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दुनिया अब कंप्यूटर युग से निकलकर डिफ्यूज़न युग में जा रही है जहाँ असली ताक़त तकनीक के इस्तेमाल में है. एआई वही जीतेगा जो लोगों की ज़िंदगी में सच में काम आए.
आज पूरी दुनिया एआई की होड़ में लगी है लेकिन यह प्रतिस्पर्धा केवल छोटे चिप, बड़े डेटा सेंटर या तेज़ मॉडल तक सीमित नहीं रहेगी. असली विजेता वे होंगे जो तकनीकी नवाचार को ज़मीनी असर में बदल पाएँगे, जो एआई को उपयोगी उत्पादों, मज़बूत संस्थानों और समाज के भरोसे में ढाल सकें. इस दौर में शक्ति सिर्फ एल्गोरिदम या सिलिकॉन पर नियंत्रण रखने वालों के पास नहीं होगी बल्कि उनके पास होगी जो एआई को रोज़मर्रा की ज़िंदगी में बड़े पैमाने पर लोगों के लिए उपयोगी बना सकें.
दुनिया अब कंप्यूटर युग से निकलकर डिफ्यूज़न युग में जा रही है जहाँ असली ताक़त तकनीक के इस्तेमाल में है.
एआई का यह युग तीन चरणों में विकसित हो रहा है. पहला है कंप्यूटर युग , जहाँ चिप्स की आपूर्ति और बड़े डेटा सेंटर बाज़ार तय करते हैं. इसमें पूंजी, ऊर्जा और ज़मीन-पानी जैसे पारंपरिक संसाधनों का दबदबा रहता है. दूसरा है डिफ्यूज़न युग, जहाँ वे देश आगे निकलेंगे जो एआई को बड़े पैमाने पर डिजिटल प्लेटफॉर्म और वास्तविक अर्थव्यवस्था में लागू कर पाएँगे. यहीं तय होगा कि मूल्य कैसे बनाया, बाँटा और बढ़ाया जाता है. तीसरा चरण है गवर्नेंस युग, जहाँ सरकारें, राजनीतिक वैधता और भू-राजनीतिक ताकत यह तय करेंगी कि कौन-से एआई सिस्टम स्वीकार्य और प्रभावी होंगे.
सरल शब्दों में, जैसे-जैसे कंप्यूटर एक सामान्य सुविधा बनता जाएगा, असली मूल्य इस बात से आएगा कि उसका उपयोग कैसे किया जाता है. भारत जैसे देश, जिन्हें तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाने और ढालने का अनुभव है, इस डिफ्यूज़न युग में स्वाभाविक बढ़त हासिल कर सकते हैं. जैसे-जैसे डेटा सेंटर और उनसे जुड़ी सुविधाओं में अत्यधिक निवेश की चर्चा बढ़ रही है, यह संकेत मिल रहा है कि कंप्यूटर युग अपने चरम पर पहुँच रहा है. आगे चलकर कम्प्यूटिंग संसाधन एक सार्वजनिक उपयोगिता बन जाएंगे जिनमें निवेश, मूल्य निर्धारण और नियमन बिजली या टेलीकॉम की तरह होगा. इतिहास गवाह है कि नई तकनीकें पहले तेज़ उछाल और ज़रूरत से ज़्यादा निवेश देखती हैं और बाद में वही ढाँचा व्यापक नवाचार की नींव बन जाता है.
इस दौर में शक्ति सिर्फ एल्गोरिदम या सिलिकॉन पर नियंत्रण रखने वालों के पास नहीं होगी बल्कि उनके पास होगी जो एआई को रोज़मर्रा की ज़िंदगी में बड़े पैमाने पर लोगों के लिए उपयोगी बना सकें.
डिफ्यूज़न युग में मूल्य इस बात से बनेगा कि कंप्यूटर ढाँचे का उपयोग कैसे किया जाता है. भारत जैसे देश, जिन्हें तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाने और ढालने का अनुभव है, यहाँ बढ़त हासिल कर सकते हैं जो एप्लिकेशन अधिकतम लोगों के लिए वास्तविक लाभ पैदा करेंगे, वही सफल होंगे. इसमें भरोसा निर्णायक होगा. साथ ही, एआई मॉडलों को स्थानीय बनना पड़ेगा क्योंकि आज के बड़े मॉडल भारत जैसे देशों की सांस्कृतिक वास्तविकताओं को ठीक से नहीं दर्शाते.
इसके आगे गवर्नेंस युग है, जहाँ सरकारें डेटा संप्रभुता की रक्षा को प्राथमिकता देंगी और कंप्यूटर युग से बनी उपयोगिताओं व एआई प्रतिस्पर्धा में अधिक सक्रिय भूमिका निभाएँगी. जैसे-जैसे दुनिया कंप्यूटर युग से आगे बढ़कर डिफ्यूज़न युग में जा रही है, भारत—उसकी कंपनियों, संस्थानों और सरकार-को खुद से तीन आसान लेकिन अहम सवाल पूछने होंगे.
पहला, क्या भारतीय कंपनियाँ ज़रूरी जोखिम उठाने को तैयार हैं? क्या वे ऐसे भविष्य में निवेश कर सकती हैं जो अभी साफ़ दिखाई नहीं देता? छोटे स्टार्टअप्स ने यह दिखाया है कि उनमें हिम्मत और सोच है लेकिन क्या बड़े और स्थापित निजी क्षेत्र भी इस नए दौर के अवसरों को अपनाएँगे? इसके लिए सोच और जोखिम लेने के तरीक़े में बदलाव ज़रूरी होगा.
दूसरा, क्या भारत की वित्तीय और संस्थागत व्यवस्था ऐसे निवेश को बढ़ावा दे सकती है जो नए और अनजान विचारों को मौका दे? क्या ऐसी लंबी अवधि की पूँजी उपलब्ध कराई जा सकती है जो बड़े पैमाने पर एआई और डिजिटल ढाँचे को मज़बूत कर सके?
तीसरा, क्या सरकार ऐसा नियम-कानून बना सकती है जो निजी कंपनियों को आगे बढ़ने दे और साथ ही जनता के हित, डेटा सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा भी करे? क्या भारत अपना ऐसा एआई ढाँचा बना सकता है जो दुनिया की एआई व्यवस्था से जुड़ा भी रहे और भारत की ज़रूरतों के हिसाब से काम भी करे?
भारत जैसे देश, जिन्हें तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाने और ढालने का अनुभव है, इस डिफ्यूज़न युग में स्वाभाविक बढ़त हासिल कर सकते हैं.
अगर भारत इन तीन सवालों के सही जवाब ढूँढ लेता है तो वह एआई के इस नए दौर में मज़बूत नेतृत्व कर सकता है. इसके लिए ज़रूरी है मज़बूत कंप्यूटर ढाँचा, सक्रिय उद्यमी समुदाय और सहयोगी नीतियाँ.
यह टिप्पणी मूल रूप से द इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित हुई थी.
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Samir Saran is the President of the Observer Research Foundation (ORF), India’s premier think tank, headquartered in New Delhi with affiliates in North America and ...
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