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भारत अपनी तकनीकी शिक्षा को अफ्रीका ले जा रहा है और नाइजीरिया इस बदलाव का नेतृत्व कर रहा है. नाइजीरिया में IIT की स्थापना शिक्षा और इनोवेशन के नए युग की शुरुआत है. ये साझेदारी नाइजीरिया को वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में नई बढ़त दिला सकती है.
भारत अपनी विश्वस्तरीय तकनीकी शिक्षा को अफ्रीका ले जा रहा है और इस कायाकल्प में नाइजीरिया ने ख़ुद को सबसे आगे रखा है. नाइजीरिया में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) की स्थापना न केवल शिक्षा के मामले में एक मील का पत्थर है बल्कि ये एक रणनीतिक साझेदारी भी है जो 21वीं शताब्दी में इनोवेशन, औद्योगिक विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के मामले में नाइजीरिया के नज़रिए को नया रूप दे सकता है.
जुलाई 2023 में IIT मद्रास ने भारत के बाहर पहला IIT कैंपस खोलने के लिए ज़ांज़ीबार की सरकार के साथ एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए. उस मॉडल की सफलता ने एक नए वेंचर यानी IIT नाइजीरिया की स्थापना की बुनियाद रखी. सुलेजा में फेडरल गवर्नमेंट एकेडमी- जिसे प्रतिभाशाली लोगों के लिए नाइजीरिया की एकेडमी के रूप में भी जाना जाता है- के भीतर स्थित ये प्रस्तावित संस्था भारत की शैक्षणिक उत्कृष्टता को नाइजीरिया के बुनियादी ढांचे और स्थानीय परिचालन (ऑपरेशनल) समर्थन के साथ जोड़ेगा. इस ढांचे के तहत भारत फैकल्टी, पाठ्यक्रम और शैक्षणिक देख-रेख प्रदान करेगा जबकि नाइजीरिया बुनियादी ढांचे और प्रशासन को संभालेगा. 2026 से क्लास शुरू होने की उम्मीद है जो नाइजीरिया के उच्च शिक्षा के परिदृश्य में एक नए अध्याय के आरंभ होने का प्रतीक होगा.
“ये मॉडल स्थानीय बनाकर नाइजीरिया अपने ज़्यादा-से-ज़्यादा युवाओं के लिए विश्व स्तरीय शिक्षा को आसान बना रहा है.”
नाइजीरिया के लिए इस साझेदारी का महत्व किसी विदेशी संस्थान की मेज़बानी से बढ़कर है. ये मानव पूंजी, तकनीकी इनोवेशन और ज्ञान की कूटनीति के माध्यम से राष्ट्रीय विकास की परिकल्पना का सोच-समझकर प्रयास है. दुनिया भर में शीर्ष स्तर के इंजीनियर, वैज्ञानिक और इनोवेटर तैयार करने के लिए मशहूर IIT, नाइजीरिया के छात्रों को उसी स्तर की शिक्षा तक पहुंच प्रदान करेगा जिसने वैश्विक तकनीक और उद्यमिता में भारत के उदय में मदद की है. इस मॉडल को स्थानीय बनाकर नाइजीरिया अपने ज़्यादा-से-ज़्यादा युवाओं के लिए विश्व स्तरीय शिक्षा को आसान बना रहा है. अगर ऐसा नहीं होता तो उनमें से ज़्यादातर युवा अपने लिए अवसर की तलाश में विदेश चले जाते.
इसका समय इससे ज़्यादा रणनीतिक नहीं हो सकता था. राष्ट्रपति बोला अहमद टिनुबु के “नए सिरे से उम्मीद के एजेंडे” में मानव संसाधन विकास और तकनीकी इनोवेशन को नाइजीरिया के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है. IIT नाइजीरिया औद्योगिकी विविधता में लंबे समय से बाधा बने कौशल से जुड़ी खामियों को दूर करके और एप्लाइड रिसर्च, एंटरप्रेन्योरशिप और इनोवेशन को बढ़ावा देने वाला इकोसिस्टम तैयार करके उनके नज़रिए में मदद करता है. ये छात्रों को अपने देश की सीमा के भीतर उच्च क्वालिटी की शिक्षा प्रदान करके प्रतिभा पलायन (ब्रेन ड्रेन) की लगातार चुनौती का समाधान करने में मदद करता है. साथ ही इससे छात्रों को विदेश में अवसर तलाशने के बदले नाइजीरिया के विकास के लिए अपनी विशेषज्ञता का योगदान देने का प्रोत्साहन भी मिलता है.
“ये साझेदारी साउथ-साउथ कोऑपरेशन में एक अग्रणी देश के रूप में नाइजीरिया के उदय को भी रेखांकित करती है.”
ये साझेदारी साउथ-साउथ कोऑपरेशन (विकासशील देशों के बीच सहयोग) में एक अग्रणी देश के रूप में नाइजीरिया के उदय को भी रेखांकित करती है. दशकों से भारत शिक्षा, प्रशिक्षण और तकनीक के हस्तांतरण के क्षेत्रों में अफ्रीका का लगातार साझेदार रहा है. भारतीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग (ITEC) पहल और पैन-अफ्रीकन ई-नेटवर्क जैसे कार्यक्रमों ने अफ्रीका के हज़ारों पेशेवरों को सूचना तकनीक से लेकर रक्षा और लोक प्रशासन जैसे क्षेत्रों में ट्रेनिंग दी है. ट्रेनिंग पाने वालों में नाइजीरिया के लोग भी हैं. नाइजीरिया की धरती पर IIT कैंपस लाकर ये तालमेल आगे की दिशा में एक साहसिक कदम है. ये सहयोग को विदेशी धरती पर ट्रेनिंग की जगह घरेलू संस्थान निर्माण की तरफ ले जाता है जो सीधे तौर पर सुलभ, उच्च क्वालिटी वाली और प्रासंगिक शिक्षा के लिए अफ्रीका की मांग से मिलता है.
