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ठोस रॉकेट मोटर केवल मिसाइल का हिस्सा नहीं बल्कि युद्ध और अंतरिक्ष में ताकत का खेल बदल रही हैं. जानिए क्यों दुनिया की सेनाएँ इसे अपनी पहली प्राथमिकता बना रही हैं.
Image Source: Getty Images
दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाएँ- अमेरिका, यूरोप, चीन और रूस-तेज़ी से युद्धकालीन ढाँचे की ओर बढ़ रही हैं. विभिन्न क्षेत्रों में जारी और संभावित संघर्षों के बीच ठोस ईंधन वाले रॉकेटों की वैश्विक माँग में तेज़ उछाल देखा जा रहा है. इस बढ़ती माँग के केंद्र में ठोस रॉकेट मोटर (SRM) है जो मिसाइल और प्रक्षेपण प्रणालियों का एक मूलभूत घटक मानी जाती है.
सेनाओं की रणनीतिक और सामरिक क्षमताओं में ठोस ईंधन रॉकेट मोटर (SRM) को हमेशा प्राथमिकता दी जाती रही है, और हालिया वैश्विक संघर्षों ने इस तकनीक की अहमियत को और बढ़ा दिया है. आधुनिक युद्ध और सैन्य तैयारियों में वायु रक्षा, सटीक प्रहार करने वाली मिसाइलें और तात्कालिक हमले प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं जिसमें SRM तकनीक तकनीकी दृष्टि से सबसे भरोसेमंद और टिकाऊ विकल्प साबित हो रही है.
आधुनिक युद्ध और सैन्य तैयारियों में वायु रक्षा, सटीक प्रहार करने वाली मिसाइलें और तात्कालिक हमले प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं जिसमें SRM तकनीक तकनीकी दृष्टि से सबसे भरोसेमंद और टिकाऊ विकल्प साबित हो रही है.
ठोस ईंधन आधारित प्रणालियाँ भंडारण में आसान, तेजी से तैनाती योग्य और लंबे समय तक सक्रिय रहने में सक्षम होती हैं. ये तकनीकें विभिन्न प्रकार के मिसाइल और लॉन्च सिस्टम जैसे एयर-टू-सर्फेस मिसाइल, लंबी दूरी की एंटी-शिप मिसाइल और मल्टीपल रॉकेट लॉन्च सिस्टम के लिए उपयुक्त है. रणनीतिक और सामरिक बलों में SRM का महत्व बढ़ता जा रहा है क्योंकि यह तेज, विश्वसनीय और टिकाऊ तकनीकी समाधान प्रदान करती है जो आधुनिक युद्ध की बदलती आवश्यकताओं को पूरा करने में निर्णायक भूमिका निभाती है.
विशेषज्ञों के अनुसार, ठोस रॉकेट मोटर तरल और क्रायोजेनिक प्रणालियों की तुलना में अधिक टिकाऊ, सुरक्षित और भंडारण के लिए अनुकूल होती हैं. यही कारण है कि इनका उपयोग वायु रक्षा मिसाइलों, मल्टी-रॉकेट लॉन्च सिस्टम, लंबी दूरी की जहाज़-रोधी मिसाइलों, स्टैंड-ऑफ हथियारों और छोटे उपग्रह प्रक्षेपण प्रणालियों में व्यापक रूप से किया जा रहा है.
बैलिस्टिक मिसाइल तकनीक की शुरुआत से ही ठोस रॉकेट मोटर (SRM) का इस्तेमाल होता रहा है लेकिन बीते कुछ वर्षों में वैश्विक तनाव और युद्धों ने इसकी मांग को तेज़ी से बढ़ा दिया है. दुनिया के कई भू-राजनीतिक हॉटस्पॉट-जैसे रूस-यूक्रेन, ईरान-इज़रायल, भारत-पाकिस्तान, आर्मेनिया-अज़रबैजान और थाईलैंड-कंबोडिया-में हुए संघर्षों के कारण ठोस ईंधन वाली मिसाइलों के पुराने भंडार तेज़ी से खत्म हो रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि 2010 के दशक की उत्पादन क्षमता इस खपत की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं है. आम तौर पर एक SRM को बनाने में लगभग दो हफ्ते लगते हैं जिसमें ईंधन को ठोस करने की प्रक्रिया सबसे ज़्यादा समय लेती है. इसे तेज़ करने पर अब कंपनियाँ शोध कर रही हैं.
