Author : Atul Kumar

Expert Speak Raisina Debates
Published on Apr 22, 2026 Updated 1 Days ago

चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) में बदलाव के दौरान अब ईमानदारी से ज़्यादा वफादारी को महत्व दिया जा रहा है. यानी नेताओं को चुनते समय उनकी राजनीतिक निष्ठा सबसे ज़रूरी मानी जा रही है. एक विश्लेषण.

वफादार युवाओं को क्यों खोज रहे हैं शी जिनपिंग?

8 अप्रैल 2026 को, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने बीजिंग स्थित पीएलए नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी (एनडीयू) में अपना पहला वरिष्ठ कैडर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया. 200 से ज्यादा अधिकारी शामिल हुए, जिनमें मुख्य रूप से मेजर जनरल और उससे ऊपर के रैंक के अधिकारी थे. राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इसका उद्घाटन करते हुए इस बात पर ज़ोर दिया कि पीएलए को 2027 में अपने शताब्दी समारोह को नए राजनीतिक दृष्टिकोण के साथ मनाना चाहिए. उन्होंने कहा कि राजनीतिक सुधार को मज़बूत करने, सेना की 'पवित्रता और गौरव' को बनाए रखने के लिए क्रांतिकारी भावना से भरपूर वरिष्ठ अधिकारियों को तैयार करना आवश्यक है. 

भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के मायने  

अगर गौर से देखें तो ये ट्रेनिंग कोर्ट अब भ्रष्टाचार विरोधी अभियान से बदलकर एक ऐसे राजनीतिक छानबीन तंत्र में तब्दील हो गया है, जिसका उद्देश्य सैन्य नेतृत्व से कथित 'भ्रष्ट अधिकारियों' और उनके प्रभाव को हटाना है.  100 से ज़्यादा सैन्य अधिकारियों को हटाया गया. इसके अलावा, इसका मक़सद विशिष्ट अनुशासन, वफादारी को लागू करना और भविष्य की भूमिकाओं के लिए बेदाग अधिकारियों की पहचान करना है.

राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इसका उद्घाटन करते हुए इस बात पर ज़ोर दिया कि पीएलए को 2027 में अपने शताब्दी समारोह को नए राजनीतिक दृष्टिकोण के साथ मनाना चाहिए. उन्होंने कहा कि राजनीतिक सुधार को मज़बूत करने, सेना की 'पवित्रता और गौरव' को बनाए रखने के लिए क्रांतिकारी भावना से भरपूर वरिष्ठ अधिकारियों को तैयार करना आवश्यक है. 

हालांकि, चयन प्रक्रिया आसान नहीं होगी, क्योंकि बड़े पैमाने पर बर्खास्तगी से अधिकारी वर्ग दहशत फैलना तय है. इतना ही नहीं, इसकी वजह से संस्थागत स्मृति का क्षीण होना, उत्तराधिकार की व्यवस्था का बाधित होना और कमान संरचना का कमज़ोर होना भी निश्चित है. इससे अधिकारी वर्ग ज़ोखिम से बचने वाला हो जाएगा और ये डर निचले स्तर तक फैल जाएगा. कोई भी फैसला लेने से पहले अधिकारी ज़्यादा सतर्क और शंकालु हो जाएंगे.

संस्थागत भ्रष्टाचार और सुधार

इराक युद्ध में अमेरिका के प्रदर्शन को बारीकी से देखने के बाद पीएलए ने 2004 में संयुक्त युद्ध की दिशा में संगठनात्मक संरचना में बदलाव शुरू किया. ये उच्च स्तरीय सुधार 2015 में एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गए, जब युद्ध क्षमता को बढ़ाने के लिए उच्च कमान में बड़े पैमाने पर पुनर्गठन की मांग की गई. हालांकि, जिनपिंग की मौजूदा असंतुष्टि दिखाती है कि ये प्रक्रिया अधूरी रह गई है. युद्ध क्षमता बढ़ाने की बजाय, पीएलए संस्थागत भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया है. इसी के देखते हुए शी जिनपिंग ने पीएलए के मौजूदा शीर्ष नेतृत्व को हटाकर उनकी जगह युवा और अपेक्षाकृत बेदाग लीडरशिप को नियुक्त करने का कदम उठाया है.

