Author : Samarveer Singh

Expert Speak Raisina Debates
Published on Dec 12, 2025 Updated 4 Days ago

ऑपरेशन सिंदूर में भारत और पाकिस्तान दोनों ने भारी खर्च किया लेकिन भारत ने खर्च को रणनीति में बदलकर दबाव बनाया, जबकि पाकिस्तान कई साल पीछे चला गया.

भारत बनाम पाकिस्तान: चार दिनों की जंग, अरबों का हिसाब

Image Source: Getty Images

सैन्य अभियान, चाहे उसका कोई भी रूप हो, हमेशा आर्थिक प्रभाव डालते हैं. ऑपरेशन सिंदूर ने दोनों देशों के लिए भारी आर्थिक बोझ पैदा किया. मिसाइलों, ड्रोन और उच्च मूल्य वाले हथियारों से किए गए सटीक हमलों में सिस्टम बदलने से लेकर क्षतिग्रस्त एयरबेस और विमानों की मरम्मत तक कई खर्च शामिल हुए. हालांकि यह ऑपरेशन भारत के लिए भी कम नुकसानदेह नहीं था फिर भी पाकिस्तान को गंभीर नुकसान उठाना पड़ा जिसमें भारी इन्फ्रास्ट्रक्चर, रडार और विमानों का नुकसान शामिल था.

  • ऑपरेशन सिंदूर: दोनों ने भारी खर्च किया; भारत ने खर्च को रणनीति में बदला, पाकिस्तान पीछे चला गया.
  • लक्ष्य हासिल: पाक अधिकृत कश्मीर के आतंकवादी ढांचे नष्ट; पाकिस्तान को संदेश दिया गया.
  • सीमा पार आतंकवाद पाकिस्तान के लिए अब आर्थिक बोझ भी बन गया.

ऑपरेशन ने अपने दोनों उद्देश्य हासिल किए: पाक अधिकृत कश्मीर में आतंकवादी ढांचे को नष्ट करना और पाकिस्तान को यह संकेत देना कि भारत सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ सख्त है. यह लेख इन खर्चों का आकलन करता है और ऑपरेशन की आर्थिक व्याख्या पर नई समझ प्रस्तुत करता है.

ऑपरेशन सिंदूर ने सीमा पार आतंकवाद को पाकिस्तान के लिए सिर्फ राजनीतिक हथियार नहीं रहने दिया बल्कि इसे आर्थिक तौर पर भी भारी बोझ और जोखिम वाला खेल बना दिया.

 

हवाई हमलों पर खर्च

ऑपरेशन सिंदूर की सबसे खास बात यह थी कि दोनों देशों ने सटीक मिसाइलों का जमकर इस्तेमाल किया. भारत ने इस ऑपरेशन में नियंत्रण रेखा (LoC) और पाकिस्तान के अंदर तक हमलों के लिए कई तरह की मिसाइलें तैनात कीं- स्कैल्प, ब्रह्मोस, क्रिस्टल मेज़ बैलिस्टिक मिसाइल, आकाश और S-400 इंटरसेप्टर मिसाइलें. पहले दिन ही स्कैल्प और क्रिस्टल मेज मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया, लक्ष्य थे जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के मुख्यालय. रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुरिदके का मरकज ए तैयबा लगभग 4-5 क्रिस्टल मेज मिसाइलों से निशाना बनाया गया जबकि बहावलपुर का मरकज़-ए-सुभानअल्लाह 6 स्कैल्प मिसाइलों से मारा गया. स्कैल्प मिसाइल की कीमत लगभग 1 मिलियन डॉलर प्रति यूनिट मानी गई यानी कुल 6 मिलियन डॉलर. क्रिस्टल मेज की कीमत खुलासा नहीं है लेकिन भारत-इज़राइल के 30 मिसाइलों के 60 मिलियन डॉलर के सौदे के हिसाब से एक यूनिट लगभग 2 मिलियन डॉलर की पड़ती है यानी 5 मिसाइलों पर लगभग 10 मिलियन डॉलर खर्च हुए.

8 से 10 मई के बीच भारत ने पाकिस्तान के 11 एयरबेस को निशाना बनाया, जिनमें प्रमुख एयर स्टेशन नूर खान, जैकबाबाद और सरगोधा शामिल थे. इन हमलों में स्कैल्प और ब्रह्मोस मिसाइलों का मिश्रित इस्तेमाल हुआ. अनुमान है कि एयरबेस पर लगभग 19 ब्रह्मोस मिसाइलें छोड़ी गईं और उतनी ही स्कैल्प मिसाइलें भी इस्तेमाल की गई होंगी. ब्रह्मोस की औसत कीमत लगभग 4.75 मिलियन डॉलर है यानी इन मिसाइलों पर भारत ने लगभग 90.25 मिलियन डॉलर खर्च किए. 

