क्वांटम तकनीक को अब तक भविष्य की अवधारणा माना जाता रहा है लेकिन जानें कैसे क्वांटम सेंसिंग इसे आज की व्यावहारिक जरूरतों से जोड़ रही है. और क्यों भारत का पहला क्वांटम डायमंड माइक्रोस्कोप इस बदलाव का सबसे ठोस उदाहरण बनकर उभरा है.
क्वांटम तकनीक (क्यूटी) में हाल के दिनों में लोगों की काफ़ी रुचि जगी है. 2025 क्वांटम-केंद्रित वेंचर कैपिटल निवेश के लिए अब तक का सबसे सक्रिय साल बनकर उभरा है. संयुक्त राष्ट्र ने भी 2025 को क्वांटम विज्ञान और प्रौद्योगिकी का अंतर्राष्ट्रीय वर्ष (आईवाईक्यू) घोषित किया. हालांकि, क्वांटम तकनीक के विकास में आने वाली प्रमुख बाधाओं में से एक इसका सीमित व्यावहारिक प्रयोग है. ये अवगुण इसकी व्यावसायिक सफलता को काफ़ी हद तक सीमित करता है. अब क्वांटम सेंसिंग इसके व्यावहारिक इस्तेमाल का सबसे करीबी एप्लिकेशन बनकर उभरा है.
भारत द्वारा अपने पहले क्वांटम डायमंड माइक्रोस्कोप की हालिया घोषणा विशेष महत्व रखती है. यह भारत के महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (एनक्यूएम) के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है. इसके साथ-साथ, यह भूविज्ञान, चिकित्सा और सूक्ष्म इलेक्ट्रॉनिक जैसे क्षेत्रों में भी व्यावहारिक रूप से उपयोगी क्वांटम प्रौद्योगिकी का एक दुर्लभ उदाहरण पेश करता है. यह भविष्य के क्वांटम सेंसिंग सिस्टम के विकास का रास्ता साफ करता है.
इस संदर्भ में, भारत द्वारा अपने पहले क्वांटम डायमंड माइक्रोस्कोप की हालिया घोषणा विशेष महत्व रखती है. यह भारत के महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (एनक्यूएम) के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है. इसके साथ-साथ, यह भूविज्ञान, चिकित्सा और सूक्ष्म इलेक्ट्रॉनिक जैसे क्षेत्रों में भी व्यावहारिक रूप से उपयोगी क्वांटम प्रौद्योगिकी का एक दुर्लभ उदाहरण पेश करता है. यह भविष्य के क्वांटम सेंसिंग सिस्टम के विकास का रास्ता साफ करता है.
नवंबर 2025 में, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) बॉम्बे की फोटोनिक्स और क्वांटम सक्षम सेंसिंग (PQuest) प्रयोगशाला ने भारत के पहले क्वांटम डायमंड माइक्रोस्कोप (क्यूडीएम) के विकास की घोषणा की. क्वांटम के क्षेत्र में ये भारत का पहला पेटेंट था. आईआईटी बॉम्बे, एनक्यूएम के तहत क्वांटम सेंसिंग और मेट्रोलॉजी के केंद्र के रूप में कार्य करता है.
क्वांटम सेंसिंग के अंतर्गत क्वांटम डायमंड माइक्रोस्कोप (क्यूडीएम) एक प्रमुख एप्लिकेशन है. व्यापक रूप से, क्वांटम सेंसिंग का अर्थ ऐसे सेंसिंग सिस्टम या प्लेटफॉर्म से लगाया जाता है जो पदार्थ के अंतर्निहित क्वांटम यांत्रिक गुणों जैसे कि असतत या परिमाणित ऊर्जा अवस्थाएं की माप करता है. ये सेंसिंग सिस्टम क्वांटम टनलिंग का उपयोग करके समय, विद्युत चुम्बकीय क्षेत्र और गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र जैसी विभिन्न मात्राओं का बहुत सटीक मापन करता है. क्वांटम सेंसिंग के उभरते क्षेत्र में से एक सॉलिड-स्टेट डिफेक्ट सेंसर है जो ठोस पदार्थों में मौजूद बिंदु दोषों का प्रयोग करते हैं जैसे कि वाइड-बैंडगैप सेमीकंडक्टर (जैसे सिलिकॉन कार्बाइड) और हीरे ताकि चुंबकीय क्षेत्रों सहित भौतिक मात्राओं की सटीक माप की जा सके.
