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Published on Jan 27, 2026 Updated 1 Days ago

UAE ने अब विदेशी ख़रीदारी छोड़कर अपने खुद के विमान और रक्षा सिस्टम बनाने शुरू कर दिए हैं. इस विवरण से समझें कि UAE ने पिछले पांच दशकों में विदेशी निर्भरता से आत्मनिर्भर एयरोस्पेस निर्माता बनने तक का सफर कैसे तय किया.

एयरोस्पेस में UAE: पांच दशक का सफर

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पिछले पांच दशकों में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने चुपके से मिडिल ईस्ट के सबसे ख़ास एयरोस्पेस इकोसिस्टम में से एक बनाया है. उसने इस सेक्टर को अपने राष्ट्रीय विकास के एक रणनीतिक स्तंभ में बदल दिया है. जिस सेक्टर की शुरुआत लगभग पूरी तरह विदेशी ख़रीदारी से हुई थी, वो अब अपने आप में एक अधिक आत्मविश्वास से भरे और सक्षम औद्योगिक इकोसिस्टम में बदल गया है. ये बदलाव अचानक नहीं हुआ है. ये सावधानीपूर्वक योजना, संस्थागत अनुशासन और वास्तविक क्षमता बनाने के प्रति एक राष्ट्रीय प्रतिबद्धता के माध्यम से संभव हुआ है. जिस क्षेत्र में कई देश विदेशी सप्लायर पर निर्भर हैं, वहां UAE ने एक महत्वाकांक्षी और आत्मनिर्भर रास्ता अपनाया है.  

ख़रीदारी से शुरुआती क्षमता तक

शुरुआती वर्षों में UAE का एयरोस्पेस इकोसिस्टम बड़े अंतर्राष्ट्रीय सप्लायर से आधुनिक लड़ाकू विमान, सर्विलांस एयरक्राफ्ट, हेलीकॉप्टर और प्रिसिज़न वेपन ख़रीदता था. इनकी ख़रीदारी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक मानी गई. इससे ये सुनिश्चित हुआ कि UAE आधुनिक युद्ध की क्षमताओं के साथ काम कर सके. लेकिन इस तरीके में कई सीमाएं थी. UAE की सेना एयरक्राफ्ट और संबंधित रक्षा प्रणालियों को चलाती तो थीं, लेकिन तकनीकी ज्ञान, रखरखाव और इंजीनियरिंग विशेषज्ञता विदेशों में ही रहीं. तेज़ी से रक्षा का आधुनिकीकरण कर रहे दूसरे देशों की तरह UAE क्षमता हासिल तो कर रहा था लेकिन उसका निर्माण नहीं कर रहा था. 

जिस सेक्टर की शुरुआत लगभग पूरी तरह विदेशी ख़रीदारी से हुई थी, वो अब अपने आप में एक अधिक आत्मविश्वास से भरे और सक्षम औद्योगिक इकोसिस्टम में बदल गया है. ये बदलाव अचानक नहीं हुआ है. ये सावधानीपूर्वक योजना, संस्थागत अनुशासन और वास्तविक क्षमता बनाने के प्रति एक राष्ट्रीय प्रतिबद्धता के माध्यम से संभव हुआ है.

पहला वास्तविक बदलाव घरेलू रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉल (MRO) क्षमता के विस्तार के साथ आया. हो सकता है कि इसने ख़रीदारी की बड़ी घोषणाओं की तरह लोगों का ध्यान आकर्षित नहीं किया लेकिन ये एक निर्णायक क्षण था. बड़ी रक्षा प्रणालियों का घरेलू रखरखाव शुरू कर UAE ने एक व्यावहारिक माहौल बनाया जहां इंजीनियर, टेक्नीशियन और मैनेजर जटिल सैन्य प्रणालियों का अनुभव हासिल कर सकते थे. स्थानीय MRO प्रभावी रूप से एयरोस्पेस सेक्टर का पहला क्लासरूम बन गया. UAE ने विशेषज्ञों की शुरुआती टीम तैयार की और तकनीकी उत्कृष्टता की संस्कृति को बढ़ावा दिया जिसने बाद में व्यापक रणनीतिक महत्वाकांक्षाओं का समर्थन किया. 

