Author : Ramanath Jha

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Published on Dec 18, 2025 Updated 0 Hours ago

न्यूयॉर्क में मेयर के पास शहर चलाने की वास्तविक शक्ति होती है. मुंबई में मेयर का पद अहम तो है लेकिन निर्णय लेने के अधिकार सीमित हैं- यही फर्क भारत के शहरी शासन की चुनौती को सामने लाता है.

न्यूयॉर्क और मुंबई: मेयर और अधिकारों का बड़ा फर्क

न्यूयॉर्क सिटी (NYC) में हाल ही में हुए मेयर चुनाव को दुनिया भर में काफी ध्यान मिला जिससे स्वाभाविक रूप से इसकी तुलना भारत के बड़े शहरों-मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु-के मेयरों से होने लगी. इस तुलना के लिए मुंबई सबसे उपयुक्त उदाहरण है क्योंकि वहां भी जल्द ही नगर चुनाव होने वाले हैं.

  • न्यूयॉर्क मेयर के पास वास्तविक शक्ति।

  • मुंबई मेयर के अधिकार सीमित।

  • यही शहरी शासन की बड़ी चुनौती।

मुंबई की स्थानीय प्रशासनिक संस्था, बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC), भारत की सबसे बड़ी और शक्तिशाली नगरपालिकाओं में से एक है. यह 478 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में काम करती है और इसकी आर्थिक स्थिति भी अन्य शहरों से बेहतर है. 2011 की जनगणना के अनुसार, मुंबई की आबादी 1.24 करोड़ थी जो 2025 तक बढ़कर लगभग 1.4 करोड़ होने का अनुमान है. वहीं, न्यूयॉर्क सिटी का क्षेत्रफल बड़ा (790 वर्ग किलोमीटर) है लेकिन उसकी आबादी करीब 85 लाख ही है. दूसरी ओर, दिल्ली और बेंगलुरु कई छोटी नगरपालिकाओं में बंटे हुए हैं.

न्यूयॉर्क के मेयर बनाम मुंबई के मेयर

मुंबई और न्यूयॉर्क के मेयरों की शक्तियों की तुलना करना सही नहीं है क्योंकि दोनों शहरों की व्यवस्था अलग-अलग है. न्यूयॉर्क सिटी, न्यूयॉर्क राज्य के अंतर्गत आती है और वहां का कामकाज राज्य के संविधान और कानूनों के अनुसार चलता है. न्यूयॉर्क राज्य का संविधान राज्य सरकार को स्थानीय निकाय बनाने और उनके कामकाज को नियंत्रित करने का अधिकार देता है. न्यूयॉर्क सिटी के लिए सबसे अहम कानून जनरल म्युनिसिपल लॉ है जो राज्य की सभी नगरपालिकाओं पर लागू होता है. इसके अलावा, न्यूयॉर्क सिटी का अपना अलग सिटी चार्टर है जो शहर की संस्थाओं की संरचना और उनके अधिकार तय करता है. वहीं मुंबई, महाराष्ट्र राज्य के अंतर्गत आती है और बृहन्मुंबई नगर निगम अधिनियम, 1888 तथा महाराष्ट्र क्षेत्रीय एवं नगर नियोजन अधिनियम, 1966 के अनुसार संचालित होती है.

न्यूयॉर्क सिटी चार्टर का पहला अध्याय पूरी तरह मेयर की भूमिका पर केंद्रित है. इसमें मेयर को शहर का मुख्य कार्यकारी अधिकारी बताया गया है. शहर के लगभग सभी वरिष्ठ अधिकारियों जैसे विभाग प्रमुख और आयुक्त की नियुक्ति और हटाने का अधिकार मेयर के पास होता है, वे डिप्टी मेयर भी नियुक्त कर सकते हैं और वित्त तथा प्रशासन से जुड़े महत्वपूर्ण अधिकार रखते हैं. चार्टर साफ़ तौर पर कहता है कि शहर की सारी शक्तियाँ मेयर के पास हैं. हालाँकि राज्य का गवर्नर आरोप लगने पर मेयर को पद से हटा या निलंबित कर सकता है लेकिन शहर के इतिहास में कभी ऐसा नहीं हुआ है.