क्वांटम डायमंड माइक्रोस्कोप ठोस-अवस्था दोष सेंसर की श्रेणी में आते हैं जिसमें हीरे की जाली में कार्बन परमाणुओं की एक जोड़ी को एक नाइट्रोजन परमाणु द्वारा प्रतिस्थापित किया जाता है जिससे नाइट्रोजन वैकेंसी (एनवी) केंद्र बनता है.
चित्र 1: एनवी केंद्र का निर्माण

Source: Medium
इस एनवी केंद्र में कुछ विशिष्ट गुण हैं जो इसे विशेष रूप से, मैग्नोमीटर (या चुंबकीय क्षेत्र सेंसर) के रूप में उपयोगी बनाते हैं. चुंबकीय क्षेत्र के संपर्क में आने पर यह फ्लूरोसेंस (एक तरह का रेडिएशन) प्रदर्शित करता है. ये एक ऐसा गुण है जिसका इस्तेमाल ऑप्टिकल पंपिंग के लिए लेज़र और चुंबकीय क्षेत्रों में सूक्ष्म परिवर्तनों का पता लगाने के लिए माइक्रोवेव का उपयोग करके किया जा सकता है. इसके अलावा, सुपरकंडक्टिंग मैग्नेटोमीटर जैसे अन्य सेंसरों के विपरीत क्यूडीएम को कमरे के तापमान पर संचालित किया जा सकता है. इसके लिए अपेक्षाकृत सरल सेटअप की ज़रूरत होती है. उदाहरण के लिए, क्यूडीएम प्रयोगशाला में विकसित केमिकल वेपर डिपोजिशन (सीवीडी) डायमंड का उपयोग करते हैं जिन्हें एलिमेंट सिक्स जैसी कंपनियों द्वारा विश्व स्तर पर विकसित किया जाता है.
पीक्वेस्ट टीम द्वारा उपयोग किए गए प्रायोगिक सेटअप को नीचे दिए गए चित्र में दिखाया गया है.
चित्र 1: क्यूडीएम का प्रायोगिक सेटअप

Source: Sub-second Temporal Magnetic Field Microscopy Using Quantum Defects in Diamond, Parashar et al
अत्यंत दुर्बल चुंबकीय क्षेत्रों का पता लगाने की क्यूडीएम (क्वांटिटेटिव डायनामिक्स) की क्षमता से इसके कई संभावित इस्तेमाल संभव हो पाते हैं. भूविज्ञान में, इनका उपयोग तापमान के साथ चट्टानों के चुंबकत्व में होने वाले परिवर्तन का विश्लेषण करने के लिए किया जा सकता है. इसी तरह, इनका इस्तेमाल भूकंपीय क्षेत्रों के आसपास चुंबकत्व में होने वाले बदलावों का मानचित्रण करने के लिए भी किया जा सकता है. इससे सटीक भूकंप मॉडल और पूर्वानुमान तैयार किए जा सकते हैं.
क्वांटम डायमंड माइक्रोस्कोप चिकित्सा क्षेत्र में, विशेष रूप से मस्तिष्क की इमेजिंग और तंत्रिका गतिविधि का पता लगाने के क्षेत्र में, गहरा प्रभाव डाल सकता है क्योंकि यह मैग्नेटिक रिसोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) जैसी पारंपरिक विधियों की तुलना में छोटे चुंबकीय क्षेत्रों के प्रति कहीं ज़्यादा संवेदनशील होता है और बेहतर जानकारी दे सकता है. इसके अलावा, एमआरआई एक भारी और जटिल सेटअप पर निर्भर करता है, जबकि क्यूडीएम ज्यादा कॉम्पैक्ट होता है.
