Author : Subhasree Ray

Expert Speak Health Express
Published on May 19, 2026 Updated 1 Days ago

स्वस्थ और टिकाऊ भोजन का भविष्य अब केवल खेती नहीं बल्कि लोगों के स्वास्थ्य, पर्यावरण और सामाजिक समानता से भी जुड़ गया है. जानें क्यों विशेषज्ञ कुपोषण, जलवायु संकट और अस्वस्थ खानपान से निपटने के लिए स्वास्थ्य और खाद्य प्रणालियों को साथ लेकर चलने पर जोर दे रहे हैं.

क्या आपकी थाली बदल सकती है दुनिया?

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स्वास्थ्य प्रणालियाँ और खाद्य प्रणालियाँ एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई हैं फिर भी वैश्विक दक्षिण के अधिकांश देशों में ये अलग-अलग तरीके से काम करती रहती हैं. आज खाद्य प्रणालियों को लोगों के स्वास्थ्य, पर्यावरण और सामाजिक समानता पर बड़ा असर डालने वाला महत्वपूर्ण कारक माना जाता है. 

खाद्य प्रणाली केवल भोजन के उत्पादन और उपभोग तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें खेती, प्रसंस्करण, वितरण, उपभोग और अपशिष्ट प्रबंधन जैसी आपस में जुड़ी प्रक्रियाएं शामिल हैं, जो व्यापक पर्यावरणीय, आर्थिक और राजनीतिक ढांचों से प्रभावित होती हैं. वर्तमान शोध बताते हैं कि वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का लगभग एक-तिहाई हिस्सा खाद्य प्रणालियों से आता है, जबकि अस्वस्थ खानपान हर वर्ष लगभग 1.1 करोड़ रोकी जा सकने वाली मौतों से जुड़ा है. इन समस्याओं का सबसे अधिक प्रभाव वैश्विक दक्षिण के देशों पर पड़ता है, जहाँ पर्यावरणीय असुरक्षा, संरचनात्मक असमानता और कमजोर शासन व्यवस्था एक साथ मौजूद हैं.

खाद्य प्रणालियाँ लोगों के स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं, लेकिन लंबे समय तक स्वास्थ्य व्यवस्था केवल बीमारियों के इलाज पर ध्यान देती रहीं. लोगों के पोषण और सही खानपान से जुड़ी बड़ी समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया.

पोषण क्षेत्र की प्रमुख चुनौती  

इन देशों में कुपोषण के कई रूप एक साथ मौजूद हैं. लगातार रहने वाला अल्पपोषण और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी अब तेजी से बढ़ते मोटापे, मधुमेह, हृदय रोगों और भोजन से जुड़े अन्य गैर-संचारी( जो छूने से नहीं फैलते) रोगों के साथ देखने को मिल रही है. इसे ‘कुपोषण का त्रिस्तरीय बोझ’ कहा जाता है. साथ ही, जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता में कमी, कृषि संकट और बाजार की अस्थिरता स्थानीय खाद्य उत्पादन प्रणालियों की मजबूती को कमजोर कर रहे हैं, खासकर उन प्रणालियों को जो छोटे किसानों पर निर्भर हैं.

खाद्य प्रणालियों के महत्व के बावजूद, स्वास्थ्य प्रणालियाँ अब भी मुख्य रूप से इलाज-आधारित मॉडल पर केंद्रित हैं. कई निम्न और मध्यम आय वाले देशों में स्वास्थ्य प्रणालियाँ रोग-नियंत्रण कार्यक्रमों और उपचार सेवाओं के आधार पर विकसित हुईं, जिन पर अक्सर दाता-आधारित प्राथमिकताओं का प्रभाव रहा. इन प्रयासों से कुछ स्वास्थ्य परिणामों में सुधार जरूर हुआ, लेकिन इससे ऐसी बिखरी हुई संस्थागत व्यवस्थाएँ भी बनीं जो खाद्य परिवेश, कृषि प्रणालियों और बाजार की स्थितियों से पर्याप्त रूप से जुड़ नहीं पाईं. परिणामस्वरूप, कुपोषण से निपटने के प्रयास अक्सर केवल सप्लीमेंट, उपचार और व्यवहार संबंधी सलाह तक सीमित रह जाते हैं और वे उन व्यापक व्यवस्थाओं को प्रभावित नहीं कर पाते जो पौष्टिक, सस्ते और उपयुक्त भोजन तक पहुँच तय करती हैं.

