Author : Shivam Shekhawat

Expert Speak Raisina Debates
Published on Mar 11, 2026 Updated 4 Days ago

नेपाल की जनता ने दशकों से सत्ता में रही पुरानी पार्टियों से मोहभंग दिखाते हुए नई पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) को ऐतिहासिक जनादेश दिया है. आख़िर इस जीत के पीछे क्या वजहें रहीं और भारत-नेपाल संबंधों पर इसका क्या असर पड़ सकता है- पढ़ें पूरा विश्लेषण.

नेपाल में नीली लहर: कितना अहम रहा युवा वोटर?

नेपाल में अचानक हुए संसदीय चुनावों में निर्णायक नतीजे आए हैं. राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के चुनाव चिन्ह घंटी को लोगों ने हाथों-हाथ लिया और नेपाल की सत्ता के पुराने दिग्गजों को शर्मनाक हार मिली है. ये लेख लिखे जाने तक RSP ने फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट (FPTP) प्रणाली के तहत प्रत्यक्ष मतदान में 125 सीटें और आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत 58 सीटें जीती हैं. RSP को 52 प्रतिशत वोट मिले हैं और 275 सदस्यों वाली प्रतिनिधि सभा में उसे लगभग दो-तिहाई बहुमत मिला है. गठबंधन की उलझनों में फंसे और एक-दूसरे को लाभ पहुंचाने वाले गठबंधनों से ग्रस्त देश में इस ज़ोरदार जनादेश को एक स्वागत योग्य बदलाव के रूप में देखा जा रहा है. 

नेपाल में नीली लहर

2022 में हुए पिछले आम चुनावों (जो कि उसी साल गठित RSP का पहला चुनाव भी था) की तुलना में इस चुनाव में RSP की जीत यथास्थिति से मतदाताओं के मोहभंग का संकेत है. 2022 में RSP को 20 सीटों पर जीत मिली थी. ये उस समय के हिसाब से अच्छा प्रदर्शन था क्योंकि नेपाल की राजनीति पर स्थापित पार्टियों की मज़बूत पकड़ थी और RSP चुनाव मैदान में बिल्कुल नई थी. इस साल जेन ज़ी प्रदर्शनों के बाद सत्ता विरोधी भावनाओं और काठमांडू के पूर्व मेयर बालेन शाह (जो प्रधानमंत्री बनने वाले हैं) के बढ़ते समर्थन के दम पर RSP ने अपना चुनावी प्रदर्शन काफी हद तक अच्छा किया है. पार्टी दो-तिहाई बहुमत के करीब है. ये ऐसा कीर्तिमान है जो 1959 में नेपाल के पहले लोकतांत्रिक चुनाव के समय से नहीं बना था. उसको सभी प्रांतों में सफलता मिली है. करनाली (जहां नेपाली कांग्रेस को ज़्यादा सीटें मिली हैं) को छोड़ सभी छह प्रांतों में RSP को ज़्यादा सीटें मिली हैं. सीटों के मामले में सबसे बड़े बागमती प्रांत में पार्टी ने 33 में से 31 सीटों पर जीत हासिल की. 

RSP को 52 प्रतिशत वोट मिले हैं और 275 सदस्यों वाली प्रतिनिधि सभा में उसे लगभग दो-तिहाई बहुमत मिला है. गठबंधन की उलझनों में फंसे और एक-दूसरे को लाभ पहुंचाने वाले गठबंधनों से ग्रस्त देश में इस ज़ोरदार जनादेश को एक स्वागत योग्य बदलाव के रूप में देखा जा रहा है. 

प्रमुख राजनीतिक दलों को मिली सीटें

पार्टी 

2026 चुनाव (प्रत्यक्ष) 

2026 चुनाव (आनुपातिक) 

कुल

RSP

125

58

183

NC

18

19

37

CPN-UML

9

16

25

NCP

8

9

17

SSP

3

4

7

RPP

1

0

1

निर्दलीय

1

-

1

स्रोत: काठमांडू पोस्ट के चुनाव पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों से संकलित

एफपीटीपी के माध्यम से प्रांतवार सीट बंटवारा

The Bell Tolls For Nepal S Old Order Making Sense Of The Rsp S Victory

Source: Data secured from The Kathmandu Post’s Election Portal

पिछले छह दशकों में नेपाल की राजनीति की दिशा तय करने वाले तीन नेताओं (CPN-UML के केपी शर्मा ओली, नेपाली कांग्रेस के शेर बहादुर देउबा और इस चुनाव में NCP के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले CPN-MC के पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’) में से केवल प्रचंड ही अपनी सीट बचा पाए. ओली के गढ़ झापा-5 में बालेन शाह लगभग 50,000 वोट से चुनाव जीते जो देश की राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ है. मधेश की कई पार्टियों को निर्णायक हार मिली और उनके बड़े नेता अपनी सीट बचाने में नाकाम रहे.

परिवर्तन को संस्थागत बनाना

8 मार्च को उस आयोग ने अंतरिम प्रधानमंत्री को अपनी रिपोर्ट सौंपी जिसे जेन ज़ी प्रदर्शनों के बाद 8-9 सितंबर की घटनाओं की छानबीन करने और हत्या एवं आगजनी के लिए ज़िम्मेदार लोगों की पहचान करके उन्हें सज़ा देने का काम सौंपा गया था. सफलतापूर्वक चुनाव कराना और आयोग की रिपोर्ट सौंपना नेपाल के लोगों के लिए संतोष का क्षण है जो सितंबर 2025 से ही तनावग्रस्त हैं. 

