2026 में रूस-यूक्रेन युद्ध पूरी तरह समाप्त होने के बजाय एक नाज़ुक युद्धविराम या ‘फ्रोजन कॉन्फ्लिक्ट’ की स्थिति में प्रवेश कर सकता है क्योंकि मॉस्को की कठोर शर्तें और कीव की ठोस सुरक्षा गारंटी की मांगें आमने-सामने खड़ी हैं. जानें क्यों दोनों पक्ष अपने-अपने रणनीतिक हितों से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं.
यह वर्ष रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए निर्णायक साबित हो सकता है. अपने दूसरे कार्यकाल के लिए कार्यभार संभालने के बाद से, संयुक्त राज्य अमेरिका (US) के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शांति स्थापित करने के लिए महत्वपूर्ण राजनयिक प्रयास किए हैं. हालाँकि, संघर्ष की जटिलता को कम आंकना-जिसे उन्होंने ‘24 घंटों’ के भीतर हल करने की उम्मीद की थी-अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए बार-बार निराशा का कारण बना है. प्रक्रिया को तेज करने के ट्रंप के दबाव के बीच रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए बातचीत तेज हुई है, लेकिन शांति की शर्तों पर गहरे मतभेदों के कारण यह सीमित बनी हुई है.
पिछले एक साल के घटनाक्रमों ने दिखाया है कि यूक्रेन को तेजी से रियायतें देने के लिए मजबूर करने के ट्रंप प्रशासन के प्रयास, जिन्हें शांति के लिए एक 'यथार्थवादी' दृष्टिकोण के रूप में पेश किया गया था, परिणाम देने में विफल रहे. इन पहलों को यूक्रेन और व्यक्तिगत रूप से राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की के प्रतिरोध का सामना करना पड़ा, जबकि क्रेमलिन में इन्हें रूस के अनुकूल अधिकतम शर्तों के लिए दबाव डालने के अवसर के रूप में देखा गया. मॉस्को ने औपचारिक रूप से बातचीत के जरिए समाधान के विचार को खारिज नहीं किया है और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ जुड़ाव जारी रखा है; हालाँकि, इसका रुख समझौते की इच्छा का संकेत नहीं देता है. पिछले दिसंबर में अपनी साल के अंत की टिप्पणी में, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा था कि, रूस की व्याख्या में, शांतिपूर्ण तरीकों से संघर्ष को समाप्त करना 2024 में उनके द्वारा बताई गई शर्तों के कार्यान्वयन पर निर्भर करता है. यदि इन शर्तों को स्वीकार नहीं किया जाता है, तो क्रेमलिन अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए सैन्य अभियान जारी रखने की अपनी तत्परता का संकेत देता है. रूस के रणनीतिक तर्क में, शांति की संभावना आपसी रियायतों के बजाय उसकी पूर्व निर्धारित मांगों के अनुपालन पर निर्भर करती है.
यूक्रेन और व्यक्तिगत रूप से राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की के प्रतिरोध का सामना करना पड़ा, जबकि क्रेमलिन में इन्हें रूस के अनुकूल अधिकतम शर्तों के लिए दबाव डालने के अवसर के रूप में देखा गया.
रूस ने संघर्ष को वर्तमान संपर्क रेखा पर रोकने या तनाव कम करने की दिशा में एक प्रारंभिक, सीमित कदम के रूप में ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमलों को बंद करने के प्रस्तावों को खारिज कर दिया है. इसके बजाय, रूसी सेना यूक्रेन के ऊर्जा और गैस बुनियादी ढांचे को जानबूझकर निशाना बनाते हुए मोर्चे पर धीरे-धीरे आगे बढ़ना जारी रखे हुए है. इन कार्रवाइयों का उद्देश्य नागरिक जीवन को बाधित करना है, विशेष रूप से सर्दियों के दौरान. इस दृष्टिकोण के माध्यम से, मॉस्को बातचीत की प्रक्रिया में अधिक लचीलापन लाने के लिए यूक्रेनी अधिकारियों पर अधिक घरेलू दबाव बनाने की कोशिश करता दिख रहा है.
कीव के दृष्टिकोण से, रूस की शर्तें अस्वीकार्य हैं. वे मांग करते हैं कि यूक्रेनी सेना चार क्षेत्रों - डोनेट्स्क, लुहान्स्क, खेरसॉन और ज़ापोरिज्जिया से पूरी तरह से पीछे हट जाए, जो वर्तमान में यूक्रेन के नियंत्रण में हैं. रूस की शर्तों में कब्जे वाले क्षेत्रों को मान्यता और यूक्रेनी सेना में कटौती शामिल है, जिसे कीव समझौते के बजाय आत्मसमर्पण मानता है.