अप्रैल 2024 में ईरान द्वारा इज़रायल पर किए गए बड़े हमले ने भी इस चुनौती को उजागर किया. ईरान ने एक ही दिन में ड्रोन, बैलिस्टिक और क्रूज़ मिसाइलों से हमला किया जिसे इज़रायल ने अपने वायु रक्षा सिस्टम से नाकाम किया. इसके बाद यह साफ हो गया कि युद्ध केवल हमले और बचाव का नहीं बल्कि मिसाइल भंडार को बनाए रखने की क्षमता का भी है. इसी को देखते हुए इज़रायल ने 2025–26 में रक्षा खरीद के लिए बड़े बजट का ऐलान किया है, जिसमें SRM की अहम भूमिका होगी. दूसरी ओर, ईरान ने भी मिसाइल उत्पादन बढ़ाने की कोशिश की है हालांकि उसके कई उत्पादन केंद्रों पर हमले हुए हैं.
दुनिया के कई भू-राजनीतिक हॉटस्पॉट-जैसे रूस-यूक्रेन, ईरान-इज़रायल, भारत-पाकिस्तान, आर्मेनिया-अज़रबैजान और थाईलैंड-कंबोडिया-में हुए संघर्षों के कारण ठोस ईंधन वाली मिसाइलों के पुराने भंडार तेज़ी से खत्म हो रहे हैं.
अमेरिका ने समय रहते SRM (सॉलिड रॉकेट मोटर) उत्पादन की सीमाओं और जोखिमों को पहचाना. 2017 में सरकारी रिपोर्ट में चेतावनी दी गई थी कि देश के SRM भंडार घट रहे हैं और आपूर्ति श्रृंखला में कमजोरियाँ बढ़ रही हैं, जिससे उत्पादन और तैनाती पर असर पड़ सकता है. इसके जवाब में अमेरिका ने नए निर्माताओं को बढ़ावा दिया और नाटो देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी मजबूत की. हाल के वर्षों में स्पेसएक्स, एंड्यूरिल और एक्स-बो जैसी नई रक्षा कंपनियाँ, लॉकहीड मार्टिन, रेथियॉन और नॉर्थरोप ग्रुमैन जैसी पुरानी कंपनियों के साथ मिलकर काम कर रही हैं. इन प्रयासों का उद्देश्य SRM उत्पादन को अधिक तेज़, कम लागत में और बड़े पैमाने पर करना है साथ ही डिजिटल तकनीक, रोबोटिक प्रौद्योगिकी और स्वचालन का उपयोग करके उत्पादन दक्षता और सटीकता बढ़ाना भी है.
यूरोप में भी SRM (सॉलिड रॉकेट मोटर) उत्पादन और तकनीकी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं. इटली, जर्मनी और अन्य यूरोपीय देशों की प्रमुख रक्षा कंपनियाँ अमेरिका की कंपनियों के साथ मिलकर नई फैक्ट्रियाँ स्थापित कर रही हैं और उन्नत तकनीकों का विकास कर रही हैं. उदाहरण के लिए, इटली की Avio कंपनी ने वर्जीनिया में एक नई SRM फैक्ट्री की घोषणा की है जो लॉकहीड मार्टिन और रेथियॉन को प्राथमिक पहुँच प्रदान करेगी. इसी तरह, जर्मनी की Rheinmetall और Bayern-Chemie जैसी कंपनियाँ नए-जनरेशन SRM विकसित करने और निर्माण करने के लिए अमेरिकी कंपनियों के साथ साझेदारी कर रही हैं. इन प्रयासों का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना ही नहीं बल्कि तकनीकी नवाचार, डिजिटल निर्माण, रोबोटिक प्रक्रियाएँ और उच्च दक्षता सुनिश्चित करना भी है. विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले वर्षों में वैश्विक सुरक्षा की बढ़ती चुनौतियों और बढ़ते सैन्य तनावों को देखते हुए ठोस रॉकेट मोटर केवल मिसाइल और अंतरिक्ष लॉन्च सिस्टम में ही नहीं बल्कि सैन्य ताकत और रणनीतिक संतुलन में भी अहम भूमिका निभाएगी.
