा सकता है.

सांस्कृतिक और जन-जुड़ाव

किसी भी रणनीतिक साझेदारी की सफलता के लिए लोगों के बीच जुड़ाव होना अनिवार्य है. सूरजकुंड मेले के माहौल ने इस आर्थिक रिश्ते को एक सांस्कृतिक पहचान दी. जब अफ्रीकी कलाकारों ने हरियाणा के कलाकारों के साथ मंच साझा किया, तो इसने न केवल मनोरंजन किया बल्कि सामाजिक निकटता को भी बढ़ाया. जब लोगों के बीच सांस्कृतिक सहानुभूति होती है, तो व्यापारिक और राजनीतिक संबंध अपने आप मजबूत हो जाते हैं.

संरचनात्मक बदलाव और भविष्य की राह

हरियाणा की यह पहल भारत की विदेश नीति में एक बड़ा बदलाव दिखाती है. परंपरागत रूप से विदेश नीति केंद्र सरकार का विषय रही है, लेकिन अब आर्थिक विकेंद्रीकरण के दौर में राज्यों को अपनी क्षमताएं प्रदर्शित करने की छूट मिली है. हरियाणा का यह 'माइक्रो-लेवल' (सूक्ष्म स्तर) दृष्टिकोण राष्ट्रीय विजन को हकीकत में बदलने का काम करता है.

यह महज एक क्षेत्रीय पहल नहीं है, बल्कि यह भविष्य की उस कूटनीति का संकेत है जहाँ सहयोग केवल ऊपर से नीचे नहीं होता, बल्कि क्षैतिज रूप से एक-दूसरे के सम्मान और विश्वास के साथ बहता है.

हालाँकि, इस साझेदारी को लंबे समय तक सफल बनाए रखने के लिए केवल आयोजनों से काम नहीं चलेगा. इसके लिए कुछ ठोस कदम उठाने होंगे,संस्थागत निरंतरता: नियमित व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों का दौरा और सेक्टर-विशिष्ट वर्किंग ग्रुप का गठन. जवाबदेही: जो समझौते (MoUs) हुए हैं, उनके परिणामों का समय-समय पर पारदर्शी मूल्यांकन होना चाहिए. शिक्षा और प्रशिक्षण: अफ्रीकी युवाओं के लिए हरियाणा के विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों में विशेष छात्रवृत्ति और प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करना.

सह-विकास का मॉडल

अंततः, हरियाणा-अफ्रीका रणनीतिक साझेदारी एक ऐसा खाका है जिसे अन्य भारतीय राज्य और दुनिया के अन्य विकासशील क्षेत्र भी अपना सकते हैं. यह साझेदारी हमें सिखाती है कि जब समान चुनौतियों वाले समाज एक-दूसरे का हाथ थामते हैं, तो विकास की गति तेज हो जाती है. यह महज एक क्षेत्रीय पहल नहीं है, बल्कि यह भविष्य की उस कूटनीति का संकेत है जहाँ सहयोग केवल ऊपर से नीचे नहीं होता, बल्कि क्षैतिज (Horizontal) रूप से एक-दूसरे के सम्मान और विश्वास के साथ बहता है. हरियाणा ने दिखा दिया है कि एक राज्य भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक 'प्रयोगशाला' के रूप में कार्य कर सकता है, जहाँ आधुनिक समस्याओं के साझा समाधान खोजे जाते हैं.


यह लेख मूल रूप से मॉडर्न घाना में प्रकाशित हुआ था. 

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