Author : Vivek Mishra

Published on Apr 30, 2026 Commentaries 1 Hours ago

डोनाल्ड ट्रंप की वापसी के बावजूद अमेरिका में बढ़ती राजनीतिक हिंसा और ध्रुवीकरण चिंता का कारण बन गए हैं. लगातार हमलों और अस्थिर माहौल से साफ है कि यह लोकतंत्र अंदरूनी तनाव के कठिन दौर से गुजर रहा है. पढ़ें पूरा विश्लेषण.

क्या ये नया अमेरिका है- ज्यादा विभाजित, ज्यादा हिंसक?

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संयुक्त राज्य अमेरिका में राजनीतिक हिंसा कोई नई बात नहीं है, लेकिन वर्तमान स्वरूप में यह पहले से कहीं अधिक चिंताजनक हो गई है. गहराई से ध्रुवीकृत समाज अब तकनीक तक पहुँच और उसे नए तरीकों से इस्तेमाल करने की क्षमता दोनों रखता है-अक्सर शत्रुतापूर्ण इरादों को पहचानने, प्रशिक्षित करने और हथियार बनाने के लिए. कट्टर दलगत राजनीति इस बढ़ती बेचैनी को और हवा दे रही है. शनिवार को, जब राष्ट्रपति ट्रंप वॉशिंगटन डीसी के वाशिंगटन हिल्टन में एक कार्यक्रम में शामिल थे, तब उन पर कथित रूप से तीसरी बार जानलेवा हमला हुआ-इससे पहले 2024 में पेंसिल्वेनिया में एक घटना में उन्हें गोली छूकर निकल गई थी. यह पूरा घटनाक्रम चिंताजनक रूप से परिचित लगा. एक विचित्र समानता में, मार्च 1981 में रोनाल्ड रीगन को भी इसी होटल के बाहर गोली मारी गई थी. इस ऐतिहासिक समानता के बावजूद, आज की राजनीतिक ध्रुवीकरण की तीव्रता देश को भीतर से तोड़ती हुई दिखाई देती है.

अमेरिका में बढ़ती गन वायलेंस एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा है, जो संविधान के दूसरे संशोधन के कारण विवादास्पद बना हुआ है, यह संशोधन नागरिकों को हथियार रखने का अधिकार देता है. केवल 2025 में ही लगभग 40,000 लोगों को गोली मारी गई.

ट्रंप 10 से अधिक वर्षों में पहली बार व्हाइट हाउस कॉरेस्पॉन्डेंट्स एसोसिएशन डिनर में अपने प्रमुख अधिकारियों के साथ शामिल हो रहे थे. यदि सुरक्षा में कोई चूक होती, तो यह घटना देश की राजनीति की दिशा बदल सकती थी, खासकर जब अमेरिका मध्यावधि चुनावों के करीब है. फिर भी, इस घटना और पिछली घटनाओं से ऐसे सबक मिलते हैं जो एक विभाजित राजनीतिक व्यवस्था को सुधारने का खाका पेश कर सकते हैं.

युवाओं का झुकाव हिंसा की ओर

अमेरिका में बढ़ती गन वायलेंस एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा है, जो संविधान के दूसरे संशोधन के कारण विवादास्पद बना हुआ है, यह संशोधन नागरिकों को हथियार रखने का अधिकार देता है. केवल 2025 में ही लगभग 40,000 लोगों को गोली मारी गई. इसके अलावा, कई हाई-प्रोफाइल शूटिंग मामलों से यह भी सामने आया है कि युवा वर्ग इस हिंसा में अधिक शामिल हो रहा है. यूनाइटेड हेल्थकेयर के सीईओ ब्रायन थॉम्पसन की 4 दिसंबर 2024 को मैनहट्टन के एक होटल के बाहर 26 वर्षीय लुइगी मैंगियोन द्वारा हत्या कर दी गई थी.

पिछले वर्ष दक्षिणपंथी इन्फ्लुएंसर चार्ली किर्क की हत्या के आरोपी की उम्र 22 वर्ष थी. पेंसिल्वेनिया में ट्रंप पर गोली चलाने वाला थॉमस मैथ्यू क्रूक्स 20 साल का था, जबकि वर्तमान मामले का संदिग्ध 31 वर्ष का है. ये आँकड़े एक पैटर्न की ओर इशारा करते हैं. इन सभी घटनाओं के बाद अमेरिका में उदारवादियों और रूढ़िवादियों के बीच राजनीतिक टकराव बढ़ा है.