Operation Sindoor Raising The Cost Of Terrorism For Pakistan

Damage at Rahim Yar Khan Airbase, Source- Indian Express

भारत ने पाकिस्तानी हवाई हमलों को रोकने के लिए आकाश और S-400 एयर डिफेंस सिस्टम का भी इस्तेमाल किया. S-400 का इस्तेमाल 11 बार मिसाइलें रोकने और विमान गिराने के लिए किया गया जबकि आकाश ने फतह 2 मिसाइल को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट किया. प्रत्येक आकाश शॉर्ट-रेंज सर्फेस-टू-एयर मिसाइल की कीमत लगभग 500,000 डॉलर है. इसके अलावा, भारत ने नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तानी ठिकानों को नष्ट करने के लिए इज़राइल की स्पाइक एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलें (ATGM) भी इस्तेमाल कीं. 2019 में तैनाती के दौरान लगभग 5 ATGM (एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल) छोड़े गए, प्रत्येक की कीमत लगभग 200,000 डॉलर थी यानी कुल 1 मिलियन डॉलर खर्च हुए.

जहां भारत ने सटीक हथियारों के इस्तेमाल में आर्थिक झटका सहा, वहीं पाकिस्तान ने अपनी अपरिवर्तनीय हवाई शक्ति और निगरानी उपकरण खोकर रणनीतिक झटका झेला.

पाकिस्तान ने भी अपने मिसाइल तंत्र का इस्तेमाल किया. मुख्य मिसाइल थी फतह 2, लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल, जो दिल्ली की ओर छोड़ी गई लेकिन हरियाणा के सिरसा में इंटरसेप्ट की गई. पाकिस्तान के लिए इसकी औसत लागत लगभग 100,000 डॉलर रही. इसके अलावा, पाकिस्तान ने 2 PL-15E (चीनी) लंबी दूरी की BVR (बियॉन्ड विजुअल रेंज) मिसाइलें भी दागीं जिन्हें भारत के एयर डिफेंस ने पंजाब में रोक दिया. इनकी कीमत लगभग 1 मिलियन डॉलर प्रति मिसाइल थी यानी कुल 2 मिलियन डॉलर. पाकिस्तान ने 2 CM-400AKG सुपरसोनिक मिसाइलें भारतीय एयरबेस पर दागीं, जिनकी कीमत लगभग 1.67 मिलियन डॉलर प्रति मिसाइल थी यानी कुल 3.35 मिलियन डॉलर.

Operation Sindoor Raising The Cost Of Terrorism For Pakistan

Damage at Arifwala Air base, Source- NDTV

Operation Sindoor Raising The Cost Of Terrorism For Pakistan

Damage at Chunian Air base, Source- NDTV

Operation Sindoor Raising The Cost Of Terrorism For Pakistan

Damage at Pasrur Air base, Source- NDTV

Operation Sindoor Raising The Cost Of Terrorism For Pakistan

Damage at Sukkur Air base, Source- Indian Express

Operation Sindoor Raising The Cost Of Terrorism For Pakistan

Damage at Sargodha Air base, Source- NDTV

कुल मिलाकर, भारत ने मिसाइलों पर पाकिस्तान की तुलना में बहुत अधिक खर्च किया लेकिन फर्क यह था कि भारतीय मिसाइलों ने अपना असर दिखाया जबकि पाकिस्तान की मिसाइलें खर्च के हिसाब से कोई खास सफलता नहीं हासिल कर सकीं.

 

लड़ाकू विमानों का नुकसान

हवाई मुकाबले संघर्ष का अहम हिस्सा बने. भारतीय वायु सेना के पास सबूत हैं कि उन्होंने 2 JF-17 और 1 F-16 लड़ाकू विमान को जमीन और हवा में नष्ट किया. JF-17 Block-2 की कीमत लगभग 25 मिलियन डॉलर प्रति विमान है यानी पाकिस्तान को 2 विमानों के नुकसान में लगभग 50 मिलियन डॉलर का झटका लगा. वहीं, F-16 की कीमत 40 से 70 मिलियन डॉलर के बीच है.

पाकिस्तान के लिए इन विमानों की मरम्मत और बदलने की लागत भी बहुत बड़ी थी. अपने लड़ाकू विमानों के नुकसान के अलावा, पाकिस्तान ने एक C-130J मीडियम-लिफ्ट विमान भी खो दिया जिसकी कीमत लगभग 180 मिलियन डॉलर है. इसके अलावा, S-400 सिस्टम्स से पाकिस्तान के अंदर एक SAAB-2000 एयरबोर्न अर्ली वार्निंग सिस्टम भी नष्ट हुआ, जिसकी कीमत लगभग 70-80 मिलियन डॉलर आंकी गई है. अगर पाकिस्तान इसे बदलता है तो अनुमानित लागत लगभग 160.5 मिलियन डॉलर होगी. यह आंकड़ा 2020 के SAB-2000 सौदे से लिया गया है.

