Author : Mukesh Jindal

Expert Speak Raisina Debates
Published on Jan 08, 2026 Updated 1 Days ago

न्यूक्लियर फ्यूज़न को भविष्य की ऊर्जा क्रांति क्यों माना जा रहा है, इस आर्टिकल में सूर्य जैसी ऊर्जा प्रक्रिया, हालिया वैज्ञानिक प्रगति और भारत के लिए इसके अवसरों को संक्षेप में समझाया गया है. 

न्यूक्लियर फ्यूज़न: भारत के लिए ऊर्जा का अगला युग

Image Source: Getty

न्यूक्लियर फ्यूज़न या परमाणु संलयन (ऐसी प्रक्रिया जो सूर्य और सितारों को ऊर्जा प्रदान करती है) का उपयोग वैज्ञानिकों के साथ-साथ ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी लोगों के लिए भी आशा की एक किरण रही है. न्यूक्लियर फिज़न यानी परमाणु विखंडन (ऐसी प्रक्रिया जहां भारी परमाणु नाभिक को तोड़ा जाता है) के विपरीत फ्यूज़न में हल्के परमाणु नाभिक (जैसे कि हाइड्रोजन के आइसोटोप) आपस में जुड़कर ऊर्जा की भारी मात्रा उत्पन्न करते हैं. हाइड्रोजन के हीलियम में फ्यूज़न से प्राप्त ये ऊर्जा मानवता को लगभग असीमित, कार्बन-मुक्त और टिकाऊ स्रोत प्रदान करने की क्षमता रखती है. 

फ्यूज़न क्रांतिकारी क्यों है 

मौजूदा ऊर्जा स्रोतों की तुलना में न्यूक्लियर फ्यूज़न के कई महत्वपूर्ण लाभ हैं. इसके प्राथमिक ईंधन स्रोत (समुद्र से प्राप्त ड्यूटेरियम और रिएक्टर से उत्पन्न ट्रिटियम) भरपूर मात्रा में और व्यापक रूप से उपलब्ध हैं. फ्यूज़न ईंधन के एक ग्राम से उतनी ही ऊर्जा उत्पन्न की जा सकती है जितनी 10 टन कोयले को जलाने से. इसके अलावा फ्यूज़न रिएक्टर से ग्रीनहाउस गैस (GHG) उत्पन्न नहीं होती है जिससे जीवाश्म ईंधन के मुकाबले पर्यावरण की रक्षा होती है. फ्यूज़न से बहुत कम दीर्घकालिक रेडियोएक्टिव कचरा उत्पन्न होता है जिससे मौजूदा न्यूक्लियर फिज़न तकनीक की बहुत बड़ी कमी का समाधान होता है. 

हाइड्रोजन के हीलियम में फ्यूज़न से प्राप्त ये ऊर्जा मानवता को लगभग असीमित, कार्बन-मुक्त और टिकाऊ स्रोत प्रदान करने की क्षमता रखती है. 

लेकिन न्यूक्लियर फ्यूज़न की संभावनाओं के बावजूद फ्यूज़न को प्राप्त करना एक बहुत बड़ी वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग चुनौती बनी हुई है. इसके लिए कठिन परिस्थितियों का निर्माण और उसे बनाए रखना ज़रूरी है. इनमें 150 मिलियन डिग्री सेल्सियस से ज़्यादा तापमान, प्रभावी प्लाज़्मा कन्फाइनमेंट (परिरोधन) और शुद्ध ऊर्जा लाभ हासिल करना शामिल हैं. हालांकि प्रमुख क्षेत्रों में हाल की प्रगति ने हमें आत्मनिर्भर फ्यूज़न रिएक्शन या ‘इग्निशन’ की सफलता प्राप्त करने के क़रीब ला दिया है: 

मैटेरियल साइंस: अत्यधिक गर्मी, रेडिएशन और मैकेनिकल दबाव का सामना करने में सक्षम आधुनिक मटेरियल में इनोवेशन, रिएक्टर वॉल और प्लाज़्मा के संपर्क में आने वाले हिस्सों के लिए महत्वपूर्ण हैं. 

मैग्नेटिक कन्फाइनमेंट: टोकामक और स्टेलारेटर जैसी डिवाइस शक्तिशाली मैग्नेटिक फील्ड का उपयोग करके बेहद गर्म प्लाज़्मा को सीमित रखती हैं और ऊर्जा नुकसान को कम करती हैं. फ्रांस की अंतर्राष्ट्रीय परियोजना इंटरनेशनल थर्मोन्यूक्लियर एक्सपेरिमेंटल रिएक्टर (ITER) इस क्षेत्र में सहयोग से जुड़ी प्रगति का उदाहरण है. 

इनर्शियल कन्फाइनमेंट: नेशनल इग्निशन फैसिलिटी (NIF) जैसी लेज़र से चलने वाली प्रणाली फ्यूज़न के लिए आवश्यक चरम परिस्थितियों को दोहराने के उद्देश्य से छोटे फ्यूल पेलेट पर विशाल ऊर्जा केंद्रित करती है. 

