Author : Prithvi Gupta

Expert Speak Raisina Debates
Published on Aug 14, 2025 Updated 0 Hours ago

2025 में जिस तरह से चीन की बेल्ट एंड रोड पहल आगे बढ़ रही है, वो उसकी दोहरी रणनीति को प्रकट करती है. इससे पता चलता है कि बीजिंग एक ओर हरित-प्रौद्योगिकी आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित करना चाहता है, वहीं दूसरी ओर घरेलू रणनीतिक प्राथमिकताओं के मद्देनज़र सरकारी कंपनियों की अगुवाई वाली जीवाश्म ईंधन और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन से जुड़ी बड़ी परियोजनाओं को तवज्जो दे रहा है.

बीआरआई 2025 अभियान: आगे बढ़ते हुए पीछे लौटना

Image Source: Getty Images

चीन की बेल्ट एंड रोड पहल (BRI) को शुरू हुए बारह साल हो गए हैं. वर्ष 2023 में तीसरे बेल्ट एंड रोड फोरम (BRF) के बाद उम्मीद थी कि इस पहले को आगे बढ़ाने के लिए जो भी सुधार सुझाए गए हैं उन पर अमल किया जाएगा. यानी स्थिरता, निजी सेक्टर की भागीदारी को बढ़ावा, आर्थिक मुद्दों को तवज्जो देना और परियोजनाओं में ज़्यादा से ज़्यादा पारदर्शिता लाने जैसे क़दमों पर चला जाएगा. लेकिन 2025 की पहली छमाही में BRI को लेकर जो भी परियोजनाएं आगे बढ़ाई गई है और आर्थिक रूप से जो भी क़दम उठाए गए हैं, उनसे साफ संकेत मिलता है कि तीसरे BRF में सुझाए गए सुधारों को दरकिनार दिया गया है और अब पुराने ढर्रे पर ही चला जा रहा है. यानी 2025 की पहली छमाही के दौरान बीआरआई के तहत छोटी, हरित और ज़्यादा पारदर्शी परियोजनाओं को कार्यान्वित करने के बजाय व्यापक स्तर पर जीवाश्म ईंधन समझौते किए गए हैं एवं समझौतों के लिए तेल, गैस जैसे प्राकृतिक संसाधानों का भरपूर इस्तेमाल किया गया है, साथ ही खनन और औद्योगिक सेक्टरों में बड़े निवेशों को प्रमुखता दी गई है. इतना ही नहीं, बीआरएफ के सुझावों और सुधारों की बात तो बहुत की गई, लेकिन धरातल पर ऐसा कुछ भी दिखाई नहीं दिया और पहले की तरह ही बीआरआई परियोजनाओं को शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ा गया है.

इस लेख में 2023 में तीसरे बेल्ट एंड रोड फोरम में जो भी प्रस्ताव पारित किए गए थे, वर्ष 2023-24 में उनके मुताबिक़ क़दमों को आगे बढ़ाया गया है या नहीं, इसका भी विस्तार से आकलन किया गया है.

साल 2025 के पहले छह महीनों को दौरान बीआरआई के तहत इकोनॉमिक सेक्टर की परियोजनाओं और दूसरे देशों की इसमें भागीदारी का इस लेख में विस्तार से विश्लेषण किया गया है. इसके अलावा, यह भी बताया गया है कि इनका भू-आर्थिकी पर और रणनीतिक लिहाज़ से क्या असर पड़ा है. इतना ही नहीं, इस लेख में 2023 में तीसरे बेल्ट एंड रोड फोरम में जो भी प्रस्ताव पारित किए गए थे, वर्ष 2023-24 में उनके मुताबिक़ क़दमों को आगे बढ़ाया गया है या नहीं, इसका भी विस्तार से आकलन किया गया है. इसके अतिरिक्त, लेख में तीसरे बीआरएफ से पहले बीआरआई के तहत उठाए जाने वाले रणनीतिक क़दमों का भी आज के संदर्भ में विश्लेषण किया गया है.

