Author : Arpan Gelal

Expert Speak India Matters
Published on May 20, 2024 Updated 0 Hours ago

आपसी संबंधों को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से नेपाल एवं भारत दोनों द्वारा डिजिटल कनेक्टिविटी की मदद से सहयोग के नए मौकों पर खास ध्यान दिया जा रहा है.

भारत और नेपाल के दो-तरफा रिश्ते को डिजिटल कनेक्टिविटी के ज़रिये दोबारा ज़िंदा करने का प्रयास.

कई वर्षों के खराब राजनीतिक संबंधों के बाद, नेपाल एवं भारत अब आपसी द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूत करने के उद्देश्य से दोनों देशों के बीच, संपर्क बढ़ाने और नये रिश्ते बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं. हाल ही में, दोनों देशों ने सीमा पार व्यापार, पर्यटन एवं पैसों के प्रवाह को आसान बनाने के उद्देश्य से ई-भुगतान की शुरुआत करके, डिजिटल वित्तीय संपर्क को मज़बूत करने का काम किया है. ये सभी  विकास कार्य , विगत वर्षों में, अन्य संचार साझेदारियों जिनमें एकीकृत चेकपोस्ट (ICP), क्रॉस बॉर्डर रेलवे, और पावर ट्रांसमिशन लाइन शुरू करना शामिल है, उसके साथ-साथ की गई है. इसके अलावा, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) के क्षेत्र में भारत की सफलता और फिर  डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग की संभावना से व्यापक आर्थिक एकीकरण व दोनों देशों के नागरिकों के बीच के संबंधों को मज़बूती प्रदान करने की संभावना व्यक्त करती है. सीमा-पार डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटलीकृत कस्टम प्रक्रियाओं द्वारा   ट्रांस-बॉर्डर व्यापार को प्रोत्साहित कर सकती है, ई-कॉमर्स आधारित व्यापार एवं स्टार्टअप को बड़े स्तर पर ग्राहकों के स्त्रोत की सुविधा दे सकती है, एवं दोनों देशों के बीच के पारंपरिक आदान-प्रदान एवं पर्यटन को भी डिजिटल मंच के सहयोग से और भी बेहतर किया जा सकता है.    

रिश्तों में तल्ख़ी तब और ज़्यादा आ गयी जब दिल्ली ने अपना नया राजनीतिक मानचित्र जारी किया जिसमें कालापानी, एवं लिपुलेख के विवादित क्षेत्रों को भारतीय सीमा के अंतर्गत दर्शाया गया, और लिपुलेख से कैलाश मानसरोवर तक जाने के लिए एक रोड लिंक को खोला गया.

राजनीतिक विवादों की श्रृंखला  

2014 के अपने प्रथम नेपाल यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने नेपाल के लिए एक HIT विज़न का सुझाव साझा किया था. इस सुझाव के अनुसार दोनों देशों के बीच हाइ-वे के निर्माण, सूचना मार्ग, एवं ट्रांसवे – ट्रांसमिशन लाइनों पर सहयोग पर ध्यान दिए जाने की ज़रूरत है.  हालांकि 2015 के बाद, दोनों देशों के राजनीतिक संबंधों में आये गिरावट के साथ ही ये रिश्ता अपने ऐतिहासिक निम्न स्तर पर पहुंच गया था. रिश्तों में तल्ख़ी तब और ज़्यादा आ गयी जब दिल्ली ने अपना नया राजनीतिक मानचित्र जारी किया जिसमें कालापानी, एवं लिपुलेख के विवादित क्षेत्रों को भारतीय सीमा के अंतर्गत दर्शाया गया, और लिपुलेख से कैलाश मानसरोवर तक जाने के लिए एक रोड लिंक को खोला गया. इसके प्रतिक्रिया स्वरूप नेपाल ने भी कालापानी, लिपुलेख एवं लिम्पियाधुरा के विवादित सीमाओं को अपनी सीमाओं में दर्शाते हुए अपना नया राजनीतिक मानचित्र जारी कर दिया. इसके बाद अप्रैल 2021 में  कोविड-19 महामारी के दौरान नेपाल द्वारा एडवांस भुगतान कर दिए जाने के बावजूद भारत में वैक्सीन की घरेलू मांग बढ़े होने का हवाला देते हुए भारत ने नेपाल को 1 मिलियन वैक्सीन की आपूर्ति को रोक दिए जाने की वजह से भी नेपाली नागरिकों में भारत को लेकर असंतुष्टी बढ़ गई थी. 