हाल के महीनों में, ट्रंप प्रशासन ने अधिक मुखर कूटनीतिक दृष्टिकोण अपनाते हुए 28-सूत्रीय शांति योजना का प्रस्ताव रखा है. यह योजना रूस और यूक्रेन के लिए व्हाइट हाउस के दूत स्टीव विटकॉफ द्वारा रूस के प्रतिनिधि किरिल दिमित्रीव के समन्वय से विकसित की गई थी. यह योजना काफी हद तक रूसी हितों को दर्शाती थी और यूक्रेनी समाज के भीतर इसे महत्वपूर्ण विरोध का सामना करना पड़ा. पिछले दिसंबर में मियामी में राष्ट्रपति जेलेंस्की और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच हुई बातचीत के दौरान, यूक्रेनी पक्ष सबसे स्पष्ट रूप से रूस-समर्थक प्रावधानों को हटाने में सफल रहा, जिससे मूल 28-सूत्रीय योजना को 20-सूत्रीय ढांचे में संशोधित किया गया.
हालिया सर्वेक्षणों से पता चलता है कि 69 प्रतिशत यूक्रेनी ऐसी शांति योजना का समर्थन करेंगे जो वर्तमान फ्रंट लाइन को फ्रीज करती हो, बशर्ते इसमें सुरक्षा गारंटी शामिल हो और कब्जे वाले क्षेत्रों की औपचारिक मान्यता से बचा जाए.
साथ ही, यूक्रेन द्वारा क्षेत्रीय रियायतों या यूरोप के सबसे बड़े परमाणु ऊर्जा केंद्र- ज़ापोरिज्जिया परमाणु ऊर्जा संयंत्र-पर नियंत्रण से संबंधित प्रमुख मुद्दों पर कोई समझौता नहीं हो सका, जो अभी भी रूसी कब्जे में है. अमेरिका द्वारा प्रस्तावित एक समझौते के तहत, इस संयंत्र का प्रबंधन रूस, यूक्रेन और संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा संयुक्त रूप से किया जाएगा. डोनेट्स्क क्षेत्र के क्षेत्र के संबंध में समझौता करने के लिए, अमेरिका ने वहां एक मुक्त आर्थिक क्षेत्र स्थापित करने और अन्य क्षेत्रों में अग्रिम पंक्ति (फ्रंट लाइन) पर संघर्ष को थामने (फ्रीज करने) का प्रस्ताव दिया है. ये प्रस्ताव चर्चा के अधीन हैं और अभी तक संबंधित पक्षों द्वारा इन पर सहमति नहीं बनी है.
हालाँकि, यूक्रेन के लिए, डोनेट्स्क क्षेत्र का काफी सैन्य और रणनीतिक महत्व है. यह देश का सबसे भारी किलेबंद इलाका है, और इसे सौंपने से रूस को परिचालन गहराई (operational depth) मिलेगी, जिससे यूक्रेन की रक्षा क्षमताएं काफी कमजोर हो जाएंगी और नीप्रो नदी, खार्किव और कीव की ओर रूसी बढ़त के संभावित रास्ते खुल जाएंगे.
राष्ट्रपति जेलेंस्की को क्षेत्रीय रियायतों के खिलाफ घरेलू विपक्ष-जिसमें सेना भी शामिल है, जैसे अतिरिक्त चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. कीव इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोशियोलॉजी के हालिया सर्वेक्षणों से पता चलता है कि 69 प्रतिशत यूक्रेनी ऐसी शांति योजना का समर्थन करेंगे जो वर्तमान फ्रंट लाइन को फ्रीज करती हो, बशर्ते इसमें सुरक्षा गारंटी शामिल हो और कब्जे वाले क्षेत्रों की औपचारिक मान्यता से बचा जाए. वहीं दूसरी ओर, 74 प्रतिशत लोग उन योजनाओं का विरोध करते हैं जिनमें डोनबास से सेना की वापसी, यूक्रेन के सशस्त्र बलों पर सीमाएं, या ठोस सुरक्षा गारंटी की अनुपस्थिति शामिल हो.