इस वर्ष के मध्य तक बीआरआई की उपलब्धियां

बीआरआई के जरिए चीन की आर्थिक भागीदारी पर नज़र डालें तो इस वर्ष जनवरी और जुलाई के बीच यह 124 बिलियन अमेरिकी डॉलर (निर्माण से जुड़े समझौते और निवेश) तक पहुंच गई है. यानी यह 2024 में बीआरआई के तहत निर्माण अनुबंध और निवेश की कुल 122 बिलियन अमेरिकी डॉलर की चीनी आर्थिक भागीदारी को पार कर गई है. साल की पहली छमाही में ही चीन की इस अभूतपूर्व आर्थिक भागीदारी में तेल एवं गैस, हरित ऊर्जा, हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन टेक आपूर्ति श्रृंखला इंफ्रास्ट्रक्चर, मेटल्स एवं खनन और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सेक्टरों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है. 2025 में अब तक BRI के तहत जो समझौते और अनुबंध हुए हैं उनसे साफ संकेत मिलता है कि इसका दायरा काफ़ी व्यापक होता जा रहा है और नए क्षेत्र इसमें शामिल हो रहे हैं. इन छह महीनों के दौरान बीआरआई के अंतर्गत काम करने वाली चीन की निजी और सरकारी कंपनियों की दिलचस्पी अफ्रीका और मध्य एशिया में ख़ास तौर पर बढ़ी है. पिछले वर्षों में बीआरआई के तहत शुरू की गई परियोजनाओं को देखें तो 2013 से 2022 के बीच भी बीआरआई के तहत दक्षिण एशिया, अफ्रीका और दक्षिण पूर्व एशिया में काफ़ी निवेश किया गया था.

जिस प्रकार से बीआरआई का विस्तार हो रहा है और इसके पसंदीदा क्षेत्रों में बदलाव दिखाई दे रहा है, यह बताता है कि चीनी सरकार पारंपरिक और गैर-पारंपरिक दोनों ही प्रकार की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित करने के लिए तत्पर है और ज़ल्द से ज़ल्द हाई-टेक एवं ग्रीन टेक विनिर्माण आपूर्ति श्रृंखलाओं में चीनी हिस्सेदारी को अधिक से अधिक करना चाहती है. ज़ाहिर है कि बीआरआई के साझीदार मध्य एशियाई और अफ्रीकी देशों के पास ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधानों का अकूत भंडार मौज़ूद है, जिसका अब तक उपयोग नहीं किया गया है. इतना ही नहीं, ये देश राष्ट्रीय हितों को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक क्षेत्रों में चीनी निवेश पाना चाहते हैं. चीन की सरकारी और निजी कंपनियां इन देशों में विनिर्माण सुविधाओं के विकास, प्राकृतिक संसाधनों के दोहन से जुड़ी परियोजनाओं और औद्योगिक केंद्रों में जमकर निवेश कर रही हैं. इस वजह से कच्चे माल के दोहन और प्रसंस्करण से लेकर अंतिम उत्पादन तक पूरी आपूर्ति श्रृंखला में बीजिंग का दबदबा लगातार बढ़ रहा है.

बीआरआई के तहत वर्ष 2025 में ऊर्जा क्षेत्र की आर्थिक भागीदारी सबसे अधिक रही है और जुलाई महीने तक एनर्जी सेक्टर में 44 अरब डॉलर के निवेश समझौते हुए हैं. हालांकि, बीआरआई के तहत ऊर्जा सेक्टर में इस साल अब तक सबसे अधिक निवेश ग्रीन एनर्जी सेक्टर में हुआ है, बावज़ूद इसके ऊर्जा के पारंपरिक स्रोत यानी जीवाश्म ईंधन से जुड़े समझौतों का भी काफ़ी बोलबाला रहा है. बीआरआई के तहत इस साल किए गए प्रमुख समझौतों में श्रीलंका में सिनोपेक की 3.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर की रिफाइनरी की स्थापना और नाइजीरिया में 20 बिलियन अमेरिकी डॉलर के गैस-प्रसंस्करण कॉम्प्लेक्स की स्थापना से जुड़ा समझौता भी शामिल है. इन समझौतों से साफ ज़ाहिर होता है कि बीआरआई का रुझान न केवल पारंपरिक एनर्जी सेक्टर की ओर लौट रहा है, बल्कि सरकारी भागीदारी और बड़ी परियोजनाओं की स्थापना का सिलसिला भी दोबारा शुरू हो गया है. इस दौरान ग्रीन एनर्जी सेक्टर से जुड़े समझौतों में भी मामूली वृद्धि दर्ज़ की गई, जिसमें विंड, सोलर और हाइड्रो पावर परियोजनाओं (सामूहिक क्षमता 11.9 गीगावाट) में 9.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश किया गया है. कोयले से जुड़ी परियोजनाओं को भी प्रमुखता मिली है और खनन संबंधी अनुबंधों में 1.58 बिलियन अमेरिकी डॉलर की राशि हासिल हुई है.