इसके बाद वर्ष 2022 में, भारत में सैन्य बहाली की प्रक्रिया में शुरू की गई अग्निपथ स्कीम ने काफी लंबे अरसे से चली आ रही गोरखा रेजीमेंट के भविष्य को लेकर चिंताएं उत्पन्न कर दीं हैं. नेपाल ने भारत से अग्निपथ योजना के अंतर्गत नेपाली युवाओं की भर्ती नहीं किये जाने का भी अनुरोध किया है, क्यूंकि इससे भारतीय सेना में नेपाली युवाओं के करियर के संपूर्ण विकास की संभावनाएं कम हो जाएंगी और चार साल बाद जब ये युवा भारतीय सेना की नौकरी से मुक्त होकर जब घर लौटेंगे तो उससे नेपाल के समाज पर इसका दुष्प्रभाव दिखेगा. नेपाल और भारत के सामाजिक - राजनीतिक संबंधों के बीच इस प्रकार के गतिरोध से न केवल अविश्वास एवं संदेह का वातावरण उत्पन्न हुआ है, बल्कि नेपाली नागरिकों के बीच भारत को लेकर उनकी धारणा भी प्रभावित हुई है.    

 

सीमा पार के संपर्क सेतु का विस्तार

 

संबंधों में गतिरोध के बीच, दोनों देशों ने कनेक्टिविटी व संपर्क के बुनियादी ढांचे एवं आर्थिक एकीकरण में सहयोग के ज़रिये, संबंधों में नई उर्जा डालने की व्यावहारिक प्रयास करनी शुरू कर दी है. दोनों देशों ने नेपाल से अगले दस वर्षों तक 10,000 मेगावाट बिजली आयात करने के मसौदे पर जनवरी 2021 में हस्ताक्षर किये. भारत, नेपाल को अपने भारतीय ट्रांसमिशन ढांचों की सहायता द्वारा उसके अन्य विक्रेता देश बांग्लादेश को बिजली निर्यात करने देने की सुविधा प्रदान करने को भी राज़ी हो गया है. इसके अलावा, ऊर्जा एवं निवेश के क्षेत्र को सहयोग और गतिशीलता प्रदान करने की दिशा में, एनएचपीसी लिमिटेड द्वारा नेपाल में 669 मेगावाट लोअर अरुण हाइड्रोइलेक्ट्रिक परियोजना के विकास संबंधी परियोजना विकास समझौते पर भी हस्ताक्षर किया गया है.  जून 2023 में, दोनों देशों के प्रधानमंत्री ने नेपालगंज-रुपईडीहा सीमा क्षेत्र के ICP का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया, भैरहवा – सुनौली सीमा पर एक ICP की आधारशिला रखी, और दोधारा-छदानी के सूखे बंदरगाह़ पर भारतीय सहयोग से एक ICP के निर्माण संबंधी मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग  (एमओयू) पर हस्ताक्षर किये. सीमा पार बन रहे मोतीहारी – अमलेखगंज पेट्रोलियम पाइपलाइन परियोजना के द्वितीय चरण के निर्माण में भारत भी सहयोग कर रहा है, एवं दोनों देशों के बीच, पूर्वी नेपाल के झापा से सिलीगुड़ी तक के नये पाइपलाइन निर्माण के संबंध में भी एक समझौते पर सहमति बनी है. जयनगर – कुर्था  पैसेंजर रेल सेवा को केंद्रीय नेपाल के बीजलपुर तक विस्तार देने में भारत की तरफ से मिलने वाली सहायता भी आगे जाकर व्यापार एवं लोगों के आपसी संबंधों को और भी मज़बूत कर पायेगा.    