यह अलगाव खास तौर पर उन परिस्थितियों में अधिक गंभीर हो जाता है जहां गरीबी, अनौपचारिकता और सामाजिक बहिष्कार मौजूद हैं. स्वास्थ्य प्रणालियों और खाद्य प्रणालियों के बीच मजबूत संस्थागत जुड़ाव की कमी नीतियों की प्रभावशीलता को सीमित करती है और पोषण सुरक्षा तथा स्वास्थ्य समानता को बढ़ाने के प्रयासों में बाधा डालती है. जैसे-जैसे जलवायु परिवर्तन कृषि और सार्वजनिक स्वास्थ्य दोनों पर दबाव बढ़ा रहा है, वैसे-वैसे एकीकृत और सरल व्यवस्था की  आवश्यकता और अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है.

अब बड़ी संख्या में शोध यह मानते हैं कि खाद्य प्रणालियाँ आपस में जुड़ी सामाजिक और पर्यावरणीय व्यवस्थाएँ हैं, जिनमें कृषि, पोषण, स्वास्थ्य, पर्यावरण और आर्थिक ढांचे लगातार एक-दूसरे को प्रभावित करते रहते हैं. आज की पोषण संबंधी चुनौतियाँ निम्न और मध्यम आय वाले देशों में तेजी से बदलती खाद्य प्रणालियों से जुड़ी हुई हैं. तेज शहरीकरण, बढ़ती आय, बाजारों का विस्तार और औद्योगिक खाद्य उत्पादन ने लोगों के खानपान को अधिक कैलोरी वाले और अत्यधिक प्रसंस्कृत(जो मशीनों द्वारा तैयार किए जाते हैं) खाद्य पदार्थों की ओर मोड़ दिया है. इससे भोजन से जुड़े गैर-संचारी रोग बढ़े हैं, जबकि अल्पपोषण और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी जैसी समस्याएं अब भी बनी हुई हैं.

हालांकि, इन समस्याओं से निपटने के लिए मौजूदा संस्थागत प्रयास बिखरे हुए हैं. कृषि, स्वास्थ्य, पोषण, जलवायु और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी नीतियां अक्सर अलग-अलग काम करती हैं. इससे सरकारों और सार्वजनिक संस्थानों की क्षमता कमजोर पड़ती है और वे खाद्य असुरक्षा, कुपोषण और पर्यावरणीय नुकसान जैसी आपस में जुड़ी समस्याओं का प्रभावी समाधान नहीं कर पाते.

चुनौतियों का समाधान

शासन व्यवस्था खाद्य प्रणालियों की मजबूती और समानता तय करने वाला एक महत्वपूर्ण कारक बनकर सामने आती है. कई शोध इस बात पर जोर देते हैं कि अलग-अलग क्षेत्रों के बीच बेहतर समन्वय, नीतियों में तालमेल और अधिकार-आधारित दृष्टिकोण जरूरी हैं, जिनमें लोगों की भागीदारी, खाद्य संप्रभुता और स्थानीय नियंत्रण को प्राथमिकता दी जाए. लेकिन व्यवहार में अभी भी बड़ी कमियाँ मौजूद हैं, खासकर उन देशों में जहाँ संस्थागत बिखराव, कमजोर नियामक व्यवस्था और आर्थिक प्राथमिकताओं का टकराव देखने को मिलता है.

इसी तरह, वित्तीय ढांचे भी खाद्य परिवेश और पोषण परिणामों को गहराई से प्रभावित करते हैं. कई जगहों पर सब्सिडी, खरीद प्रणालियाँ, कर नीतियाँ और बाजार प्रोत्साहन अब भी औद्योगिक खाद्य प्रणालियों और अत्यधिक प्रसंस्कृत( मशीनों द्वारा तैयार भोजन) खाद्य पदार्थों को बढ़ावा देते हैं. वहीं, शोध यह भी बताते हैं कि सही सार्वजनिक निवेश और खरीद नीतियाँ खाद्य प्रणालियों को अधिक स्वस्थ और टिकाऊ दिशा में ले जा सकती हैं.

सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को अब खाद्य प्रणालियों और जनस्वास्थ्य को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में देखा जा रहा है. पोषण-संवेदनशील कृषि, स्थानीय खाद्य पहल, सामुदायिक पोषण कार्यक्रम और निवारक स्वास्थ्य मॉडल काफी संभावनाएँ दिखाते हैं, लेकिन इनके बीच समन्वय अभी भी कमजोर और असमान है. जवाबदेही भी न्यायपूर्ण खाद्य प्रणाली परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनकर उभरती है. कमजोर निगरानी व्यवस्था, बिखरे हुए मॉनिटरिंग सिस्टम और सीमित संस्थागत जवाबदेही के कारण वैश्विक दक्षिण के कई देशों में खाद्य और पोषण नीतियों का सही क्रियान्वयन( लागू करने का तरीका) प्रभावित होता है.

