अमेरिका में 2024 के चुनाव की रेस पहले से ही भीड़-भाड़ भरी हो गई है. फ्लोरिडा के गवर्नर रॉन डिसांटिस ने एलन मस्क के साथ एक ट्विटर सेशन के ज़रिए 2024 के राष्ट्रपति चुनाव के लिए अपनी दावेदारी का एलान किया. ऐसा करके डिसांटिस ने आख़िरकार एक बेहद पुरानी राजनीतिक हिचकिचाहट को ख़त्म किया. हालांकि डिसांटिस ने ये हिचकिचाहट ख़ुद से ज़्यादा अमेरिका के मतदाताओं के लिए ख़त्म की है. वैसे तो डिसांटिस के ट्विटर सेशन की शुरुआत ट्विटर की तरफ़ से तकनीकी गड़बड़ी से हुई लेकिन इस दौरान कंज़र्वेटिव (रूढ़िवादी) राजनीति के एक अलग ब्रांड के इर्द-गिर्द अच्छी बातचीत हुई. डोनाल्ड ट्रंप जिस ब्रैंड की नुमाइंदगी करते हैं, उससे ये अलग ब्रैंड है. कुछ मायनों में ये सेशन ट्विटर और इलॉन मस्क के द्वारा ट्रंप के मुक़ाबले डिसांटिस को समर्थन के बारे में भी बताता है क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप मस्क के द्वारा अपना ट्विटर अकाउंट बहाल किए जाने के बावजूद ट्रूथ सोशल का इस्तेमाल कर रहे हैं. इस घटनाक्रम ने दो ढंग से पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तुलना में डिसांटिस को लेकर बहुत ज़्यादा दिलचस्पी और अटकलें पैदा कर दी है. पहला, जो बाइडेन के ख़िलाफ़ लड़ने के लिए डिसांटिस या ट्रंप में से कौन पसंद का उम्मीदवार होना चाहिए; और दूसरा, 2024 के आने वाले चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की संभावना पर इसका क्या असर होगा.
पिछले कुछ समय से अमेरिका में राष्ट्रीय चुनाव को लेकर बातचीत में व्यक्तिगत, राजनीतिक और प्रशासनिक कारणों से राजनीतिक स्पेक्ट्रम पर डिसांटिस के लिए एक जगह की पहचान हो गई है.
पिछले कुछ समय से अमेरिका में राष्ट्रीय चुनाव को लेकर बातचीत में व्यक्तिगत, राजनीतिक और प्रशासनिक कारणों से राजनीतिक स्पेक्ट्रम पर डिसांटिस के लिए एक जगह की पहचान हो गई है. व्यक्तिगत स्तर पर येल एवं हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के साथ उनके मज़बूत संस्थागत संबंध और अमेरिकी नौसेना के पूर्व कर्मी के तौर पर उनकी सैन्य पृष्ठभूमि उन्हें रिपब्लिकन पार्टी के मतदाताओं के बीच डोनाल्ड ट्रंप के विकल्प के रूप में असरदार ढंग से स्थापित करती है. राजनीतिक तौर पर डिसांटिस फ्लोरिडा के काम करने वाले गवर्नर के तौर पर अपनी काबिलियत साबित कर चुके हैं क्योंकि वो बड़ी कंपनियों का सामना करने से कतराते नहीं हैं, मज़बूत क़ानून को आगे बढ़ाते हैं और अपने स्टॉप वोक एक्ट के ज़रिए ‘वोकिज़्म‘ के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़े हुए हैं. लेकिन ये ऐलान करके कि 6 जनवरी के दंगों के दोषियों को वो माफ़ कर सकते हैं, डिसांटिस ने ख़ुद को ट्रंप से भी आगे ले जाने की कोशिश की है.
रॉन डिसांटिस की तरफ़ से रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर राष्ट्रपति का चुनाव लड़ने के एलान ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ एक पेचीदा तुलना की स्थिति पैदा कर दी है. वैसे तो दोनों उम्मीदवार ज़िद्दी अंदाज़ और रूढ़िवादी मूल्यों के मामले में समानता रखते हैं लेकिन नज़रिए, अनुभव और नीतियों को प्राथमिकता देने के मामले में उनके बीच महत्वपूर्ण अंतर भी है. डिसांटिस का सामाजिक तौर पर तकलीफ़देह लेकिन नपा-तुला व्यवहार, नीतियों को आगे बढ़ाने पर ध्यान और कठोर दंडात्मक नीतियां, ट्रंप की भिड़ने वाली भाषा और बाहरी के दरज़े के विपरीत है. मेक्सिको के साथ सीमा पर दीवार बनाने में ट्रंप की नाकामी और कोविड-19 महामारी की शुरुआत के समय उनके द्वारा डॉ. एंथनी डी. पाउची को बढ़ावा देने को डिसांटिस के द्वारा ट्रंप की नाकामी के तौर पर लोगों के सामने रखा जाएगा, ख़ास तौर पर फ्लोरिडा में डिसांटिस के द्वारा गर्भपात और शिक्षा में सुधार जैसे मुद्दों पर राजनीतिक तौर पर रूढ़िवादी लेकिन लोकप्रिय फ़ैसलों के मुक़ाबले. इसके अलावा अमेरिका के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव के सदस्य और गवर्नर के तौर पर डिसांटिस का ट्रैक रिकॉर्ड उन्हें गवर्नेंस के मामले में क़ीमती अनुभव प्रदान करता है, उन्हें इस मायने में अलग करता है कि ट्रंप को राज्य स्तर की राजनीति का अनुभव नहीं है. राज्य स्तर की राजनीति का अनुभव डिसांटिस को गवर्नेंस में एक ठोस बुनियाद और निर्णायक मतदाताओं का आधार मुहैया कराता है. ये उन्हें रिपब्लिकन पार्टी में ट्रंप के ग़ैर-परंपरागत बाहरी दरज़े की तुलना में एक परंपरागत उम्मीदवार के तौर पर भी रखता है.