    

सीमा पार बन रहे मोतीहारी – अमलेखगंज पेट्रोलियम पाइपलाइन परियोजना के द्वितीय चरण के निर्माण में भारत भी सहयोग कर रहा है, एवं दोनों देशों के बीच, पूर्वी नेपाल के झापा से सिलीगुड़ी तक के नये पाइपलाइन निर्माण के संबंध में भी एक समझौते पर सहमति बनी है.

संबंधों में कम होते तनाव: वित्तीय एवं डिजिटल कनेक्टिविटी में सहयोग 

 भौतिकी बुनियादी ढांचों के साथ ही, वित्तीय एवं डिजिटल कनेक्टिविटी भी काफी तेज़ी से महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं. नेपाल एवं भारत ने दोनों देशों के बीच बिना किसी बाधा के वित्तीय ट्रांज़ैक्शन को प्रोत्साहित करने के लिये सीमा-पार डिजिटल पेमेंट भुगतान का सिस्टम लॉन्च किया है. जून 2023 में, दोनों देशों के बीच सीमा पार डिजिटल ट्रांज़ैक्शन की सुविधा शुरुआत के लिए भारत के नेश्नल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और नेपाल क्लियरिंग हाउस लिमिटेड ((NCHL) के बीच एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए. इसके बाद 28 फ़रवरी 2024 से भारतीय नागरिक नेपाल में यूनाइटेड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) के ज़रिये मोबाइल फंड ट्रांसफर और क्यूआर कोड के ज़रिए भुगतान कर सकते हैं.  हालांकि, नेपाल की ओर से हो रही विलंब की वजह से, नेपाल ने भारत में अपना डिजिटल भुगतान प्रणाली शुरू नहीं किया है, परंतु सीमा पार से ई-भुगतान तंत्र की शुरुआत होने से सीमा के आर-पार भुगतान, रेमिटेंस, व्यापार एवं पर्यटन को और भी सरल, व सुविधाजनक बनाने में सुविधा होगी.         

नेपाल एवं भारत के बीच लोगों की निर्विघ्न होने वाली आवाजाही ने दोनों देशों के बीच भारी संख्या में प्रवासियों को सुविधा प्रदान की है. नेपाल के अस्थायी प्रवासियों की एक काफी बड़ी तादाद के लिए छोटे एवं लंबे दोनों ही कारणों से भारत एक पसंदीदा देश रहा है. इसकी वजह उनके लिये यहां व्यवसाय, नौकरी, तीर्थयात्रा, शिक्षा एवं ऐसे कई अन्य कारण हैं जो उन्हें भारत की तरफ खींचता आया है और भारत को उनके माकूल गंतव्य बनाका रहा है. एक तरफ जहां, दोनों देशों में आने-जाने वाले प्रवासियों की गिनती रखने के लिए ज़रूरी कोई आधिकारिक रिकार्ड दर्ज करने का सिस्टम नहीं है, इसके बावजूद ऐसा अनुमान है कि कम से कम  600,000 भारतीय नेपाल में रह रहे हैं, और वहीं 30 – 40 लाख  नेपाली नागरिक भारत में रह एवं काम कर रहे हैं. नज़दीकी पड़ोसी होने के बावजूद, सीमापार डिजिटल फंड ट्रांसफर तंत्र के न होने से दोनों देशों के बीच  सरल एवं तत्काल राशि प्रेषण का प्रवाह बाधित हो रहा है व रेमिटेंस के लेनदेन में काफी ज़्यादा लागत आ रही है.      

साल 2023 में, नेपाल ने लगभग 3,15,000 से ज्य़ादा भारतीय पर्यटकों की मेज़बानी करके, भारत को विदेशी पर्यटक के स्त्रोत के तौर पर सबसे बड़ा देश बनाया.

