जॉर्जिया में 2024 के चुनाव विरोधी प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की पानी की तोपों में कैमाइट (ब्रोमोबेंज़िल साइनाइड) जैसे रसायन के इस्तेमाल के आरोप लगे जिन्हें सरकार लगातार नकारती रही. अब अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग के बीच सवाल है- सच क्या है और यह विवाद इतना बड़ा क्यों बन गया? पढ़ें पूरा विश्लेषण.
पिछले दो वर्षों से जॉर्जिया में राष्ट्रीय चुनाव परिणामों के खिलाफ महत्वपूर्ण विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं. हाल ही में कुछ रिपोर्टों में, जिनमें ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (BBC) की रिपोर्ट भी शामिल है, दावा किया गया कि नवंबर–दिसंबर 2024 के प्रदर्शनों के दौरान जॉर्जियाई पुलिस द्वारा इस्तेमाल की गई पानी की तोपों में कैमाइट या ब्रोमोबेंज़िल साइनाइड, नामक रासायनिक पदार्थ मिला हुआ था. यह एक रासायनिक उत्तेजक (chemical irritant) है जिसे ऐतिहासिक रूप से आंसू गैस के रूप में इस्तेमाल किया गया था.
रिपोर्ट में इसके लक्षणों का भी उल्लेख किया गया, जिनमें त्वचा और फेफड़ों में जलन, खांसी और जलन की तीव्र अनुभूति शामिल है. कई लोगों का दावा था कि यह रसायन दंगों को तितर-बितर करने के लिए आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली गैसों, जैसे CS गैस, से अधिक शक्तिशाली था. इस दावे ने वैश्विक स्तर पर भारी ध्यान और जॉर्जियाई सरकार की आलोचना को जन्म दिया, क्योंकि कैमाइट वर्तमान रासायनिक सुरक्षा मानकों के तहत अत्यधिक खतरनाक माना जाता है और आधुनिक कानून प्रवर्तन में इसका उपयोग प्रथम विश्व युद्ध के बाद से नहीं किया गया है. विवाद तब और बढ़ गया जब जनवरी 2026 में सत्तारूढ़ पार्टी जॉर्जियाई ड्रीम ने आधिकारिक रूप से BBC के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई और डॉक्यूमेंट्री को वापस लेने तथा सार्वजनिक माफी की मांग की.
जॉर्जिया की स्टेट सिक्योरिटी सर्विस ने एक सार्वजनिक बयान में कहा कि आंतरिक मामलों के मंत्रालय ने कभी इसका उपयोग नहीं किया और केवल CS गैस का सहारा लिया गया. उन्होंने यह भी कहा कि इस्तेमाल की गई कोई भी सामग्री उन रासायनिक हथियारों की सूची में नहीं आती जिन्हें प्रतिबंधित किया गया है. विवाद तब और बढ़ गया जब जनवरी 2026 में सत्तारूढ़ पार्टी जॉर्जियाई ड्रीम ने आधिकारिक रूप से BBC के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई और डॉक्यूमेंट्री को वापस लेने तथा सार्वजनिक माफी की मांग की. जॉर्जियाई स्टेट सिक्योरिटी सर्विस ने स्थानीय कानूनों के तहत एक आपराधिक जांच भी शुरू की, जिसमें आधिकारिक शक्तियों के दुरुपयोग और किसी विदेशी संगठन की शत्रुतापूर्ण गतिविधियों में सहायता करने की संभावनाओं की जांच की जा रही है. उनका दावा है कि ऐसे आरोपों से राज्य की छवि को नुक़सान पहुँच सकता है.
कई लोगों का दावा था कि यह रसायन दंगों को तितर-बितर करने के लिए आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली गैसों, जैसे CS गैस, से अधिक शक्तिशाली था. इस दावे ने वैश्विक स्तर पर भारी ध्यान और जॉर्जियाई सरकार की आलोचना को जन्म दिया, क्योंकि कैमाइट वर्तमान रासायनिक सुरक्षा मानकों के तहत अत्यधिक खतरनाक माना जाता है
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस विवाद ने लगातार ध्यान आकर्षित किया है. दिसंबर 2025 में कथित कैमाइट उपयोग की रिपोर्ट सामने आने और जनवरी 2026 में औपचारिक शिकायत दर्ज होने के बाद यूरोपीय संघ ने इन रिपोर्टों की पारदर्शी और विश्वसनीय जांच की मांग की. यूरोपीय संघ ने कहा कि यदि कैमाइट के उपयोग की पुष्टि होती है, तो यह अस्वीकार्य होगा. संयुक्त राज्य अमेरिका हेलसिंकी आयोग, जो अमेरिकी सरकार की एक स्वतंत्र एजेंसी है और सुरक्षा तथा मानवाधिकारों पर ध्यान केंद्रित करती है, ने कांग्रेस और यूरोपीय अधिकारियों से आग्रह किया कि वे इन रिपोर्टों की तत्काल जांच करें और यदि आवश्यक हो तो प्रतिबंध लगाए जाएं.
मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी मांग की है मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने रासायनिक हथियार सम्मेलन के तहत स्वतंत्र जांच और जॉर्जिया को कानून-प्रवर्तन सामग्री की आपूर्ति रोकने की मांग की. BBC को जानकारी देने वाले गवाहों, विशेषज्ञों और डॉक्टरों को सुरक्षा देने के बजाय पुलिस जांच में शामिल किया गया.