बीआरआई की आर्थिक भागीदारी के प्रमुख सेक्टर (जनवरी-जुलाई 2025)

 

सेक्टर

मूल्य (बिलियन अमेरिका डॉलर में)

गैस

23.3

तेल

6.9

ग्रीन एनर्जी (RE)

9.7

कोयला

1.58

टेक्नोलॉजी एवं विनिर्माण

23.2

मेटल्स एवं माइनिंग

24.9

ट्रांसपोर्ट एवं कनेक्टिविटी

15.0

 

 

कुल सेक्टर: 7

कुल राशि: 104.58

 

स्रोत: चाइना बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) इन्वेस्टमेंट रिपोर्ट 2025 एच1

हालांकि, जिस तरह से बीआरआई के अंतर्गत चीन ने टेक्नोलॉजी, विनिर्माण और मेटल्स के सेक्टरों में अपना निवेश बढ़ाया है, उससे साफ प्रतीत होता है कि चीन गंभीरता के साथ ग्रीन एनर्जी सप्लाई चेन में अपना प्रभुत्व बढ़ाने में जुटा है. ज़ाहिर है कि चीन ने इलेक्ट्रिक वाहनों के उत्पादन, बैटरी उत्पादन और सोलर से जुड़े उपकरणों के निर्माण पर ध्यान केंद्रित करते हुए तकनीक़ और विनिर्माण सेक्टर में निवेश को क़रीब दोगुना कर दिया है और 23.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश किया है. हरित ऊर्जा के क्षेत्र में किए गए प्रमुख समझौतों में CALB द्वारा पुर्तगाल में 2.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर के बैटरी प्लांट की स्थापना और मिस्र में शिनयी के 0.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर के सोलर ग्लास संयंत्र की स्थापना से जुड़ा समझौता शामिल है. चीन की धातु और खनन क्षेत्र में भागीदारी बढ़कर 24.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गई है, जिसमें कज़ाकिस्तान में एल्युमिनियम और कॉपर से जुड़ी परियोजनाओं के लिए 19.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश किया गया है. इसमें से क़रीब 60 प्रतिशत फंडिंग कच्चे माल यानी प्राकृतिक संसाधनों के दोहन पर केंद्रित थी. इससे ग्रीन टेक्नोलॉजी पर आधारित सेक्टरों को फायदा हुआ है. अगर चीन की बीआरआई के तहत ट्रांसपोर्ट सेक्टर में आर्थिक भागीदारी की बात की जाए, तो यह 15 बिलियन अमेरिकी डॉलर पर स्थिर रही है. इसकी वजह यह थी कि रणनीतिक रूप से चीन का फोकस पारंपरिक बुनियादी ढांचे से हटकर आपूर्ति श्रृंखला नियंत्रण पर केंद्रित हो गया है.