सीमा पार डिजिटल भुगतान सुविधा के शुरू होने से नेपाल में पर्यटन को बढ़ावा मिलने की आशा है और कोविड-19 महामारी के उपरांत नेपाली पर्यटन के पुनः ज़ोर पकड़ने की उम्मीद है. साल 2023 में, नेपाल ने लगभग 3,15,000 से ज्य़ादा भारतीय पर्यटकों की मेज़बानी करके, भारत को विदेशी पर्यटक के स्त्रोत के तौर पर सबसे बड़ा देश बनाया. इन आंकड़ों में सिर्फ हवाई यात्रा के ज़रिए नेपाल पहुंचने वाले भारतीय पर्यटकों को ही दर्ज किया गया है, और ज़मीनी रास्तों से नेपाल दाख़िल होने वाले भारतीय पर्यटकों का कोई आधिकारिक आंकड़ा मौजूद नहीं है. साल 2017 में किए गए एक आधिकारिक अध्ययन के अनुसार, कम से कम 1.2 मिलियन भारतीय पर्यटक, मनोरंजन एवं धार्मिक तीर्थ यात्रा के उद्देश्य से सड़क के रास्ते नेपाल गए हैं. उसी तरह से 2022 तक, भारत आने वाले पर्यटकों के सातवें सबसे बड़े स्त्रोत के रूप में, नेपाल का नाम शामिल रहा है.

पर्यटन क्षेत्र के लिए, सीमापार भुगतान हमेशा ही एक बड़ी समस्या रही है, चूंकि पर्यटक एवं व्यापार से संबंधित लोग जो देशों के आर- पार यात्रा करते हैं, उनको डिजिटल ट्रांज़ैक्शन करने में बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ता. साल 2016 में, भारत में नोटबंदी की घटना के बाद, नेपाल नें 100 रुपये के अतिरिक्त कोई और मूल्य की भारतीय मुद्रा को स्वीकार करने पर प्रतिबंध लगा दिया था. जिस कारण नेपाल जाने वाले सभी भारतीय पर्यटक को अपनी नेपाल यात्रा के दौरान बड़ी मात्रा सौ रुपये की मुद्रा साथ ले जाने को विवश कर दिया था.  इसके अलावा, सिर्फ़ शहरी क्षेत्रों तक सीमित, वित्तीय प्रेषण के लिए ज़रूरी डेबिट कार्ड की सुविधा होने से, संकट एवं बाधायें और भी  बढ़ गईं. मोबाइल वॉलेट द्वारा रियल टाइम में होने वाले परेशानी मुक्त एवं कम लागत में होने वाले भुगतान की सुविधा वाली डिजिटल पेमेंट अन्य देशों से आने वाले पर्यटकों, तीर्थयात्रियों को राहत देगी, और फिर इस तरह उन्हें किसी भी प्रकार की सामान्य मुद्रा विनिमय, एक्सचेंज, आदि के लिए बैंक जाने एवं कैश मुद्रा संग लेकर जाने की चिंताओं से मुक्ति मिलेगी.       

गहरी होती सीमा पार डिजिटल कनेक्टिविटी  

फ़रवरी 2024 में, भारतीय संचार मंत्रालय ने अपने नियम कायदों में संशोधन करते हुए, नेपाली नागरिकों को अपनी भारत यात्रा के दौरान मोबाइल सिम कार्ड प्राप्त करने का प्रावधान तय किया था. 2021 में, सिम कार्ड  वितरण का डिजिटलीकरण किए जाने के बाद, भारतीय अधिकारियों ने  2012 में मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत किए गए प्रावधानों के आधार पर किसी भी विदेशी नागरिकों को मान्य वीज़ा दस्तावेज़ के बग़ैर, सिम कार्ड निर्गत किए जाने को प्रतिबंधित कर दिया. चूंकि, नेपाली राष्ट्रीयता के नागरिकों को भारत की यात्रा के लिए किसी वैध वीज़ा दस्तावेज़ की आवश्यकता नहीं पड़ती है, इसलिए उन्हें सिमकार्ड नहीं दिया जा सकता है, जिस वजह से, व्यापार, तीर्थ, शिक्षा, स्वास्थ्य उपचार, और अन्य वजहों से यात्रा करने वाले लोगों को फिर संचार आदि में बाधा आती है. ये नया प्रावधान, नेपाली नागरिकों को अपने वैध पहचान पत्र जिनमें नागरिकता, पासपोर्ट, वोटर कार्ड, या फिर नेपाली दूतावास द्वारा निर्गत कोई अन्य फ़ोटो आईडी आदि शामिल है, उसके आधार पर भारत में सिम कार्ड जारी कर पायेगा. इससे सीमापार होने वाले में सुविधा होगी एवं 1950 में स्थापित शांति संधि के तहत, दोनों देशों के नागरिकों को एक-दूसरे देश के देशों में समान व्यवहार एवं समान विशेषाधिकारों के प्रावधान को सुनिश्चित किया जा सकेगा.         