सरकार के द्वारा हिंसक कार्रवाई में प्रदर्शनकारियों के मारे जाने के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री ओली के इस्तीफे के समय से ही इस बात की आशंका जताई जा रही थी कि नेपाल अस्थिरता की तरफ बढ़ रहा है. लेकिन उसके बाद का घटनाक्रम नेपाल के संस्थानों की परिपक्वता और इसमें शामिल लोगों की ज़िम्मेदारी की भावना को दिखाता है. 

कई विश्लेषणों में इस नतीजे को नेपाल की राजनीति में एक पीढ़ीगत बदलाव के रूप में सही ढंग से दिखाया गया है. चुनाव में जीतने वाले युवा उम्मीदवारों की संख्या में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई. 40 साल से कम उम्र के जीतने वाले उम्मीदवारों का हिस्सा पिछले चुनाव के 11 प्रतिशत की तुलना में बढ़कर लगभग 38 प्रतिशत तक पहुंच गया. इस बदलाव का नेतृत्व RSP ने किया जिसका हिस्सा इस श्रेणी में जीतने वाले 61 उम्मीदवारों में से 52 रहा. 41-50 उम्र समूह के जीतने वाले उम्मीदवारों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई. 159 सीटों के नतीजे के आधार पर इस श्रेणी के 55 विजेता उम्मीदवारों में से 41 RSP के थे. 

अंतरिम प्रधानमंत्री के साथ टेलीफोन पर बातचीत करने वाला भी भारत पहला देश था और सफल चुनाव कराने के लिए उसने साजो-सामान की मदद प्रदान की. भारतीय प्रधानमंत्री के ट्वीट पर अपनी प्रतिक्रिया में RSP अध्यक्ष के द्वारा ‘विकास की कूटनीति’ पर ध्यान देना ये संकेत देता है कि पार्टी द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाना चाहती है.

घोषणापत्र से पहले जारी RSP के नागरिक अनुबंध में पांच विषयों पर ध्यान केंद्रित किया गया- सुशासन; मध्यम वर्ग का विस्तार; प्रति व्यक्ति आय 3,000 अमेरिकी डॉलर तक बढ़ाकर और 7 प्रतिशत की विकास दर हासिल करके देश के भीतर रोज़गार के अवसरों का निर्माण; कनेक्टिविटी का विकास और प्रवासी नागरिकों के साथ जुड़ाव. 2022 के चुनावों से पहले इसकी शुरुआती लोकप्रियता भ्रष्टाचार से निपटने पर इसके ध्यान की वजह से थी. ये एक ऐसा मुद्दा था जिस पर इसने इस साल भी ज़ोर दिया. हालांकि इसकी व्यावहारिकता को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं. 

नेपाल के नागरिकों के लिए ये चुनाव पुरानी पार्टियों द्वारा अपने वादों को पूरा करने में नाकामी की निंदा करने के साथ-साथ बालेन शाह और रबि लामिछाने के नेतृत्व वाले RSP की परिवर्तन लाने की क्षमता के बारे में अपेक्षाओं की अभिव्यक्ति भी था. वैसे तो RSP के घोषणापत्र में जो नीतिगत प्राथमिकताएं बताई गई हैं वो उसके विरोधियों से पूरी तरह अलग नहीं थीं, फिर भी ज़बरदस्त वोट शेयर हासिल करने में उसकी सफलता का मुख्य कारण पुराने नेतृत्व से जनता की नाराज़गी थी. RSP के लिए ये जनादेश महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी के साथ आया है क्योंकि कम समय में उसके द्वारा उठाए गए कदम भविष्य में उसके द्वारा अपनाई जाने वाली दिशा का संकेत देंगे. 

विकास का एक नया एजेंडा? 

9 मार्च को भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ऐसे विदेशी नेता बने जिन्होंने रबि लामिछाने और बालेंद्र शाह के साथ टेलीफोन पर बातचीत की. सितंबर 2025 में रातों-रात के राजनीतिक घटनाक्रम के बाद भारत ने नेपाल की शांति और स्थिरता को लेकर प्रतिबद्धता और सत्ता संभालने वाले किसी भी नए प्रशासन के साथ जुड़ने की अपनी तत्परता व्यक्त की है. अंतरिम प्रधानमंत्री के साथ टेलीफोन पर बातचीत करने वाला भी भारत पहला देश था और सफल चुनाव कराने के लिए उसने साजो-सामान की मदद प्रदान की. भारतीय प्रधानमंत्री के ट्वीट पर अपनी प्रतिक्रिया में RSP अध्यक्ष के द्वारा ‘विकास की कूटनीति’ पर ध्यान देना ये संकेत देता है कि पार्टी द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाना चाहती है. 

नया राजनीतिक प्रशासन अपने दो प्रमुख पड़ोसियों (भारत और चीन) के बीच नेपाल की संतुलन वाली कूटनीति को किस हद तक बदलने का प्रयास करेगी, ये आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा. सत्ता में बदलाव और सत्ताधारी पार्टी के द्वारा शासन करने के इरादे पर सीमित स्पष्टता की वजह से अटकलबाजी के लिए बहुत कुछ खुला रह जाता है. लोकतांत्रिक व्यवस्था में गठबंधन सरकारों से जुड़े दबावों की अनुपस्थिति के अपने फायदे और नुकसान हैं. अब ये समय ही बताएगा कि RSP इन मजबूरियों के बिना सरकार चलाने का कौन सा तरीका चुनती है. 


शिवम शेखावत ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के स्ट्रेटेजिक स्टडीज प्रोग्राम में जूनियर फेलो हैं.

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