प्लाज़्मा को गर्म करने के तौर-तरीकों में ओमिक हीटिंग, न्यूट्रल बीम इंजेक्शन और हाई-फ्रीक्वेंसी तरंग कंपन शामिल हैं. फ्यूज़न रिएक्शन से उत्पन्न उष्मा को पारंपरिक ऊर्जा उत्पादन की पद्धति के माध्यम से बिजली में बदला जाता है.

उच्च तापमान वाले सुपरकंडक्टर: सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट में प्रगति ने मैग्नेटिक फील्ड की मज़बूती और क्षमता में नाटकीय रूप से सुधार किया है. इससे छोटे और कम लागत वाले रिएक्टर डिज़ाइन का विकास संभव हो पाया है. 

ये सफलताएं सिद्धांत और व्यावहारिक कार्यान्वयन के बीच दूरी को पाट रही हैं. इस तरह फ्यूज़न को भविष्य में टिकाऊ ऊर्जा की बुनियाद के रूप में पेश किया जा रहा है. 

रिसर्च में प्रमुख फ्यूज़न रिएक्टर डिज़ाइन

टोकामक (ITER और दूसरी सुविधाएं) 

टोकामक डिज़ाइन वैक्यूम चैंबर के भीतर 100 मिलियन डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान पर प्लाज़्मा को सीमित करने के लिए मैग्नेटिक फील्ड पर निर्भर करता है. इस तरह सीमित करने से प्लाज़्मा रिएक्टर वॉल के संपर्क में नहीं आता है जिससे ये डोनट का रूप ले लेता है. प्लाज़्मा को गर्म करने के तौर-तरीकों में ओमिक हीटिंग, न्यूट्रल बीम इंजेक्शन और हाई-फ्रीक्वेंसी तरंग कंपन शामिल हैं. फ्यूज़न रिएक्शन से उत्पन्न उष्मा को पारंपरिक ऊर्जा उत्पादन की पद्धति के माध्यम से बिजली में बदला जाता है. फ्रांस के कडाहाश में स्थिति ITER विकास के अधीन सबसे बड़ी और सबसे जटिल फ्यूज़न डिवाइस है. ITER भारत, चीन, यूरोपियन यूनियन (EU), जापान, कोरिया, रूस और अमेरिका को शामिल करके तैयार वैश्विक गठबंधन है जो फ्यूज़न ऊर्जा की प्रगति को लेकर अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धता का उदाहरण है.  

  • The Power Of The Stars Harnessing Nuclear Fusion For Energy Needs

स्रोत: ITER Organization, France

मिनी टोकामक (टोकामक एनर्जी एंड कॉमनवेल्थ फ्यूज़न सिस्टम): मिनी टोकामक, प्लाज़्मा को एक छोटे, सेब के आकार के विन्यास में सीमित करने के लिए उच्च-तापमान वाले सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट का इस्तेमाल करता है. ये मैग्नेट मज़बूत और अधिक कुशल फील्ड में सक्षम बनाते हैं जिससे छोटे रिएक्टर के डिज़ाइन की सुविधा मिलती है.

 

The Power Of The Stars Harnessing Nuclear Fusion For Energy Needs
Source: 
MIT-PSFC/CFS

The Power Of The Stars Harnessing Nuclear Fusion For Energy Needs

Source: Max Planck Institute for Plasma Physics

स्टेलारेटर: स्टेलारेटर चक्करदार मैग्नेटिक फील्ड बनाने के लिए जटिल रूप से डिज़ाइन किए गए मैग्नेटिक कुंडलियों का उपयोग करते हैं. इससे प्लाज़्मा करंट के बिना प्लाज़्मा सीमित किया जा सकता है. हालांकि इंजीनियरिंग जटिलता और चुंबक की अधिक लागत महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं. 

लीनियर कोलाइडिंग बीम रिएक्टर (TAE टेक्नोलॉजी)

इस डिज़ाइन में प्लाज़्मा के पैकेज को एक सेंट्रल चैंबर में डाला जाता है जहां वो एक सोलेनाइड के भीतर तेज़ी से घूमते हैं. फ्यूज़न, टकराव और मैग्नेटिक कन्फाइनमेंट के ज़रिए होता है. TAE टेक्नोलॉजी इस क्षेत्र में अग्रणी है. उसने कई प्रोटोटाइप बनाए हैं और उसका उद्देश्य एक दशक के भीतर बिजली उत्पादन शुरू करना है. 

  • The Power Of The Stars Harnessing Nuclear Fusion For Energy Needs

Source: TAE Technologies

मैग्नेटाइज़्ड टारगेट रिएक्टर (जनरल फ्यूज़न)

मैग्नेटाइज़्ड टारगेट फ्यूज़न (MTF) का तरीका मैग्नेटिक और इनर्शियल कन्फाइनमेंट को जोड़ता है. प्लाज़्मा को तरल धातु के एक घूमते हुए गोले के भीतर रखा जाता है और तेज़ कंप्रेशन के ज़रिए फ्यूज़न की परिस्थिति प्राप्त की जाती है. डॉ. मिशेल लबेर्ज द्वारा स्थापित जनरल फ्यूज़न 2025 तक फ्यूज़न की स्थिति प्राप्त करने के लिए अपनी LM26 मशीन विकसित कर रही है

The Power Of The Stars Harnessing Nuclear Fusion For Energy NeedsSource: General Fusion

फ्यूज़न माइक्रो रिएक्टर (अवलांच एनर्जी) 

फ्यूज़न माइक्रोरिएक्टर प्लाज़्मा को सीमित करने के लिए मैग्नेटिक फील्ड की जगह इलेक्ट्रिक फील्ड का उपयोग करता है. अवलांच एनर्जी के माइक्रोरिएक्टर आर्बिट्रोन का स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन और स्पेस प्रोपल्शन में संभावित उपयोग है. 