बीआरआई में चीन की रणनीतिक वापसी

वर्ष 2025 की जुलाई तक चीन की बीआरआई आर्थिक भागीदारी के जो आंकड़े हैं, वो साफ बताते हैं कि चीन अब पुराने ढर्रे पर लौटने लगा है और तेज़ी के साथ अपने दायरे को बढ़ा रहा है. इतना ही नहीं पश्चिमी देशों द्वारा अक्सर जो दावा किया जाता है कि चीन कमज़ोर हो गया है, ये आंकड़े उन दावों को भी झुठलाने का काम करते हैं. इस आंकड़ों से यह भी स्पष्ट हो जाता है कि चीन ने इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण की अपनी कूटनीति को दोगुनी गति से आगे बढ़ाया है और ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, विनिर्माण, धातु एवं खनन क्षेत्रों में भागीदारी को सशक्त किया है. 2025 में बीआरआई के अंतर्गत चीन की आर्थिक भागीदारी और परियोजनाओं में किए गए निवेश से यह भी साफ हो जाता है कि 2023 में तीसरे बेल्ट एंड रोड फोरम में जिन सुधारों का प्रस्ताव किया गया था, उन्हें अब पूरी तरह से अनदेखा कर दिया गया है. ज़ाहिर है कि तीसरे बीआरएफ के दौरान बीजिंग ने सुधारों को संस्थागत रूप देते हुए हरित और डिजिटल परियोजनाओं को बढ़ावा देने पर ज़ोर दिया था. यानी ऐसी परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने का संकल्प लिया गया था, जो छोटी और सुव्यवस्थित होंगी, साथ ही आर्थिक रूप से टिकाऊ होंगी. फोरम के बाद जारी किए गए अध्यक्ष के वक्तव्य में भागीदार देशों के लिए ऋण स्थिरता और कर्ज के पुनर्गठन, निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ाने और बहुपक्षीय संस्थानों के साथ मज़बूत सहयोग स्थापित करने जैसी बातों पर भी ख़ासा ज़ोर दिया गया था.

देखा जाए तो वर्ष 2023 और 2024 के दौरान बीजिंग ने तीसरी बीआरएफ में लिए गए सुधारों से जुड़े संकल्पों में से कुछ पर अमल भी किया. इसी के चलते ग्रीन-टेक और ऊर्जा से संबंधित निवेशों में अभूतपूर्व बढ़ोतरी भी दर्ज़ की गई. 

देखा जाए तो वर्ष 2023 और 2024 के दौरान बीजिंग ने तीसरी बीआरएफ में लिए गए सुधारों से जुड़े संकल्पों में से कुछ पर अमल भी किया. इसी के चलते ग्रीन-टेक और ऊर्जा से संबंधित निवेशों में अभूतपूर्व बढ़ोतरी भी दर्ज़ की गई. वर्ष 2023 के आंकड़ों पर नज़र डालें तो बीआरआई के तहत नवीकरणीय ऊर्जा और ट्रांसमिशन से जुड़ी परियोजनाओं में रिकॉर्ड 7.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक का निवेश किया गया, वहीं इलेक्ट्रिक गाड़ियों और बैटरी आपूर्ति श्रृंखलाओं में भी निवेश बढ़कर 8 बिलियन अमेरिकी डॉलर से ज़्यादा का हो गया. यह सिलसिला वर्ष 2024 में भी चलता रहा और ग्रीन एनर्जी सेक्टर में निवेश बढ़कर 11.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर पहुंच गया. इससे साफ पता चलता है कि उस दौरान चीन क्लीन-टेक यानी स्वच्छ ऊर्जा तकनीक़ के क्षेत्र में ख़ासी दिलचस्पी ले रहा था और ग्रीन-टेक से जुड़े प्राकृतिक संसाधनों के दोहन से उत्पादन तक पर फोकस कर रहा था. बीआरएफ के सुधारों के अनुकूल इस दौरान बीआरआई से जुड़ी परियोजनाओं में निजी सेक्टर की भूमिका में भी ख़ासी वृद्धि दर्ज़ की गई. जहां 2023 में निजी कंपनियों ने बीआरआई में काम करने वाली चीनी सरकार की कंपनियों को पीछ़े छोड़ते हुए आर्थिक भागीदारी में 52 प्रतिशत हिस्सेदारी पर कब्ज़ा कर लिया, वहीं वर्ष 2024 में भी अपनी 48 प्रतिशत हिस्सेदारी को बरक़रार रखा.