नाइजीरिया के लिए लंबे समय में इसका बहुत ज़्यादा परिणाम है. एक IIT कैंपस से इनोवेटर्स की एक ऐसी पीढ़ी को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी जो टिकाऊ औद्योगिक विकास को तेज़ करने में सक्षम होगी और नाइजीरिया को विज्ञान एवं तकनीक के क्षेत्रीय केंद्र के रूप में स्थापित करेगी. ये नाइजीरिया और भारत के स्कॉलर्स के बीच तालमेल के माध्यम से रिसर्च के इकोसिस्टम को मज़बूत बनाने का वादा करता है जिससे नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल इनोवेशन, जलवायु सामर्थ्य और स्वास्थ्य देखभाल की तकनीक जैसे क्षेत्रों में प्रगति को गति मिलेगी. समय के साथ इसका प्रभाव नाइजीरिया की सीमा से आगे भी होने की उम्मीद है जिससे पूरे पश्चिम अफ्रीका के छात्र नाइजीरिया की तरफ आकर्षित होंगे और तकनीकी शिक्षा के मामले में नाइजीरिया की स्थिति पूरे अफ्रीकी महादेश में मज़बूत होगी.
“एक IIT कैंपस से इनोवेटर्स की एक ऐसी पीढ़ी को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी जो टिकाऊ औद्योगिक विकास को तेज़ करने में सक्षम होगी…”
इतना ही महत्वपूर्ण इस साझेदारी में नाइजीरिया और भारत के बीच द्विपक्षीय संबंधों को गहरा करने की क्षमता है. दोनों देश निर्भरता के बदले सहयोग के माध्यम से विकासशील देशों को सशक्त बनाने का दृष्टिकोण साझा करते हैं. इस साझा रणनीति में शिक्षा एक शक्तिशाली साधन के रूप में उभर रही है. शिक्षा कूटनीति का वो साधन है जिससे न सिर्फ ज्ञान का निर्माण होता है बल्कि आपसी विश्वास और समृद्धि का भी. चूंकि भारत पूरे अफ्रीकी महादेश में शिक्षा से जुड़ा अपना दायरा बढ़ा रहा है, ऐसे में IIT की मेज़बानी करने का नाइजीरिया का निर्णय उसे साउथ-साउथ भागीदारी की इस नई लहर के केंद्र में रखता है.
अफ्रीका की युवा जनसंख्या इस तरह के सहयोग को आवश्यक और समय के अनुकूल बनाती है. केवल 19 साल की औसत आयु और तेज़ी से बढ़ते वर्कफोर्स के साथ अफ्रीका को कौशल विकास और तकनीकी प्रगति के लिए टिकाऊ मॉडल की आवश्यकता है. भारत के साथ नाइजीरिया की साझेदारी ठीक यही मॉडल मुहैया कराती है यानी एक ऐसा व्यावहारिक ढांचा जो शिक्षा को औद्योगिक महत्व से और कूटनीति को विकास के साथ जोड़ता है. ये दिखाता है कि प्रगति की तरफ अफ्रीका का रास्ता केवल पश्चिमी देशों की सहायता या संस्थानों पर निर्भर नहीं करता है बल्कि साझा मूल्यों और समान आकांक्षाओं पर आधारित आपसी साझेदारी के ज़रिए भी बनाया जा सकता है.
“दीर्घकाल में IIT नाइजीरिया—देश की शिक्षा और अर्थव्यवस्था दोनों को बदल सकता है.”
लंबे समय में IIT नाइजीरिया कायापलट करने वाला साबित हो सकता है- न सिर्फ नाइजीरिया की शिक्षा प्रणाली के लिए बल्कि इसकी व्यापक सामाजिक-आर्थिक राह के लिए भी. ये खपत से निर्माण की ओर, संसाधनों पर निर्भरता से इनोवेशन आधारित विकास की तरफ बदलाव के बारे में बताता है. नाइजीरिया के लिए ये तालमेल केवल भारत के अनुभवों से सीखना नहीं है बल्कि उस अनुभव का लाभ उठाकर तकनीकी उत्कृष्टता के मामले में नाइजीरिया का सबसे अलग मॉडल तैयार करने को लेकर भी है.
IIT नाइजीरिया एक संस्थान से बढ़कर है- ये ज्ञान, इनोवेशन और रणनीतिक वैश्विक साझेदारी के माध्यम से अपना भविष्य तय करने को लेकर नाइजीरिया के दृढ़ संकल्प का प्रतीक है. भारत के साथ हाथ मिलाकर नाइजीरिया न केवल शिक्षा में निवेश कर रहा है बल्कि वो अपने भविष्य और अधिक आत्मनिर्भर अफ्रीका के वादे में भी निवेश कर रहा है.
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Samir Bhattacharya is an Associate Fellow at Observer Research Foundation (ORF), where he works on geopolitics with particular reference to Africa in the changing global ...
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