आईआईटी बॉम्बे ने QMagPI भी विकसित किया है जो भारत का पहला पोर्टेबल क्वांटम मैग्नेटोमीटर है. ये नैनोटेस्ला (nT) रेंज में अति-निम्न चुंबकीय क्षेत्रों का पता लगा सकता है.
क्यूडीएम के प्रमुख एप्लिकेशन्स में से एक इंटिग्रेटेड सर्किट्स (आईसी) और माइक्रो इलेक्ट्रॉनिक घटकों की इमेजिंग में निहित है. इनका इस्तेमाल मुख्य रूप से सेमीकंडक्टर चिप्स और ज्यादातर मौजूदा इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में किया जाता है. इसके अलावा, असामान्य धारा गतिविधि का पता लगाने की उनकी क्षमता हार्डवेयर ट्रोजन का पता लगाने में सहायक हो सकती है. इस संबंध में, आईआईटी बॉम्बे टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के साथ मिलकर क्वांटम डायमंड माइक्रोचिप इमेजर विकसित कर रहा है.
भारत में स्वदेशी क्वांटम सेंसर (क्यूडीएम) का विकास क्वांटम प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है. क्वांटम कंप्यूटिंग और क्वांटम संचार जैसी क्वांटम प्रौद्योगिकी की अन्य शाखाओं के विपरीत, क्यूडीएम जैसे क्वांटम सेंसिंग सिस्टम के वास्तविक दुनिया में प्रैक्टिकल एप्लिकेशन है. इसके अलावा, एनवी सेंटर-आधारित क्वांटम सेंसरों की अपेक्षाकृत कम जटिल प्रकृति उन्हें सुपरकंडक्टर के लिए प्रभावी बनाते हैं. सामान्य रूप से उपयोग किए जाने वाले क्वांटम सेंसिंग प्लेटफॉर्म की तुलना में लागत प्रभावी भी बनाती है इसलिए, स्वदेशी क्वांटम सेंसिंग सिस्टम विकसित करना, इस क्षेत्र में काम करने वाले स्टार्टअप और संस्थाओं के लिए कुख्यात 'वैली ऑफ डेथ' को पार करने में बहुत मददगार साबित हो सकता है.
इसके अलावा, क्वांटम सेंसिंग प्लेटफॉर्म विकसित करने के राष्ट्रीय सुरक्षा पर व्यापक प्रभाव हैं. क्वांटम डायमंड माइक्रोस्कोप द्वारा प्रदान किए गए संभावित माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक उपकरण के अतिरिक्त, आईआईटी बॉम्बे ने QMagPI भी विकसित किया है जो भारत का पहला पोर्टेबल क्वांटम मैग्नेटोमीटर है. ये नैनोटेस्ला (nT) रेंज में अति-निम्न चुंबकीय क्षेत्रों का पता लगा सकता है. क्वांटम मैग्नेटोमीटर में मिलिट्री एप्लिकेशन की अपार संभावनाएं हैं. ऐसे में, पीक्वेस्ट लैब की उपलब्धियां सराहनीय हैं और क्वांटम मैग्नेटोमीटर के लिए एक महत्वपूर्ण कदम होने के साथ-साथ भारत में व्यावहारिक क्वांटम टेक्नोलॉजी एप्लिकेशन के विकास को आगे बढ़ाने में भी सहायक हैं.
प्रतीक त्रिपाठी ऑब्ज़र्वर रिसर्च फाउंडेशन के सेंटर फॉर सिक्योरिटी, स्ट्रैटजी और टेक्नोलॉजी (सीएसएसटी)में एसोसिएट फेलो हैं.
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Prateek Tripathi is an Associate Fellow at the Centre for Security, Strategy and Technology. His work focuses on an emerging technologies and deep tech including quantum ...
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