मुंबई में, बीएमसी एक्ट की धारा 37 के अनुसार, नगर निगम आम चुनाव के बाद अपनी पहली बैठक में अपने ही चुने हुए पार्षदों में से एक को मेयर चुनता है यानी मुंबई का मेयर सीधे जनता द्वारा नहीं बल्कि पार्षदों द्वारा चुना जाता है. नगर निगम में कुल 227 पार्षद होते हैं और मेयर का कार्यकाल केवल ढाई साल का होता है, धारा 36 के तहत मेयर का मुख्य काम नगर निगम की मासिक बैठक बुलाना और उसकी अध्यक्षता करना है. अगर मेयर लगातार दो बैठकें नहीं बुलाता तो राज्य सरकार उसे पद से हटा सकती है. इसके अलावा मेयर के पास कोई बड़ा प्रशासनिक या निर्णय लेने का अधिकार नहीं होता इसलिए, मुंबई के मेयर की भूमिका मुख्य रूप से औपचारिक (ceremonial) मानी जाती है.

न्यूयॉर्क में सिटी काउंसिल के पास बहुत मजबूत अधिकार हैं. सिटी चार्टर के अनुसार, सिटी काउंसिल शहर की विधायी संस्था है, जिसमें पब्लिक एडवोकेट और 51 निर्वाचित सदस्य होते हैं. यह काउंसिल शहर के लिए स्थानीय कानून बना सकती है, बशर्ते वे संविधान और राज्य के कानूनों के खिलाफ न हों. इसके अलावा, काउंसिल को जांच और निगरानी करने, शहर की खरीद नीतियों की समीक्षा करने और प्रशासनिक फैसलों पर सलाह देने व सहमति जताने का अधिकार भी है.

न्यूयॉर्क बनाम भारत: शहरों को मिले अधिकारों का फर्क

न्यूयॉर्क शहर में नगर प्रशासन के तहत बहुत सारे विभाग और कार्यालय काम करते हैं. इनमें पुलिस, अग्निशमन, परिवहन, पर्यावरण संरक्षण, भवन निर्माण, आवास और शहर नियोजन जैसे प्रमुख विभाग शामिल हैं. इसके अलावा अपराध रोकथाम, आपातकालीन प्रबंधन, प्रवासी मामलों, डेटा विश्लेषण, छोटे व्यवसायों और अल्पसंख्यक समूहों से जुड़े अलग-अलग कार्यालय भी हैं. इन सभी का मकसद शहर की सेवाओं को बेहतर और प्रभावी ढंग से चलाना है.

इसके अलावा न्यूयॉर्क शहर में शिक्षा, पार्क और मनोरंजन, स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य और पशु कल्याण जैसे विभाग भी हैं. साथ ही भवन, सफ़ाई और प्रशासन से जुड़े ज़रूरी विभाग काम करते हैं. समानता और सामाजिक कल्याण के लिए बुज़ुर्गों, पूर्व सैनिकों, संस्कृति, सामाजिक सेवाओं, घरेलू हिंसा, बेघर लोगों और बच्चों के लिए अलग विभाग हैं. सूचना तकनीक, दूरसंचार, छोटे व्यवसाय और वित्त से जुड़े विभाग भी शहर के कामकाज का हिस्सा हैं. NYC में लैंगिक समानता, कला, मानवाधिकार, विरासत संरक्षण, नागरिक भागीदारी और खेल जैसे विषयों के लिए अलग-अलग आयोग हैं. भारत में जो कई काम राज्य सरकारें करती हैं, वे न्यूयॉर्क सिटी को सौंपे गए हैं, क्योंकि वे सीधे शहर के लोगों से जुड़े हैं. कानून NYC जैसे बड़े शहरों को छोटे राज्यों की तरह मानते हैं और उन्हें अपने काम खुद करने की पूरी आज़ादी देते हैं.