डिजिटल संचार पर विशिष्ट ध्यान केंद्रित करते हुए, सहयोग के नए अवसरों के माध्यम से आपसी संबंधों को पुनर्जीवित किए जाने के तमाम प्रयास, निस्संदेह एक स्वागत योग्य कदम है.     

आगे, नेपाल-भारत डिजिटल संचार दोनों देशों के बीच के लोगों–से–लोगों तक एवं आर्थिक संबंधों को और भी गहरा करने में काफी सहायक साबित होगा. डिजिटल भुगतान इंटरफेस के एकीकरण से सरल, सुलभ एवं परेशानी मुक्त एवं कम लागत पर होने वाली भुगतान प्रेषण प्रक्रिया से व्यापार एवं वाणिज्य के लिए विशाल भारत के बाज़ार खुल जाएंगे. इससे विशेषकर  दोनों देशों के, छोटे व्यवसायी और स्टार्टअप को फायदा होगा. लंबे समय से बाधित आर्थिक एवं लोगों से लोगों तक के संपर्क को लाभ प्रदान करने लिए, नेपाल-भारत की डीपीआई (DPI) क्षेत्र में प्राप्त सफलता से लाभान्वित होते हुए, उसके डिजिटलीकरण की यात्रा में शामिल हो सकता है और संयुक्त रूप से सीमा-पार आर्थिक एकीकरण के लिए अंतर-संचालित डिजिटल प्रणालियों को प्रोत्साहित कर सकता है. हालांकि, सीमा पार डेटा प्रवाह से संबंधित संभावित डेटा सुरक्षा एवं गोपनीयता संबंधी जोख़िमों के लिए ज़रूरी एकीकृत, सुरक्षित एवं विनियमित दृष्टिकोण की आवश्यकता सतत् कायम रहेगी.            

सारांश 

 

द्विपक्षीय संबंधों में नई जान डालने की दिशा में, सीमा पार संचार क्षेत्र में, डिजिटल एवं अन्य मोर्चों पर उन्नत सहयोग बढ़ाने के माध्यम से हालिया हुए घटनाक्रम, साल 2015 में उत्पन्न राजनीतिक संकट के बाद ठंडे चल रहे दोनों देशों के संबंधों को पुनर्जीवित करने के संयुक्त प्रयासों की ओर इशारा करती है. हालांकि, नेपाली नगारिकों के मन में राजनीतिक विश्वास एवं आम स्थानीय लोगों के मन में भारत के प्रति कायम आम धारणा में सुधार के लिए द्विपक्षीय संबंधों में व्याप्त विवादास्पद मुद्दों पर खुले रूप में चर्चा करने एवं नेपाली हितों के समायोजन के लिए ज़रूरी लचीलेपन का रुख़ अपनाने की भारतीय रुख़ का इंतज़ार है. अभी के लिए, डिजिटल संचार पर विशिष्ट ध्यान केंद्रित करते हुए, सहयोग के नए अवसरों के माध्यम से आपसी संबंधों को पुनर्जीवित किए जाने के तमाम प्रयास, निस्संदेह एक स्वागत योग्य कदम है.       

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