सीरिया की नई सरकार के सामने उइगर लड़ाकों की चुनौती सबसे संवेदनशील है. जानें कैसे चीन की बढ़ती दख़लअंदाज़ी पूरे क्षेत्र के समीकरण बदल रही है.
असद शासन के पतन के बाद पहली बार, नवंबर 2025 में सीरिया के विदेश मंत्री असद अल-शैबानी ने चीन का दौरा किया और बीजिंग में अपने चीनी समकक्ष वांग यी से मुलाक़ात की. इस बैठक का उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूत करना और सहयोग बढ़ाना था लेकिन इसका मुख्य एजेंडा सीरिया से उइगर लड़ाकों की वापसी (प्रत्यावर्तन) रहा. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दमिश्क ने लगभग 400 उइगर लड़ाकों को चीन वापस भेजने पर सहमति जताई जिससे उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएँ पैदा हुईं. हालांकि सीरियाई सरकार ने निर्वासन की इन खबरों से इनकार किया है लेकिन बैठक के दौरान अल-शैबानी ने ‘वन-चाइना’ सिद्धांत का खुलकर समर्थन किया. उन्होंने चीन की सुरक्षा चिंताओं से खुद को जोड़ते हुए कहा कि किसी भी ऐसे संगठन को, जिसे चीन की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा माना जाए, सीरियाई धरती से काम करने की अनुमति नहीं दी जाएगी.
गौरतलब है कि अल-शैबानी का यह खुला समर्थन ऐसे समय आया जब चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सीरियाई राष्ट्रपति अहमद अल-शरा पर लगे प्रतिबंध हटाने के प्रस्ताव पर मतदान से दूरी बना ली. चीन ने इसका कारण आतंकवाद-रोधी चिंताओं को बताया, विशेष रूप से उइगर जैसे विदेशी लड़ाकों की मौजूदगी को लेकर. संयुक्त राष्ट्र में चीन के स्थायी प्रतिनिधि फू कोंग ने दोहराया कि सीरिया को आतंकवादी हमलों को रोकने और विदेशी आतंकियों-जैसे ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट (ETIM) और तुर्किस्तान इस्लामिक पार्टी (TIP)-से निपटने की अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करना चाहिए. उल्लेखनीय है कि 2020 में अमेरिका ने ETIM को अपनी आतंकवादी संगठनों की सूची से हटा दिया था और कहा था कि पिछले दस वर्षों से इसके अस्तित्व के कोई ठोस प्रमाण नहीं मिले हैं.
दिसंबर 2024 में, अहमद अल-शरा के नेतृत्व में हयात तहरीर अल-शाम (HTS) और विपक्षी लड़ाकों ने बशर अल-असद के 53 साल पुराने पारिवारिक शासन को सत्ता से हटा दिया. इन लड़ाकों में कई अलग-अलग जातीय समूहों के लोग थे जिनमें चीन के शिनजियांग प्रांत से आए उइगर भी शामिल थे. चीन की सरकार उइगरों को सुरक्षा खतरे के रूप में देखती है. राज्य दमन, आर्थिक हाशिये पर धकेले जाने और मानवाधिकार उल्लंघनों के कारण उइगर कई चरणों में शिनजियांग छोड़ने को मजबूर हुए. 2009 के जातीय दंगों के बाद मनमानी गिरफ्तारियों ने कई उइगर परिवारों को तुर्किये पलायन के लिए मजबूर किया लेकिन तुर्किये में सामाजिक-आर्थिक समस्याओं के चलते युद्धग्रस्त सीरियाई प्रांत इदलिब उनके लिए एक सुरक्षित ठिकाना बन गया.
इन लड़ाकों में कई अलग-अलग जातीय समूहों के लोग थे जिनमें चीन के शिनजियांग प्रांत से आए उइगर भी शामिल थे. चीन की सरकार उइगरों को सुरक्षा खतरे के रूप में देखती है.
निर्वासन के दौरान कई उइगर कट्टरपंथी विचारधाराओं के प्रभाव में आए और अफ़ग़ानिस्तान-पाकिस्तान क्षेत्र तथा मध्य पूर्व के चरमपंथी संगठनों द्वारा भर्ती किए गए. 2015 तक लगभग 700 उइगर परिवार इदलिब पहुँच चुके थे और क़रीब 1,500 उइगर इस्लामिक स्टेट और अल-क़ायदा जैसे स्थानीय जिहादी संगठनों में शामिल हो गए थे. अनुमान है कि 4,000 से 5,000 उइगर लड़ाके आज भी सीरिया में विभिन्न सशस्त्र गुटों के साथ सक्रिय हैं. राष्ट्रपति अहमद अल-शरा की नई सरकार ने इन विदेशी लड़ाकों को प्रशासन में शामिल करना शुरू किया, जिनमें से अधिकांश को रक्षा मंत्रालय के अधीन रखा गया. नई सरकार ने 84वीं डिवीजन का गठन किया, जिसमें बड़ी संख्या में उइगर लड़ाके शामिल हैं. दिसंबर 2024 तक छह विदेशी लड़ाकों-जिनमें उइगर मूल के अब्दुलअज़ीज़ दाऊद हुडाबेरदी (ज़ाहिद)-को ब्रिगेडियर जनरल के पद पर पदोन्नत किया गया.
