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Published on Mar 10, 2026 Updated 0 Hours ago

हिंद महासागर में बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और समुद्री अपराधों के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा बड़ा सवाल बन गई है. समझिए कि IORA की चेयरमैनशिप संभालने के बाद भारत के सामने कौन सी चुनौतियां हैं.

हिंद महासागर में ‘ट्रिपल थ्रेट’: क्यों बढ़ी चिंता?

भारत ने 2025 के आखिर में इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन (IORA) की चेयरमैनशिप संभाली है. हिंद महासागर से जुड़े देशों का यह सबसे बड़ा क्षेत्रीय मंच माना जाता है. ऐसे दौर में जब दुनिया की सियासत, समुद्री रास्तों की अहमियत और ताकत की खींचतान इस इलाके को लगातार प्रभावित कर रही है, भारत पर बड़ी जिम्मेदारी है. नई दिल्ली को एक तरफ सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाना होगा और दूसरी तरफ सुरक्षा से जुड़े मसलों पर ऐसा नजरिया आगे रखना होगा जो पूरे इलाके के लिए काम का हो. यहीं से एक अहम सवाल उठता है. हिंद महासागर में आखिर ऐसे कौन से खतरे हैं जिनसे निपटने के लिए देशों के बीच मजबूत सहयोग की जरूरत है? 

यह इलाका दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है. तेल, गैस और अंतरराष्ट्रीय व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी समुद्र से होकर गुजरता है. हाल के सालों में यहां चीन की मौजूदगी तेजी से बढ़ी है. रिसर्च और सर्वे जहाजों की आवाजाही से देशों में चिंता है. ये जहाज वैज्ञानिक काम के साथ-साथ सैन्य जानकारी जुटाने में भी काम आ सकते हैं. लेकिन इस मसले में एक बड़ी पेचीदगी भी है. हिंद महासागर के कई देशों की अर्थव्यवस्था चीन से जुड़ी है. कई देश चीनी कर्ज और परियोजनाओं पर निर्भर हैं. इसलिए वे खुलकर चीन की आलोचना करने से बचते हैं. इसीलिए चीन को लेकर चिंता तो है, लेकिन उसके खिलाफ कोई साफ और साझा क्षेत्रीय रणनीति बन पानी अभी तक मुश्किल ही है.

तिगुनी चुनौती, बढ़ते खतरे

हालांकि हिंद महासागर की सुरक्षा सिर्फ बड़ी ताकतों के कॉम्पिटिशन से ही तय नहीं होती. सैन्य टकराव से इतर यहां कई ऐसे खतरे भी हैं, जिनका असर उतना ही गंभीर हो सकता है. इनमें समुद्री डकैती, अवैध मछली पकड़ना, नशे और इंसानों की तस्करी, और क्लाइमेट चेंज वगैरह हैं. इन्हीं वजहों से IORA के एक्शन प्लान 2022–2027 में समुद्री सुरक्षा अहम है. इस इलाके के सामने तीन बड़े खतरे अक्सर साथ दिखते हैं. पहला है, समुद्री डकैती. दूसरा, अवैध और अनियंत्रित मछली पकड़ना, जिसे IUU फिशिंग कहते हैं. तीसरा है नशे और इंसानों की तस्करी. तीनों मिलकर ‘ट्रिपल थ्रेट’ बनाते हैं.

नई दिल्ली को एक तरफ सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाना होगा और दूसरी तरफ सुरक्षा से जुड़े मसलों पर ऐसा नजरिया आगे रखना होगा जो पूरे इलाके के लिए काम का हो. यहीं से एक अहम सवाल उठता है. हिंद महासागर में आखिर ऐसे कौन से खतरे हैं जिनसे निपटने के लिए देशों के बीच मजबूत सहयोग की जरूरत है? 

खास बात यह है कि ये समुद्री सीमाओं को नहीं मानते. इसलिए इनसे निपटने के लिए किसी एक देश की कोशिश काफी नहीं होती. पूरे इलाके के देशों को मिलकर काम करना पड़ता है. IORA का ध्यान ऐसे ही मसलों पर रहता है. इनका असर व्यापार, आर्थिक स्थिरता, फूड सप्लाई और लोगों की सुरक्षा पर पड़ता है. ऐसे मुद्दों पर ध्यान दें तो देशों के बीच सहयोग बढ़ाना आसान हो जाता है.

हिंद महासागर का भूगोल सहयोग की जरूरत मजबूत करता है. मलक्का जलडमरूमध्य और बाब-अल-मंदेब जैसे समुद्री रास्ते दुनिया के सबसे व्यस्त रास्ते हैं. यहां पैदा होने वाले संकट का असर बहुत दूर तक जाता है. इसलिए निगरानी, जानकारी साझा करने और तुरंत कार्रवाई की व्यवस्था जरूरी हो जाती है.