चूंकि इस स्तर पर रूस-यूक्रेन युद्ध को रोकने के लिए एक 'थमा हुआ संघर्ष' (frozen conflict) सबसे यथार्थवादी तरीका है, इसलिए सुरक्षा गारंटी कीव की बातचीत की स्थिति का आधार है. सबसे पहले, यह अनिवार्यता अप्रभावी 1994 बुडापेस्ट मेमोरेंडम की स्थायी छाया से उपजी है, जिसने परमाणु हथियारों के त्याग के बदले यूक्रेन की सुरक्षा की गारंटी दी थी, लेकिन अंततः इसके एक गारंटर द्वारा हमले को रोकने में विफल रही. दूसरा, यूक्रेनी समाज के भीतर एक निरंतर धारणा बनी हुई है कि संघर्ष रुकने की स्थिति में रूस एक संक्षिप्त विराम के बाद फिर से हमला शुरू कर देगा. न्यू यूरोप सेंटर द्वारा दिसंबर 2025 में किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार, 86.7 प्रतिशत यूक्रेनी इस विचार को साझा करते हैं.
समाज को एकजुट करता है, और एक 'महान शक्ति' के रूप में रूस की छवि को मजबूत करता है. घोषित उद्देश्यों को प्राप्त किए बिना शत्रुता समाप्त करना क्रेमलिन के लिए एक रणनीतिक हार होगी. रूसी नेतृत्व के लिए दांव काफी बढ़ गए हैं.
राष्ट्रपति जेलेंस्की यूक्रेन को नए रूसी आक्रमण से बचाने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय भागीदारों से कानूनी रूप से बाध्यकारी सुरक्षा गारंटी मांग रहे हैं. यूक्रेन और अमेरिका वर्तमान में एक द्विपक्षीय सुरक्षा गारंटी समझौते को अंतिम रूप दे रहे हैं, जिसमें कीव औपचारिक वैधता और एक स्पष्ट कानूनी ढांचा सुनिश्चित करने के लिए अमेरिकी कांग्रेस द्वारा इसकी पुष्टि पर जोर दे रहा है. इसके साथ ही, दोनों पक्ष युद्ध के बाद के पुनर्निर्माण समझौते को संपन्न करने की योजना बना रहे हैं जिसमें 800 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक की सहायता की परिकल्पना की गई है.
यूरोपीय मोर्चे पर, 6 जनवरी 2026 को पेरिस में आयोजित ’कोएलिशन ऑफ द विलिंग’ की बैठक में 35 देश शामिल हुए, जिसके परिणामस्वरूप युद्धविराम के बाद यूक्रेन के लिए सुरक्षा गारंटी पर पेरिस घोषणा पत्र जारी हुआ. यह घोषणा पत्र युद्धविराम की निगरानी, दीर्घकालिक सैन्य और वित्तीय सहायता, बहुराष्ट्रीय बल, नए आक्रमणों के प्रति समन्वित प्रतिक्रिया और उन्नत रक्षा सहयोग का प्रावधान करता है. इसके अतिरिक्त, यूक्रेन, फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम ने युद्धविराम लागू करने के लिए जमीन, समुद्र और हवा में बहुराष्ट्रीय बलों को तैनात करने के लिए एक त्रिपक्षीय इरादे की घोषणा पर हस्ताक्षर किए. हालाँकि, पेरिस में हुए समझौतों को केवल दो शर्तों के तहत लागू किया जा सकता है: संयुक्त राज्य अमेरिका का समर्थन और राष्ट्रपति ट्रंप का समर्थन, जिनके विचार हमेशा यूरोप के साथ मेल नहीं खाते, और एक युद्धविराम की स्थापना, जिसके लिए रूस की सहमति आवश्यक है. क्रेमलिन ने आधिकारिक तौर पर अमेरिका की 20-सूत्रीय योजना को खारिज नहीं किया है, क्योंकि वह ट्रंप के साथ संबंधों को खराब करने से सतर्क है, लेकिन उसने अपने स्वयं के प्रस्ताव पेश करने का संकेत दिया है.
यूक्रेन के राष्ट्रपति कार्यालय के प्रमुख और यूक्रेन के मुख्य खुफिया निदेशालय (HUR) के पूर्व प्रमुख किरिलो बुडानोव के अनुसार, बातचीत की प्रक्रिया में शामिल होने में रूस की रुचि समझौते की इच्छा का संकेत नहीं है, बल्कि यह यूक्रेन के खिलाफ युद्ध की बढ़ती थकान और बढ़ती लागत को दर्शाती है. इसके साथ ही, बुडानोव का कहना है कि रणनीतिक उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए बातचीत कई उपकरणों में से केवल एक है-और ये उद्देश्य प्रत्येक पक्ष के लिए मौलिक रूप से अलग हैं.
रूस के स्वतंत्र लेवाडा सेंटर के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 में, युद्ध जारी रखने के लिए सार्वजनिक समर्थन 2022 के बाद से अपने सबसे निचले स्तर 25 प्रतिशत पर गिर गया, जबकि शांति वार्ता की ओर बढ़ने के पक्ष में उत्तरदाताओं की संख्या बढ़कर 66 प्रतिशत हो गई.
