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दस साल बाद थ्री सीज़ इनिशिएटिव सिर्फ़ कनेक्टिविटी नहीं बल्कि यूरोप की आर्थिक और सुरक्षा ज़रूरत बन चुका है. उत्तर–दक्षिण ढांचा अब मध्य और पूर्वी यूरोप को नई रणनीतिक ताक़त दे रहा है.
Image Source: Getty Images
थ्री सीज़ इनिशिएटिव (3SI) एक राजनीतिक और आर्थिक मंच है जो बाल्टिक, एड्रियाटिक और ब्लैक सागर के बीच स्थित यूरोपीय संघ (EU) के 13 देशों को साथ लाता है. ये पहल 2015 में पोलैंड और क्रोएशिया के पूर्व राष्ट्रपतियों ने की थी. इसका मुख्य उद्देश्य उत्तर–दक्षिण के बीच बेहतर संपर्क बनाना और सोवियत दौर से चली आ रही पूर्व–पश्चिम दिशा वाली बुनियादी ढांचे की पकड़ को कम करना था. इसके जरिए शीत युद्ध के बाद यूरोप में बनी असमानताओं को दूर करने की कोशिश की गई. इस पहल का लक्ष्य मध्य और पूर्वी यूरोप के देशों में आर्थिक विकास को बढ़ावा देना, ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना और यूरोपीय संघ व नाटो के भीतर इस क्षेत्र की भूमिका को और मजबूत बनाना है.
2015 में पोलैंड और क्रोएशिया के पूर्व राष्ट्रपतियों द्वारा शुरू की गई थ्री सीज़ इनिशिएटिव का मुख्य उद्देश्य उत्तर–दक्षिण के बीच बेहतर संपर्क बनाना और सोवियत काल से चली आ रही पूर्व–पश्चिम बुनियादी ढांचे की प्रधानता को कम करना है, ताकि शीत युद्ध के बाद यूरोप में बनी संरचनात्मक असमानताओं को दूर किया जा सके.
2025 में थ्री सीज़ इनिशिएटिव (3SI) की 10वीं वर्षगांठ एक अहम मोड़ है जहाँ अब शुरुआती लक्ष्यों से आगे बढ़कर इसके वास्तविक नतीजों और रणनीतिक महत्व का आकलन किया जा रहा है. इस पहल की कल्पना यूरोपीय संघ के भीतर एकीकरण को मजबूत करने और ऐतिहासिक आर्थिक असमानताओं को कम करने के लिए की गई थी. इसका मुख्य उद्देश्य आधुनिक परिवहन ढांचे का विकास करना और यूरोप में ऊर्जा व डिजिटल संपर्क को बेहतर बनाना रहा है.
यूरोप की बदलती भू-राजनीतिक स्थिति में थ्री सीज़ इनिशिएटिव का महत्व बना हुआ है. तेज़ आर्थिक विकास के बावजूद मध्य और पूर्वी यूरोप में बुनियादी ढांचे के लिए 570 अरब यूरो से अधिक की धन की कमी है जो सुरक्षा और क्षेत्रीय एकता से भी जुड़ी है. पुराने पूर्व–पश्चिम ढांचों के कारण रूस पर निर्भरता कम करना मुश्किल रहा है. इसी को ध्यान में रखते हुए 2019 में थ्री सीज़ इनिशिएटिव इन्वेस्टमेंट फंड बनाया गया, जिसका उद्देश्य निजी निवेश आकर्षित कर सरकारी फंड पर निर्भरता घटाना है. अब तक यह फंड 800 मिलियन यूरो जुटा चुका है और भविष्य में 3-5 अरब यूरो के निवेश का लक्ष्य रखता है जिसे अमेरिका जैसे रणनीतिक साझेदारों का समर्थन प्राप्त है.
“2022 में रूस के यूक्रेन पर आक्रमण के बाद थ्री सीज़ इनिशिएटिव को और मजबूती मिली।”
थ्री सीज़ इनिशिएटिव के दस वर्षों पर नज़र डालने से साफ होता है कि प्रगति तो हुई है लेकिन वह समान नहीं रही. इस कार्यक्रम के तहत कुल 143 कनेक्टिविटी परियोजनाओं को प्राथमिकता दी गई है जिनकी अनुमानित लागत 111 अरब यूरो है और अब तक कुल बजट का लगभग 40 प्रतिशत जुटाया जा चुका है. 2024 तक 19 परियोजनाओं में अच्छी प्रगति हुई जिनमें से 14 पूरी हो चुकी हैं.
2022 में रूस के यूक्रेन पर आक्रमण के बाद थ्री सीज़ इनिशिएटिव को और मजबूती मिली. नाटो बलों और संसाधनों को पूर्वी सीमा पर तैनात करने की जरूरत ने उत्तर–दक्षिण कॉरिडोर की सैन्य दृष्टि से अहम भूमिका को उजागर किया. इसी संदर्भ में विया कार्पैथिया और रेल बाल्टिका जैसी परियोजनाएँ अब नागरिक के साथ-साथ सैन्य उपयोग के लिहाज़ से भी महत्वपूर्ण बन गई हैं.