सम्मान, सहयोग और क्षमता

इस सोच को मजबूत बनाने के लिए 2023 में एक अहम कदम उठाया गया. तब बांग्लादेश IORA का चेयरमैन था. उसी दौरान IORA आउटलुक ऑन द इंडो-पैसिफिक (IOIP) को अपनाया गया. इस दस्तावेज में इंडो-पैसिफिक इलाके में सबको साथ लेकर चलने वाला नजरिया है. इसमें नियमों का सम्मान, सहयोग और टिकाऊ विकास पर जोर दिया गया. इसके बाद IORA के वर्किंग ग्रुप ऑन मैरिटाइम सेफ्टी एंड सिक्योरिटी ने एक्शन प्लान को जमीन पर लागू करने के लिए तकनीकी योजनाएं तैयार कीं. इनका मकसद खोज और बचाव अभियान, समुद्री जानकारी साझा करने और इमरजेंसी में तालमेल को बेहतर बनाना था.

इसी सिलसिले में मैरीटाइम इन्फॉर्मेशन शेयरिंग वर्कशॉप 2025 जैसे कार्यक्रम आयोजित किए गए. इनमें मंत्र सॉफ्टवेयर के जरिए अलग-अलग देशों के बीच रियल टाइम जानकारी साझा करने की व्यवस्था पर काम हुआ. इसी तरह IORA और सिंगापुर के सहयोग से समुद्री सुरक्षा और पोर्ट मैनेजमेंट पर ट्रेनिंग प्रोग्राम भी चलाए गए. IORA ने अवैध मछली पकड़ने से निपटने के लिए दिशा-निर्देश भी जारी किए. मई 2025 में IUU फिशिंग के खिलाफ नए दिशा-निर्देश अपनाए गए. इसके साथ सदस्य देशों की क्षमता बढ़ाने के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम भी शुरू किए गए.

इस इलाके के सामने तीन बड़े खतरे अक्सर साथ दिखते हैं. पहला है, समुद्री डकैती. दूसरा, अवैध और अनियंत्रित मछली पकड़ना, जिसे IUU फिशिंग कहते हैं. तीसरा है नशे और इंसानों की तस्करी. तीनों मिलकर ‘ट्रिपल थ्रेट’ बनाते हैं.

IORA ने क्षमता बढ़ाने के लिए दूसरे मंचों के साथ भी तालमेल बढ़ाया है. इसका बड़ा उदाहरण क्वाड है. क्वाड के विदेश मंत्रियों के संयुक्त बयान में कहा है कि वह IORA और पैसेफिक आइलैंड्स फोरम (PIF) के साथ चुनौतियों से निपटना चाहता है. इसी तरह पश्चिमी हिंद महासागर में जिबूती कोड ऑफ कंडक्ट और उसका जेद्दा अमेंडमेंट भी अहम भूमिका निभा रहा है.

फिर भी IORA के सामने कई चुनौतियां हैं. सदस्य देशों की समुद्री क्षमता एक जैसी नहीं है. इसके अलावा संगठन की कार्यप्रणाली अब भी काफी हद तक बातचीत और बैठकों पर टिकी है. नीति और जमीन पर अमल के बीच जो अंतर है, वही उसकी सबसे बड़ी कमजोरी बन जाता है. इसीलिए मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस, यानी समुद्र में होने वाली गतिविधियों की बेहतर निगरानी बेहद जरूरी है. अगर देशों के पास समुद्र में क्या हो रहा है इसकी सही और साझा जानकारी होगी, तभी वे समय रहते कदम उठा पाएंगे.

साझा खतरे, मिलकर काम

कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि हिंद महासागर इलाके का भविष्य इन समुद्री खतरों से भी काफी हद तक तय होगा. चीन की बढ़ती मौजूदगी एक चुनौती जरूर है, लेकिन समुद्री डकैती, तस्करी और अवैध मछली पकड़ने जैसे साझा खतरे ही ऐसे मुद्दे हैं जिन पर सभी देश मिलकर काम कर सकते हैं. अगर IORA सहयोग को और मजबूत करे, नीति और अमल के बीच का अंतर कम करे, तो यह मंच हिंद महासागर को ज्यादा सुरक्षित और स्थिर बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है.


सायंतन हलदर ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के स्ट्रेटेजिक स्टडीज प्रोग्राम में एसोसिएट फेलो हैं.

सांच माहेश्वरी ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के स्ट्रेटेजिक स्टडीज प्रोग्राम में रिसर्च इंटर्न हैं.

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Authors

Sayantan Haldar

Sayantan Haldar

Sayantan Haldar is an Associate Fellow with ORF’s Strategic Studies Programme. At ORF, Sayantan’s work is focused on Maritime Studies. He is interested in questions on ...

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Saanch Maheshwari

Saanch Maheshwari

Saanch Maheshwari is a Research Intern with the Strategic Studies Programme at the Observer Research Foundation. ...

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