फ्यूज़न में उपलब्धि का क्षण

कहावत है कि ‘फ्यूज़न हमेशा 30 साल दूर है’. लेकिन इसके बावजूद कई उपलब्धियां हासिल की गई हैं. अमेरिका में टोकामक फ्यूज़न टेस्ट रिएक्टर (TFTR) और UK में ज्वाइंट यूरोपियन टोरस (JET) ने प्लाज़्मा तापमान और ऊर्जा घनत्व में महत्वपूर्ण प्रगति का प्रदर्शन किया है. दिसंबर 2022 में कैलिफोर्निया स्थित लॉरेंस लिवरमोर नेशनल लैबोरेटेरी की नेशनल इग्निशन फैसिलिटी (NIF) ने इग्निशन प्राप्त किया और 2.05 मेगाजूल इनपुट से 3.15 मेगाजूल बिजली का उत्पादन किया. ये राइट बंधुओं की पहली उड़ान के समान ऐतिहासिक सफलता है. 

फ्यूज़न ऊर्जा: भारत के लिए अवसर

The Power Of The Stars Harnessing Nuclear Fusion For Energy Needs

कैलिफोर्निया स्थित नेशनल इग्निशन फैसिलिटी में एक लेज़र बे

Source: Lawrence Livermore National Laboratory

भारत में फ्यूज़न रिसर्च का परिदृश्य: भारत में फ्यूज़न रिसर्च का नेतृत्व गांधीनगर स्थित इंस्टीट्यूट फॉर प्लाज़्मा रिसर्च (IPR) के पास है. वहां दो टोकामक हैं: आदित्य (1989 में चालू) और SST-1 (नई पीढ़ा का टोकामक)

आर्थिक संभावना: वैश्विक फ्यूज़न उद्योग (जिसका मूल्य 40 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर आंका गया है) आर्थिक विकास के लिए अपार अवसर पेश करता है. उचित हिस्सेदारी हासिल करके भारत अपनी अर्थव्यवस्था में 6.8 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर जोड़ सकता है. 

परमाणु विज्ञान एवं तकनीक में मज़बूत बुनियाद के साथ भारत पहले से ही ITER में योगदान कर रहा है और ऊर्जा एवं जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने के लिए फ्यूज़न की प्रगति का लाभ उठाने की क्षमता रखता है.

वैज्ञानिक अनुसंधान के माहौल को बढ़ावा: फ्यूज़न रिसर्च में प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों को शामिल करने से रक्षा और अंतरिक्ष जैसे अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों की तरह सफलता की कहानियों को दोहराया जा सकता है. ज़ेन टेक्नोलॉजी और अदाणी डिफेंस समेत कई कंपनियों ने सार्वजनिक-निजी सहयोग के लाभों को दिखाया है. 

अत्याधुनिक तकनीकों को बढ़ावा: फ्यूज़न रिसर्च मैटेरियल साइंस, डायग्नोस्टिक और सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट सिस्टम में प्रगति को बढ़ावा देती है. इन इनोवेशन के प्रयोग ऊर्जा से परे हैं और रक्षा, अंतरिक्ष एवं चिकित्सा तकनीकों को भी प्रभावित करते हैं. 

आगे का रास्ता 

लगातार बढ़ती ऊर्जा की मांग वाले देश भारत में फ्यूज़न एक बड़े बदलाव का अवसर प्रस्तुत करता है. परमाणु विज्ञान एवं तकनीक में मज़बूत बुनियाद के साथ भारत पहले से ही ITER में योगदान कर रहा है और ऊर्जा एवं जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने के लिए फ्यूज़न की प्रगति का लाभ उठाने की क्षमता रखता है. स्वदेशी फ्यूज़न रिसर्च में निवेश, वैश्विक कार्यक्रमों के साथ सहयोग और कुशल वर्कफोर्स को बढ़ावा इस उभरते क्षेत्र में भारत के नेतृत्व के लिए महत्वपूर्ण होगा. 


मुकेश जिंदल आईटीईआर-इंडिया में एक वैज्ञानिक अधिकारी हैं, जो प्लाज्मा अनुसंधान संस्थान (परमाणु ऊर्जा विभाग का एक सहायता प्राप्त संस्थान) के अंतर्गत एक विशेष परियोजना है. 

The views expressed above belong to the author(s). ORF research and analyses now available on Telegram! Click here to access our curated content — blogs, longforms and interviews.