Author : Harsh V. Pant

Originally Published नवभारत टाइम्स Published on Dec 25, 2025 Commentaries 13 Days ago

वैश्विक राजनीति पर असर डालने वाले दूसरे नेता रहे चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग. माओ के बाद वह चीन के सबसे शक्तिशाली नेता के रूप में उभरे हैं।

ग्लोबल पॉलिटिक्स का नया त्रिकोण: ट्रंप, शी और मोदी

राजनीतिक शख्सियतें और व्यवस्थागत कारण, ग्लोबल पॉलिटिक्स पर समय के हिसाब से इन दोनों का असर पड़ता है. व्यवस्थागत कारण जैसे इंटरनेशनल सिस्टम, आर्थिक स्थिति और सैन्य ताकत. अंतरराष्ट्रीय राजनीति में ये फैक्टर लंबे वक्त के लिए दिशा तय करते हैं. वहीं राजनेताओं का प्रभाव कुछ समय के लिए होता है, खासकर संकट के दौरान.

डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक राजनीति में संरक्षणवाद और द्विपक्षीय समझौतों को प्राथमिकता देकर मौजूदा व्यवस्था को चुनौती दी।

नेताओं का असर: यह वैश्विक राजनीति का ऐसा ही एक दौर है, जब तेजी से बदलती दुनिया में कुछ नेताओं का निर्णायक असर दिख रहा है. इस साल वैश्विक राजनीति में सबसे प्रभावशाली व्यक्तित्व अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रहे हैं, जिन्होंने अकेले ही दुनिया में अपने देश की भूमिका को काफी हद तक बदल दिया है.

ट्रंप की नीति: उन्होंने विदेश नीति में एक हाथ दे, एक हाथ ले वाला तरीका अपनाया, पुराने गठबंधनों पर सवाल उठाए कई अंतरराष्ट्रीय समझौतों से अमेरिका को बाहर निकाला और बहुपक्षीय सहयोग की जगह द्विपक्षीय समझौतों को तरजीह दी. हालांकि चीन से मिलने वाली चुनौतियां बरकरार हैं. घरेलू मोर्चे पर भी ट्रंप ने बड़े बदलाव किए.

विचारों में टकराव: आर्थिक मोर्चे पर ट्रंप ने संरक्षणवादी व्यापार नीति अपनाई, टैरिफ का सहारा लिया. उनका कहना है कि उनकी विदेश नीतियों से अमेरिका की ताकत और समृद्धि बढ़ रही है. हालांकि तमाम अर्थशास्त्रियों और जनता का मानना है कि ट्रंप की नीतियां लंबे वक्त में अमेरिका को नुकसान पहुंचाएंगी. ट्रंप ने कई सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को वापस ले लिया है या उनमें बदलाव किया. समर्थकों के मुताबिक इससे सरकार का जरूरत से ज्यादा दखल कम हुआ है, जबकि आलोचकों का मानना है कि इससे कमजोर और हाशिए पर रहने वाले लोगों की सुरक्षा कमजोर हुई है. ट्रंप के समर्थक उन्हें मजबूत नेता मानते हैं, जबकि विरोधी बंटवारा करने वाला.

कूटनीति, निवेश और बुनियादी ढांचे के माध्यम से ग्लोबल साउथ में चीन की सक्रियता उसकी बढ़ती ताकत और वैश्विक महत्वाकांक्षाओं को दर्शाती है।

शी का प्रभाव: वैश्विक राजनीति पर असर डालने वाले दूसरे नेता रहे चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग. माओ के बाद वह चीन के सबसे शक्तिशाली नेता के रूप में उभरे हैं. उनकी ताकत की वजह है सत्ता का केंद्रीकरण, लंबे वक्त के लिए नीतियां और राष्ट्रीय शक्ति व स्थिरता पर जोर. शी ने हाई क्वॉलिटी ग्रोथ को प्रमोट किया है और धीमी विकास दर, बेरोजगारी व जनसंख्या दबाव जैसे मामलों को संभालने की कोशिश की है.


बढ़ती ताकत: इस साल चीन ने दुनिया में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश की. व्यापार, तकनीक, सैन्य शक्ति और वैश्विक नेतृत्व को लेकर अमेरिका से टकराव बना रहा. इस बीच शी ने कूटनीति निवेश और इंफ्रा परियोजनाओं के जरिये ग्लोबल साउथ के साथ रिश्ते सुधारे. यह नीति चीन की बढ़ती ताकत दिखाती है. शी चिनफिंग के नेतृत्व में संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर भी खास जोर रहा. ताइवान, दक्षिण चीन सागर और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चीन का रुख सख्त बना रहा.

अमेरिका, चीन और रूस जैसे बड़े शक्तिकेंद्रों के साथ संबंध साधते हुए भारत ने खुद को एक जिम्मेदार और स्थिर शक्ति के रूप में प्रस्तुत किया।

मजबूत हुए पुतिन: इस लिस्ट के एक और नेता है व्लादिमीर पुतिन. यूक्रेन युद्ध के बावजूद उन्होंने रूस पर मजबूत पकड़ बनाए रखी है. पुतिन के कार्यकाल में राजनीतिक शक्ति केंद्रित है और विपक्ष या स्वतंत्र सिविल सोसायटी के लिए बहुत कम जगह बची है. विदेश नीति में पूतिन ने रूस को एक महाशक्ति के रूप में फिर से स्थापित करने के लिए टकराव वाली नीति जारी रखी. पश्चिमी देशों के साथ रूस के संबंध तनावपूर्ण बने रहे. वहीं, गैर-पश्चिम देशों के साथ उन्होंने रिश्ते मजबूत करने का प्रयास किया. 2025 में यह साफ हो गया कि यूक्रेन युद्ध का अंत पुतिन की शर्तों पर होगा.

जहां ट्रंप की नीतियों ने व्यवस्था को उलझाया, वहीं शी ने शक्ति विस्तार किया और मोदी ने संतुलन साधने की कोशिश की—यही त्रिकोण आज वैश्विक राजनीति की दिशा तय कर रहा है।

मोदी का नेतृत्व: यह लिस्ट भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बिना अधूरी है. ट्रंप की टैरिफ चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने अच्छा प्रदर्शन करना जारी रखा. सुरक्षा के मोर्चे पर भी भारत का प्रदर्शन प्रभावशाली रहा है. घरेलू स्तर पर मोदी सरकार ने आर्थिक विकास, बुनियादी ढांचों और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन पर जोर दिया.


यह आर्टिकल मूल रूप से नवभारत टाइम्स में प्रकाशित हो चुका है.

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