कोविड-19 महामारी का अमेरिका पर गहरा असर पड़ा है और इस संकट से निपटने में डिसांटिस एवं ट्रंप- दोनों की भूमिका पर लोगों की नज़र रही है. महामारी के शुरुआती दिनों में इसकी गंभीरता को नज़रअंदाज़ करने की वजह से ट्रंप को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा, वहीं फ्लोरिडा की अर्थव्यवस्था को तुरंत फिर से खोलने में डिसांटिस की कोशिशों की तारीफ़ की गई. हालांकि डिसांटिस को भी सख़्त क़दम का विरोध करने के लिए आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था. वैसे ज़्यादातर लोग मानते हैं कि डिसांटिस ने जो दांव खेला था, उसका फ़ायदा हुआ. इस बात की संभावना है कि ट्रंप के मुक़ाबले महामारी को लेकर डिसांटिस का अलग नज़रिया लोगों की राय तय करने और मतदाताओं का समर्थन निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा.
कोविड-19 महामारी का अमेरिका पर गहरा असर पड़ा है और इस संकट से निपटने में डिसांटिस एवं ट्रंप- दोनों की भूमिका पर लोगों की नज़र रही है. महामारी के शुरुआती दिनों में इसकी गंभीरता को नज़रअंदाज़ करने की वजह से ट्रंप को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा
वैसे तो डिसांटिस और ट्रंप- दोनों रूढ़िवादी मूल्यों का समर्थन करते हैं लेकिन वो संदेश पहुंचाने और नीतियों की प्राथमिकता के मामले में अलग-अलग राय रखते हैं. ट्रंप का “अमेरिका फर्स्ट” एजेंडा इमिग्रेशन, व्यापार और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर ज़ोर देता है. इसके विपरीत, डिसांटिस ने आर्थिक विकास, शिक्षा में सुधार और क़ानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर ध्यान दिया है. डिसांटिस की नीतियां ज़्यादा परंपरागत रिपब्लिकन मंच के बारे में बताती हैं जिसमें रूढ़िवादी सिद्धांतों पर ज़ोर दिया गया है, हालांकि ये उनके अनोखे नीतिगत प्रस्तावों के साथ है. डोनाल्ड ट्रंप का ग़ैर-परंपरागत चुनाव अभियान का अंदाज़ और उनकी लोकप्रिय अपील ने उनके राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान वफ़ादार समर्थकों के महत्वपूर्ण वर्ग को आकर्षित किया है. असंतुष्ट मतदाताओं के साथ संपर्क करने और उनकी चिंताओं के बारे में बोलने की ट्रंप की क्षमता ने उनकी चुनावी कामयाबी में योगदान दिया है. रॉन डिसांटिस अपने परंपरागत दृष्टिकोण और नीतियों को आगे बढ़ाने पर ध्यान देकर रिपब्लिकन पार्टी की अपील को ट्रंप के मूल मतदाताओं से आगे तक ले जाने में सक्षम हो सकते हैं. उनका अंदाज़ उदारवादी और स्वतंत्र मतदाताओं के लिए ज़्यादा सुहावना हो सकता है जो चुनाव के दौरान पार्टी की उम्मीदों में बढ़ोतरी कर सकता है.
राष्ट्रपति चुनाव की रेस में रॉन डिसांटिस की एंट्री 2024 में रिपब्लिकन पार्टी की उम्मीदों पर महत्वपूर्ण असर डालती है. अगर डिसांटिस अपने ट्रैक रिकॉर्ड का फ़ायदा उठाने में कामयाब होते हैं, मतदाताओं की एक व्यापक श्रेणी को लुभा पाते हैं और रूढ़िवादी सिद्धांतों एवं व्यापक अपील के बीच संतुलन स्थापित कर पाते हैं तो वो ट्रंप के वफ़ादारों और उदारवादी रिपब्लिकन- दोनों के लिए एक दमदार विकल्प के रूप में ख़ुद को पेश कर सकेंगे. इससे रिपब्लिकन पार्टी अपनी पहुंच का विस्तार और अलग-अलग तरह के मतदाताओं को आकर्षित कर सकेगी. इस तरह चुनावी कामयाबी की उम्मीद मज़बूत होगी.