ठोस ईंधन रॉकेट मोटर (SRM) की सैन्य मांग केवल मिसाइलों तक सीमित नहीं है. अमेरिकी स्पेस फोर्स अपने कमर्शियल ऑगमेंटेशन स्पेस रिज़र्व और टैक्टिकली रिस्पॉन्सिव स्पेस मिशन के तहत मांग पर, रियल-टाइम और सामरिक कक्षीय लॉन्च क्षमताएँ विकसित कर रही है. इस रिज़र्व के अंतर्गत 2026 में लगभग 20 अनुबंध व्यावसायिक स्पेस लॉन्च कंपनियों को दिए जाने हैं. स्पेस फोर्स आपूर्ति शृंखला की कमजोरियों को कम कर सुरक्षित स्पेस लॉन्चरों की उपलब्धता सुनिश्चित करना चाहती है. यहीं मिसाइलों और त्वरित-प्रतिक्रिया लॉन्च वाहनों का एक-दूसरे में रूपांतरण और उनकी आपूर्ति का अभिसरण स्पष्ट होता है, क्योंकि दोनों के ठोस-ईंधन आधारित होने की संभावना अधिक है.
यहीं मिसाइलों और त्वरित-प्रतिक्रिया लॉन्च वाहनों का एक-दूसरे में रूपांतरण और उनकी आपूर्ति का अभिसरण स्पष्ट होता है, क्योंकि दोनों के ठोस-ईंधन आधारित होने की संभावना अधिक है.
अंतरिक्ष-सक्षम सेनाओं को त्वरित-प्रतिक्रिया लॉन्च वाहन इसलिए चाहिए क्योंकि इनमें सामरिक उपग्रह से जुड़ा लॉन्च वाहन साइलो, सड़क-, रेल-, जहाज़-आधारित कैनिस्टरों या विमान में संग्रहीत किया जा सकता है और बिना जटिल तैयारियों के, कहीं से भी और कभी भी सरल आदेशों पर लॉन्च किया जा सकता है. इनके भंडारण की आवश्यकता ठोस ईंधन को अनिवार्य बनाती है. चीन की सरकारी कंपनी चाइना एयरोस्पेस साइंस एंड इंडस्ट्री कॉरपोरेशन की सहायक एक्सपेस (ExPace) ने अपनी कुआइझो (Kuaizhou) श्रृंखला के त्वरित-प्रतिक्रिया वाणिज्यिक लॉन्चर चीन की डोंगफेंग-21 मध्यम-दूरी बैलिस्टिक मिसाइल से व्युत्पन्न किए हैं, जो उपग्रह-रोधी और बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा भूमिकाएँ भी निभाती है. नियमित कुआइझो लॉन्च—जिसका ताज़ा उदाहरण दिसंबर 2025 है—ने खासकर उपग्रह-रोधी अभियानों और कक्षीय निगरानी के लिए त्वरित-प्रतिक्रिया लॉन्च क्षमताओं की मांग बढ़ाई है.
अग्रणी सॉलिड रॉकेट मोटर (SRM) निर्माता अपनी उत्पादन क्षमता को तेज़ी से बढ़ा रहे हैं और नई तकनीकों को अपनाकर उन्नत ठोस ईंधनों का उपयोग कर रहे हैं. इनमें सान्द्र तरल ईंधन भी शामिल है जो लंबी अवधि तक भंडारण योग्य है और लॉन्च प्रणाली की विश्वसनीयता को बढ़ाता है. इसके अलावा, यह ईंधन बेहतर ऊर्जा घनत्व, उच्च थ्रस्ट टू वेट अनुपात और स्वच्छ घटकों के साथ आता है जो मिसाइल और अंतरिक्ष लॉन्च सिस्टम की दक्षता और सुरक्षा दोनों सुनिश्चित करता है. इन उन्नत विकासों से SRM का इस्तेमाल लंबी दूरी, उच्च गति और रणनीतिक उद्देश्यों के लिए अधिक प्रभावी और भरोसेमंद बन जाता है, जिससे वैश्विक सैन्य ताकतों के लिए यह तकनीक अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है.
एसआरएम उत्पादन में तेज़ वृद्धि इस बात का संकेत है कि दुनिया भर की सेनाएँ लंबे समय तक चलने वाले संघर्षों की तैयारी कर रही हैं.