हर नष्ट किया गया रडार, ड्रोन हैंगर और लड़ाकू विमान भारत की रणनीति को सिर्फ सिद्धांत नहीं बल्कि वास्तविक आर्थिक दबाव में बदल देता है.

भारत के DGMO और CDS ने भी माना कि भारत के नुकसान सीमित थे लेकिन ऐसे उच्च-तीव्रता वाले संघर्ष में अवश्य होने वाले थे.

 

पाकिस्तानी एयरबेस पर हमले

भारत के हवाई हमलों ने पाकिस्तान के एयरबेस को भारी नुकसान पहुँचाया. रावलपिंडी के नूर खान एयरबेस में सैटेलाइट इमेजरी ने बड़े कॉम्प्लेक्स के ध्वस्त होने और हैंगरों को गंभीर नुकसान पहुँचने का खुलासा किया. इसमें दो NG-MMCC सिस्टम्स भी नष्ट हुए जो तुर्की के साथ मिलकर बनाए गए थे और AI-आधारित निर्णय सहायता उपकरणों से लैस थे. ये हाई-टेक सिस्टम्स बेहद महंगे माने जाते हैं.

Operation Sindoor Raising The Cost Of Terrorism For Pakistan

Damage at the Nur Khan Airbase, Source- NDTV

तुर्की के बेयराक्तर TB-2 ड्रोन रखने वाले हैंगर भी निशाने पर आए जिससे पाकिस्तान को लगभग 50 TB-2 ड्रोन के नुकसान का सामना करना पड़ा, जिसकी कीमत लगभग 300 मिलियन डॉलर आंकी गई. एक ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस रिपोर्ट के अनुसार कम से कम एक IL-78 टैंकर भी निष्क्रिय हुआ जिसकी कीमत 25–50 मिलियन डॉलर थी जिससे पाकिस्तान के सबसे सुरक्षित बेस में बड़े पैमाने पर विनाश का पता चलता है.

चकवाल का मुरिद एयरबेस, पाकिस्तान का मुख्य लड़ाकू ड्रोन हब, एक अहम फॉरवर्ड ऑपरेशनल बेस है. सैटेलाइट इमेजरी में देखा गया कि प्रवेश द्वार के पास 3 मीटर चौड़ा गड्ढा बना है, जो संभवतः विशेष उपकरणों के भंडारण के लिए इस्तेमाल होने वाले अंडरग्राउंड फैसिलिटी में है. इस हमले में चीनी Wing Loong ड्रोन रखने वाले हैंगर को भी नुकसान पहुंचा, लगभग 10 UCAVs नष्ट हुए, जिनकी कीमत लगभग 10 मिलियन डॉलर है.

Operation Sindoor Raising The Cost Of Terrorism For Pakistan

Damage at the Murid Airbase, Source- Hindustan Times

कराची का भोलेरी एयरबेस, जहाँ JF-17, F-16 और SAB-2000 AEW&C सिस्टम तैनात थे, पर क्रूज मिसाइल हमले में स्वीडिश मूल के AEW&C विमान को नष्ट किया गया. एक सेवानिवृत्त पाकिस्तानी एयर मार्शल के अनुसार, हैंगर को चार ब्रह्मोस मिसाइलों से निशाना बनाया गया और नुकसान लगभग 300 मिलियन डॉलर का आंका गया.

Operation Sindoor Raising The Cost Of Terrorism For Pakistan

Damage at the Bholari Airbase in Karachi, Source- The Economic Times 

जैकबाबाद एयरबेस में एक मजबूत हैंगर को निशाना बनाया गया जिससे तीन जॉर्डनियन F-16 विमानों को नुकसान पहुँचा. इनके सटीक मूल्य का पता नहीं है लेकिन रोमानिया–पुर्तगाल के सौदे के हिसाब से 12 पुनर्निर्मित F-16 की कीमत 253 मिलियन डॉलर थी यानी लगभग 18 मिलियन डॉलर प्रति विमान इसी हिसाब से तीन विमानों का नुकसान लगभग 54 मिलियन डॉलर माना जा सकता है.

Operation Sindoor Raising The Cost Of Terrorism For Pakistan

Damage to the Jacobabad airbase, Source- Indian Express

रहिम यार खान जो UAV और जेट तैनाती के लिए अहम फॉरवर्ड बेस है, वहां रनवे को सबसे ज्यादा नुकसान पहुँचा. इससे बेस के सभी PAF विमानों की उड़ानें रुक गईं और संचालन क्षमता काफी कम हो गई.