वैश्विक प्रतिस्पर्धी के रूप में UAE एयरोस्पेस का उदय 

एयरोस्पेस सेक्टर में UAE की प्रगति का सबसे स्पष्ट संकेत घरेलू रक्षा प्रणालियों का उदय था. इसमें कैलिडस B-250 लाइट अटैक एयरक्राफ्ट का विकास एक महत्वपूर्ण क्षण था. इससे पता चला कि UAE अपने माहौल के अनुसार एक सैन्य विमान का निर्माण कर सकता है. 2027 में सर्टिफिकेशन हासिल करने के लक्ष्य के साथ B-250 एयरोस्पेस क्षमता के मामले में लगातार विकास के बारे में बताता है. इसके साथ अनमैन्ड सिस्टम के तेज़ विकास ने साबित किया कि स्थानीय उद्योग उन क्षेत्रों में मुकाबला करने में सक्षम है जहां इनोवेशन, सिस्टम एकीकरण और रफ़्तार पारंपरिक औद्योगिक विरासत की तुलना में अधिक मायने रखते हैं. 

हाल के वर्षों में व्यापक रूप से आधुनिक तकनीकी साझेदारी भी देखने को मिली है जो विकास के अगले चरण की ओर इशारा करती है. आधुनिक सेंसिंग, समुद्री जागरूकता और एकीकृत निगरानी समाधानों पर केंद्रित मारलान स्पेस और लॉफ्ट ऑर्बिटल के बीच का सहयोग मिडिल ईस्ट में ऑर्बिटवर्क्स नाम के एक स्थानीय उत्पादन केंद्र की स्थापना में एक ऐतिहासिक उपलब्धि के बारे में बताता है. उनका काम-काज इस बात का उदाहरण है कि UAE रक्षा प्रणाली के विकास से जटिल प्रणाली स्तर की क्षमताओं के निर्माण की तरफ बढ़ रहा है. ये घटनाक्रम इस सोच को मज़बूत करते हैं कि UAE इनोवेशन और प्रतिभा का केंद्र बनता जा रहा है जो न केवल एयरक्राफ्ट और अनमैन्ड सिस्टम को बल्कि आधुनिक रक्षा प्रणालियों के भीतर हवाई, समुद्री और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक क्षेत्रों को जोड़ने वाली आधुनिक तकनीकों को भी आकार दे रहा है. 

2027 में सर्टिफिकेशन हासिल करने के लक्ष्य के साथ B-250 एयरोस्पेस क्षमता के मामले में लगातार विकास के बारे में बताता है. इसके साथ अनमैन्ड सिस्टम के तेज़ विकास ने साबित किया कि स्थानीय उद्योग उन क्षेत्रों में मुकाबला करने में सक्षम है जहां इनोवेशन, सिस्टम एकीकरण और रफ़्तार पारंपरिक औद्योगिक विरासत की तुलना में अधिक मायने रखते हैं. 

EDGE ग्रुप की स्थापना ने इस रफ्तार को और तेज़ किया है. कई रक्षा संस्थानों को एक आधुनिक तकनीकी इकोसिस्टम के तहत लाकर UAE ने एक ऐसा औद्योगिक मंच तैयार किया है जिसमें व्यापकता, समन्वय और एकीकृत समाधान प्रदान करने की क्षमता है. EDGE रणनीतिक दृष्टिकोण को अमल में लाने वाली शाखा बन गई जिसने विचारों को प्रोडक्ट, प्रोटोटाइप और निर्यात के अवसरों में बदला. इसने UAE को अधिक सामंजस्य और उद्देश्य के साथ काम करने वाले देश में बदला जहां एक एकीकृत संरचना के तहत रिसर्च, इंजीनियरिंग, उत्पादन और रणनीतिक योजना को लाया जा सका.   