शी जिनपिंग का इरादा थिएटर रोटेशन, केंद्रीय सैन्य आयोग (सीएमसी)और कमांड स्तर पर तबादलों पर केंद्रित एक सुगम, एकीकृत कार्मिक प्रणाली को आगे बढ़ाना है. हालांकि, शी जिनपिंग इन कोशिशों में अब तक असफल रहे हैं. हाल के वर्षों में, चीन के शीर्ष नेतृत्व ने पीएलए ने भ्रष्टाचार-विरोधी और सत्ता-संगठन के लिए एक व्यापक अभियान चलाया है. इस अभियान के दौरान 100 से ज़्यादा वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को पद से हटाया गया है. पीएलए में वरिष्ठ अधिकारियों की कमी गंभीर हो गई है. यहां तक ​​कि महत्वपूर्ण थिएटर कमांडों में भी व्यवधान उत्पन्न हुआ है. उदाहरण के लिए, पश्चिमी थिएटर कमांड के नौ पूर्व और सेवारत जनरलों को हटा दिया गया.

ये उच्च स्तरीय सुधार 2015 में एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गए, जब युद्ध क्षमता को बढ़ाने के लिए उच्च कमान में बड़े पैमाने पर पुनर्गठन की मांग की गई. जिनपिंग की मौजूदा असंतुष्टि दिखाती है कि ये प्रक्रिया अधूरी रह गई है. युद्ध क्षमता बढ़ाने की बजाय, पीएलए संस्थागत भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया है.

पीएलए में तीन जगह पर ज़्यादा भ्रष्टाचार दिख रहा है. पहला, खरीद पर निगरानी अभी भी कमज़ोर है, जिससे उपकरण अधिग्रहण, रसद, निर्माण, मिसाइल, एयरोस्पेस श्रृंखलाएं और प्रमोशन से जुड़े मामलों में रिश्वतखोरी सबसे अधिक है. इसलिए, पीएलए अधिकारियों और व्यापारियों के बीच मिलीभगत को अक्सर भ्रष्टाचार विरोधी अभियानों में निशाना बनाया जाता है. दूसरा, पदोन्नति की जांच को अनुशासन संबंधी निरीक्षणों और संरक्षण नेटवर्क की गहन जांच से जोड़ा जा रहा है, लेकिन राजनीतिक शिक्षा के बढ़ते महत्व से ये ज़ोखिम बना हुआ है. ये स्थिति खतरनाक है, क्योंकि राजनीतिक जांच का चरण ऐतिहासिक रूप से प्रमोशन के लिए रिश्वतखोरी के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील रहा है. इसका अर्थ ये है, रिश्वतखोरी पर निगरानी के लिए बनाए गए निकाय अनजाने में उसी भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे सकते हैं, जिसे ख़त्म करने के लिए उन्हें बनाया गया है.

इतना ही नहीं, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने वरिष्ठ अधिकारियों से बार-बार 'सच बोलने' की अपील की है, जिससे कमान प्रणाली के भीतर सूचना की सत्यता को लेकर उनकी गहरी चिंता का पता चलता है. उन्हें इस बात की चिंता है कि लंबे समय तक चलने वाली छंटनी और पदोन्नति प्रणालियां ज़ोखिम से बचने की प्रवृत्ति, चाटुकारिता और गलत रिपोर्टिंग को जन्म दे सकती हैं. एक ऐसी व्यवस्था के पैदा होने का ख़तरा है, जो योग्यता के बजाय व्यक्तिगत वफादारी को प्राथमिकता देती हैं,  मिसाइल विश्वसनीयता, रसद क्षेत्र की तैयारियों और ताइवान के मामले में अगर सूचना में सत्यता की कमी होगी, बढ़ा-चढ़ाकर दावे किए जाएंगे तो इससे गलत राजनीतिक निर्णय लेने का ख़तरा उत्पन्न हो सकता है.