नागरिकों के खिलाफ हथियार के रूप में इस्तेमाल किए जाने वाले विषैले रसायनों पर रासायनिक हथियार सम्मेलन के तहत प्रतिबंध है. इसी तरह पारंपरिक दंगा-नियंत्रण एजेंटों के उपयोग पर भी सख्त कानूनी और नैतिक सीमाएँ लागू होती हैं. यदि किसी प्रतिबंधित एजेंट के उपयोग की पुष्टि होती है, तो इससे अंतरराष्ट्रीय निकायों द्वारा औपचारिक जांच शुरू हो सकती है और ऐसे समझौतों के पक्षकार देशों द्वारा प्रतिबंध भी लगाए जा सकते हैं.
यूरोपीय संघ ने कहा कि यदि कैमाइट के उपयोग की पुष्टि होती है, तो यह अस्वीकार्य होगा. संयुक्त राज्य अमेरिका हेलसिंकी आयोग, जो अमेरिकी सरकार की एक स्वतंत्र एजेंसी है और सुरक्षा तथा मानवाधिकारों पर ध्यान केंद्रित करती है, ने कांग्रेस और यूरोपीय अधिकारियों से आग्रह किया कि वे इन रिपोर्टों की तत्काल जांच करें और यदि आवश्यक हो तो प्रतिबंध लगाए जाएं.
सरकार द्वारा किए गए कड़े खंडन और आलोचकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई, विपक्षी दलों और नागरिक समाज द्वारा पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग के विपरीत दिखाई देते हैं. रसायनों, यहां तक कि दंगा-नियंत्रण एजेंटों (RCAs) के उपयोग से भी गंभीर स्वास्थ्य प्रभाव पड़ सकते हैं. स्वतंत्र स्वास्थ्य सर्वेक्षणों में गंभीर स्वास्थ्य प्रतिक्रियाओं और लंबे समय तक बने रहने वाले स्वास्थ्य प्रभावों का उल्लेख किया गया है. यह मामला सिर्फ लोगों के स्वास्थ्य का नहीं, बल्कि जनता के भरोसे का भी है. रसायनों के इस्तेमाल को लेकर विवाद ने जॉर्जिया में राजनीति को और ज्यादा बांट दिया है. अगर सही जांच नहीं हुई, तो पुलिस और न्याय व्यवस्था पर लोगों का भरोसा और कम हो सकता है.
जॉर्जियाई सरकार ने पहले ही रासायनिक हथियारों के उपयोग के सभी आरोपों से इनकार कर दिया है. हालांकि, इससे मामला पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता. इन आरोपों की जांच होना आवश्यक है, जिसके लिए सरकार का सहयोग और स्वतंत्र जांच की अनुमति जरूरी है.
यह आवश्यक है कि रासायनिक हथियारों के निषेध के लिए संगठन (OPCW) जैसी तीसरी-पक्ष संस्थाएं इन आरोपों की शीघ्र जांच करें और पुष्टि या खंडन करें. यह न केवल प्रभावित लोगों के उपचार और सरकारी जवाबदेही के लिए जरूरी है, बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए भी महत्वपूर्ण है कि नागरिक अशांति के समय वैश्विक शासन में जनता का विश्वास कमजोर न पड़े.
इसके लिए जॉर्जियाई सरकार कुछ कदम उठा सकती है
भीड़ नियंत्रण के लिए उपयोग किए गए हर रासायनिक एजेंट, विशेषकर RCAs, की खरीद और तैनाती से संबंधित सभी डेटा का पूर्ण खुलासा करना चाहिए. इससे तीसरे पक्ष की संस्थाएं यह सुनिश्चित कर सकेंगी कि केवल CS जैसे दंगा-नियंत्रण एजेंट ही खरीदे गए हैं और किसी रासायनिक हथियार का भंडारण नहीं किया गया है. स्वास्थ्य प्रभावों के लिए स्वतंत्र विशेषज्ञों द्वारा तीसरे पक्ष की जांच सुनिश्चित करनी चाहिए. इससे रिपोर्टों की विश्वसनीयता बनी रहेगी और वैज्ञानिकों तथा स्वास्थ्य विशेषज्ञों को उनके प्रभावों का अध्ययन करने का अवसर मिलेगा. अंततः मानवाधिकार और रासायनिक हथियारों से संबंधित अंतरराष्ट्रीय संगठनों को इस प्रक्रिया में पर्यवेक्षक या समीक्षक के रूप में शामिल करना चाहिए. इस संदर्भ में रासायनिक हथियारों के निषेध के लिए संगठन (OPCW) को विशेषज्ञों की टीम गठित करनी चाहिए जो ऐसे आरोपों की समीक्षा कर सकें.
जॉर्जिया में प्रदर्शन कर रहे नागरिकों पर रासायनिक पदार्थ मिले पानी के तोपों के इस्तेमाल की रिपोर्टों ने एक गहरे विवाद को जन्म दिया है. एक ओर जॉर्जियाई सरकार सबूतों की मांग कर रही है, वहीं दूसरी ओर यदि आरोप सही साबित होते हैं तो मानवाधिकारों को लेकर वैश्विक चिंता भी सही है. इसलिए यह आवश्यक है कि रासायनिक हथियारों के निषेध के लिए संगठन (OPCW) जैसी तीसरी-पक्ष संस्थाएं इन आरोपों की शीघ्र जांच करें और पुष्टि या खंडन करें. यह न केवल प्रभावित लोगों के उपचार और सरकारी जवाबदेही के लिए जरूरी है, बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए भी महत्वपूर्ण है कि नागरिक अशांति के समय वैश्विक शासन में जनता का विश्वास कमजोर न पड़े.
श्राविष्ठा अजयकुमार सेंटर फॉर सिक्योरिटी, स्ट्रेटेजी एंड टेक्नोलॉजी में एसोसिएट फेलो हैं.
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Shravishtha Ajaykumar is an Associate Fellow at the Centre for Security, Strategy, and Technology. Her research areas include Chemical, Biological, Radiological, and Nuclear (CBRN) strategy ...
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