जांच अभी जारी है, इसलिए एलन के मामले को सिर्फ राजनीतिक बदले की घटना मानना सही नहीं होगा. हमले का स्पष्ट कारण अभी सामने नहीं आया है, लेकिन उसके संदेश बताते हैं कि वह कई तरह के राजनीतिक और धार्मिक विचारों से प्रभावित था. इससे पता चलता है कि अमेरिका का माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया है. बार-बार ऐसी घटनाएं होना दर्शाता है कि राजनीति कमजोर हो रही है. ट्रंप के लिए भी हालात कठिन हैं, और चुनाव से पहले माहौल शांत करना जरूरी है.

अब कई अमेरिकी बढ़ती गैस कीमतों के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराते हैं. सहयोगी देशों के बीच भरोसा कम होता दिख रहा है. ब्रिटेन भी विवाद में आया जब डोनाल्ड ट्रम्प ने फॉकलैंड द्वीप पर अर्जेंटीना के दावे का समर्थन किया.

आगे की जांच के अधीन, एलन का मामला राजनीतिक प्रतिशोध की एक चरम घटना जैसा प्रतीत हो सकता है, लेकिन इसे केवल उसी दृष्टि से समझना एक गंभीर भूल होगी. अधिकारियों ने अभी तक हमले के पीछे कोई स्पष्ट कारण स्थापित नहीं किया है, लेकिन एलन के घटना से पहले के संदेश कथित तौर पर राजनीतिक और वैचारिक प्रभावों के जटिल मिश्रण की ओर इशारा करते हैं-जो जेफरी एपस्टीन विवाद से लेकर इवैंजेलिकल विचारधारा के कुछ पहलुओं और ईरान के साथ चल रहे संघर्ष तक फैले हुए हैं. यह दर्शाता है कि कई तरह की कथाएं एक साथ मिलकर अधिक व्यापक और अस्थिर स्थिति बना रही हैं. स्पष्ट है कि अमेरिका का राजनीतिक माहौल लगातार अधिक तनावपूर्ण होता जा रहा है, जिस पर घरेलू तनाव और बाहरी घटनाओं दोनों का प्रभाव पड़ रहा है.

कमजोर होती अमेरिका की राजनीति 

बार-बार राष्ट्रपति पर हमले दिखाते हैं कि अमेरिका की राजनीति कमजोर हो रही है. डोनाल्ड ट्रम्प सत्ता-विरोधी माहौल के सहारे लौटे, लेकिन अपनी स्थिति बनाए रखना उनके लिए मुश्किल हो रहा है. एपस्टीन विवाद ने भी उनके कार्यकाल को प्रभावित किया और महाभियोग की चर्चाएं फिर शुरू कर दी हैं. उनकी लोकप्रियता दर गिरकर ऐतिहासिक रूप से 38 प्रतिशत तक पहुँच गई है.

इसी बीच, युद्ध, खुद को एक मसीहाई नेता के रूप में प्रस्तुत करना, और पोप लियो XIV के साथ तीखी बयानबाजी ने उनके इवेंजेलिकल समर्थन आधार को भी अस्थिर कर दिया है. विदेश नीति के मोर्चे पर स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण रही है, खासकर इसलिए क्योंकि उन्होंने चुनाव अभियान के दौरान नए युद्धों से बचने का वादा किया था. अब कई अमेरिकी बढ़ती गैस कीमतों के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराते हैं. सहयोगी देशों के बीच भरोसा कम होता दिख रहा है. ब्रिटेन भी विवाद में आया जब डोनाल्ड ट्रम्प ने फॉकलैंड द्वीप पर अर्जेंटीना के दावे का समर्थन किया. नवंबर के मध्यावधि चुनावों से पहले अमेरिका, खासकर ट्रंप के लिए, राजनीतिक तनाव कम करना जरूरी होगा. दुनिया को और अस्थिरता नहीं चाहिए, खासकर एक बड़े लोकतंत्र से. इतिहास बताता है कि लोकतंत्रों में अशांति का असर देश के भीतर ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया पर भी पड़ता है.


यह लेख मूल रूप से द इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित हो चुका है.  
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