तीसरे बीआरएफ में सुझाए गए सुधारों के अनुरूप बीआरआई के अंतर्गत चीन ने कई क़दम उठाए और उसका लाभ भी हुआ, लेकिन 2023 और 2025 के बीच चीन की पारंपरिक बीआरआई गतिविधियों की ओर वापसी ने इन लाभों पर पानी फेर दिया. जैसे कि बीआरआई के तहत वर्ष 2023 में तेल और गैस से जुड़े समझौते बढ़कर 11.75 बिलियन अमेरिका डॉलर तक पहुंच गए, जो कि 2024 में बढ़कर 24.3 बिलियन अमेरिका डॉलर के हो गए. चीन की सरकारी कंपनियों द्वारा जीवाश्म ईंधन में किए गए इस भारी-भरकम निवेश ने हरित ऊर्जा सेक्टर में किए गए प्रयासों को पलीता लगने का काम किया. इसके अलावा, रणनीतिक सेक्टर में बड़े समझौतों में भी इज़ाफा हुआ और वर्ष 2023 में 12.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर, जबकि वर्ष 2024 में 21.25 बिलियन अमेरिका डॉलर की डील की गईं. इतना ही नहीं, चीन की सरकारी स्वामित्व वाली कंपनियों का दबदबा भी 2024 में दोबारा से स्थापित हो गया और इसने निजी सेक्टर को बढ़ावा देने से मिले लाभ को समाप्त कर दिया. दोनों वर्षों के दौरान निर्माण सेक्टर की 95 प्रतिशत परियोजनाओं में सरकारी कंपनियों का वर्चस्व रहा. इसके अलावा, इस दौरान न तो ऋण स्थिरता के लिहाज़ से कुछ ख़ास किया गया और न ही कर्ज़ माफ़ी या फिर कर्ज़ पुनर्गठन की दिशा में कोई क़दम उठाए गए. कुल मिलाकर 2025 की शुरुआत तक चीन की महत्वाकांक्षी बीआरआई पहल में कहीं न कहीं शुरुआती मॉडल को ही अपनाया जाने लगा. यानी बीआरआई के तहत किए जाने वाले निवेश और समझौतों में तेल, गैस, कोयला और महत्वपूर्ण खनिजों के व्यापक स्तर पर दोहन और औद्योगिक निर्माण परियोजनाएं शामिल हो गई थीं. इसके अलावा, 2025 आते-आते बीआरआई की ये परियोजनाएं तेज़ी से मध्य एशिया और अफ्रीका की तरफ केंद्रित होने लगीं. इतना ही नहीं, इन परियोजनाओं में चीन की सरकारी बैंकों द्वारा वित्तपोषित सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (SOEs) का दबदबा स्थापित हो गया. इस सभी घटनाक्रमों ने बीआरआई के लिहाज़ से किए गए बीआरएफ को संकल्पों को कुंद कर दिया और कहीं न कहीं चीन की इस पहल की विश्वसनीयता को भी झटका देने का काम किया. 

बीआरआई के तौर-तरीक़ों में होने वाला यह परिवर्तन इस बात को ज़ाहिर करता है कि किस प्रकार से चीन की आर्थिक और विदेश नीतियों की रणनीतिक ज़रूरतों के हिसाब से इस पहल में बदलाव किया जाता है, या कहा जाए कि चीन की इस महत्वपूर्ण पहल के संचालन में उसकी आर्थिक और विदेश नीतियां हावी होती हैं. वर्ष 2025 में बीआरआई में जो भी बदलाव किए गए हैं, वे कहीं न कहीं बीजिंग की घरेलू आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं के मुताबिक़ हैं. जैसे कि चीन फिलहाल अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, साथ ही उभरते सेक्टरों में देश की अत्यधिक क्षमता का संतुलन स्थापित कर रहा है, अपस्ट्रीम ग्रीन-टेक और हरित ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं तक पहुंच बनाने में जुटा है. इसके अलावा, चीन इन दिनों बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य, बढ़ते वैश्विक टकराव और व्यापक हो रही व्यापार अस्थिरता की वजह से लगातार करवटें ले रही अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था में अपने अस्तित्व को बचाने में लगा है. इसके लिए चीन पुराने व्यापार मार्गों पर निर्भरता कम करने के लिए वैकल्पिक व्यापार मार्गों को बनाने में जुटा है. बीआरआई के तहत चीन ने जिस तरह से वर्ष 2023 और 2024 में कुछ हद तक सुधार का अभियान चलाया, लेकिन फिर 2025 आते-आते जिस प्रकार से रणनीतिक यू-टर्न लेते हुए अपने पुराने ढर्रे पर वापस आ गया, वो दिखाता है कि चीन की इस पहल ने हमेशा बीजिंग की घरेलू आवश्यकताओं, रणनीतिक प्राथमिकताओं और आर्थिक नीतियों को आगे ले जाने के एक सशक्त माध्यम के तौर पर काम किया है. कहने का मतलब है कि चीन की बेल्ट एंड रोड पहल ने हमेशा से उसकी आर्थिक प्रगति को केंद्र में रखा है और उसी लिहाज़ से पूरी दुनिया में विस्तार और सहयोग की रणनीति बनाकर उस पर अमल किया है.