एसआरएम उत्पादन में तेज़ वृद्धि इस बात का संकेत है कि दुनिया भर की सेनाएँ लंबे समय तक चलने वाले संघर्षों की तैयारी कर रही हैं. अत्याधुनिक एसआरएम का फोकस कम लागत, बड़े पैमाने पर और तेज़ निर्माण; डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग व ऑटोमेशन आधारित कुशल डिज़ाइन; हल्के-मज़बूत आवरण; स्टेल्थ क्षमताएँ; बुद्धिमान इग्निशन और थ्रस्ट-वेक्टरिंग पर है-ताकि सामरिक, लंबी दूरी, ईंधन-कुशल और गुप्त उपयोग संभव हो सके.
ठोस ईंधन रॉकेट मोटर (SRM) में हो रहे नवाचार ने वैश्विक सैन्य और अंतरिक्ष संचालन की दिशा ही बदल दी है. ये उन्नत तकनीकें ठोस ईंधन रॉकेटों—including लॉन्च वाहनों को—सड़क, रेल और अन्य मोबाइल प्लेटफॉर्म पर संचालित करने योग्य बनाती हैं. इसके साथ ही, इन्हें लंबे समय तक बिना किसी निगरानी या अतिरिक्त रखरखाव के भी पूरी क्षमता के साथ चलाया जा सकता है. यह विशेषता विशेष रूप से उन देशों के लिए महत्वपूर्ण है जो संभावित संघर्षों या तात्कालिक सैन्य आवश्यकताओं के लिए तैयारी कर रहे हैं.
उन्नत SRM के बड़े भंडार को केवल संख्या में नहीं बल्कि सामरिक रूप से भी एक प्रतिरोधक क्षमता माना जाता है. एक देश के पास उच्च गुणवत्ता और मात्रा में SRM होने से उसे न केवल रणनीतिक बल मिलता है बल्कि यह प्रतिद्वंद्वियों के लिए एक निवारक (deterrent) के रूप में भी काम करता है. इसलिए, जो देश संभावित संघर्षों में शामिल होने की संभावना रखते हैं, वे अपनी SRM नवाचार, उत्पादन इकाइयों, आपूर्ति शृंखलाओं और भंडार को सुरक्षा के कड़े प्रावधानों के तहत बनाए रखना चाहते हैं.
इन सभी कारकों को देखते हुए, SRM तकनीक अब केवल मिसाइल प्रणालियों का हिस्सा नहीं रही बल्कि यह आधुनिक सैन्य तैयारियों और वैश्विक सामरिक संतुलन की आधारभूत तकनीक बन गई है.
इन सभी कारकों को देखते हुए, SRM तकनीक अब केवल मिसाइल प्रणालियों का हिस्सा नहीं रही बल्कि यह आधुनिक सैन्य तैयारियों और वैश्विक सामरिक संतुलन की आधारभूत तकनीक बन गई है. इसके अलावा, SRM में किए जा रहे डिज़ाइन और उत्पादन नवाचार—जैसे डिजिटल ट्विनिंग, रोबोटिक लाइनर अप्लिकेशन और हल्की, मजबूत संरचनाएँ—इस तकनीक को लंबी दूरी, उच्च गति और स्टील्थ संचालन के लिए उपयुक्त बनाते हैं. परिणामस्वरूप, SRM न केवल वर्तमान समय में बल्कि भविष्य की संभावित सैन्य आवश्यकताओं के लिहाज से भी एक अत्यंत महत्वपूर्ण और रणनीतिक तकनीक बन चुकी है.
एसआरएम का उल्लेख मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रेजीम (MTCR) की उपकरण, सॉफ़्टवेयर और प्रौद्योगिकी परिशिष्ट सूची में विस्तार से है. एसआरएम की भारी मांग को देखते हुए यह आवश्यक है कि MTCR की अनदेखी न हो, विशेषकर उन शक्तियों द्वारा जो अपने और अपने सैन्य सहयोगियों के लिए मिसाइल निर्माण तेज़ कर रही हैं.
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Dr. Chaitanya Giri is a Fellow at ORF’s Centre for Security, Strategy and Technology. His work focuses on India’s space ecosystem and its interlinkages with ...
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