थ्री सीज़ इनिशिएटिव की सबसे बड़ी सफलता ऊर्जा सुरक्षा में दिखती है जैसे पोलैंड–लिथुआनिया गैस पाइपलाइन, पोलैंड और क्रोएशिया में एलएनजी टर्मिनलों का विस्तार और बाल्टिक देशों के गैस बाज़ारों का यूरोप से जुड़ना. पोलैंड–नॉर्वे की बाल्टिक पाइप और BRUA कॉरिडोर से क्षेत्र की ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ी है जबकि रेल बाल्टिका, रेल-2-सी परियोजना और विया कार्पैथिया राजमार्ग से परिवहन और रेल संपर्क बेहतर हुआ है. डिजिटल क्षेत्र में ड्रोन जैसी संयुक्त पहलें भी आगे बढ़ी हैं लेकिन लगातार बदलते नेतृत्व, स्थायी सचिवालय की कमी और फंड जुटाने की दिक्कतों के कारण 3SI इन्वेस्टमेंट फंड की रफ्तार धीमी रही है. इसके अलावा, यूरोपीय ग्रीन डील के सख्त नियमों के चलते कई पारंपरिक परिवहन और ऊर्जा परियोजनाओं को मंजूरी और धन मिलने में देरी होती रही है.
2022 में रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद थ्री सीज़ इनिशिएटिव का महत्व और बढ़ गया. नाटो सेनाओं की पूर्वी सीमा पर तैनाती की जरूरत ने उत्तर–दक्षिण कॉरिडोर को सैन्य और नागरिक दोनों नजरिए से अहम बना दिया जिससे विया कार्पैथिया और रेल बाल्टिका जैसी परियोजनाएँ दोहरे उपयोग वाली बन गईं. अब इस पहल का फोकस आर्थिक विकास से हटकर सुरक्षा, मजबूती और यूक्रेन के पुनर्निर्माण पर आ गया है, साथ ही उसे यूरोपीय संघ के परिवहन और ऊर्जा नेटवर्क से जोड़ने पर ज़ोर दिया जा रहा है. मोल्दोवा और यूक्रेन के जुड़ने के बाद रेलवे जैसे पुराने ढांचागत अंतर दूर करने की कोशिशें तेज़ हुई हैं और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन को मजबूत व विविध बनाने के साथ मध्य और पूर्वी यूरोप एक नए कनेक्टिविटी ढांचे का केंद्र बनकर उभरा है.
“अब यह सिर्फ पश्चिमी यूरोप के बराबर आने का साधन नहीं रहा बल्कि पूरे यूरोप के लिए एक अहम रणनीतिक ज़रूरत बन गया है।”
भारत–मध्य पूर्व–यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) की शुरुआत को मध्य और पूर्वी यूरोप (CEE) क्षेत्र की बढ़ती कनेक्टिविटी पहलों से रणनीतिक रूप से जोड़ा जा रहा है. उत्तर–दक्षिण ढांचे के विस्तार के साथ, 2023 में ग्रीस के थ्री सीज़ इनिशिएटिव में शामिल होने के बाद 3SI को IMEC के उत्तरी विस्तार के रूप में देखा जाने लगा है. इससे थेसालोनिकी और कोपर जैसे दक्षिणी यूरोपीय बंदरगाह CEE क्षेत्र और बाल्टिक सागर से जुड़ सकेंगे. इस तरह 3SI केवल क्षेत्रीय सहयोग की पहल नहीं बल्कि सुरक्षित और नियम-आधारित वैश्विक व्यापारिक संपर्क सुनिश्चित करने की लोकतांत्रिक दुनिया की व्यापक सोच का एक अहम हिस्सा बन गया है.
लगातार बदलने वाली अध्यक्षता से होने वाली रुकावटों को दूर करने के लिए थ्री सीज़ इनिशिएटिव को एक स्थायी सचिवालय बनाने पर विचार करना चाहिए. इससे परियोजनाओं का काम लगातार चलता रहेगा, बेहतर निगरानी होगी और निवेश की प्रक्रिया स्थिर बनेगी. इसके साथ ही, उन परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए जिनका दोहरा लाभ हो-आर्थिक विकास और सैन्य आवाजाही. यदि परियोजनाओं को यूरोपीय संघ की कनेक्टिंग यूरोप फैसिलिटी और ईयू–नाटो के सैन्य गतिशीलता लक्ष्यों से जोड़ा जाए तो क्षेत्र की सुरक्षा मजबूत होगी और फंडिंग भी आसान होगी. उत्तर–दक्षिण कॉरिडोर के तेज़ विकास और मजबूत संस्थागत ढांचे से CEE क्षेत्र का एकीकरण और गहरा हो सकता है. दस साल बाद, थ्री सीज़ इनिशिएटिव एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है. अब यह सिर्फ पश्चिमी यूरोप के बराबर आने का साधन नहीं रहा बल्कि पूरे यूरोप के लिए एक अहम रणनीतिक ज़रूरत बन गया है-जो एक मजबूत लॉजिस्टिक केंद्र और लोकतांत्रिक सुरक्षा कवच के रूप में उभर रहा है.
शैरी मल्होत्रा ऑब्ज़र्वर रिसर्च फ़ाउंडेशन में स्ट्रैटेजिक स्टडीज़ प्रोग्राम की उप निदेशक हैं.
शिवांगी यादव ऑब्ज़र्वर रिसर्च फ़ाउंडेशन में रिसर्च इंटर्न हैं.
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Shairee Malhotra is Deputy Director - Strategic Studies Programme at the Observer Research Foundation. Her areas of work include Indian foreign policy with a focus on ...
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Shivangi Yadav is a Research Intern at the Observer Research Foundation. ...
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