यह संघर्ष यूक्रेन और रूस दोनों के लिए अस्तित्व का प्रश्न है. व्लादिमीर पुतिन के लिए, युद्ध जारी रखना एक तार्किक विकल्प है: यह घरेलू वैधता बनाए रखता है, समाज को एकजुट करता है, और एक 'महान शक्ति' के रूप में रूस की छवि को मजबूत करता है. घोषित उद्देश्यों को प्राप्त किए बिना शत्रुता समाप्त करना क्रेमलिन के लिए एक रणनीतिक हार होगी. रूसी नेतृत्व के लिए दांव काफी बढ़ गए हैं, क्योंकि युद्ध अब 'महान देशभक्तिपूर्ण युद्ध' (द्वितीय विश्व युद्ध) से भी अधिक समय तक चला है. द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सोवियत संघ (USSR) के विपरीत, जिसने अंततः मित्र देशों के समर्थन से बर्लिन पर कब्जा कर लिया था, रूस लंबे समय तक चले सैन्य अभियानों के बावजूद डोनेट्स्क क्षेत्र को भी सुरक्षित करने में विफल रहा है. यूक्रेन के खिलाफ युद्ध को वैध बनाने के लिए कीव में ‘नव-नाजी शासन’ के खिलाफ लड़ाई में ऐतिहासिक निरंतरता के नैरेटिव पर रूस की निर्भरता को देखते हुए, तुलनीय सफलता हासिल करने में उसकी विफलता ने रूसी सैन्य ब्लॉगर्स और पत्रकारों के बीच महत्वपूर्ण निराशा और आलोचना पैदा की है, जिन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला है कि लगभग चार वर्षों के युद्ध के वास्तविक परिणाम उम्मीदों या क्रेमलिन के घोषित उद्देश्यों पर खरे नहीं उतरे हैं. यूक्रेन में रूसी विफलता ने उसकी रणनीतिक सीमाओं और सहयोगियों (आर्मेनिया, ईरान) को समर्थन देने की घटती क्षमता को उजागर कर, मॉस्को के वैश्विक प्रभाव और साख को कमजोर कर दिया है.
इस पृष्ठभूमि में, निकट भविष्य में यूक्रेन में एक व्यापक और टिकाऊ शांति की संभावनाएं सीमित बनी हुई हैं. साथ ही, कई कारक रूस के रणनीतिक आकलन के पुनर्मूल्यांकन में योगदान दे सकते हैं और युद्धविराम की संभावना को बढ़ा सकते हैं. पहला, रूस अपनी आर्थिक स्थिति में गिरावट का सामना कर रहा है, जो गिरती तेल की कीमतों और प्रतिबंधों के कारण कम हुए निर्यात राजस्व से प्रेरित है. दूसरा, क्षेत्रीय बजट में निरंतर घाटे के कारण बढ़ते सामाजिक दबावों ने युद्ध के प्रति जनता के दृष्टिकोण को प्रभावित करना शुरू कर दिया है. रूस के स्वतंत्र लेवाडा सेंटर के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 में, युद्ध जारी रखने के लिए सार्वजनिक समर्थन 2022 के बाद से अपने सबसे निचले स्तर 25 प्रतिशत पर गिर गया, जबकि शांति वार्ता की ओर बढ़ने के पक्ष में उत्तरदाताओं की संख्या बढ़कर 66 प्रतिशत हो गई. तीसरा, ट्रंप प्रशासन की ओर से तीव्र दबाव और अतिरिक्त प्रतिबंधों का जोखिम-विशेष रूप से आगामी कांग्रेस के मध्यावधि चुनावों से पहले और रिपब्लिकन चुनावी स्थिति को मजबूत करने की आवश्यकता-रूस के रणनीतिक दृष्टिकोण में और अनिश्चितता जोड़ता है. सामूहिक रूप से, ये कारक संकेत देते हैं कि 2026 सक्रिय शत्रुता की समाप्ति का प्रतीक हो सकता है. रूस-यूक्रेन युद्ध में स्थायी शांति के बजाय सीमित युद्धविराम की संभावना है, जो रूस की रणनीति, सहयोगियों की एकजुटता और डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता पर निर्भर करेगा.
नतालिया बुटिर्स्का यूक्रेन के कीव स्थित न्यू यूरोप सेंटर की सीनियर फेलो हैं.
The views expressed above belong to the author(s). ORF research and analyses now available on Telegram! Click here to access our curated content — blogs, longforms and interviews.
Nataliya Butyrska is a freelance expert on International Relations from Kyiv, Ukraine. ...
Read More +