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अमेरिका ने अपने रक्षा विभाग का नाम बदलकर “युद्ध विभाग” कर दिया जिससे उसका सैन्य रुख और ज्यादा आक्रामक दिख रहा है. वैश्विक STEM (Science, Technology, Engineering, Mathematics) प्रतिभा अब अमेरिका से दूर होकर अन्य देशों के अवसरों पर ध्यान दे रही है.
Image Source: Getty Images
अमेरिका विभिन्न क्षेत्रों में अनुसंधान और विकास (आरएंडडी) करने वाला दुनिया का एक महत्वपूर्ण निवेशक है. अमेरिका को महाशक्ति बनाने में इसके सैन्य शोध और विकास कार्यक्रम का सबसे बड़ा हाथ है. 2022 के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिकी रक्षा विभाग (डीओडी) कुल संघीय अनुसंधान एवं विकास फंड का 38 प्रतिशत का उपभोग करता है. 2023 में, अमेरिका के रक्षा अनुसंधान और विकास खर्च में भारी वृद्धि देखी गई. 2022 में 73 अरब डॉलर था जो 2023 में बढ़कर 89 अरब डॉलर हो गया. ये किसी बड़े संघर्षों की तैयारी का संकेत है.
“अमेरिकी रक्षा विभाग (डीओडी) कुल संघीय अनुसंधान एवं विकास फंड का 38 प्रतिशत का उपभोग करता है।”
2024 में, दुनिया के रक्षा खर्च में अमेरिकी रक्षा विभाग की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत थी. लंबे समय तक, इस तरह के व्यापक अनुसंधान एवं विकास खर्च ने दुनिया भर से साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स (STEM) यानी स्टेम प्रतिभाओं को आकर्षित किया. इससे अमेरिका की तकनीकी, आर्थिक और सांस्कृतिक शक्ति मज़बूत हुई. इस "अमेरिकन ड्रीम" ने स्टेम के अत्याधुनिक क्षेत्र में काम करने के लिए प्रतिभाओं को अपने यहां खींचा. हालांकि, स्टेम सेक्टर से जुड़े प्रतिभाशाली युवा अमेरिकी विश्वविद्यालयों, राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं, स्टार्टअप और बड़े डिफेंस कॉन्ट्रैक्टर्स के यहां काम करते थे लेकिन इन सब में अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिकी रक्षा विभाग की बड़ी छाप थी. हालांकि, कई घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय कारणों से, अमेरिका रक्षा विभाग को अब युद्ध विभाग में बदल गया है. यह बदलाव ऐसे समय में आया है, जब अमेरिकी राजनीति विदेशी प्रतिभाओं के प्रति सख्त और असहिष्णु होती जा रही है. ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या वैश्विक स्टेम प्रतिभाएं अमेरिकी युद्ध विभाग को वैसे ही सशक्त बनाएंगी, जैसा कि उसने इस विभाग के पहले अवतार यानी डीओडी को किया था?
5 सितंबर 2025 को, अमेरिका ने रक्षा विभाग का नाम बदलकर युद्ध विभाग कर दिया. 1947 से पहले इसका नाम युद्ध विभाग ही था. रक्षा विभाग का नाम बदलने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कार्यकारी आदेश पर साइन किए. ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि व्हाइट हाउस के शब्दों में "हमारे अपने राष्ट्रीय हितों और जो हमारा है, उसे सुरक्षित रखने के लिए ऐसा किया गया है. अमेरिका की युद्ध छेड़ने की इच्छा, संसाधनों की उपलब्धता और हमारे विरोधियों पर ध्यान केंद्रित करना इसका लक्ष्य है". अमेरिका में रक्षा मामलों पर जारी होने वाले कार्यकारी आदेशों को आम तौर पर दोनों मुख्य दलों का समर्थन हासिल रहता है, इसलिए अक्सर इन्हें वापस नहीं लिया जाता है. रक्षा विभाग का नाम बदलना एक बड़ा फैसला है, और ये माना जा सकता है कि इसे जल्द नहीं पलटा जा सकता, जैसा कि 1947 में हुआ था. 30 सितंबर 2025 को, अमेरिकी युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ ने 10 नए युद्ध विभाग के निर्देशों की घोषणा की, जिनमें से एक 'आधुनिक कार्यबल प्रबंधन' यहां प्रासंगिक है. इस आदेश का उद्देश्य समग्र कार्यबल का बोझ कम करने के लिए ऑफबोर्डिंग प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करते हुए उच्च प्रदर्शन वाले नागरिक और सैन्य कार्यबल को प्रोत्साहित करना है.