उइगर लड़ाके और उनके परिवार सुरक्षा कारणों से सीरिया को अपना घर मानने लगे हैं क्योंकि अन्य मुस्लिम देशों में उन्हें उतनी सुरक्षा नहीं मिलती. चीन ने अपनी आर्थिक शक्ति का उपयोग कर पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और मध्य एशिया सहित 81 देशों के साथ प्रत्यर्पण संधियाँ की हैं. 2017 के बाद से, चीन ने तुर्किये सहित कई मुस्लिम देशों पर दबाव डालकर 682 उइगरों को हिरासत में लेने के लिए मजबूर किया, भले ही औपचारिक प्रत्यर्पण संधियाँ मौजूद न हों. इसके अलावा, चीन ने आतंकवाद-रोधी भाषा का इस्तेमाल कर इंटरपोल के माध्यम से 5,530 चेतावनियाँ और गिरफ्तारी अनुरोध भेजे हैं.
चूँकि असद शासन भी उइगर उग्रवादियों के ख़िलाफ़ लड़ रहा था इसलिए चीन ने लंबे समय तक असद सरकार का समर्थन किया और अरब स्प्रिंग आंदोलनों की आलोचना की. असद परिवार को प्रतिबंधों और हथियार प्रतिबंधों से बचाने के लिए चीन ने संयुक्त राष्ट्र में आठ बार वीटो का इस्तेमाल किया. इससे नई शरा सरकार के साथ चीन के संबंधों में तनाव भी बढ़ा. उइगरों की मौजूदगी ने चीन की कूटनीतिक और आर्थिक सहायता को भी सीमित कर दिया है, खासकर पश्चिमी देशों की तुलना में.
जैसे-जैसे चीन सीरिया में अपना प्रभाव बढ़ा रहा है, उइगरों को लेकर दमिश्क का रुख यह दिखाने वाला अहम संकेत होगा कि बड़ी शक्तियों की प्रतिस्पर्धा के बीच क्षेत्रीय समीकरण कैसे बदल रहे हैं.
इसके बावजूद, सीरिया की नई सरकार को युद्ध के बाद पुनर्निर्माण के लिए चीन जैसे देशों से वित्तीय सहायता और अंतरराष्ट्रीय मंच पर समर्थन की ज़रूरत है. इसी उद्देश्य से राष्ट्रपति अल-शरा ने रूस, अमेरिका और फ्रांस का दौरा किया और प्रतिबंधों में राहत तथा आर्थिक सहायता पर चर्चा की. 2025 तक संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ ने सीरिया पर लगे कई प्रतिबंध हटा या ढीले कर दिए. हालाँकि पश्चिमी देश HTS नेतृत्व के साथ संवाद कर रहे हैं, फिर भी उइगर लड़ाकों को अब भी आतंकवादी माना जाता है, भले ही अमेरिका ने सीरियाई रक्षा बलों में उनकी भूमिका पर औपचारिक आपत्ति नहीं जताई हो.
बीजिंग में अल-शैबानी के बयान दमिश्क की पहले की नीति से एक बड़ा बदलाव दर्शाते हैं. जहाँ अल-शरा सरकार ने उइगरों को सीरिया की सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा माना है, वहीं चीन की चिंताओं का खुला समर्थन करके अल-शैबानी ने बीजिंग के नैरेटिव को मज़बूती दी है.
जैसे-जैसे चीन सीरिया में अपना प्रभाव बढ़ा रहा है, उइगरों को लेकर दमिश्क का रुख यह दिखाने वाला अहम संकेत होगा कि बड़ी शक्तियों की प्रतिस्पर्धा के बीच क्षेत्रीय समीकरण कैसे बदल रहे हैं. चीन अपने आर्थिक और कूटनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर उइगरों को सीरिया से वापस भेजने और शिनजियांग जैसे हिरासत शिविरों में रखने की कोशिश कर सकता है. आने वाले महीनों में यह साफ़ होगा कि अल-शैबानी के बयान केवल चीन को आश्वस्त करने की कोशिश हैं या फिर उइगरों की सामूहिक वापसी जैसी ठोस रियायतों का संकेत.
अयजाज वानी ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के स्ट्रेटेजिक स्टडीज प्रोग्राम में फेलो हैं.
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Ayjaz Wani (Phd) is a Fellow in the Strategic Studies Programme at ORF. Based out of Mumbai, he tracks China’s relations with Central Asia, Pakistan and ...
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