इंफ्रास्ट्रक्चर नुकसान के अलावा, भारत ने पाकिस्तान के कई एयर डिफेंस रडार साइट्स भी नष्ट किए. इनमें पंजाब के पासरूर एयरफील्ड का रडार, अरिफ़वाला एयरबेस, चुन्नियन रडार और सुक्कुर एयरफील्ड शामिल हैं.

चुन्नियन एयरबेस (मध्य पंजाब) में भारत ने चीनी YLC-8E एंटी-स्टील्थ रडार को नष्ट किया जिसकी कीमत लगभग 15–20 मिलियन डॉलर आंकी गई. अन्य नष्ट किए गए सिस्टम में चीनी LY-80 फायर रडार (70 मिलियन डॉलर) शामिल है, जिसे लाहौर में HARPY ड्रोन ने निशाना बनाया, दो अमेरिकी AN/TPQ-43 ट्रैकिंग रडार (प्रत्येक 25 मिलियन डॉलर) और एक चीनी HQ-9 फायर यूनिट (100–200 मिलियन डॉलर) शामिल थे.

SEAD (सपरेशन ऑफ एनेमी एयर डिफेंस) ऑपरेशन्स के दौरान, लगभग 30 Harop ड्रोन (भारत के 154 ड्रोन का 20 प्रतिशत) तैनात किए गए, जिनकी लागत लगभग 300 मिलियन डॉलर मानी गई.

 

तोपखाने पर हमले और स्थायी दवाब

ऑपरेशन के बाद नियंत्रण रेखा (LoC) पर भारी तोपखाने की लड़ाई हुई. औसतन रोज़ाना 2,000 गोले चलाने के हिसाब से, अनुमान है कि भारत ने लगभग 8,000 और पाकिस्तान ने 6,000 गोले दागे, जिसे Financial Express ने भी पुष्ट किया है.

ऑपरेशन सिंदूर की असली सफलता सिर्फ लक्ष्यों को नष्ट करने में नहीं बल्कि पाकिस्तान की युद्ध क्षमता पर डाले गए दीर्घकालीन आर्थिक दबाव में है.

भारत ने M-777 हॉवित्ज़र तोपों का इस्तेमाल किया जिनमें प्रिसिजन-गाइडेड Excalibur राउंड लगे थे ताकि पाकिस्तान की सेकेंड-लेवल डिफेंस को निशाना बनाया जा सके. इसके साथ ही बोफोर्स तोपें और पोलिश निर्मित लूटरिंग म्यूनिशन का भी इस्तेमाल सटीक हमलों के लिए किया गया. 155mm बोफोर्स गोले की कीमत लगभग 1,100 डॉलर है जबकि Excalibur राउंड की कीमत लगभग 100,000 डॉलर है. इस तरह, अधिकांश गोले सामान्य “डंब” राउंड थे जबकि महंगे सटीक हथियार महत्त्वपूर्ण लक्ष्यों के लिए रखे गए.

 

कम खर्च में बड़ी सफलता

ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की आतंकवाद पर रणनीतिक स्थिति को नया आकार दिया और पाकिस्तान की सैन्य व आतंकवादी ढांचे पर गंभीर आर्थिक चोट लगाई. कुल लागत की बात करें तो, चार दिन के इस संघर्ष में भारत का खर्च लगभग 407.75 मिलियन डॉलर रहा जबकि पाकिस्तान को लगभग 1.5 बिलियन डॉलर का भारी आर्थिक नुकसान हुआ.

हालाँकि दोनों देशों ने महत्वपूर्ण खर्च किए, पाकिस्तान पर आर्थिक दबाव भारत की तुलना में बहुत अधिक था क्योंकि भारत की अर्थव्यवस्था आकार में लगभग 10 गुना बड़ी है. इसका मतलब यह है कि भारत के लिए विमानों और उपकरणों की मरम्मत और बदलना अपेक्षाकृत आसान था. इसके विपरीत, पाकिस्तान को F-16 और Saab AEW&C जैसे उन्नत हथियारों को फिर से भरने में गंभीर दबाव का सामना करना पड़ा, जिससे उसकी रक्षा क्षमता और कमजोर हुई.

बता दें, लेख में बताई गई लागत केवल सीधे सैन्य संचालन से जुड़ी है. अन्य आर्थिक प्रभाव, जैसे एयरलाइन रुकावट, हवाई क्षेत्र बंद होना और उससे जुड़ा व्यावसायिक नुकसान इसमें शामिल नहीं हैं.

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