निष्कर्ष

चीन की बेल्ट एंड रोड पहल का यह दूसरा दशक चल रहा है. पिछले वर्षों में बीआरआई के तहत जो भी परियोजनाएं संचालित की गई है, उनसे साफ हो जाता है कि इन सबके पीछे बीजिंग की रणनीतिक ज़रूरतों को पूरा करना मुख्य मकसद होता है और इसीलिए काफ़ी सोच-समझकर नीतियां बनाई जाती हैं और क़दम उठाए जाते हैं. साथ ही यह भी पता चलता है कि आगे भी जो बदलाव किए जाएंगे उनके केंद्र में भी चीन की घरेलू आवश्यकताएं ही होंगी. 2025 में बीआरआई के अंतर्गत जिस प्रकार से परियोजनाओं में चीनी सरकार की अगुवाई वाली कंपनियों का दबदबा बढ़ा है और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन से जुड़ी परियोजनाओं की तरफ वापसी की गई है, वो साफ दिखाता है कि चीन इस पहल के जरिए न केवल अपनी डांवाडोल होती अर्थव्यवस्था को सशक्त करना चाहता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर अपने प्रभुत्व को भी स्थापित करना चाहता है. बावज़ूद इसके, जिस तरह से चीन बीआरआई के जरिए हरित-प्रौद्योगिकी और उन्नत विनिर्माण के क्षेत्र में अपनी दिलचस्पी और मौज़ूदगी को बढ़ा रहा है, उससे यह भी पता चलता है कि वह पारंपरिक तौर-तरीक़ों के साथ-साथ भविष्य के लिए ज़रूरी आपूर्ति श्रृंखलाओं पर भी अपना वर्चस्व क़ायम करने की दिशा में अग्रसर है. चीन का यही दोहरा नज़रिया अब उसकी महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड पहल का एक नया मापदंड बन सकता है. यानी भविष्य में भी चीन अपनी इस पहल के जरिए जहां अपनी घरेलू ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक विस्तार की ज़रूरतों को पूरा करेगा, वहीं ग्रीन-टेक जैसे उभरते सेक्टरों पर भी समान रूप से निवेश को तवज्जो देगा. यह कहना भी उचित होगा कि बीआरआई न सिर्फ़ वैश्विक स्तर पर बढ़ती व्यापार उथल-पुथल एवं भू-राजनीतिक उठापटक के बीच बीजिंग को मज़बूती से खड़ा करने का काम करता है, बल्कि उसे पूरी दुनिया के सामने अपनी आर्थिक ताक़त दिखाने का हौसला भी है. इतना ही नहीं, आने वाले दिनों में भी चीन की बीआरआई पहल लगातार अलग-अलग गुटों में बंट रही वैश्विक राजनीति एवं आर्थिक अराजकता से भरे माहौल में बीजिंग को मज़बूती देगी, साथ ही उसकी आर्थिक एवं रणनीतिक प्राथमिकताओं को पूरा करने के अहम हथियार के रूप में भी काम करेगी. निसंदेह तौर पर चीन का यह दृष्टिकोण उसकी घरेलू ज़रूरतों और राष्ट्रीय उद्देश्यों को पूरा करने में कारगर साबित हो सकता है, लेकिन इसमें वैश्विक स्तर पर भरोसेमंद विकास साझेदार देश के रूप में चीन की विश्वसनीयता को झटका लगने का भी ख़तरा है.


पृथ्वी गुप्ता ऑब्ज़र्वर रिसर्च फाउंडेशन के स्ट्रैटेजिक स्टडीज़ प्रोग्राम में जूनियर फेलो हैं.

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