भारत में शहरी स्थानीय निकाय (Urban Local Bodies) संविधान की 12वीं अनुसूची और राज्य कानूनों में दी गई जिम्मेदारियाँ निभाते हैं. ये जिम्मेदारियाँ दो तरह की होती हैं- अनिवार्य और वैकल्पिक. नगर निकाय वही काम करते हैं जो राज्य सरकार उन्हें सौंपती है. मुंबई में अनिवार्य कामों में पानी और सीवर व्यवस्था, कचरा प्रबंधन, सफ़ाई, अग्निशमन सेवाएँ, प्राथमिक स्वास्थ्य और शिक्षा, टीकाकरण, पार्क व खुले स्थान, सड़कें और पुल, स्ट्रीट लाइट, खतरनाक गतिविधियों का नियमन, श्मशान और कब्रिस्तान, बाज़ार, जन्म–मृत्यु पंजीकरण, अतिक्रमण हटाना और रेबीज़ उपचार शामिल हैं.

भारत में नगर निकायों (ULBs) की कई ज़िम्मेदारियाँ हैं लेकिन शहरों के अहम काम-जैसे परिवहन, आवास और पुलिस-अब भी राज्य सरकारों के पास हैं. इससे स्थानीय सरकारें कमजोर हो जाती हैं. आज ज़रूरत है कि नगर निकायों और महापौरों को ज़्यादा अधिकार और संसाधन दिए जाएँ और पुराने नियमों की समीक्षा की जाए, खासकर जलवायु बदलाव जैसे नए मुद्दों को जोड़ने के लिए. मजबूत और सक्षम शहरों के बिना भारत का शहरीकरण संतुलित और प्रभावी नहीं हो सकता.

मजबूत शहर, मजबूत मेयर

न्यूयॉर्क जैसे शहरों की तुलना में भारत के शहर आज भी राज्य सरकारों के कड़े नियंत्रण में हैं. यहां नगर निकायों और मेयर के पास सीमित अधिकार और कम निर्णय-क्षमता होती है जिससे वे शहर की समस्याओं का प्रभावी ढंग से समाधान नहीं कर पाते जबकि शहरी आबादी तेजी से बढ़ रही है और शहरों पर बुनियादी सुविधाएं, परिवहन, आवास, स्वच्छता और रोजगार उपलब्ध कराने का दबाव लगातार बढ़ रहा है. ऐसे में भारत को अपने शहरी शासन ढांचे में बड़े सुधारों की जरूरत है. मेयर की भूमिका को केवल औपचारिक न रखकर उन्हें वास्तविक प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियां दी जानी चाहिए. साथ ही नगर निकायों को अधिक स्वायत्तता और संसाधन मिलने चाहिए ताकि वे स्थानीय जरूरतों के अनुसार फैसले ले सकें और उनके लिए सीधे जवाबदेह भी हों. अगर शहरों को सशक्त नहीं किया गया तो नगर निगम चुनाव सिर्फ राजनीतिक दलों की आपसी प्रतिस्पर्धा और सत्ता संतुलन तक ही सीमित रह जाएंगे. इससे नागरिकों के रोजमर्रा के मुद्दे जैसे बेहतर सेवाएं, जवाबदेह प्रशासन और समावेशी विकास- हाशिए पर चले जाएंगे इसलिए टिकाऊ और नागरिक-केंद्रित शहरी विकास के लिए मजबूत मेयर और स्वायत्त नगर निकाय अनिवार्य हैं.


रामनाथ झा ऑब्ज़र्वर रिसर्च फ़ाउंडेशन में डिस्टिंग्विश्ड फ़ेलो हैं.

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