“2022 में 73 अरब डॉलर था जो 2023 में बढ़कर 89 अरब डॉलर हो गया।”
“अकसर अमेरिकी विश्वविद्यालयों, राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं, स्टार्टअप और बड़े डिफेंस कॉन्ट्रैक्टर्स में काम करने वाली इस प्रतिभा पर रक्षा विभाग की अप्रत्यक्ष छाप रही है।”
आज, स्टेम प्रतिभा के सामने अवसरों की कमी नहीं है. प्रगतिशील और पारंपरिक राष्ट्रीय नीतियों के कारण इन्हें घर पर ही बरकरार रखा जा रहा है, जिसका कई देशों ने समर्थन करना शुरू कर दिया है. आम तौर पर स्टेम प्रतिभा आदर्शवादी और शांतिपूर्ण होती है, जो वैश्विक भलाई के उत्पादों और कार्यक्रमों का हिस्सा बनना चाहती है. फिर चाहे वो, वैक्सीन बनाना हो, टिकाऊ प्रौद्योगिकियों को आगे बढ़ाना हो या अंतरग्रहीय मिशनों यानी अंतरिक्ष कार्यक्रमों को आगे बढ़ाना हो. ऐसी परियोजनाओं पर अब कई गैर-पश्चिमी देश भी सफल होने लगे हैं. ऐसे में इस अंतर्राष्ट्रीय स्टेम प्रतिभा का एक बड़ा हिस्सा अमेरिकी युद्ध विभाग के साथ काम करने से बचना चाहेगा, फिर भले ही इस विभाग के पास भारी वित्तीय संसाधन ही क्यों ना हो. हालांकि, एक ज़माने में ये प्रतिभा आसानी से अमेरिकी रक्षा विभाग से जुड़ गई थी, लेकिन प्रतिभाशाली लोगों के इस शांतिवादी समूह को उन संस्थानों द्वारा आकर्षित करना या बनाए रखना मुश्किल है जिन्होंने रक्षा से आक्रामकता की ओर जाने का विकल्प चुना है. इसके अलावा, अमेरिकी सरकार और उसके सहयोगियों और साझेदारों के बीच बार-बार उभरने वाले भू-राजनीतिक विचारों में टकराव भी इसकी राह में बाधा उत्पन्न कर सकते हैं. ऐसे में स्टेम प्रतिभाओं के लिए अपने संस्थानों, पेशेवर समाजों, ग्राहकों और हितधारकों को युद्ध विभाग के साथ उनकी संबद्धता के बारे में समझाना मुश्किल हो जाएगा, फिर चाहे, वो व्यक्ति हों, स्टार्टअप या फिर बड़ी वाणिज्यिक संस्थाएं हों.
“अमेरिकी युद्ध मंत्री ने जो आदेश दिया है, उससे ये संकेत मिलता है कि अमेरिका अब ऐसी प्रतिभा की तलाश कर रहा है जो युद्ध की लंबी अवधि के लिए तैयार हो।”
हालांकि, ग्रीन कार्ड धारकों के सक्रिय और आरक्षित बलों के रूप में सिकुड़ती अमेरिकी सेना में शामिल होने की ख़बरों के बीच, स्टेम पेशेवर उन लोगों में से हो सकते हैं, जो 5 सितंबर 2025 के कार्यकारी आदेश के साथ जुड़ने में संकोच नहीं करेंगे. यूक्रेन युद्ध के बाद की दुनिया ने भू-राजनीतिक स्पेक्ट्रम में कई भाड़े के सैनिकों को देखा है, जो ऐसी लड़ाइयां लड़ रहे हैं, जो उनकी नहीं हैं. ऐसे में अगर भविष्य में हमें ये देखने को मिले कि, स्टेम से जुड़ी प्रतिभाएं भाड़े में नवाचार कर रही है, फ्रीलांसर और निजी ठेकेदारों के रूप में काम कर रही हैं, तो इस पर हैरान नहीं होना चाहिए. हालांकि, शांतिवादी स्टेम समूह की तुलना में ऐसा करने वालों की संख्या कम ही रहेगी. यह स्टेम प्रतिभाओं का ऐसा योग्य समूह है, जो नवाचार करने वाले भाड़े के सैनिकों के रूप में शामिल हो सकता है, जो सिविल-मिलिट्री फ्यूज़न के मेल पर काम कर रहा है. ये सिर्फ अमेरिका के लिए नहीं, बल्कि चीन, रूस और यूरोप के लिए भी ऑपरेशन पेपरक्लिप के अधिक संगठित रूप से मिलता जुलता है.
चैतन्य गिरी ऑब्ज़र्वर रिसर्च फाउंडेशन के सेंटर फॉर सिक्योरिटी एंड स्ट्रैटेजी में फेलो हैं.
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Dr. Chaitanya Giri is a Fellow at ORF’s Centre for Security, Strategy and Technology. His work focuses on India’s space ecosystem and its interlinkages with ...
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