राजनीतिक शिक्षा पर एनडीयू का संस्थागत कोर्स

इसलिए, अप्रैल 2026 में वरिष्ठ पीएलए अधिकारियों के लिए आयोजित एनडीयू प्रशिक्षण कार्यक्रम को बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है. ये एक सामान्य पेशेवर सैन्य शिक्षा कार्यक्रम नहीं है. चीन के आधिकारिक मीडिया में इसके व्यापक और प्रमुख कवरेज से ये बात स्पष्ट भी होती है. ये तीन महत्वपूर्ण रुझानों को दर्शाता है. पहला, शी जिनपिंग पीएलए के भीतर कम वफादार लोगों को हटाकर कठोर अनुशासन लागू करना चाहते हैं. दूसरा, इस पाठ्यक्रम के प्रतिभागी उसी पदोन्नति समूह से आते हैं, जिनसे भविष्य में थिएटर कमांडर, सेवा प्रमुख, सीएमसी विभाग प्रमुख और पार्टी कांग्रेस में सैन्य प्रतिनिधि चुने जाएंगे. इसलिए, ये पाठ्यक्रम न सिर्फ अधिकारियों को प्रशिक्षित करेगा, बल्कि इस बात का आकलन भी करेगा कि भविष्य में पदोन्नति के लिए कौन योग्य है.

आने वाले कुछ साल उथल-पुथल भरे और अनिश्चित रह सकते हैं. ऐसा संशय भरा माहौल कुछ अधिकारियों को सावधानी बरतने और ज़ोखिम से बचने के लिए प्रेरित कर सकता है, जबकि महत्वाकांक्षी अधिकारी शीर्ष नेतृत्व का ध्यान आकर्षित करने के लिए साहसिक पहल करने के लिए प्रोत्साहित होंगे.

तीसरा, पाठ्यक्रम का लगभग पूरा ध्यान राजनीतिक शिक्षा पर केंद्रित है, जिसमें पार्टी के प्रति निष्ठा और 'नए युग के लिए चीनी विशेषताओं वाले समाजवाद पर शी जिनपिंग के विचार' शामिल हैं. ये इसकी केंद्रीय विशेषता को उजागर करता है, जिसका उद्देश्य है 'दो प्रतिष्ठान, चार चेतनाएं, चार विश्वास और दो समर्थन' में महारत हासिल करना.

सफलताएं, आशंकाएं और उनके प्रभाव

शी जिनपिंग के सुधार अभियान ने प्रतिद्वंद्वी नेटवर्क को भंग करने, व्यक्तिगत रूप से वफादार युवा जनरलों को पदोन्नत करने और उच्च अधिकारियों में डर पर आधारित अनुशासन लागू करने में ठोस प्रगति की है. फिर भी, गुटबाजी के पूरी तरह ख़त्म होने की संभावना नहीं है. सबसे बड़ा अनसुलझा सवाल ये है, कि क्या शी जिनपिंग राजनीतिक शुद्धिकरण को बेहतर कमांडरों, ज़्यादा ईमानदार स्टाफ, भ्रष्टाचार रहित खरीद प्रक्रियाओं और मज़बूत युद्ध क्षमता में तब्दील कर सकते हैं.

इसके अलावा, वरिष्ठ कमांडरों का पुनर्गठन केवल शीर्ष स्तर तक ही सीमित नहीं रहेगा. ये निचले स्तरों और क्षेत्रीय टुकड़ियों तक निरंतर फैलता जाएगा, जिससे पीएलए के पूरे अधिकारी वर्ग का स्वरूप बदल जाएगा. सभी रैंकों में राजनीतिक शिक्षा को और अधिक गहन बनाया जाएगा, जिसमें कैडर और सैनिक दोनों को नियमित रूप से अध्ययन और वैचारिक सत्रों में शामिल किया जाएगा.

वहीं दूसरी ओर, पदोन्नति की राहें काफी धीमी होने की संभावना है, क्योंकि अधिकारियों का चयन एक गहन जांच प्रक्रिया से गुजरता है. इसलिए आने वाले कुछ साल उथल-पुथल भरे और अनिश्चित रह सकते हैं. ऐसा संशय भरा माहौल कुछ अधिकारियों को सावधानी बरतने और ज़ोखिम से बचने के लिए प्रेरित कर सकता है, जबकि महत्वाकांक्षी अधिकारी शीर्ष नेतृत्व का ध्यान आकर्षित करने के लिए साहसिक पहल करने के लिए प्रोत्साहित होंगे. दोनों ही परिस्थितियों में पीएलए की गतिविधियों पर करीबी नज़र रखने और इससे सतर्क रहने की ज़रूरत है.


अतुल कुमार ऑब्ज़र्वर रिसर्च फाउंडेशन के स्ट्रैटेजिक स्टडीज प्रोग्राम में फेलो हैं.
The views expressed above belong to the author(s). ORF research and analyses now available on Telegram! Click here to access our curated content — blogs, longforms and interviews.