लेकिन अभी भी कई गंभीर चुनौतियां बनी हुई हैं. सेंसर, प्रोपल्शन सिस्टम, आधुनिक सामग्रियों और एवियोनिक्स समेत कई महत्वपूर्ण घटकों के लिए UAE अभी भी अंतरराष्ट्रीय सप्लायर पर निर्भर है. सप्लाई चेन को मज़बूत और स्थानीय बनाने के लिए लगातार निवेश और उन क्षेत्रों को सावधानी से प्राथमिकता देने की आवश्यकता होगी जहां UAE प्रभावी रूप से मुकाबला कर सकता है. मानव संसाधन अभी भी एक सीमाओं में बांधने वाला फैक्टर बना हुआ है. सैन्य एयरोस्पेस ज्ञान पर आधारित सेक्टर है और ज्ञान अनुभव के ज़रिए धीरे-धीरे विकसित होता है. UAE ने दुनिया भर में भर्ती, शिक्षा सुधार और ट्रेनिंग कार्यक्रमों के माध्यम से महत्वपूर्ण प्रगति की है लेकिन उसे घरेलू विशेषज्ञता के मामले में दीर्घकालिक योजनाओं पर निवेश जारी रखना चाहिए. डिजिटल युग में संप्रभुता पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है. सॉफ्टवेयर, डेटा और इंटीग्रेशन के साधनों पर नियंत्रण किसी भी एयरोस्पेस सिस्टम की असली स्वतंत्रता को तेज़ी से निर्धारित करेगा. 

ख़रीदार से आत्मनिर्भर निर्माता तक

इन चुनौतियों के बावजूद कुल मिलाकर आगे की राह उत्साह बढ़ाने वाली है. UAE धीरे-धीरे ख़रीदार से निर्माता बन गया है, उसने सामंजस्यता का वो स्तर हासिल कर लिया है जो रक्षा औद्योगिक विकास में कम ही देखा जाता है. उसने घरेलू रखरखाव की क्षमताएं विकसित की हैं, ऑफसेट को रणनीतिक निवेश में बदल दिया है, सहायता प्रदान करने वाले संस्थानों की स्थापना की है, अपना पहला स्वदेशी एयरक्राफ्ट और आधुनिक अनमैन्ड सिस्टम विकसित किया और ऐसी साझेदारियां बनाई हैं जिसने उच्च तकनीक के क्षेत्रों में उसकी मौजूदगी का विस्तार किया. संक्षेप में कहें तो UAE ने एक ऐसा औद्योगिक इकोसिस्टम बनाया है जो अभी शुरुआती दौर में है लेकिन तेज़ी से परिपक्व हो रहा है. 

UAE का एयरोस्पेस सेक्टर इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि दूरदर्शी सोच, राष्ट्रीय जुड़ाव और रणनीतिक धैर्य से क्या हासिल किया जा सकता है. ये यात्रा अभी पूरी नहीं हुई है. सप्लाई चेन को मज़बूत करने, प्रतिभा के विकास और तकनीकी पहुंच में अभी भी महत्वपूर्ण काम बचे हुए हैं. अगर UAE अभी तक के अपने उद्देश्य और अनुशासन के साथ मौजूदा रास्ते पर बना रहता है तो दुनिया में एयरोस्पेस के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान देने वाले देश के रूप में उसका उभरना तय है. ख़रीदार से निर्माता के रूप में उसका बदलाव अच्छी तरह से हो रहा है और उसकी गति हर साल बढ़ती जा रही है.


भरत गोपालस्वामी एक एयरोस्पेस और रक्षा विशेषज्ञ हैं, जिन्हें एआई, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों और उन्नत प्रणालियों में व्यापक अनुभव है.

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Bharath Gopalaswamy

Bharath Gopalaswamy

Bharath Gopalaswamy (PhD) is an aerospace, defence, and emerging-technology executive with extensive experience leading growth, strategy, and advanced programmes across the US, Europe, and the ...

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