रूढ़िवादी सिद्धांतों और व्यापक अपील के बीच संतुलन स्थापित करके डिसांटिस 2024 में पार्टी को चुनावी कामयाबी दिला सकते हैं. दोनों उम्मीदवारों के बीच मुक़ाबला बेशक रिपब्लिकन पार्टी के लिए भविष्य की राह और 2024 में उसकी चुनावी संभावनाएं तय करेगी.
अगर एंटी-वोकनेस का संदर्भ प्रगतिशील सामाजिक न्याय के आंदोलनों और विचारधाराओं, ख़ास तौर पर नस्ल, लिंग और सामाजिक समानता जैसे मुद्दों से जुड़े, का विरोध या प्रतिरोध है तो रिपब्लिकन उम्मीदवार पार्टी के भीतर समर्थन के लिए मुक़ाबला कर सकते हैं और आबादी की उस श्रेणी को अपील कर सकते हैं जो इन प्रगतिशील आंदोलनों के लिए महत्वपूर्ण हैं या उनका विरोध करते हैं. रॉन डीसैंटिस और डोनाल्ड ट्रंप रिपब्लिकन पार्टी में जिस राजनीतिक बंटवारे को दिखाते हैं, राष्ट्रपति पद के एक और दावेदार विवेक रामास्वामी की वजह से जिसका विस्तार होता है, वो नवंबर 2024 में राष्ट्रपति चुनाव के नज़दीक अमेरिका में एंटी-वोक सेंटीमेंट (भावनाओं) की हदों का इम्तिहान ले सकते हैं.
डिसांटिस की राह उतनी आसान नहीं होगी जितना कि मस्क ने ऐलान किया है. डिसांटिस अपनी ही पार्टी के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से कड़ी चुनौती का सामना कर रहे हैं जो ताज़ा पोल में सबसे आगे हैं.
पिछले साल जुलाई में एलन मस्क ने ऐलान किया कि अगर डिसांटिस 2024 में बाइडेन के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ते हैं तो वो बिना किसी कैंपेन के चुनाव जीत जाएंगे. हालांकि डिसांटिस की राह उतनी आसान नहीं होगी जितना कि मस्क ने ऐलान किया है. डिसांटिस अपनी ही पार्टी के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से कड़ी चुनौती का सामना कर रहे हैं जो ताज़ा पोल में सबसे आगे हैं. इसके अलावा डिसांटिस अपने उन फ़ैसलों की वजह से विरोध और नाराज़गी का सामना कर रहे हैं जिन्होंने ख़ास तौर पर महिलाओं और अश्वेतों को प्रभावित किया है. हाल के एक पोल से पता चलता है कि अमेरिका के अलग-अलग हिस्सों में महिलाओं ने डिसांटिस के द्वारा बनाए गए कम-से-कम छह क़ानूनों का विरोध किया है. इन क़ानूनों में छह हफ़्तों के बाद गर्भपात को ग़ैर-क़ानूनी बनाना; जिन किताबों को अनुचित बताया गया है उन्हें 12वीं क्लास तक की लाइब्रेरी से हटाना; कॉलेज में क्रिटिकल रेस थ्योरी (CRT) की पढ़ाई पर पाबंदी लगाना; कॉलेज के विविधता, समानता और समावेशन (DEI) कार्यक्रम को ख़त्म करना; जेंडर स्टडीज़ के साथ-साथ उग्र नारीवादी (फेमिनिस्ट) और क्वीर थ्योरी में यूनिवर्सिटी की पढ़ाई पर प्रतिबंध लगाना और बिना किसी परमिट या ट्रेनिंग के लोगों को छुपाकर गन ले जाने की इजाज़त देना शामिल हैं.
ऊपरी हाथ के लिए रिपब्लिकन पार्टी के भीतर अंतिम लड़ाई उन भावनाओं से प्रभावित हो सकती है कि डोनाल्ड ट्रंप और रॉन डिसांटिस के बीच ज़्यादा वोक उम्मीदवार कौन है. ट्रंप फ्लोरिडा में डिज़्नी की ‘वोक’ परंपरा के लिए डिसांटिस पर आरोप लगा रहे हैं और डिसांटिस के एंटी-वोक क़ानूनों ने उसी के लिए मंच तैयार किया है.
विवेक मिश्रा ऑब्ज़र्वर रिसर्च फाउंडेशन के स्ट्रैटजिक स्टडीज़ प्रोग्राम में फेलो हैं.
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Vivek Mishra is Deputy Director – Strategic Studies Programme at the Observer Research Foundation. His work focuses on US foreign policy, domestic politics in the US, ...
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