इन चुनौतियों के समाधान के लिए ‘हेल्थ सिस्टम्स ऐज़ फूड सिस्टम एंकर्स’ ढाँचा एक वैचारिक मॉडल के रूप में प्रस्तावित किया गया है. HSFSA ढाँचे का मकसद स्वास्थ्य प्रणालियों को सिर्फ इलाज तक सीमित न रखकर उन्हें टिकाऊ और न्यायपूर्ण खाद्य व्यवस्था का सक्रिय हिस्सा बनाना है. यह मॉडल मानता है कि स्वास्थ्य प्रणाली समाज, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण से गहराई से जुड़ी होती है. अपनी वित्तीय क्षमता, सरकारी अधिकार और लोगों तक पहुँच के जरिए स्वास्थ्य संस्थाएँ खानपान और पोषण पर असर डाल सकती हैं. इस ढांचे में शासन, वित्तपोषण, सेवा वितरण और जवाबदेही को मुख्य आधार माना गया है. इसके तहत अस्पताल, स्कूल और सामुदायिक कार्यक्रम पौष्टिक भोजन को बढ़ावा दे सकते हैं, जिससे स्थानीय किसानों को समर्थन मिलेगा और कुपोषण कम करने में मदद मिलेगी.

यह ढाँचा स्वास्थ्य सेवाओं को केवल इलाज तक सीमित नहीं रखता, बल्कि भोजन तक पहुँच, सही खानपान और स्थानीय खाद्य वातावरण से जुड़े प्रयासों को भी शामिल करता है. सामुदायिक पोषण कार्यक्रम, पोषण आधारित खेती, स्थानीय खाद्य योजनाएं और लोगों की संस्कृति के अनुसार आहार संबंधी सलाह निवारक स्वास्थ्य सेवा का हिस्सा बन सकती हैं. खासकर सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता स्वास्थ्य सेवाओं और स्थानीय खाद्य व्यवस्थाओं के बीच मजबूत कड़ी का काम कर सकते हैं.

आगे की राह 

इसके अलावा विशेषज्ञों के अनुसार, टिकाऊ और न्यायपूर्ण खाद्य व्यवस्था के लिए मजबूत जवाबदेही बेहद जरूरी है. बेहतर निगरानी, लोगों की भागीदारी और खाद्य गुणवत्ता पर सख्त नियंत्रण से संस्थाएँ अधिक पारदर्शी और जिम्मेदार बन सकती हैं. वैश्विक दक्षिण के देशों में, जहाँ जलवायु संकट, असमानता और खाद्य अस्थिरता बढ़ रही है, स्वास्थ्य प्रणालियाँ अपनी वित्तीय क्षमता और समुदायों तक पहुँच के जरिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि कुपोषण और जलवायु संकट से निपटने के लिए स्वास्थ्य और खाद्य प्रणालियों को साथ लेकर चलना जरूरी होगा.

HSFSA ढांचा स्वास्थ्य प्रणालियों को सिर्फ बीमारी का इलाज करने वाली व्यवस्था नहीं मानता, बल्कि उन्हें भोजन, पोषण और लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ी बड़ी सामाजिक चुनौतियों का हिस्सा मानता है. यह मॉडल बताता है कि स्वास्थ्य प्रणालियाँ सही खानपान, पोषण सुरक्षा, जलवायु संकट से निपटने और सामाजिक समानता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं. इसके जरिए स्वास्थ्य सेवाओं को केवल अस्पतालों और इलाज तक सीमित रखने के बजाय उन्हें लोगों के भोजन, जीवनशैली और स्थानीय जरूरतों से जोड़ा जा सकता है. इस तरह स्वास्थ्य प्रणालियाँ केवल बीमारी आने के बाद इलाज करने वाली संस्थाएँ नहीं रहेंगी, बल्कि स्वस्थ, सुरक्षित, समानता पूर्ण और पर्यावरण के अनुकूल समाज बनाने में सक्रिय योगदान देंगी. 


सुभाषश्री रे टीवीएस मोटर कंपनी के सस्टेनेबिलिटी विभाग में वेलनेस सेक्शन की प्रमुख हैं.

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Dr. Ray, an Executive MBA and PhD with 11+ years of expertise in employee wellbeing, is the Section Head - Wellness at TVS Motor Company's ...

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